कुमाऊं रेजिमेंट

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कुमाऊं रेजिमेंट
चित्र:Kumaon Regiment Insignia.gif
Cap badge of the Kumaon Regiment
सक्रिय1813 – present
देशभारत India
शाखाFlag of Indian Army.svg Indian Army
प्रकारInfantry
विशालता19 Battalions
Regimental CentreRanikhet, Uttarakhand
अन्य नामCreed Of The Man Eaters
आदर्श वाक्यParakramo Vijayate (Valour Triumphs)
War CryKalika Mata Ki Jai (Victory to the Great Goddess Kali)
मार्च (सीमा रक्षा)Bedu Pako Baro Masa
सैनिक चिह्न2 Param Vir Chakras

4 Ashok Chakras
10 Maha Vir Chakras
6 Kirti Chakras
2 Uttam Yudh Seva Medals
78 Vir Chakras
1 Vir Chakra & Bar
23 Shaurya Chakras
1 Yudh Seva Medal
127 Sena Medals
2 Sena Medals and Bar
8 Param Vishisht Seva Medals
24 Ati Vishisht Seva Medals

36 Vishisht Seva Medals
युद्ध सम्मानPost Independence Srinagar (Badgam), Rezang La, Gadra City, Bhaduria, Daudkandi, Sanjoi Mirpur and Shamsher Nagar
सेनापति
वर्तमान
सेनापति
Lt. Gen. Rana Pratap Kalita
प्रसिद्ध
सेनापति
Gen. S.M. Shrinagesh
Gen. K.S. Thimayya
Gen. T.N. Raina
बिल्ला
Regimental InsigniaA demi-rampant lion holding a cross. The demi-rampant lion is part of the arms of the Russel family, whose ancestor had started the body of troops now formed into the Kumaon Regiment.

कुमांऊँ रेजीमेंट भारतीय सशस्त्र सेना का एक सैन्य-दल है, जिसकी स्थापना सन् 1788 में हुई। यह कुमांऊँ नामक हिमालयी क्षेत्र के निवासियों से सम्बन्धित भारतीय सैन्य-दल है। जिसका मुख्यालय उत्तराखण्ड के कुमांऊँ क्षेत्र के रानीखेत नामक पर्वतीय स्थान में स्थित है तथा भारतीय सशस्त्र सेना के वीरता का प्रथम सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित है। कुमांऊँ रेजिमेंट को 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान तथा 1962 के भारत और चीन युद्ध के लिये विशेष गौरवपूर्ण माना जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

कुमांऊँ रेजीमेंट की स्थापना सन् 1788 में हैदराबाद में हुयी थी, तब मात्र चार बटालियनें थीं। (सन् 2017 में इक्कीस बटालिनें हैं)[1][2] कुमांऊँ रेजीमेंट के स्वतंत्रता पूर्व की शौर्य गाथा का इतिहास भी गौर्वान्वित रहा है। इस रैजीमेंट ने मराठा युद्ध (1803), पिन्डारी युद्ध (1817), भीलों के विरुद्ध युद्ध (1841), अरब युद्ध (1853), रोहिल्ला युद्ध (1854) तथा भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम, झॉंसी (1857) इत्यादि युद्धों में महत्वपूर्ण तथा गौरवपूर्ण कर्तव्यों का निर्वहन किया।

शौर्य गाथा[संपादित करें]

भारत की स्वतंत्रता से पहले से ही कुमांऊँ रेजीमेंट की शौर्य गाथा का इतिहास गौर्वान्वित रहा है। इस रैजीमेंट ने मराठा युद्ध (1803), पिन्डारी युद्ध (1817), भीलों के विरुद्ध युद्ध (1841), अरब युद्ध (1853), रोहिल्ला युद्ध (1854) तथा भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम, झॉंसी (1857) इत्यादि युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

परमवीर चक्र (वीरता का सर्वोच्च सम्मान)[संपादित करें]

