रायगढ़

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रायगढ़ दुर्ग
महाराष्ट्र का हिस्सा
Raigad District, Maharashtra
(near Mahad)
RaigadFort3.jpg
Raigad fort towers, Ranivasa (residence of queens)
प्रकार Hill fort
निर्देशांक 18°14′01″N 73°26′26″E / 18.2335°N 73.4406°E / 18.2335; 73.4406
निर्माण
निर्माण कर्ता Hirojee indalkar

(Deshmukh)

निर्माण सामग्री Stone, Lead
ऊंचाई 1,356 मीटर (4,400 फीट) ASL
प्रयोग में
वर्तमान स्वामित्व Government of India
जनता के लिये खुला
Yes
अधिकृत है साँचा:देश आँकड़े Maratha Empire (1656-1689)

Mughal Empire (1689-1707)

साँचा:देश आँकड़े Maratha Empire (1707-1818)

East India Company (1818-1857)

British Raj (1857-1947)

Flag of भारत भारत (1947-)

उपयोगकर्ता Sambhaji

रायगढ़ दुर्ग, महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के महाड में पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध दुर्ग है। इसे छत्रपति शिवाजी ने बनवाया था और १६७४ में इसे अपनी राजधानी बनाया।

रायगढ़ स्थित शिवाजी की प्रतिमा

रायगड पश्चिमी भारत का ऐतिहासिक क्षेत्र है। यह मुंबई (भूतपूर्व बंबई) के ठीक दक्षिण में महाराष्ट्र में स्थित है। यह कोंकण समुद्रतटीय मैदान का हिस्सा है, इसका क्षेत्र लहरदार और आड़ी-तिरछी पहाड़ियों वाला है, जो पश्चिमी घाट (पूर्व) की सह्याद्रि पहाड़ियों की खड़ी ढलुआ कगारों से अरब सागर (पश्चिम) के ऊँचे किनारों तक पहुँचता है।

यह किला सह्याद्री पर्वतरांग मे स्थित है. समुद्रतळ से ८२० मीटर (२७०० फुट ) कि उंचाई पर है. मराठा साम्राज्य पर उसकी एक खास पहचान है. छत्रपती शिवाजी महाराज ने रायगडकिले कि विशेषता और स्थान ध्यान मे लेते हुये १७ वी सदि मे स्वराज्य कि आपणी राजधानी इस किले को बनाई। दुर्ग एक बहुत हि शक्तिशाली दुर्ग है। छत्रपती शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक भी यहीं पर हुआ था।

अंग्रेजों ने इस किले पर १८१८ मे कब्जा करनेके बाद किले को बहुत पुरी तरहसे नेस्तनाभूत किया भारी मात्रा मे किलेको नुकसान पहुँचाया. और वहा से बहुत सारी लूट भी की।

आजकी तारीख मे ये किला महाराष्ट्र शासन के पुरातत्व विभाग मे संरक्षित स्मारक है। आज यहाँ पर भारी मात्रा मे हर रोज यात्री आते हैं।

इतिहास[संपादित करें]

रायगड किले का प्राचीन नाम रायरी था. पूरब कि और के देश के लोग इसे पूरब का जिब्राल्टर के नामसे जाणते थे. जिब्राल्टर के जैसे हि रायगड पहाडी इलाके मे है. और अजिंक्य है.

1662 ई. में शिवाजी तथा बीजापुर के सुल्तान में काफ़ी संघर्ष के पश्चात संधि हुई थी जिससे शिवाजी ने अपना जीता हुआ सारा प्रदेश प्राप्त कर लिया था। इस संधि के लिए शिवाजी के पिता कई वर्ष पश्चात पुत्र से मिलने आए थे। शिवाजी ने उन्हें अपना जीता हुआ समस्त प्रांत दिखाया। उस समय शाहजी के सुझाव को मानकर रैरी पहाड़ी के उल्ल श्रृंग पर शिवाजी ने रायगढ़ को बसाने का इरादा किया था। समाधि भी रायगढ़ में ही है। यहाँ उन्होंने एक क़िला तथा प्रासाद बनवाया और वे यहीं निवास करने लगे। इस प्रकार शिवाजी के राज्य की राजधानी रायगड में ही स्थापित हुई। रायगड चारों ओर से सह्यद्रि की अनेक पर्वत मालाओं से घिरा हुआ था और उसके उल्ल श्रृंग दूर से दिखाई देते थे।

