मोदी

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मोदी भारत में एक उपनाम हैं। यह सामान्यतः उत्तर और पश्चिम भारतीय राज्य हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखण्ड और गुजरात में पाया जाता हैं। मोदी अधिकतर जाट जातिधित हैं। राजस्थान में एवं उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेशछत्तीसगढ़ में जाट शब्दों का प्रयोग होता हैं। ओबीसी वर्ग की सूची में यह जाति आती हैं। पोद्दार"वैश्य बनिया" जाति के उपजाति हैं।

उपनाम वाले लोग[संपादित करें]

नामकरण[संपादित करें]

‘मोदी’ का सामान्य अर्थ है, दाल, चावल आदि बेचने वाला, पंसारी, परचूनिया, ग्रॉसर. भंडारी या स्टोर-कीपर को भी मोदी कह सकते हैं। और ‘मोदीखाना’ का अर्थ है मोदी की दुकान या भंडार, पंसारी की दुकान, जनरल स्टोर, राशन की दुकान, किराना स्टोर, रसद भंडार, आपूर्ति भंडार. नरेंद्र मोदी गुजरात के मोढ-घांची समाज से हैं जो परंपरागत रूप से वनस्पति तेल निकालने और बेचने का काम करता रहा है।

यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत में पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ही व्यवसाय में लगे रहने के कारण पारिवारिक व्यवसाय ही जातियों में बदल गए थे। ऐसा प्रतीत होता है कि मोदी जाति का नामकरण प्राचीन काल में मोठ बेचने के व्यवसाय से शुरू हुआ होगा (मोठ, मोठी, मोढी, मोदी)। लगभग 10,000 वर्ष पहले की दुनिया में, जब हमारे भील-शिकारी-घुमंतू पुरखे वनों को छोड़ कर मानव सभ्यता के पहले गांव बसाना चाह रहे थ। कंद-मूल-फल का संग्रह और शिकार छोड़ कर हमारे पुरखे कृषि करना चाह रहे थे, किन्तु उन्हें अब भी वन में उपजी वस्तुएं ही खाने के लिए पसंद थीं। ऐसे में कुछ लोग वन से वन-उपज ला कर गांव के लोगों को बेचते थे या उनका लेन-देन करते थ। वन-उपज बेचने या उसका लेन-देन करने वाले ही वणकि /वनिये /बनिये कहलाए होंगे (वन > वणकि > वाणजि > विनय > बनिया)। इन वर्णाकों में भी विभिन्न लोग वन से वस्तु-विशेष लाने में विशेषज्ञता रखने लगे होंगे। इसी वस्तु-विशेष में विशेषज्ञता के कारण बनिया जाति की उप-जातियाँ बनी होंगी, जैसे बांस वाला बांसल /बंसल, मधु वाला मधुकुल/ मुद्गल। वन से लाकर मोठ बेचने वाले या उसका लेनदेन करने वाले विनये मोठी कहलाए होंगे और फिर मोठी से मोढी और मोदी।

प्राचीन काल में जब हमारे पुरखे नए-नए खाद्य पदार्थों की पहचान और उनका नामकरण कर रहे थे, उन्होने कंद-मूल-फल-अन्न का नामकारण उनके स्वाद, आकार या अन्य गुणों पर किया होगा। जैसे मधुर > मटुर > मटर। इसी क्रम जब मोठ के पौधे की खोज हुई तो पुरखों ने पाया कि यह मीठी फली मनुष्यों को भी पसंद है और पशुओं को भ। मिठास के कारण इसका नाम हुआ - मिष्ठ > मोष्ठ > मोष्ठक (लुप्त संस्कृत) > मुकुष्ट (संस्कृत) > मोष्ठक > मोठिके > मोडिके (कन्नड). मोष्ठ > मोठ > मुट/ मठ (गुजराती)। मोठ को बिना पकाये खाया जा सकता है क्योंकि पानी में भीगने के कुछ ही देर में मोठ नरम और अंकुरित हो जाता है। अत: यह भारतीय मूल का पौधा मानव इतिहास में सबसे पहले उपयोग में लाये जाने वाले अन्न / दाल में से एक रहा होगा। इस प्रकार मोठ का नाम मोठ क्यों पड़ा।

कुछ विद्वानों का मत है कि मोदी शब्द मोदक (लड्डू) से बना, अत: मोदी हलवाई थे। किन्तु ऐसा लगता है कि संसार का पहला मोदक बनाने के लिए मोष्ठक या मोठ का प्रयोग किया गया होगा। अत: मोठ से मोदक. यह कल्पना मोठ के इस गुण पर आधारित है कि इसे बिना पकाये खा सकते हैं। कच्ची भीगी मोठ में कोई मीठा रस मिला कर संसार का पहला मोदक बना होगा। आज मोठ के तो नहीं किन्तु मूंग, उड़द और चने के मोदक काफी लोकप्रिय हैं। अत: मोठ से मोदी, मोठ से मोदक; मोदक से मोदी नहीं।

सभी जातियों में केवल बनिये या मोदी ही अपना लेन-देन का हिसाब बही-खातों में रखते थे, इन बहियों में अन्य मोदियों से लेनदेन का हिसाब विभिन्न कॉलम में लिखा जाता था। प्रत्येक मोदी का एक अलग कॉलम होता था। यहीं से तालिका के कॉलम को मद (मोदी > मद) या मद्द (अरबी) कहा जाने लगा होगा।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Narendra Modi belongs to Modh-Ghanchi caste, which was added to OBCs categories in 1994, says Gujarat government". DNA. मई 31 2014. |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. "JD(U) raises query on Modi's OBC status". द हिन्दू बिज़नस लाइन. अप्रैल 23, 2014.
  3. "यह मोदी शब्द कहां से आया". प्रभात खबर. मई 31 2014. |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)