सीतामढी

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सीतामढी
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
जनसंख्या
घनत्व
२६,६९,८८७ (२००१ तक )
• १,२२१
क्षेत्रफल २१८५ sq. kms कि.मी²

निर्देशांक: 26°36′N 85°29′E / 26.6°N 85.48°E / 26.6; 85.48 सीतामढी भारत गणराज्य के बिहार प्रान्त के तिरहुत प्रमंडल मे स्थित एक शहर एवं जिला है। 1972 में मुजफ्फरपुर से अलग होकर यह स्वतंत्र जिला बना। बिहार के उत्तरी गंगा के मैदान में स्थित यह जिला नेपाल की सीमा पर होने के कारण संवेदनशील है। बज्जिका यहाँ की बोली है लेकिन हिंदी और उर्दू राजकाज़ की भाषा और शिक्षा का माध्यम है। यहाँ की स्थानीय संस्कृति, रामायणकालीन परंपरा तथा धार्मिकता नेपाल के तराई प्रदेश तथा मिथिला के समान है।

इतिहास[संपादित करें]

सीतामढी का स्थान हिंदू धर्मशास्त्रों में अन्यतम है। त्रेता युग में राजा जनक की पुत्री तथा भगवान राम की पत्नी देवी सीता का जन्म पुनौरा में हुआ था। ऐसी जनश्रुति है कि सीताजी के प्रकाट्य स्थल पर उनके विवाह पश्चात राजा जनक ने भगवान राम और जानकी की प्रतिमा लगवायी थी। लगभग ५०० वर्ष पूर्व अयोध्या के एक संत बीरबल दास ने ईश्वरीय प्रेरणा पाकर उन प्रतिमाओं को खोजा औ‍र उनका नियमित पूजन आरंभ हुआ। यह स्थान आज जानकी कुंड के नाम से जाना जाता है। भौगोलिक दृष्टिकोण से सीतामढी तिरहुत का अंग रहा है। इस क्षेत्र में मुस्लिम शासन आरंभ होने तक मिथिला के शासकों के कर्नाट वंश ने यहाँ शासन किया। बाद में भी स्थानीय क्षत्रपों ने यहाँ अपनी प्रभुता कायम रखी लेकिन अंग्रेजों के आने पर यह पहले बंगाल फिर बिहार प्रांत का अंग बन गया। 1908 ईस्वी में तिरहुत मुजफ्फरपुर जिला का हिस्सा रहा। स्वतंत्रता पश्चात 11 दिसंबर 1972 को सीतामढी को स्वतंत्र जिला का दर्जा मिला।

भूगोल[संपादित करें]

गंगा के उत्तरी मैदान में बसे सीतमढी जिला की समुद्रतल से औसत ऊँचाई लगभग ८५ मीटर है। २२९४ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला इस जिले की सीमा नेपाल से लगती है। अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई ९० किलोमीटर है। दक्षिण, पश्चिम तथा पुरब में इसकी सीमा क्रमश: मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण एवं शिवहर तथा दरभंगा एवं मधुबनी से मिलती है। उपजाऊ समतल भूमि होने के बावजूद यहाँ की नदियों में आनेवाली सालाना बाढ के कारण यह भारत के पिछड़े जिले में एक है।

प्रशासनिक विभाजन[संपादित करें]

सीतामढी जिले में 3 अनुमंडल,17 प्रखंड एवं 17 राजस्व सर्किल है। सीतामढी नगर परिषद के अलावे जिले में ४ नगर पंचायत हैं। जिले के 273 पंचायतों के अंतर्गत 835 गाँव आते हैं। जिले का मुख्यालय एवं प्रशासनिक विभाजन इस प्रकार है:-

  • मुख्यालय: सीतामढी
  • अनुमंडल: सीतामढी सदर, पुपरी एवं बेलसंड
  • प्रखंड: बथनाहा, परिहार, नानपुर, बाजपट्टी, बैरगनिया, बेलसंड, रीगा, सुरसंड, पुपरी, सोनबरसा, डुमरा, रुन्नी सैदपुर, मेजरगंज, पुरनिया, सुप्पी, परसौनी, बोखरा, चौरौत

जलवायु[संपादित करें]

सीतामढी में औसत सालाना वर्षा 1100 मि•मी• से 1300 मि•मी• तक होती है। यद्यपि अधिकांश वृष्टि मानसून के दिनों में होता है लेकिन जाड़ॅ के दिनों में भी कुछ वर्षा हो जाती है जो यहाँ की रबी फसलों के लिए उपयुक्त है। वार्षिक तापान्तर 32 से• से 41 से• के बीच रहता है। हिमालय से निकटता के चलते वर्षा के दिनों में आ‍द्रता अधिक होती है जिसके फलस्वरूप भारी ऊमस रहता है।

मृदा एवं जलस्रोत[संपादित करें]

जनसंख्या एवं जीवन स्तर[संपादित करें]

