मुरुद जंजीरा किला
परिचय
[संपादित करें]मुरुड-जंजीरा किला (मराठी: मुरुड-जंजिरा किल्ला) भारत के पश्चिमी तट पर स्थित एक प्रसिद्ध समुद्री किला है, जो महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले में मुरुड के पास समुद्र के बीच एक छोटे द्वीप पर स्थित है। यह किला अरब सागर में एकमात्र ऐसा किला है जिसे कभी भी जीता नहीं जा सका। इसका निर्माण मराठा राजा रामराव पाटिल व्दारा किया गया था, और यह आज भी अपने स्थापत्य, रणनीतिक निर्माण और अजेयता के लिए प्रसिद्ध है।
नाम का अर्थ
[संपादित करें]"जंजीरा" शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द "जज़ीरा" से हुई है, जिसका अर्थ होता है द्वीप। "मुरुड" नजदीकी तटीय कस्बे का नाम है। किले का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह एक द्वीप पर स्थित है और मुरुड से संबंधित है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
[संपादित करें]किले का इतिहास 15वीं शताब्दी में शुरू होता है जब मराठा राजा राम पाटील ने यहाँ लकड़ी का किला बनवाया था। 1489 में सिद्दी सरदार पीरम खान ने इस किले को छल से हथिया लिया और इस पर कब्ज़ा कर लिया।
बाद में मलिक अंबर, जो अहमदनगर सल्तनत के प्रधानमंत्री थे, ने इस किले को पत्थर से बनवाया और इसे समुद्र में एक मजबूत किला बना दिया। इसके बाद यह किला सिद्दी वंश के अधीन रहा, जिन्होंने इसे 400 वर्षों तक नियंत्रित किया।
स्थापत्य एवं विशेषताएँ
[संपादित करें]किला पूरी तरह पत्थर से बना है और यह समुद्र की लहरों से लगातार टकराता रहता है, फिर भी यह आज भी मजबूती से खड़ा है। किले की दीवारें बहुत ऊँची और चौड़ी हैं। किले में कुल 19 बुर्ज हैं जिन पर बड़ी-बड़ी तोपें रखी गई थीं।
स्थापत्य तालिका
[संपादित करें]| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कुल क्षेत्रफल | 22 एकड़ |
| बुर्जों की संख्या | 19 |
| ऊँचाई | 90 फीट (लगभग) |
| प्रवेश द्वार | पूर्व दिशा में, जो सिर्फ समुद्र से ही पहुँचा जा सकता है |
| गुप्त द्वार | एक विशेष गुप्त मार्ग जो सुरक्षा कारणों से उपयोग किया जाता था |
| पानी के कुंड | दो मीठे पानी के कुंड, जो आज भी जल उपलब्ध कराते हैं |
| निर्माण शैली | मराठा शैली |
तोपें और युद्ध तकनीक
[संपादित करें]किले में कुछ ऐतिहासिक तोपें मौजूद हैं जो आज भी देखी जा सकती हैं:
- कलाल बांगड़ – विशाल और भारी तोप जो दुश्मनों के जहाज नष्ट कर सकती थी
- लैंड कासम – समुद्र की दिशा में लगाई गई तोप
- चावड़ी – उच्च बुर्ज पर स्थित तोप
शासक और सिद्दी वंश
[संपादित करें]इस किले पर सिद्दी वंश ने कई पीढ़ियों तक राज किया। ये लोग अफ्रीकी मूल के थे और अरबी-हब्शी समुदाय से संबंधित थे। इनका शासन लगभग 400 वर्षों तक रहा। किले का रणनीतिक स्थान और समुद्री शक्ति इसे अजेय बनाते थे।
प्रमुख सिद्दी शासक
[संपादित करें]- सिद्दी बुरहान
- सिद्दी कासिम
- सिद्दी सुरूर खान
- सिद्दी रसूल याकूत
- सिद्दी अहमद खान
"इतिहास में ऐसा कोई दूसरा किला नहीं है जिसे अंग्रेज़, पुर्तगाली, मराठा और मुग़ल — सभी जीतने में असफल रहे हों।"
मराठा और शिवाजी का प्रयास
[संपादित करें]छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले को जीतने के कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में उनके पुत्र संभाजी महाराज ने किले के सामने एक और किला — पद्मदुर्ग — बनवाया, लेकिन जंजीरा फिर भी अजेय रहा।
संस्कृति और कला
[संपादित करें]किले के अंदर एक दुर्लभ शिलालेख है जिसमें एक शेर को पाँच हाथियों को दबोचते हुए दिखाया गया है — यह उस समय की क्षत्रिय मराठाओ कि शक्ति का प्रतीक है। किले में सिद्दी शासकों की कब्रें, मस्जिद, और महल के अवशेष भी देखने को मिलते है
आज की स्थिति
[संपादित करें]आज मुरुड-जंजीरा किला महाराष्ट्र के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए नाव सेवा उपलब्ध है जो मुरुड तट से चलती है। किले की संरचना अभी भी बहुत हद तक सलामत है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
वंशज और प्रवास
[संपादित करें]सिद्दी वंश के कुछ लोग आज भी दरभंगा, झंझारपुर, मुंबई, और बंगाल के कुछ हिस्सों में रहते हैं। कुछ वंशज म्यांमार और अफ्रीका तक भी प्रवास कर गए।
देखने योग्य स्थल
[संपादित करें]- 19 बुर्ज और विशाल तोपें
- मीठे पानी के दो कुंड
- सुरूर खान का महल
- मस्जिद और मकबरे
- गुप्त सुरंगें और प्रवेश द्वार
संबंधित लेख
[संपादित करें]स्रोत
[संपादित करें]पहली बात ये समझने वाली है कि जो सिद्धि वंश के राजा खान आए
[संपादित करें]अफ्रीका देश और अरब देश से तो उनका किला कैसे हो गया ये ये इतना झूठ हमारे इतिहास को लिखा गया ताकि हमें हमारे धर्म योद्धा के बारे में कुछ पता न चल पाए [1]
और किस का छीन कर उसे अपना घर कहना क्या उचित है और फिर भी चलो मुगलों ने इसे जीता तो फिर टूट कैसे गया जब 400 साल तक उस किले पर राज किया तो तोड़ा किसने उसे खुद ही तोड़ कर चले गए क्या
- ↑ "Wikipedia, the free encyclopedia". www.wikipedia.org (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-09-14.