मंजुल भार्गव

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मंजुल भार्गव (अगस्त ८, १९७४) एक भारतीय मूल के गणितज्ञ हैं।[1] इन्हें २०१४ में प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कार फील्ड्स मेडल से नवाजा गया है।[2][3]

परिचय[संपादित करें]

1974 में कनाडा में जन्में भार्गव अमेरिका में पले बढ़े और भारत में भी समय गुजारा है। उन्होंने 2001 में प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और वहीं 2003 में प्रोफेसर बने।

मंजुल भार्गव अमेरिका की प्रिंसटन विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर है। अगस्त २०१४ में सियोल में आयोजित इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ मैथेमेटिक्स में इंटरनेशनल मैथमेटिकल यूनियन (आईएमयू) ने मंजुल भार्गव को मैथमैटिक्स का नोबेल पुरस्कार कहा जाने वाला 'फील्ड्स मेडल' से नवजा हैं। मंजुल को यह पुरस्कार ज्यॉमेट्री में नए तरीके विकसित करने के लिए दिया गया। उनके खाते में संस्कृत की मदद से 200 साल पुराने नंबर थिअरी लॉ को आसान करने की उपलब्धि भी है।[4]

क्वांटा मैगजीन को दिए इंटरव्यू में मंजुल ने बताया, 'उनके दादा राजस्थान में संस्कृत के प्रोफेसर थे। उनके पास मैंने ६२८ ई.पू. के भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त की संस्कृत में लिखी पांडुलिपि देखी थी, जिसमें जर्मनी के मैथमैटिशन कार्ल फ्रेडरिच गॉस के जटिल नंबर थ्योरी लॉ जैसा सिद्धांत साधारण तरीके से समझाया गया था।'

इस लॉ के मुताबिक, दो परफेक्ट स्क्वेयर्स के जोड़ से प्राप्त दो नंबर्स को आपस में गुणा किया जाए, तो नतीजा भी दो परफेक्ट स्क्वेयर्स के जोड़ जितना होगा। भार्गव ने ब्रह्मगुप्त के संस्कृत में लिखे सिद्धांत को फेमस रयूबिक क्यूब पर लागू किया और 18वीं सदी के गॉस के लॉ को ज्यादा आसान तरीके से समझाने में कामयाबी हासिल की।

मंजुल ने संस्कृत की कविताओं के रिदम में गणित ढूंढ निकाला। संस्कृत के अक्षरों के क्रम में भी उन्होंने गणित की संरचना बताई है। वह यूनिवर्सिटी में अपने स्टूडेंट्स को समझाने के लिए भी संस्कृत कविताओं और मैथ्स की समानता के उदाहरण पेश करते हैं। मंजुल ने उस्ताद जाकिर हुसैन से तबला बजाना भी सीखा है।[5]

पुरस्कार एवं सम्मान[संपादित करें]

भार्गव को अब तक मिले अवार्ड्स में मैथेमेटिकल एसोसिएशन ऑफ अमेरिका से मर्टेन हासे पुरस्कार (२००३), शस्त्र रामानुजन पुरस्कार (२००५), नंबर थ्योरी में अमेरिकन मैथेमेटिकल सोसाइटी से कोल पुरस्कार (२००८) इन्फोसिस पुरस्कार (२०१२) और फ़ील्ड्स मैडल (२०१४) शामिल हैं। वो २०१३ में अमेरिकी नेशनल एकेडमी के लिए भी चुने गए।

सन्दर्भ[संपादित करें]