मेरु प्रस्तार

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मेरु प्रस्तार की छः पंक्तियां

मेरु प्रस्तार का सबसे पहला वर्णन पिङ्गल के छन्दशास्त्र में है। जनश्रुति के अनुसार पिङ्गल पाणिनि के अनुज थे। इनका काल ४०० ईपू से २०० ईपू अनुमानित है। छन्दों के विभेद को वर्णित करने वाला 'मेरुप्रस्तार' (मेरु पर्वत की सीढ़ी) पास्कल (Blaise Pascal 1623-1662) के त्रिभुज से तुलनीय बनता है।

व्याख्या[संपादित करें]

पास्कल त्रिकोण की निर्माण विधि

'मेरु प्रस्तार' या 'पास्कल त्रिकोण' बनाने की विधि सामने के एनिमेशन से स्पष्ट हो जायेगी।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]