अफ़ग़ानिस्तान

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अफ़्ग़ानिस्तान इस्लामिक गणराज्य
جمهوری اسلامی افغانستان
(फ़ारसी: जोम्हूरी-ये इस्लामी-ये अफ़्ग़ानिस्तान)

د افغانستان اسلامي جمهوریت
(पश्तो: द अफ़्ग़ानिस्तान इस्लामि जम्हूरियत)
अफ़्ग़ानिस्तान का ध्वज अफ़्ग़ानिस्तान का कुल चिन्ह
ध्वज कुल चिन्ह
राष्ट्रगान: अफ़्गानिस्तान का राष्ट्रगान
अफ़्ग़ानिस्तान की स्थिति
राजधानी
(और सबसे बड़ा शहर)
काबुल
34°31′ N 69°08′ E
राजभाषा(एँ) पश्तो, फारसी
सरकार इस्लामिक गणराज्य
 - राष्ट्रपति हामिद करजाई
 - उप राष्ट्रपति अहमद जिया मसूद
 - उप राष्ट्रपति करीम खलीली
 - मुख्य न्यायाधीश अब्दुल सलाम अजीमी
स्थापना  
 - पहला अफगानी राज्य अक्टूबर १७४७ 
 - यूनाईटेड किंगडम से स्वतंत्रता १९ अगस्त, १९१९ 
क्षेत्रफल
 - कुल ६४७,५०० वर्ग किमी (४१ वां)
२५१,७७२ वर्ग मील
 - जल(%)
जनसंख्या
 - २००८ अनुमान ३२,७३८,३७६ (३७ वां)
 - १९७९ जनगणना १३,०५१,३५८
 - जन घनत्व ४६/वर्ग किमी (१५० वां)
११९/वर्ग मील
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (पीपीपी) २००८ अनुमान
 - कुल $२१.३४० बिलियन (९६ वां)
 - प्रति व्यक्ति $७५८ (१७२ वां)
मानव विकास सूचकांक  (२००७) ०.३४५ ({{{HDI_ref}}}) (१७४)
मुद्रा अफगानी (AFN)
समय मंडल D† (यूटीसी +४:३०)
इंटरनेट टीएलडी .af
दूरभाष कोड +९३

अफ़्ग़ानिस्तान इस्लामिक गणराज्य दक्षिणी मध्य एशिया में अवस्थित देश है, जो चारो ओर से जमीन से घिरा हुआ है । प्रायः इसकी गिनती मध्य एशिया के देशों में होती है पर देश में लगातार चल रहे संघर्षों ने इसे कभी मध्य पूर्व तो कभी दक्षिण एशिया से जोड़ दिया है। इसके पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर पूर्व में भारत तथा चीन, उत्तर में ताजिकिस्तान, कज़ाकस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान है।

अफगानिस्तान रेशम मार्ग और मानव प्रवास का एक प्राचीन केन्द्र बिन्दु रहा है। पुरातत्वविदों को मध्य पाषाण काल ​​के मानव बस्ती के साक्ष्य मिले हैं। इस क्षेत्र में नगरीय सभ्यता की शुरुआत 3000 से 2,000 ई.पू. के रूप में मानी जा सकती है। यह क्षेत्र एक ऐसे भू-रणनीतिक स्थान पर अवस्थित है जो मध्य एशिया और पश्चिम एशिया को भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति से जोड़ता है। इस भूमि पर कुषाण, हफ्थलिट, समानी, ग़ज़नवी, गोरी, मुगल, दुर्रानी और अनेक दूसरे प्रमुख साम्राज्यों का उत्थान हुआ है। प्राचीन काल में फ़ारस तथा शक साम्राज्यों का अंग रहा अफ़्ग़ानिस्तान कई सम्राटों, आक्रमणकारियों तथा विजेताओं की कर्मभूमि रहा है । इनमें सिकन्दर,फारसी शासक दारा प्रथम, तुर्क,मुगल शासक बाबर, मुहम्मद गौरी, नादिर शाह इत्यादि के नाम प्रमुख हैं। ब्रिटिश सेनाओं ने भी कई बार अफ्गानिस्तान पर आक्रमण किया । वर्तमान में अमेरिका द्वारा तालेबान पर आक्रमण किये जाने के बाद नाटो(NATO) की सेनाएं वहां बनी हुई हैं।

