पठान

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चित्र:Pashto-speaking regions.png
अफ़्ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के नक़्शे में पश्तून क्षेत्र (लाल))
अफ़्ग़ानिस्तान के ख़ोस्त प्रान्त में पश्तून बच्चे
अमीर शेर अली ख़ान अपने पुत्र राजकुमार अब्दुल्लाह जान और सरदारों के साथ (सन् १८६९ ई में खींची गई)

पश्तून, पख़्तून (पश्तो: پښتانه, पश्ताना) या पठान (उर्दू:پٹھان) दक्षिण एशिया में बसने वाली एक लोक-जाति है। वे मुख्य रूप में अफ़्ग़ानिस्तान में हिन्दु कुश पर्वतों और पाकिस्तान में सिन्धु नदी के दरमियानी क्षेत्र में रहते हैं हालांकि पश्तून समुदाय अफ़्ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के अन्य क्षेत्रों में भी रहते हैं। पश्तूनों की पहचान में पश्तो भाषा, पश्तूनवाली मर्यादा का पालन और किसी ज्ञात पश्तून क़बीले की सदस्यता शामिल हैं।[1][2]

पठान जाति की जड़े कहाँ थी इस बात का इतिहासकारों को ज्ञान नहीं लेकिन संस्कृत और यूनानी स्रोतों के अनुसार उनके वर्तमान इलाक़ों में कभी पक्ता नामक जाति रहा करती थी जो संभवतः पठानों के पूर्वज रहें हों। सन् १९७९ के बाद अफ़्ग़ानिस्तान में असुरक्षा के कारण जनगणना नहीं हो पाई है लेकिन ऍथनोलॉग के अनुसार पश्तून की जनसँख्या ५ करोड़ के आसपास अनुमानित की गई है। पश्तून क़बीलों और ख़ानदानों का भी शुमार करने की कोशिश की गई है और अनुमान लगाया जाता है कि विश्व में लगभग ३५० से ४०० पठान क़बीले और उपक़बीले हैं। पश्तून जाति अफ़्ग़ानिस्तान का सबसे बड़ा समुदाय है।

विवरण[संपादित करें]

पश्तून इतिहास ५ हज़ार साल से भी पुराना है और यह अलिखित तरिके से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा है। पख़्तून लोक-मान्यता के अनुसार यह जाती 'बनी इस्राएल' यानी यहूदी वंश की है। इस कथा के अनुसार पश्चिमी एशिया में असीरियन साम्राज्य के समय पर लगभग २,८०० साल पहले बनी इस्राएल के दस कबीलों को देश निकाला दे दिया गया था और यही कबीले पख़्तून हैं। ॠग्वेद के चौथे खंड के ४४वे श्लोक में भी पख़्तूनों का वर्णन 'पक्त्याकय' नाम से मिलता है। इसी तरह तीसरे खंड का ९१वाँ श्लोक आफ़रीदी क़बीले का ज़िक्र 'आपर्यतय' के नाम से करता है।

बनी इस्राएल होने के बारे में लिखाईयाँ[संपादित करें]

पख़्तूनों के बनी इस्राएल होने की बात सोलहवीं सदी ईसवी में जहांगीर के काल में लिखी गयी किताब “मगज़ाने अफ़ग़ानी” में भी मिलती है। अंग्रेज़ लेखक अलेक्ज़ेंडर बर्न ने अपनी बुख़ारा की यात्राओं के बारे में सन् १८३५ में भी पख़्तूनों द्वारा ख़ुद को बनी इस्राएल मानने के बारे में लिखा है। हालांकि पख़्तून ख़ुद को बनी इस्राएल तो कहते हैं लेकिन धार्मिक रूप से वह मुसलमान हैं, यहूदी नहीं। अलेक्ज़ेंडर बर्न ने ही पुनः १८३७ में लिखा कि जब उसने उस समय के अफ़ग़ान राजा दोस्त मोहम्मद से इसके बारे में पूछा तो उसका जवाब था कि उसकी प्रजा बनी इस्राएल है इसमें संदेह नहीं लेकिन इसमें भी संदेह नहीं कि वे लोग मुसलमान हैं एवं आधुनिक यहूदियों का समर्थन नहीं करेंगे। विलियम मूरक्राफ़्ट ने भी १८१९ व १८२५ के बीच भारत, पंजाब और अफ़्ग़ानिस्तान समेत कई देशों के यात्रा-वर्णन में लिखा कि पख़्तूनों का रंग, नाक-नक़्श, शरीर आदि सभी यहूदियों जैसा है। जे बी फ्रेज़र ने अपनी १८३४ की 'फ़ारस और अफ़्ग़ानिस्तान का ऐतिहासिक और वर्णनकारी वृत्तान्त' नामक किताब में कहा कि पख़्तून ख़ुद को बनी इस्राएल मानते हैं और इस्लाम अपनाने से पहले भी उन्होंने अपनी धार्मिक शुद्धता को बरकरार रखा था।[3] जोसेफ़ फ़िएरे फ़ेरिएर ने १८५८ में अपनी अफ़ग़ान इतिहास के बारे में लिखी किताब में कहा कि वह पख़्तूनों को बेनी इस्राएल मानने पर उस समय मजबूर हो गया जब उसे यह जानकारी मिली कि नादिरशाह भारत-विजय से पहले जब पेशावर से गुज़रा तो यूसुफ़ज़ाई कबीले के प्रधान ने उसे इब्रानी भाषा (हीब्रू) में लिखी हुई बाइबिल व प्राचीन उपासना में उपयोग किये जाने वाले कई लेख साथ भेंट किये। इन्हें उसके ख़ेमे मे मौजूद यहूदियों ने तुरंत पहचान लिया।