  • भारत का प्रथम परमवीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोपरान्त, जो कुमांऊँ रेजिमेंट की चौथी बटालियन (Four Kumaon) की डेल्टा कंपनी के कंपनी-कमांडर थे, को भारत-पाक युद्ध (1947) के दौरान।
  • मेजर शैतान सिंह को मरणोपरान्त, कुमांऊँ रेजिमेंट की तेरहवीं बटालियन के थे, को भारत-चीन के लद्दाख युद्ध (1962) के दौरान।
  • योगेन्द्र सिंह यादव को कारगिल युद्ध के दौरान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

वीर चक्र[संपादित करें]

महावीर चक्र[संपादित करें]

  • लेफ्टीनेन्ट कर्नल धरमसिंह को भारत-पाक युद्ध (1947) के दौरान।
  • सैनिक मानसिंह (मरणोपरान्त) भारत-पाक युद्ध (1947) के दौरान।
  • नायक नरसिंह (मरणोपरान्त) भारत-पाक युद्ध (1947) के दौरान।
  • सैनिक दिवानसिंह (मरणोपरान्त) भारत-पाक युद्ध (1947) के दौरान।
  • मेजर मलकियतसिंह बरार (मरणोपरान्त) भारत-पाक युद्ध (1947) के दौरान।
  • पूर्व ब्रिगेडियर जनरल तपीश्वर नारायणसिंह रैना को भारत-चीन युद्ध (1962) के दौरान।

अशोक चक्र[संपादित करें]

  • मेजर भूकान्त मिश्रा (मरणोपरान्त) कुमांऊँ रेजिमेंट की पन्द्रहवीं बटालियन के थे, को ब्लू स्टार ऑपरेशन अमृतसर, पंजाब (1984) के दौरान।
  • नायक निर्भयसिंह (मरणोपरान्त) कुमांऊँ रेजिमेंट की पन्द्रहवीं बटालियन के थे, को ब्लू स्टार ऑपरेशन अमृतसर, पंजाब (1984) के दौरान।
  • सुबेदार सज्जनसिंह (मरणोपरान्त) कुमांऊँ रेजिमेंट की तेरहवीं बटालियन के थे, को ऑपरेशन रक्षक जम्मू-कश्मीर (1994) के दौरान।
  • नायक रणवीरसिंह तोमर (मरणोपरान्त) कुमांऊँ रेजिमेंट की पन्द्रहवीं बटालियन के थे, को डोडा जिला, जम्मू-कश्मीर () के दौरान।

कीर्ति चक्र[संपादित करें]

शौर्य चक्र[संपादित करें]

सेना मैडल[संपादित करें]

परम विशिष्ट सेवा पदक[संपादित करें]

अति विशिष्ट सेवा पदक[संपादित करें]

विशिष्ट सेवा पदक[संपादित करें]

सियाचीन ग्लेशियर पदक[संपादित करें]

उच्च तुंगला पदक[संपादित करें]

सैन्य सेवा पदक[संपादित करें]

विशेष सेवा पदक[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "BICENTENARY OF THE 4TH BATTALION OF THE KUMAON REGIMENT". मूल से 1 दिसंबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 दिसम्बर 2017.
  2. "The Kumaon Regiment has a glorious past spanning around 225 years". मूल से 27 दिसंबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 दिसम्बर 2017.

विस्तृत पठान[संपादित करें]

  • प्रवल, के सी (१९७६). Valour triumphs: a history of The Kumaon Regiment [बहादुरों की विजय: कुमाऊं रेजिमेंट का इतिहास] (अंग्रेज़ी में). फरीदाबाद: द थॉमसन प्रेस.
  • ओवरटन, जे एफ ए (१९८३). Historical record of The Kumaon Rifles [कुमाऊं राइफल्स का ऐतिहासिक रिकॉर्ड] (अंग्रेज़ी में). लंदन: जे एफ ए ओवरटन.