वर्ष 2011की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या:[1] 3,419,622 है जो राज्य की कुल जनसंख्या का 3.29% है। जनंख्या का घनत्व 899 है जो राष्ट्रीय औसत से कफी आगे है। राज्य की जनसंख्या में बारहवें स्थान पर आनेवाले इस जिले की दशकीय वृद्धि दर 27.47 है। साक्षरता की दर मात्र53.53% है।

  • शहरी क्षेत्र:- 1,53,313
  • देहाती क्षेत्र:- 25,29,407
  • कुल जनसंख्या:- 3,419,622
  • स्त्री-पुरूष अनुपातः- 899 प्रति 1000

बागमती तथा लखनदेई नदियों के द्वारा प्रतिवर्ष आनेवाले बाढ तथा प्रवाह दिशा में बदलाव ने लोगों का जीवन दूभर बना दिया है। लगभग 4,44,998 परिवार गरीबी रेखा के नीचे है। [1] नदियों के द्वारा लाई गई मिट्टी से यहाँ की भूमि उपजाऊ है किंतु बाढ की अनियमितता तथा कटाव के चलते ज्यादातर लोगों का अधिवास (आवास क स्तर एवं प्रकार) निम्न कोटि के हैं। कुल जनसंख्या का ८०% आबादी कृषि से जुड़ा है। उद्योग-धंधों का प्रायः अभाव है लेकिन कृषि आधारित उद्योग की अच्छी संभावना है। उच्च जनसंख्या घनत्व तथा पिछड़ेपन के बावजूद सांप्रदायिक समरसता बनी रह्ती है। जिले में मुस्लिम आबादी कुल जनसंख्या का 21.21% है।

शिक्षण संस्थान[संपादित करें]

  • प्राथमिक विद्यालय- 1479
  • मध्य विद्यालय- 619
  • उच्च विद्यालय- 64
  • बुनियादी विद्यालय- 9
  • डिग्री कॉलेज- 25
  • संस्कृत विद्यालय- 20
  • अन्य प्रमुख विद्यालय- जवाहर नवोदय विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय जवाहरनगर, अनुसूचित जाति आवासीय विद्यालय, प्रोजेक्ट बालिका विद्यालय (17), मदरसा (26)

संस्कृति[संपादित करें]

सीतामढी की माटी में तिरहुत और मिथिला क्षेत्र की संस्कृति की गंध है। इस भूभाग को देवी सीता की जन्मस्थली तथा विदेह राज का अंग होने का गौरव प्राप्त है। लगभग २५०० वर्ष पूर्व महाजनपद का विकास होनेपर यह वैशाली के गौरवपूर्ण बज्जिसंघ का हिस्सा रहा। लोग बज्जिका में बात करते हैं लेकिन मधुबनी से सटे क्षेत्रों में मैथिली का भी पुट होता है। मुस्लिम परिवारों में उर्दू में प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है किंतु सरकारी नौकरियों में प्रधानता न मिलने के कारण अधिकांश लोग हिंदी या अंग्रेजी को ही शिक्षा का माध्यम बनाते हैं।

शादी-विवाह
हिंदू प्रधान समाज होने के कारण यहाँ जाति परंपराएँ प्रचलन में है। अधिकांश शादियाँ माता-पिता द्वारा अपनी जाति में ही तए किए जाते हैं। मुस्लिम समाज में भी शादी तय करने के समय जाति भेद का ख्याल रखा जाता है।
लोक कलाएँ
शादी-विवाह या अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों पर वैदेही सीता के भगवान श्रीराम से विवाह के समय गाए गए गीत अब भी यहाँ बड़े ही रसपूर्ण अंदाज में गाए जाते हैं। कई गीतों में यहाँ आनेवाली बाढ की बिभीषिका को भी गाकर हल्का किया जात है। जट-जटिन तथा झिझिया सीतामढी जिले का महत्वपूर्ण लोकनृत्य है। जट-जटिन नृत्य राजस्थान के झूमर के समान है। झिझिया में औरतें अपने सिर पर घड़ा रखकर नाचती हैं और अक्सर नवरात्र के दिनों में खेला जाता है। कलात्मक डिजाईन वाली लाख की चूड़ियों के लिए सीतामढी शहर की अच्छी ख्याति है।

कृषि[संपादित करें]

धान, गेहूँ, मक्का, दलहन, तिलहन, गन्ना, तम्बाकू

उद्योग[संपादित करें]

चीनी उद्योग, चावल, तेल मिल

पर्यटन स्थल[संपादित करें]

