ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा
| ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा | |
| राजधानी • निर्देशांक |
पेशावर • |
| जनसंख्या (2008) • घनत्व |
20,215,000 (अनुमान) • 259.6/km² |
| क्षेत्रफल |
74,521 km² |
| समय मंडल | PST (UTC+5) |
| प्रमुख भाषा(एं) | उर्दु (राष्ट्रीय) अंग्रेज़ी (आधिकारिक)[1] पश्तो हिन्दको खोवार पंजाबी फारसी |
| दर्जा | सूबा |
| • जिले | • 24 |
| • शहर | • |
| • संघीय परिषद | • 986 |
| स्थापना • राज्यपाल/आयुक्त • मुख्य मंत्री • विधायक (सीटें) |
१ जुलाई, १९७० • ओवाएज़ अहमद घानी • अमीर हैदर खान होटी • प्रांतीय सभा (124) |
| जालस्थल | ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा सरकार |
ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा (पहले:उत्तर पश्चिम सीमांत प्रान्त) पाकिस्तान का एक प्रान्त या सूबा है। इसे सूबा-ए-सरहद के नाम से भी जाना जाता है जो अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर स्थित है । यहाँ पर पश्तूनों की आबादी अधिक है जिन्हें स्थानीय रूप से पख़्तून भी कहते हैं । इनकी मातृभाषा पश्तो है । इस प्रांत की जनसंख्या करीब 2 करोड़ है जिसमें अफ़ग़ानिस्तान से आए शरणार्थियों की 15 लाख की आबादी सम्मिलित नहीं है ।
इतिहास[संपादित करें]
आर्यों का आगमन ईसा के कोई 2000 साल पहले आरंभ हुआ । इस क्षेत्र में इंडो-ईरानियन शाखा आई । माना जाता है कि सातवीं सदी ईसापूर्व में हिन्दू महाजनपद गान्धार यहीं या इसी के समीप स्थित था । ईसा के 200 साल पहले बौद्ध धर्म यहाँ बहुत लोकप्रिय हुआ । मौर्यों के पतन के बाद इसपर कुषाणों का शासन आया । यह कुषाण साम्राज्य की राजधानी था और इस्लाम आने से पहले इसपर ईरानी आकर्मण भी होते रहे । इससे यहाँ जरथुष्ट्र के अनुयायियों की भी आबादी थी ।
सातवीं सदी में चीन के पर्यटकों ने यहाँ के बौद्ध धर्म का जिक्र किया है । ग्यारहवीं सदी में गज़नी के महमूद ने बौद्ध तथा जोरास्ट्री शाहों को हराकर अपना शासन स्थापित किया । गज़नी तथा गज़नी पर गोर के शासन के बाद यहाँ तुर्क तथा अरबों की आबादी बढ़ती गई । दिल्ली सल्तनत के शासन में भी यहाँ इस्लाम अपनाया गया । मुग़लों तथा फ़ारस के साफ़वियों के बीच इस क्षेत्र को लेकर संघर्ष होता रहा । 1893 में अंग्रेज़ों ने अफ़गानों से यह क्षेत्र एक समझौते में ले लिया और 1947 में जब पाकिस्तान आज़ाद हुआ तो यह पाकिस्तान का अंग बन गया । उत्तर पश्चिम सीमांत प्रान्त में २४ जिले हैं।
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