राज्याभिषेक[संपादित करें]

शिवाजी का राज्याभिषेक रायगड में, 6 जून 1674 ई. को हुआ था। काशी के प्रसिद्ध विद्वान गंगाभट्ट इस समारोह के आचार्य थे। उपरान्त 1689-90 ई. में औरंगज़ेब ने इस पर अधिकार कर लिया।

कृषि और खनिज[संपादित करें]

तटवर्ती कगार बरसाती नदी-घाटियों द्वारा विभक्त हैं, जो इस इलाक़े की अधिकांश कृषि में सहायक हैं। चावल और नारियल यहाँ की प्रमुख फ़सलें हैं और मछली पकड़ना और नमक बनाना महत्त्वपूर्ण समुद्रतटीय उद्यम हैं।

उद्योग और व्यापार[संपादित करें]

तीसरी शताब्दी ई. पू. के आरम्भ से ही कोंकण तट के रायगढ़ क्षेत्र का रोम के साथ व्यापार स्थापित हो गया था। काग़ज़ की लुगदी, रसायन और इंजीनियरिंग का काम यहाँ के प्रमुख उद्योग हैं। खोपोली और पनवल प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं।

जनसंख्या[संपादित करें]

20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में यहाँ की एक बड़ी जनसंख्या बंबई (मुंबई) प्रवास कर गई और इस इलाक़े के उत्तरी भाग का तेज़ी से औद्योगिक विकास हुआ। अलीबाग़ यहाँ का प्रमुख शहर है। रायगढ़ ज़िले की कुल जनसंख्या (2001) 22,05,972 है।

पर्यटन[संपादित करें]

यहाँ के पाल, कुडा, कोन्नन और अंबीवली में अनेक प्राचीन बौद्ध गुफा मन्दिर और ऐलिफ़ेंटा द्वीप में शैव गुफाएँ हैं। विख्यात सैरगाह और रायगढ़ दुर्ग यहाँ स्थित हैं।

रायगड किले पर मराठी मे लिखी हुई किताबे[संपादित करें]