अफ़्ग़ानिस्तान के प्रमुख नगर हैं - राजधानी काबुल, कंधार । यहाँ कई नस्ल के लोग रहते हैं जिनमें पश्तून (पठान या अफ़ग़ान) सबसे अधिक हैं। इसके अलावा उज्बेक, ताजिक, तुर्कमेन और हज़ारा शामिल हैं । यहाँ की मुख्य भाषा पश्तो है। फ़ारसी भाषा के अफ़गान रूप को दरी कहते हैं।

नाम[संपादित करें]

अफ़्ग़ानिस्तान का नाम अफ़ग़ान और स्तान से मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है अफ़गानों की भूमि। स्तान इस क्षेत्र के कई देशों के नाम में है जैसे - पाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कज़ाख़स्तान, हिन्दुस्तान इत्यादि जिसका अर्थ है भूमि या देश। अफ़्गान का अर्थ यहां के सबसे अधिक वसित नस्ल (पश्तून) को कहते है। अफ़्गान शब्द को संस्कृत अवगान से निकला हुआ माना जाता है। ध्यान रहे के "अफ़्ग़ान" शब्द में ग़ की ध्वनी है और "ग" की नहीं।

इतिहास[संपादित करें]

Afghanistan map Hindi.png

मानव बसाहट १०,००० साल से भी अधिक पुराना हो सकता है। ईसा के १८०० साल पहले आर्यों का आगमन इस क्षेत्र में हुआ। ईसा के ७०० साल पहले इसके उत्तरी क्षेत्र मे गांधार महाजनपद था जिसके बारे में भारतीय स्रोत महाभारत तथा अन्य ग्रंथों में वर्णन मिलता है। ईसापूर्व ५०० में फ़ारस के हखामनी शासकों ने इसको जीत लिया। सिकन्दर के फारस विजय अभियान के तहते अफ़गानिस्तान भी यूनानी साम्राज्य का अंग बन गया। इसके बाद यह शकों के शासन में आए। शक स्कीथियों के भारतीय अंग थे। ईसापूर्व २३० में मौर्य शासन के तहत अफ़गानिस्तान का संपूर्ण इलाका आ चुका था पर मौर्यों का शासन अधिक दिनों तक नहीं रहा। इसके बाद पार्थियन और फ़िर सासानी शासकों ने फ़ारस में केन्द्रित अपने साम्राज्यों का हिस्सा इसे बना लिया। सासनी वंश इस्लाम के आगमन से पूर्व का आखिरी ईरानी वंश था। अरबों ने ख़ुरासान पर सन् ७०७ में अधिकार कर लिया। सामानी वंश, जो फ़ारसी मूल के पर सुन्नी थे, ने ९८७ इस्वी में अपना शासन गजनवियों को खो दिया जिसके फलस्वरूप लगभग संपूर्ण अफ़ग़ानिस्तान ग़ज़नवियों के हाथों आ गया। ग़ोर के शासकों ने गज़नी पर ११८३ में अधिकार कर लिया।

मध्यकाल में कई अफ़्गान शासकों ने दिल्ली की सत्ता पर अधिकार किया या करने का प्रयत्न किया जिनमें लोदी वंश का नाम प्रमुख है। इसके अलावा भी कई मुस्लिम आक्रमणकारियों ने अफगान शाहों की मदद से हिन्दुस्तान पर आक्रमण किया था जिसमें बाबर, नादिर शाह तथा अहमद शाह अब्दाली शामिल है। अफ़गानिस्तान के कुछ क्षेत्र दिल्ली सल्तनत के अंग थे।