मनिहार[संपादित करें]

पठानो क़ी एक़ नस्ल मनिहार क़े नाम से जानी जाती है जो चूड़ियॉ व बिसातख़ाने क़ा सामान बेचने अफग़ानिस्तान से भारत जाया क़रते थे धीरे-धीरे ये वही बस ग़ये मुग़ल क़ाल मे ये तोपख़ाने मे भर्ती क़िये ग़ये इनक़ी वीरता से ख़ुश होक़र बादशाहो ने इन्हे जमीदार तालुक़ेदार बनाया ये अपने नाम क़े आग़े मिर्जा बेग़ सिद्दीक़ी शेख़ आदि लग़ाते है।

पश्तून क़बीले[संपादित करें]

पश्तून लोक-मान्यताओं के अनुसार सारे पश्तून चार गुटों में विभाजित हैं: सरबानी (سربانی, Sarbani), बैतानी (بتانی, Baitani), ग़रग़श्ती (غرغوشتی, Gharghashti) और करलानी (کرلانی, Karlani)। मौखिक परंपरा के अनुसार यह क़ैस अब्दुल रशीद जो समस्त पख्तूनो के मूल पिता माने जाते हैं उनके चार बेटों के नाम से यह चार क़बीले बने थे। इन गुटों में बहुत से क़बीले और उपक़बीले आते हैं और माना जाता है कि कुल मिलाकर पश्तूनों के ३५० से ४०० क़बीले हैं।[4][5] पख्तून क़बीले कई स्तरो पर विभाजित रहते हैं। त्ताहर (क़बीला) कई ख़ेल अरज़ोई या ज़ाई से मिल कर बना होता है। ख़ेल कई प्लारीनाओं से मिल कर बना होता है। प्लारीना कई परिवारों से मिल कर बना होता है, जिन्हें कहोल कहा जाता है। एक बड़े क़बीले में अक्सर कई दर्जन उप क़बीले होते हैं वे ख़ुद को एक दूसरे से जुड़ा हुआ मानते हैं। अपने परिवार के वंश व्रक्ष में उनसे संबन्ध बताते हैं यह इस उपक़बीले से सहयोग, प्रतिस्पर्धा, अथवा टकराव पर निर्भर करता है। पख्तू क़बीलाई व्यवस्था में काहोल सबसे छोटी इकाई होती है। इसमें १- ज़मन (बेटे) २- ईमासी (पोते) ३- ख़्वासी (पर पोते) ४- ख़्वादी (पर-पर पोते) होते हैं। तीसरी पीढी का जन्म होते ही परिवार को कोहल का दर्जा मिल जाता है। मुख्य पख़्तून क़बीले इस प्रकार हैं:

  • सर्बानी क़बीले :-

1. Sheranai शेर्नाई 2. Jalwaanai जलानाई 3. Barais (Barech) बरेछ 4. Baayer बायार 5. Oormar ऊरमर 6. Tareen (Tarin) तारीन (उप क़बीले तोर तारीन, स्पीन, राईज़ानी व खेत्रानी यह क़बीले ब्रह्यी व बलूची ज़बान बोलते हैं पश्तु नहीं) [Subtribes: Tor Tarin, Spin Tarin] { Raisani & Khetran are also Tarin. Currently these Tribes are speaking Brahvi & Balochi respectively } 7. Gharshin ग़रशीन 8. Lawaanai लावानाई 9. Popalzai पोपलज़ाई 10. Baamizai बामीज़ाई 11. Sadozai सदोज़ाई 12. Alikozai आलीकोज़ाई 13. Barakzai बरकज़ाई 14. Mohammad zai (Zeerak) ज़ीराकी 15. Achakzai (Assakzai) अज़्ज़ाक्ज़ाई 16. Noorzai नूरज़ाई 17. Alizai अलीज़ाई 18. Saakzai साकज़ाई 19. Maako माकू 20. Khoogyanai खूग्ज़ाई 21. Yousufzai युसुफ़ज़ाई 22. Atmaanzai (Utmanzai) आत्मानज़ाई 23. Raanizai रानीज़ाई 24. Mandan मून्दन 25. Tarklaanai तर्क़्लानाई 26. Khalil ख़लील 27. Babar बाबर 28. Daudzai दाऊदज़ाई 29. Zamaryanai ज़मर्यन्ज़ाई 30. Zeranai ज़ेरानाई 31. Mohmand मोहम्मद 32. Kheshgai (Khaishagi) ख़ैशगी 33. Mohammad Zai (Zamand) मोहम्मेद्ज़ाई 34. Kaasi कासी 35. Shinwarai शिन्वाराई 36. Gagyanai ग़यनाई 37. Salarzaiसलार्ज़ाई 38. Malgoorai मल्गुराई

