पाषाण युग

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दक्षिण एशिया तथा भारत का इतिहास
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पाषाण युग ७०,०००–३३०० ई.पू.
मेहरगढ़ संस्कृति • ७०००–३३०० ईपू
सिन्धु घाटी सभ्यता ३३००–१७०० ईपू
हड़प्पा संस्कृति १७००–१३०० ईपू
वैदिक काल १५००–५०० ईपू
लौह युग १२००–३०० ईपू
महाजनपद • ७००–३०० ईपू
मगध साम्राज्य • ५४५–३२० ईपू
मौर्य साम्राज्य • ३२१–१८४ ईपू
मध्यकालीन राज्य २३० ईपू– १२७९
सातवाहन साम्राज्य • २३० ईपू – १९९
कुषाण साम्राज्य • ६० – २४०
गुप्त साम्राज्य •२८०–५५०
गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य •६५०–१०२७
पाल साम्राज्य • ७५०–११७४
चौल साम्राज्य • २५० ईपू–१०७०
इस्लामी सल्तनतें १२०६–१५९६
दिल्ली सल्तनत • १२०६–१५२६
दक्कन सल्तनत • १४९०–१५९६
होयसल साम्राज्य १०४०–१३४६
ककातिया साम्राज्य १०८३–१३२३
विजयनगर साम्राज्य १३३६–१५६५
मुगल साम्राज्य १५२६–१८५७
मराठा साम्राज्य १६७४–१८१८
सिख राज्यसंघ १७१६–१८४९
अंग्रेजी शासन १८५८–१९४७
भारत का विभाजन १९४७ के पश्चात
देशों का इतिहास
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मालदीवनेपालपाकिस्तानश्रीलंका
क्षेत्रीय इतिहास
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विशेष इतिहास
सिक्के• राजवंशअर्थशास्त्रइंडोलॉजी
भाषाएँसाहित्यसेना
विज्ञान एवं तकनीकसमयचक्र
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पाषाण युग इतिहास का वह काल है जब मानव का जीवन पत्थरों (संस्कृत - पाषाणः) पर अत्यधिक आश्रित था । उदाहरनार्थ पत्थरों से शिकार करना, पत्थरों की गुफाओं में शरण लेना, पत्थरों से आग पैदा करना इत्यादि। इसके तीन चरण माने जाते हैं; पुरापाषाण काल, मध्यपाषाण काल एवं नवपाषाण काल जो मानव इतिहास के आरम्भ (२५ लाख साल पूर्व) से लेकर काँस्य युग तक फ़ैला हुआ है।

भीमबेटका स्थित पाषाण कालीन शैल चित्र

अनुक्रम

पुरापाषाण काल (Paleolithic Era)[संपादित करें]

२५-२० लाख साल से १२,००० साल पूर्व तक

भारत मे इसके अवशेष सोहन, बेलन तथा नर्मदा नदी घाटी मे प्राप्त हुए है।

भोपल के पास स्थित भीमबेटका नामक चित्रित गुफाए, शैलाश्रय तथा अनेक कलाकृतिया प्राप्त हुई है।

विशिष्ट उपकरण - हैण्ड-ऐक्स, क्लीवर और स्क्रेपर आदि।

मध्यपाषाण काल (Mesolithic Era)[संपादित करें]

१२,००० साल से लेकर १०,००० साल पूर्व तक। इस युग को माइक्रोलिथ (Microlith) अथवा लधुपाषाण युग भी कहा जाता है।

नवपाषाण काल (Neolithic Era)[संपादित करें]

१०,००० साल से ३३०० ई.पू. तक

पाषाण युग और उसके बाद का मानव जीवन संक्षेप मे[संपादित करें]

युग काल औजार अर्थव्यवस्था शरण स्थल समाज धर्म
पाषाण युग पुरापाषाण काल हाथ से बने अथवा प्राकृतिक वस्तुओ का हथियार/औजार के रूप मे उपयोग--- भाला, कुल्हाड़ी, धनुष, तीर, सुई, गदा शिकार एवं खाद्य संग्रह अस्थाई जीवन शैली - गुफ़ा , अस्थाई झोपड़ीयां मुख्यता नदी एवं झील के किनारे २५-१०० लोगो का समुह (अधिकांशतः एक ही परिवार के सदस्य) मध्य पुरापाषाण काल के आसपास मृत्यु पश्चात जीवन मे विश्वास के साक्ष्य कब्र एवं अन्तिम संस्कार के रूप मे मिलते है।
मध्यपाषाण काल (known as the Epipalaeolithic in areas not affected by the Ice Age (such as Africa)) हाथ से बने अथवा प्राकृतिक वस्तुओ का हथियार/औजार के रूप मे उपयोग- धनुष, तीर, मछली के शीकार एवं भंडारण के औजार, नौका कबिले एवं परिवार समुह
नवपाषाण काल हाथ से बने अथवा प्राकृतिक वस्तुओ का हथियार/औजार के रूप मे उपयोग --- चिसल (लकड़ी एवं पत्थर छिलने के लिये ), खेती मे प्रयुक्त होने वाले औजार, मिट्टी के बरतन, हथियार खेती, शिकार एवं खाद्य संग्रह, मछली का शिकार और पशुपालन खेतो के आस पास बसी छोटी बस्तीयों से लेकर काँस्य युग के नगरों तक कबीले से लेकर काँस्य युग के राज्यो तक
काँस्य युग तांबे एवं काँस्य के औजार, मिट्टी के बरतन बनाने का चाक खेती, पशुपालन, हस्तकला एवं व्यपार
लौह युग लोहे के औजार