पितृ विसर्जन अमावस्या

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पितृ विसर्जन अमावस्या हिंदुओं का धार्मिक कार्यक्रम है जिसे प्रत्येक घर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन हिंदुओं में अपने अग्रजों की मृत्यु के पश्चात् जिन्हें पितृ (पितर) की संज्ञा दी जाती उनके सम्मान में ,उनके प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त करने के लिए एक धार्मिक कार्य क्रम का आयोजन होता है। भारतीय संस्कृति में और हिन्दू धर्म में अपने से बड़ों के प्रति आदर एवम श्रद्धा का भाव पाया जाता है।

आयोजन की तिथि[संपादित करें]

यह पर्व आश्विन मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस पर्व को पितृ पक्ष का समापन पर्व भी कहते हैं।

महत्व[संपादित करें]

  • हिन्दू पुराणों में उल्लेख है की जो व्यक्ति अपने पितरों का श्रद्धा भाव से श्राद्ध या तर्पण करता है उसे पितृ अपनी संतानों के प्रति कल्याण की कामना एवम आशीर्वाद प्रदान करते हैं। *पौराणिक तथ्यों की जिनके अनुसार आत्मा का धरती से लेकर परमात्मा तक पहुंचने का सफर वर्णित हैं। लेकिन धरती पर रहकर पूर्वजों को खुश कैसे किए जाए? इसका आसान सा जबाव यही है कि जब आपके वरिष्ठ परिजन जब धरती पर जिंदा हैं। उन्हें सम्मान दें। उनको किसी तरह से दुःखी न करें। क्योंकि माता-पिता, दादा-दादी, जब तक जिंदा हैं और खुश हैं तो मरने के बाद भी वह आपसे खुश ही रहेंगे। आधुनिक दौर में माता-पिता, दादा-दादी ,नाना- नानी या अन्य वरिष्ठजनों को लोग यातनाएं देते हैं उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं यह पूरी तरह से गलत है। और इनके मरने के बाद उनका तर्पण करते हैं। ऐसे में वह आपसे खुश कैसे रह सकते हैं।
  • पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन धरती पर आए पितरों को याद करके उनकी विदाई की जाती है। पूरे पितृ पक्ष में पितरों को याद न किया गया हो तो अमावस्या को उन्हें याद करके दान करने और गरीबों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है[1] इसदिन सभी पितर अपने परिजनों के घर के द्वार पर बैठे रहते हैं।जो व्यक्ति इन्हें अन्न जल प्रदान करता है उससे प्रसन्न होकर पितर खुशी-खुशी आशीर्वाद देकर अपने लोक लौट जाते हैं।[2]

पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध की पात्रता[संपादित करें]

  • हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में किसी भी अमावस्या को जन्म लेने वाले पूर्वजों का श्रद्धा या तर्पण किया जाता है।
  • जिन पूर्वजों के जन्म की तिथि अज्ञात हो। [2]
  • पूर्वजो की तिथि ज्ञात होने पर भी यदि समय पर किसी कारण से श्राद्ध न हो पाए तो अमावस्या के दिन श्राद्ध की जाती है।
  • जिनकी अकाल मौत हो गई हो। [2]
  • नाना ,नानी की भी इसी दिन श्राद्ध की जाती है। [3]

पितृ विसर्जन का स्थान[संपादित करें]

पितृ विसर्जन अमावस्या का श्राद्ध पर्व किसी नदी[4] या सरोवर के तट पर या निजी आवास में भी हो सकता है।

अतृप्त आत्माओं की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान[संपादित करें]

अकाल मौत होने पर उनकी आत्म की शांति हेतु नर्मदा नदी के तट पर श्रद्धा और भक्ति के साथ तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। [5]

सन्दर्भ[संपादित करें]