  • जानकी मंदिर: सीतामढी रेलवे स्टेशन से डेढ किलोमीटर की दूरी पर बने जानकी मंदिर में राजा जनक द्वारा स्थापित भगवान श्रीराम, देवी सीता और लक्ष्मण की मूर्तियाँ है। जानकी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह पूजा स्थल हिंदू धर्म में विश्वास रखने वालों के लिए अति पवित्र है।
  • जानकी कुंड: सीतामढी से ५ किलोमीटर पश्चिम पुनौरा में देवी सीता का जन्म हुआ था। मिथिला नरेश जनक ने इंद्र देव को खुश करने के लिए अपने हाथों यहाँ हल चलाया था। इसी दौरान एक मृदापात्र में देवी सीता बालिका रुप में उन्हें मिली। मंदिर के अलावे यहाँ पवित्र कुंड है।
  • हलेश्वर स्थान: सीतामढी से ३ किलोमीटर उत्तर पश्चिम में इस स्थान पर राजा जनक ने पुत्रेष्टि यज्ञ के पश्चात भगवान शिव का मंदिर बनवाया था जो हलेश्वर स्थान के नाम से प्रसिद्ध है।
  • पंथ पाकड़: सीतामढी से ८ किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बहुत पुराना पाकड़ का एक पेड़ है जिसे रामायण काल का माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि देवी सीता को जनकपुर से अयोध्या ले जाने के समय उन्हें पालकी से उतार कर इस वृक्ष के नीचे विश्राम कराया गया था।
  • बगही मठ: सीतामढी से ७ किलोमीटर उत्तर पश्चिम में स्थित बगही मठ में १०८ कमरे बने हैं। पूजा तथा यज्ञ के लिए इस स्थान की बहुत प्रसिद्धि है।
  • देवकुली (ढेकुली): ऐसी मान्यता है कि पांडवों की पत्नी द्रौपदी का यहाँ जन्म हुआ था। सीतामढी से १९ किलोमीटर पश्चिम स्थित ढेकुली में अत्यंत प्राचीन शिवमंदिर है जहाँ महाशिवरात्रि के अवसर पर मेला लगता है।
  • बोधायन सरः संस्कृत वैयाकरण पाणिनी के गुरू महर्षि बोधायन ने इस स्थान पर कई काव्यों की रचना की थी। लगभग ४० वर्ष पूर्व देवराहा बाबा ने यहाँ बोधायन मंदिर की आधारशिला रखी थी।
  • शुकेश्वर स्थानः यहाँ के शिव जो शुकेश्वरनाथ कहलाते हैं, हिंदू संत सुखदेव मुनि के पूजा अर्चना का स्थान है।
  • गोरौल शरीफ: सीतामढी से २६ किलोमीटर दूर गोरौलशरीफ बिहार के मुसलमानों के लिए बिहारशरीफ तथा फुलवारीशरीफ के बाद सबसे अधिक पवित्र है।
  • सभागाछी ससौला: सीतामढी से २० किलोमीटर पश्चिम में इस स्थान पर प्रतिवर्ष मैथिल ब्राह्मण का सम्मेलन होता है और विवाह तय किए जाते हैं।
  • जनकपुर: सीतामढी से लगभग ३५ किलोमीटर पूरब एन एच १०४ से भारत-नेपाल सीमा पर भिट्ठामोड़ जाकर नेपाल के जनकपुर जाया जा सकता है। सीमा खुली है तथा यातायात की अच्छी सुविधा है इसलिए राजा जनक की नगरी तक यात्रा करने में कोई परेशानी नहीं है।

यातायात तथा संचार सुविधाएं[संपादित करें]

  • सड़क: सीतामढी से गुजरने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 77 तथा राष्ट्रीय राजमार्ग 104 नेपाल की सीमा तक जाती है। राजकीय राजमार्ग 52 पुपरी होते सीतामढी को मधुबनी से जोड़ती है। इसके अलावे जिले के सभी भागों में पक्की सड़कें जाती है। मॉनसून के दिनों में यातायात मार्ग अक्सर बाढ का शिकार बनती है और लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है।[2]
  • रेल मार्गः सीता़मढी रेलखंड पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र में पड़ता है। हाल में यहाँ से गुजरनेवाली मीटर गेज को दरभंगा तक ब्रॉड गेज में बदल दिया गया है। सीतामढी-नरकटियागंज खंड भी ब्रॉड गेज में बदल दिया गया है। साथ में सीतामढी से सैदपुर तक ब्रॉड गेज बन गया है तथा सैदपुर से मुजफ्फरपुर रेल लाईन का काम अभी चल रहा है। रेल अमान परिवर्तन के बाद दिल्ली को जानेवाली लिच्छवी एक्सप्रेस अब सीतामढी से चलती है।
  • हवाई मार्गः यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा 130 किलोमीटर दूर राज्य की राजधानी पटना में है।
  • दूरभाष सेवाएँ: सूचना क्षेत्र में क्रांति होने का फायदा सीतामढी को भी मिला है। बीएसएनएल सहित अन्य मोबाईल कंपनियाँ जिले के हर क्षेत्र में अपनी पहुँच रखती है। बेसिक फोन (लैंडलाईन) तथा इंटरनेट की सेवा सिर्फ बीएसएनएल प्रदान करती है।
  • डाक व्यवस्था: सभी प्रखंड में डाकघर की सेवा उपलब्ध है। सीतामढी शहर तथा बड़े बाजारों में निजी कूरियर कंपनियाँ कार्यरत है जो ज्यादातर स्थानीय व्यापारियों के काम आती है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कडिया[संपादित करें]

1 सीतामढी जिला का आधिकारिक जालस्थल
2 http://en.wikipedia.org/wiki/Sitamarhi_district