  • आजचा रायगड (पांडुरंग पाटणकर. २००६)
  • एका राजधानीची कहाणी - दुर्गराज रायगड (उदय दांडेकर)
  • किल्ले रायगड (शंकर अभ्यंकर, १९८०)
  • किल्ले रायगड - कथा पंचविसी (आप्पा परब, २०१५)
  • किल्ले रायगड - प्रदक्षिणेच्या वाटेवर (लेखक - संकलक : आप्पा परब, २००५)
  • किल्ले रायगड स्थलदर्शन (आप्पा परब, २०१२)
  • गडांचा राजा - राजांचा गड - रायगड (प्र. गो. भाट्ये, १९८६)
  • चला, पाहू रायगड (म.श्री. दीक्षित, प्रकाशक : शिवाजी रायगड स्मारक मंडळ, पुणे
  • चला रायगडाला - रायगड मार्गदर्शिका (प्रकाशक : शिवाजी रायगड स्मारक मंडळ, पुणे, १९६८)
  • ‘तो’ रायगड (प्र.के. घाणेकर, १९९१)
  • दुर्गराज रायगड (गजानन आर्ते, १९७४)
  • दुर्गराज रायगड (प्रवीण वसंतराव भोसले, २००६)
  • माझे नाव रायगड (बळवंत मोरेश्वर पुरंदरे, १९६१)
  • राजधानी रायगड (प्रभाकर भावे, १९९७)
  • राजधानी रायगड (वि.वा. जोशी, १९२९)
  • रायगड (प. रा. दाते, १९६२)
  • रायगड अभ्यासवर्ग (पराग लिमये), प्रकाशक : जनसेवा समिती, विलेपार्ले, २००२.
  • रायगड एक अभ्यास - चला पाहू या रायगड (गोपाळ चांदोरकर, २००१)
  • रायगड एक अभ्यास - वैभव रायगडचे (शिवपूर्वकालीन); लेखक : गोपाळ चांदोरकर, प्रकाशक : प्रफुल्लता प्रकाशन (२००४)
  • रायगड एक अभ्यास - शोध शिवसमाधीचा (गोपाळ चांदोरकर, २०००)
  • रायगड किल्ल्याची जुनी माहिती (अंताजी लक्ष्मण जोशी, १८८५)
  • रायगड किल्ल्याचे वर्णन (गोविंदराव बाबाजी जोशी, १८८५)
  • रायगड जिल्ह्याचे दुर्गवैभव (सचिन जोशी)
  • रायगड दर्शन (प्र.न. देशपांडे, १९८०)
  • रायगड दर्शन दुर्मीळ पुस्तकांतून (प्र..के. घाणेकर)
  • रायगड प्रदक्षिणा (गे. ना. परदेशी, १९८८)
  • रायगड प्रदक्षिणा (सोमनाथ समेळ, १९८४)
  • रायगड - महाराष्ट्र राज्य पदयात्रा व प्रवासयोजना (प्रकाशक : प्रसिद्धी विभाग, महाराष्ट्र सरकार)
  • रायगड - यात्रा, दर्शन, माहिती (प्रबोधनकार केशव सीताराम ठाकरे, १९५१)
  • रायगड - रम्यकथा (प्रसिद्धी विभाग, महाराष्ट्र सरकार)
  • रायगड वर्णन (केशव अं. हर्डीकर, १९०६)
  • रायगड स्पर्धा - एक राष्ट्रोद्धारक कार्यक्रम (गे. ना. परदेशी, १९८६)
  • रायगडचा इतिहास (सुधाकर लाड)
  • रायगडाचा मार्गदर्शक (रायगड स्मारक मंडळ, पुणे, प्रकाशन - १८ एप्रिल, १९३५).
  • रायगडची जीवनकथा (शांताराम विष्णू आवळसकर, १९६२-१९७४-१९९८) : हे पुस्तक esahity.com वर आहे.
  • रायगडाची माहिती (गोविंद गोपाळ टिपणीस, महाडकर, १८९६)
  • रायगडाची सहल (रमेश द. साठे)
  • रायगडावरील शिवाजी महाराजांच्या सिंहासनाची आणि इतर व्यवस्था (शं.ना. वत्सजोशी) प्रकाशक - भारत इतिहास संशोधन मंडळ, जानेवारी १९४०.
  • शिवतीर्थ किल्ले रायगड (सुधाकर लाड, २००४)
  • शिवतीर्थ किल्ले रायगड प्रदक्षिणा स्पर्धा - एक राष्ट्रप्रेरक उपक्रम (गे.ना. परदेशी, १९८४)
  • शिवतीर्थ रायगड.(गो.नी. दांडेकर)
  • शिवतीर्थ रायगड रंगीत फोल्डर (प्रकाशक : पर्यटन संचलनालय महाराष्ट्र राज्य)
  • शिवतीर्थाच्या आख्यायिका (प्र.के. घाणेकर, १९८५)
  • शिवनेरी ते रायगड (प्रकाशक : माहिती व जनसंपर्क महासंचालनालय महाराष्ट्र शासन)
  • शिवरायांच्या दोन राजधान्या (गो.नी. दांडेकर]], १९८३)
  • शिवस्फूर्तीची स्मृती - रायगड (मधु रावकर, १९७४)
  • Shivaji Memorials, the British Attitude, (1974)
  • शिवाजी महाराजांच्या राजसिंहासनावर मेघडंबरी (प्रकाशक : माहिती व जनसंपर्क महासंचालनालय महाराष्ट्र शासन)
  • श्रीमद् रायगिरौ (गोपाळ चांदोरकर)
  • श्रीशिवाजी रायगड स्मारक मंडळ, पुणे स्थापना शताब्दी स्मरणिका (म.श्री. दीक्षित)
  • श्रीक्षेत्र रायगड दर्शन (गो.नी. दांडेकर, १९७४)

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]