वर्णाश्रम धर्म

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वर्ण एक अवस्था है। शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति शूद्र पैदा होता है और प्रयत्न और विकास से अन्य वर्ण अवस्थाओं में पहुंचता है। वास्तव में प्रत्येक में चारों वर्ण स्थापित हैं। इस व्यवस्था को वर्णाश्रम धर्म कहते हैं।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. गविन फ्लूड (२४ अगस्त २००८). "Hindu concepts" [हिन्दू विचारधारा] (अंग्रेज़ी में). बीबीसी. अभिगमन तिथि २३ जून २०१४.