बौधायन का शुल्बसूत्र

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

शुल्बसूत्रों में बौधायन का शुल्बसूत्र सबसे प्राचीन माना जाता है। इन शुल्बसूत्रों का रचना समय १२०० से ८०० ईसा पूर्व माना गया है।

अपने एक सूत्र में बौधायन ने विकर्ण के वर्ग का नियम दिया है-

दीर्घस्याक्षणया रज्जुः पार्श्वमानी तिर्यकं मानी च।
यत्पृथग्भूते कुरुतस्तदुभयांकरोति ॥

एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता है जितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं। - यही तो पाइथागोरस का प्रमेय है। स्पष्ट है कि इस प्रमेय की जानकारी भारतीय गणितज्ञों को पाइथागोरस के पहले से थी। वस्तुतः इस प्रमेय को बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय कहा जाना चाहिए।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]