जाट रेजिमेंट

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
(जाट रेजीमेंट से अनुप्रेषित)
Jump to navigation Jump to search
जाट रेजीमेंट
Rgt-jat.gif
जाट रेजीमेंट
सक्रिय1795 – वर्तमान[1]
देशब्रिटिश राज 1795-1947 Flag of भारत भारत 1947-वर्तमान
शाखासेना
प्रकारपैदल सेना (Line Infantry)
विशालता23 वाहिनियाँ
वाहिनी केन्द्रबरेली, उत्तर प्रदेश
आदर्श वाक्यसंघटन व वीरता (एकता और शौर्य)
सिंहनादजाट बलवान, जय भगवान
वर्षगांठऔर पूर्वी पाकिस्तान - 1971
बिल्ला
वाहिनी बिल्लारोमन संख्या नौ (IX) 1920 के भारतीय सेना के वाहिनी पदानुक्रम में नौंवे स्थान का प्रतिनिधित्व करती है।

जाट रेजिमेंट भारतीय सेना की एक पैदल सेना रेजिमेंट है। यह सेना की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा वीरता पुरस्कार विजेता रेजिमेंट है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] रेजिमेंट ने वर्ष 1839-1947 के बीच 19 और स्वंत्रता के पश्चात आठ महावीर चक्र, आठ कीर्ति चक्र, 32 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्र और 170 सेना पदक जीते हैं। अपने 200 से अधिक वर्षों के जीवन में, रेजिमेंट ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध सहित भारत और विदेशों में अनेक युद्धों में भाग लिया है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

भारतीय_सेना के ले० जनरल के. पी. कैण्डेय ने सन् 1971 के युद्ध के बाद कहा था - अगर जाट न होते तो फाजिल्का का भारत के मानचित्र में नामोनिशान न रहता।

 इसी लड़ाई (सन् 1971) के बाद एक #पाकिस्तानी #मेजर #जनरल ने कहा था - #चौथी_जाट_बटालियन का आक्रमण भयंकर था जिसे रोकना उसकी सेना के बस की बात नहीं रही। पाकिस्तानी अफसर मेजर जनरल मुकीम खान पाकिस्तानी दसवें डिवीजन के कमांडर थे।

पूर्व कप्तान हवासिंह डागर गांव कमोद जिला भिवानी (हरयाणा) जो 4 बटालियन की इस लड़ाई में थे, ने बतलाया कि लड़ाई से पहले बटालियन कमाण्डर ने भरतपुर के जाटों का इतिहास दोहराया था जिसमें जाट मुगलों का सिहांसन और लालकिले के किवाड़ तक उखाड़ ले गये थे।

अंग्रेजों द्वारा 1795 में जाट रेजीमेंट की स्थापना की गई. जाट रेजीमेंट को अपनी बहादुरी के लिए कई युद्ध सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है, जिसमें 2 विक्टोरिया क्रॉस, 2अशोक चक्र, 8 महावीर चक्र, 8 कीर्ति चक्र, 32 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्र और 170 सेना पदक शामिल हैं.

अटूट बल व अद्भुत युद्ध कौशल की जीती जागती मिसाल है भारतीय सेना और इसका महत्वपूर्ण अंग है जाट रेजीमेंट। चाहे भारत-पाकिस्तान का युद्ध हो या इंडो-चाइना वार। जाटों ने हर जंग में अपनी वीरता का लोहा मनवाया है। यही वजह है कि भारतीय सेना में जाट रेजीमेंट का नाम पूरे सम्मान के साथ लिया जाता है।

जाट रेजीमेंट की स्थापना सन् 1795 में कलकत्ता नेटिव मिलिशिया के रूप में हुई थी। 1859 में इस यूनिट को एक रेगुलर इंफेंट्री बटालियन बनाकर 18वीं बंगाल इंफेंट्री नाम दिया गया। कालांतर में इसके नामों में कई बार बदलाव होते रहे। सन् 1922 में जब नौ जाट रेजीमेंट की स्थापना हुई तो इसे कुछ समय के लिए चार जाट का नाम दिया गया। रेजीमेंट की अन्य पुरानी पलटनें जिसमें एक व तीन जाट, बंगाल सेना और दो जाट, बांबे सेना से आई थीं।

जाट रेजीमेंट की उपलब्धियां

फ‌र्स्ट जाट ने 1842 के प्रथम अफगान युद्ध में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए लाइट इंफेंट्री का खिताब हासिल किया था। सन् 1892 में फ‌र्स्ट जाट को जाट लाइट इंफेंट्री बनाया गया और प्रथम विश्वयुद्ध में इसे रॉयल के टाइटल से सम्मानित किया गया। 1817 में दो जाट की स्थापना दस बांबे आर्मी इंफेंट्री के रूप में हुई और 1848 के दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध में दो जाट ने मुल्तान का बैटल ऑनर हासिल किया। आजादी के बाद समय-समय पर सेना का विस्तार हुआ और कई नई पलटनें खड़ी की गई।