रवीन्द्र प्रभात

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रवीन्द्र प्रभात

दिसम्बर २००८ में रवीन्द्र प्रभात
जन्म 5 अप्रैल 1969 (1969-04-05) (आयु 45)
महिंदवारा, सीतामढ़ी, बिहार, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
व्यवसाय कवि, लेखक, साहित्यकार


रवीन्द्र प्रभात (जन्म: ५ अप्रैल १९६९) भारत के हिन्दी कवि, कथाकार, पटकथा लेखक, उपन्यासकार,व्यंग्यकार, स्तंभकार,सम्पादक और ब्लॉग विश्लेषक हैं।[1] उन्होंने लगभग सभी साहित्यिक विधाओं में लेखन किया है परंतु व्यंग्य और गज़ल में उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। १९९१ में प्रकाशित अपने पहले गज़ल संग्रह "हमसफर" से पहली बार वे चर्चा में आये।[2] उनकी रचनाएँ भारत तथा विदेश से प्रकाशित लगभग सभी प्रमुख हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा उनकी कविताएँ चर्चित काव्य संकलनों में संकलित की गई हैं। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक 'जनसंदेश टाईम्स' और 'डेली न्यूज एक्टिविस्ट' के वे नियमित स्तंभकार भी रह चुके हैं, व्यंग्य पर आधारित उनका साप्ताहिक स्तंभ "चौबे जी की चौपाल" काफ़ी लोकप्रिय हुई है। उनके अब तक तीन उपन्यास, एक काव्य संग्रह, दो गजल संग्रह, दो संपादित पुस्तक और एक हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास प्रकाशित है। 'ब्लॉग श्री' और 'ब्लॉग भूषण' उपाधियों के साथ साथ उन्हें 'हिन्दी साहित्य श्री सम्मान', 'बाबा नागार्जुन जन्मशती कथा सम्मान', 'प्रब्लेस चिट्ठाकारिता शिखर सम्मान','संवाद सम्मान', सृजन सम्मान आदि से सम्मानित किया गया है। उन्होंने हिन्दी मासिक 'संवाद' और'साहित्यांजलि' के विशेष संपादन के साथ-साथ 'उर्विजा' और 'फगुनाहट' का संपादन किया है। वे त्रैमासिक पत्रिका 'वटवृक्ष' के प्रधान संपादक भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे हिन्दी मासिक पत्रिका 'परिकल्पना समय के प्रधान संपादक हैं।[3][4]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. जनसंदेश टाइम्स, हिन्दी दैनिक, लखनऊ संस्करण, लेखक: डॉ ज़ाकिर अली रजनीश,प्रकाशन तिथि: 01 मार्च 2011, पृष्ठ संख्या:11, शीर्षक: ब्लोगिंग को सार्थक करती परिकल्पना
  2. खोजबीन,पाक्षिक समाचार पत्र, प्रकाशन स्थल: कला मंदिर प्रधान पथ सीतामढ़ी, प्रकाशन तिथि: 15.12.1991, पृष्ठ संख्या: 2, लेखक: बसंत आर्य, आलेख शीर्षक: हमसफ़र : यथार्थ और कल्पना की धूप छाँव
  3. मनोज कुमार पाण्डे. "A conversation with Ravindra Prabhat". Another Subcontinent. http://www.southasiatoday.org/2012/02/today-we-have-any-type-of-new.html. "Ravindra Prabhat Today we have many type of new applications, which will help in promoting Hindi very fast on Internet." 
  4. Ravindra Prabhat at Swargvibha

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]