टी ए सरस्वती अम्मा

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टी ए सरस्वती अम्मा (1918–2000) भारत के केरल राज्य में जन्मी गणितज्ञ थीं। उन्होने भारत के प्राचीन एवं मध्यकालीन ज्यामिति पर विशेष कार्य किया।

टेक्कथाअमायन्कोथकलाम सरस्वती अम्मा ने मद्रास विश्वविद्यालय में वीराघवन के साथ काम किया और फिर रांची और धनबाद में शिक्षण किया। उनके शोध के आधार पर ही प्राचीन और मध्यकालीन भारत में ज्यामिति (1979) पर पहला प्रामाणिक और व्यापक अध्ययन प्रकाशित हुआ[1]। उन्होंने राधाचरण गुप्त के ‘प्राचीन और मध्यकालीन भारत में त्रिकोणमिति’ नामक शोध प्रबंध का पर्यवेक्षण भी किया।[2]

प्रमुख प्रकाशन[संपादित करें]

केरल गणितीय संघ ने 2002 में अपने वार्षिक सम्मेलन में प्रोफेसर टी ए सरस्वती अम्मा मेमोरियल नामक एक नियमित व्याख्यान शुरू किया। मिचियो यानो के शब्दों मे ,सरस्वती अम्मा की पुस्तक 'प्राचीन और मध्ययुगीन भारत में ज्यामिति' ने "भारतीय ज्यामिति के अध्ययन के लिए एक दृढ़ नींव स्थापित की।"

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पुस्तक[संपादित करें]

शोधपत्र[संपादित करें]

  • T.A. Sarasvati Amma (1958–1959). "Sredi-kshetras Or Diagrammatic representations of mathematical series". Journal of Oriental Research 28: 74–85. 
  • T.A. Sarasvati Amma (1961). "The Cyclic Quadrilateral in Indian Mathematics". Proceedings of the All-India Oriental Conference 21: 295–310. 
  • T.A. Sarasvati Amma (1961–1962). "The Mathematics of the First Four Mahadhikaras of Trilokaprajnapati". Journal of Ganganath Jha Research Institute 18: 27–51. 
  • T.A. sarasvati Amma (1962). "Mahavira's Treatment of Series". Journal of Ranchi University I: 39–50. 
  • T.A. Sarasvati Amma (1969). "Development of Mathematical Ideas in India". Indian Journal of History of Science 4: 59–78. 

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कडियाँ[संपादित करें]