दुर्गा

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दुर्गा
माता दुर्गा की प्रतिमा।
माता दुर्गा की प्रतिमा।
शक्ति / विजय
बंगाली দুর্গা
संबंधित शक्ति अवतार
मंत्र ॐ दुर्गा देव्यैः नमः
ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुण्डायैः विच्चे॥
अस्त्र-शस्त्र त्रिशूल, चक्र,
गदा, धनुष,
शंख, तलवार,
कमल, तीर, अभयहस्त
जीवनसाथी शिव
वाहन बाघ
पश्चिम बंगाल के बर्दवान में दुर्गा पूजा का पांडाल, 2011

दुर्गा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं जिन्हें केवल देवी और शक्ति भी कहते हैं। [1] शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं जिनकी तुलना परम ब्रह्म से की जाती है। वह युद्ध करने वाली देवी हैं। उनके बारे में मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करतीं हैं।[2]

देवी दुर्गा का निरूपण सिंह पर सवार एक निर्भय स्त्री के रूप में की जाती है। वे अनेक हाथों से युक्त हैं जिनमें सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होता है। उन्होने महिषासुर नामक असुर का वध किया। महिषासुर (= महिष + असुर = भैंसा जैसा असुर) करतीं हैं। हिन्दू ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी पार्वती के रूप में वर्णित हैं

हिन्दुओं के शाक्त साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त साम्प्रदाय ईश्वर को देवी के रूप में मानता है)। वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी "उमा हैमवती" (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है। पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है। दुर्गा असल में शिव की पत्नी पार्वती का एक रूप हैं, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों का नाश करने के लिये देवताओं की प्रार्थना पर पार्वती ने लिया था -- इस तरह दुर्गा युद्ध की देवी हैं।

देवी दुर्गा के स्वयं कई रूप हैं। मुख्य रूप उनका "गौरी" है, अर्थात शान्तमय, सुन्दर और गोरा रूप। उनका सबसे भयानक रूप काली है, अर्थात काला रूप। विभिन्न रूपों में दुर्गा भारत और नेपाल के कई मन्दिरों और तीर्थस्थानों में पूजी जाती हैं। कुछ दुर्गा मन्दिरों में पशुबलि भी चढ़ती है। भगवती दुर्गा की सवारी शेर है।

अन्य स्वरूप[स्रोत सम्पादित करें]

दुर्गा सप्तशती के अनुसार इनके अन्य स्वरूप भी बतलायें गये हैं।

  1. ब्राह्मणी
  2. माहेश्वरी
  3. कौमारी
  4. वैष्णवी
  5. वाराही
  6. नरसिंही
  7. ऐन्द्री
  8. शिवदूती
  9. भीमादेवी
  10. भ्रामरी
  11. शाकम्भरी
  12. आदिशक्ति
  13. रक्तदन्तिका

उग्रचंडी[स्रोत सम्पादित करें]

'उग्रचण्डी' दुर्गा का एक नाम है। दक्ष ने अपने यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया , लेकिन शिव और सती को आमंत्रण नहीं दिया। इससे क्रुद्ध होकर, अपमान का प्रतिकार करने के लिए इन्होंने उग्रचंडी के रूप में अपने पिता के यज्ञ का विध्वंस किया था। इनके हाथों की संख्या १८ मानी जाती है। आश्विन महीने में कृष्णपक्ष की नवमी दिन शाक्तमतावलंबी विशेष रूप से उग्रचंडी की पूजा करते हैं।

चित्र दीर्घा[स्रोत सम्पादित करें]

इन्हें भी देखें[स्रोत सम्पादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[स्रोत सम्पादित करें]

  1. David R. Kinsley 1989, pp. 3-4.
  2. Paul Reid-Bowen 2012, pp. 212-213.