आधुनिक काल[संपादित करें]

उन्नीसवीं सदी में आंग्ल-अफ़ग़ान युद्धों के कारण अफ़ग़ानिस्तान का काफी हिस्सा ब्रिटिश इंडिया के अधीन हो गया जिसके बाद अफ़ग़ानिस्तान में यूरोपीय प्रभाव बढ़ता गया। १९१९ में अफ़ग़ानिस्तान ने विदेशी ताकतों से एक बार फिर स्वतंत्रता पाई। आधुनिक काल में १९३३-१९७३ के बाच का काल अफ़ग़ानिस्तान का सबसे अधिक व्यवस्थित काल रहा जब ज़ाहिर शाह का शासन था। पर पहले उसके जीजा तथा बाद में कम्युनिस्ट पार्टी के सत्तापलट के कारण देश में फिर से अस्थिरता आ गई। सोवियत सेना ने कम्युनिस्ट पार्टी के सहयोग के लिए देश में कदम रखा और मुजाहिदीन ने सोवियत सेनाओं के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और बाद में अमेरिका तथा पाकिस्तान के सहयोग से सोवियतों को वापस जाना पड़ा। ११ सितम्बर २००१ के हमले में मुजाहिदीन के सहयोग होने की खबर के बाद अमेरिका ने देश के अधिकांश हिस्से पर सत्तारुढ़ मुजाहिदीन (तालिबान), जिसको कभी अमेरिका ने सोवियत सेनाओं के खिलाफ लड़ने में हथियारों से सहयोग दिया था, के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।

वर्तमान[संपादित करें]

वर्तमान में (फरवरी २००७) देश में नाटो(NATO) की सेनाएं बनी हैं और देश में लोकतांत्रिक सरकार का शासन है। हालांकि तालिबान ने फिर से कुछ क्षेत्रों पर अधिपत्य जमा लिया है, अमेरिका का कहना है कि तालिबान को पाकिस्तानी जमीन पर फलने-फूलने दिया जा रहा है।

प्रशासनिक विभाग[संपादित करें]

अफ़्गानिस्तान में कुल ३४ प्रशासनिक विभाग हैं । इनके नाम हैं -

  1. बदख़्शान
  2. बदगीश
  3. बाग़लान
  4. बाल्क़
  5. बमयन
  6. दायकुंडी
  7. फ़राह
  8. फ़रयब
  9. ग़ज़नी
  10. ग़ोर
  11. हेलमंद
  12. हेरात
  13. ज़ोजान
  14. क़ाबुल
  15. कांदहार (कांधार)
  16. क़पिसा
  17. ख़ोस्त
  18. कोनार
  19. कुन्दूज
  20. लगमान
  21. लोगर
  22. नांगरहर
  23. निमरूज़
  24. नूरेस्तान
  25. ओरुज़्ग़ान
  26. पक़्तिया
  27. पक़्तिका
  28. पंजशिर
  29. परवान
  30. समंगान
  31. सरे पोल
  32. तक़ार
  33. वारदाक़
  34. ज़बोल

भूगोल[संपादित करें]

अफ़गानिस्तान का उत्थान स्वरूप

अफ़्गानिस्तान चारों ओर से ज़मीन से घिरा हुआ है और इसकी सबसे बड़ी सीमा पूर्व की ओर पाकिस्तान से लगी है। इसे डूरण्ड रेखा भी कहते हैं। केन्द्रीय तथा उत्तरपूर्व की दिशा में पर्वतमालाएँ हैं जो उत्तरपूर्व में ताजिकिस्ताऩ स्थित हिन्दूकुश पर्वतों का विस्तार हैं। अक्सर तापमान का दैनिक अन्तरण अधिक होता है।

यह भी देखिए[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]