  • ग़र्ग़श्त क़बीले :-

3- Babai बाबई 4- Mandokhail मन्दूखैल 5- Kakar काकर 6- Nagharनग़र 7- Panee (Panri) पानी (खज्जाक लूनी मर्ग़ज़ानी देहपाल बरोज़ाई मज़ारी आदि।Khajjak, Luni, Marghazani, Dehpal, Barozai, Mzari etc.) 8- Dawi दावी 9- Hamar हमार 10- Doomar (Dumarr) धूमर 11- Khondai खुन्दाई 12- Gadoon (Jadun) गरुम जादोन 13- Masakhel (Musakhail) मसखैल 14- Sapai or Safai (Safi) सपाई 15- Mashwanai मशwअनाई 16- Zmarai (Mzarai) Zअमाराई 17- Shalman शलमोन 18- Eisoot (Isot) ईसोत

  • ख़रलानी क़बीले :-

1. Mangal मंगल 2. Kakai काकई 3. Torai (Turi) तोराई 4. Hanee हनी 5. Wardak (Verdag) वर्दक 6. Aurakzai (Orakzai) औराक्ज़ाई 7. Apridee or Afridi आफ़्रीदी 8. Khattak खत्ताक 9. Sheetak शीताक 10. Bolaaq बलाक़ 11. Zadran (Jadran) ज़रदान 12. Wazir वज़ीर 13. Masid (Mahsood) मसीद 14. Daur (Dawar) दावर 15. Sataryanai सत्यानाई 16. Gaaraiग राई 17. Bangash बंगश 18. Banosee (Banuchi) बनुची 19. Zazai (Jaji) ज़ज़ाई 20. Gorbuz ग़र्बूज़ 21. Tanai (Tani) तनाई 22. Khostwaa ख़ोस्तवा l 23. Atmaankhel (Utmankhail) उत्मानखैल 24. Samkanai (Chamkani) समकानाई 25. Muqbal मुकबल 26. मनिहार्

  • बैतानी क़बीले :-

1. Sahaak सहाक 2. Tarakai तराकज़ाई 3. Tookhi तूख़ी 4. Andar अन्धर 5. SuleimanKhail (Slaimaankhel) सुलैमानखैल 6. Hotak होतक 7. Akakhail अकखैल 8. Nasar नासर 9. Kharotai ख़रोताई 10. Bakhtiar बख़्तियार 11. Marwat मार्वात 12. Ahmadzai अहमदज़ाई 13. Tarai तराई 14. Dotanai दोतानी (Dotani) 15. Taran तारन 16. Lodhi लोधी 17. Niazai नाईज़ाई 18. Soor सूर 19. Sarwanai सर्वानाई 20. Gandapur गन्धापुरी 21. Daulat Khail दौलत खेल 22. Kundi Ali Khail कुन्धी अली खैल 23. Dasoo Khail दासू खैल 24. Jaafar जाफ़र 25. Ostranai (Ustarana) ओस्त्रानाई 26. Loohanai लूहानाई 27. Miankhail मैनखैल 28. Betani (Baitanee) भैतानी 29. Khasoor ख़सूर

यह सभी क़बीले भी कई कई त्ताबरों, कैलों, प्लारीनाओं, व काहूलों में बंटे हुए हैं। यही क़बीलाई संरचना भारत के पठानों द्वारा भी अपनाई जा रही है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Pathan Borderland, James William Spain, Mouton, ... The most familiar name in the west is Pathan, a Hindi term adopted by the British, which is usally applied only to the people living east of the Durand ...
  2. Afghanistan: Glossary, British Library, ... Comes to mean 'Pathans' residing in Pakistan and Afghanistan. Divided into two main groups, the Abdalis (qv) and the Ghilzais (qv) ...
  3. An historical and descriptive account of Persia ... including a description of Afghanistan and Beloochistan, James Baillie Fraser, Oliver a. Boyd, 1834, ... According to their own traditions they believe themselves descended from the Jews ...
  4. A Historical Atlas of Afghanistan, Amy Romano, The Rosen Publishing Group, 2003, ISBN 978-0-8239-3863-6
  5. Profiles of Pakistan's Seven Tribal Agencies, Syed Saleem Shahzad