शिवनेरी दुर्ग

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शिवनेरी दुर्ग का मुख्य प्रवेश

शिवनेरी दुर्ग या शिवनेरी किला, भारत के महाराष्ट्र राज्य के पुणे के जुन्नर गांव के पास स्थित एक ऐतिहासिक किला है। शिवनेरी छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मस्थान भी है।[1] शिवाजी के पिता, शाहजी बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह की सेना में एक सेनापति थे। लगातार हो रहे युद्ध के कारण शाहजी, अपनी गर्भवती पत्नी जीजाबाई की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे, इसलिए उन्होने अपने परिवार को शिवनेरी में भेज दिया। शिवनेरी चारों ओर से खड़ी चट्टानों से घिरा एक अभेद्य गढ़ था।

शिवाजी का जन्म 6 April 1627 को हुआ था और उनका बचपन भी यहीं बीता। इस गढ़ के भीतर माता शिवाई का एक मन्दिर था, जिनके नाम पर शिवाजी का नाम रखा गया। किले के मध्य में एक सरोवर स्थित है जिसे "बादामी तालाब" कहते हैं। इसी सरोवर के दक्षिण में माता जीजाबाई और बाल शिवाजी की मूर्तियां स्थित हैं। किले में मीठे पानी के दो स्रोत हैं जिन्हें गंगा-जमुना कहते हैं और इनसे वर्ष भर पानी की आपूर्ति चालू रहती है।

किले से दो किलोमीटर की दूरी पर लेन्याद्री गुफाएं स्थित हैं जहां अष्टविनायक का मन्दिर बना है।

इतिहास ‘जीर्णनगर’, ‘जुन्नेर’ मतलब जुन्नर यह गॉव इसवी सन पूर्व समय से प्रसिद्ध हेेै। यह शक राजा नहपाना की राजधानी थी। सातवाहन राजा गौतमीपुत्र सातकर्णी इसने शकाेका नाश किया और जुन्नर व यहां के सभी परिसरपर अपना वर्चस्व प्रस्थापित किया। नाणेघाट यह पुराना व्यापारी मार्ग है। इस मार्ग से बडे पैमाने यातायात चलता था। इस पर नजर रखने के लिए मार्गपर दुर्गांकी निर्मिती की गई और सातवाहन की सत्ता स्थिर होने पर उन्होंने इस स्थान पर अनेक जगहों पर केव्स खुदवाई।

सातवाहन के बाद शिवनेरी चालुक्य व राष्ट्रकूट इस शासन के अधीन था। ११७० से १३०८ के लगभग यादव वंश ने अपना राज्य स्थापिन किया और इसी दौरान शिवनेरीको किले का स्वरूप प्राप्त हुआ था। बाद में इ.स. १४४३ में मलिक–उल–तुजार ने यादवाें का पराभव कर किला जीता इस प्रकार से किला बहमनी शासन के अधीन आया। इ.स. १४७० मध्ये मलिक–उल–तुजारचा प्रतिनिधी मलिक महंमद ने किला नाकेबंदी करके किला जीता । १४४६ में मलिक महंमद के पिता की मृत्यू के बाद निजामशाही की स्थापना हुई। आगे १४९३ मे यहाँ की राजधानी किले से अहमदनगर में करनी पडी। इ.स. १५६५ में सुलतान मूर्तिजा निजाम ने अपने भाई कासीम को इस किले में कैदे में रखा था। इसके बाद इ.स. १५९५ में किला और जुन्नर प्रांत मालोजी राजे भोसले के पास आया। जिजाबाईंक के पिता जाधवराव की हत्या के बाद १६२९ में जिजामाता गर्भवती रहने पर शहाजीने उन्हे ५०० सवार साथ देकर रातोरात शिवनेरी पर लेकर गए।‘शिवनेरी किले पर श्रीभवानीमाता शिवाई को जीजाऊ ने प्रण किया कि यदि मुझे पुत्र प्राप्त हुआ तो तुम्हारा नाम रखूंगी। शके १५५१ शुक्ल नाम संवत्सरे, फाल्गुन वद्य तृतीया को शुक्रवार के दिन सूर्यास्त के बाद शिवाजीराजे का जन्म हुआ। वह तारीख थी १९ फरवरी इसवी सन १६३०. इ.स. १६३२ में जिजाबाईने शिवाजीसह किला छोडा और १६३७ मे किला मुगलाे के अधीन गया। १६५० में मुगलो के विरूद्ध यहॉ के महादेव कोळी लोगों न् आंदोलन किया। इसमें मुगलोंकी विजय हुई। आगे इ.स. १६७३ में शिवनेरीका किलेदार अजीजखान को चकमा देकर किले को लेने का अयशस्वी प्रयत्‍न राजे शिवाजीने किया। इ.स. १६७८ में जुन्नर प्रांत लुटा गया और मराठो ने किला लेने का फिर से एक बार प्रयत्‍न किया परंतु सफलता नहीं मिली। आगे ३८ वर्ष बाद १७१६ में शाहूमहाराजने किला मराठेशाही मे लाया जो पेशवाओं के पास हस्तांतरित किया गया।

कोळी चौथरा शिवाजी महाराज की पुणे के आसपास की गई कारवायी आदिलशाही की आंखों में चुभ रही थी। मुगलों को ये मालूम थी। इसी महादेव कोळी लोगों ने मुगलविरुद्ध जुन्नर व शिवनेरी को अपने नियंत्रण में रखा। इसके पूर्व यह भाग निजामशाही के पास था। निजामशाही हारनेपर सीमाभाग पर आदिलशाहीके और मुगलोंका ध्यान कम हुआ इसका फायदा लेते हुए महादेव कोळी लोगों ने उस प्रांतापर अधिकार स्थापित किया होगा। मुगलोंने तुरंत इस पर उपाययोजना की उन्होंने महादेव कोळी लोगों को पराजित करने के लिए एक भली बड़ी फौज भेजी। शिवनेरी पर रणनिती आखनी पडी पर फिर भी महादेव कोळी समाज की नई सैनाने विशालकाय मुगल सेना के आगे घुटने टेके। लगभग १५०० महादेव कोली समाज के लोगों को नजरकैद किया गया उनको बहुत अत्याचार का सामना करना पडा उसके बाद उन्हें पहाडी पर ले जाकर उनका शिरच्छेद किया। इस नरसंहार की याद में आज उस जगह को कोली चौथरा कहते है। बाद में उस कट्टेपर एक घुमटी बांधी गई। उस कट्टेपर पारसी में दो शिलालेख भी है। अफसोस की बात यह कि आज उस महादेव कोली और उनके सरदारों के नाम उपलब्ध नही है।[२]

किले पर जाने का रास्ता किले पर जाने के लिए दो प्रमुख रास्ते जुन्नर गाव से जाते है। पुणेवासियों और मुंबईवासियों को एक दिन में शिवनेरी की सफर करके वापस जाया जा सकता है।

साखली रस्ता: इस रास्ते से जुन्नर जाने के लिए जुन्नर में आने पर नये बसस्थानक के सामने वाले रास्ते से शिवाजी पुतले के पास आए यहॉ आने पर वहां चार रस्ते इकट्ठा मिलते हैं। बाएं आेर जानेवाले रास्ते से लगभग एक किलोमीटर जाने के बाद रस्ते के बाएं आेर एक मंदिर आता है। मंदिर के सामने से जाने वाली पगडंडी सीधे शिवनेरी किले की एक दिवार के पास ले जाती है। दिवार में लगी साखली के द्वारा और सीढ़ियों के द्वारा उपर जा सकते है। यह रास्ता थोडा जाने के लिए कठिन है । किले पर जाने के लिए पौन घंटा लगता है। सात दरवाजों का रास्ता: शिवाजी के पुतले के बाजू से रास्ते से चलते हुए डांबर का रस्ता आगंतुक को किले की सीढ़ियों पर ले जाता है। इस किले पर रास्ते से किले पर आते समय सात दरवाजे लगते है। पहला महादरवाजा, दूसरा पीर दरवाजा, तीसरा परवानगीचा दरवाजा, चौथा हाथी दरवाजा, पाँचवा सिपाही दरवाजा, छटा फाटक दरवाजा और सातवा कुलाबकर दरवाजा. इस मार्ग से किले पर पहुंचने के लिए देढ घंटा लगता है। कैसे जाना होगा? मुंबई से मालशेज मार्ग जुन्नर में जाने के लिए माळशेज घाटी पार करने पर ८ से ९ किलोमीटर पर शिवनेरी १९ कि.मी.एेसा एक फलक रास्ते के एक ओर लगा दिखाई देता है। ये मार्ग गणेश खिंडी से शिवनेरी किले तक जाता है। इस मार्गा से किले पर पहुंचने के लिए मुंबई से एक दिन लगता है।

चित्रदालन

चित्रदीर्घा[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Gunaji, Milind (2003). Offbeat tracks in Maharashtra. Popular Prakashan. पृ॰ 69. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8171546692. अभिगमन तिथि March 13, 2010.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]