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अकबर के नो रत्नों में एक बीरबल की जन्म स्थली है कालपी क्षेत्र का ग्राम इटोरा

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कालपी (जालौन)

कालपी उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में स्थित बुन्देलखण्ड का प्रवेश द्वार यमुना नदी के तट पर बसा हुआ है इसे महिर्षि वेद व्यास का जन्म स्थल माना जाता है कालपी प्राचीन काल में "कालप्रिया"नगरी के नाम से विख्यात थी समय के साथ इसका नाम संक्षिप्त होकर कालपी हो गया। इतिहासकारों के अनुसार चोथी सताब्दी में राजा वसुदेव ने इसे बसाया था। यह बीरबल का जन्म स्थल है जो अकबर के नों रत्नों में एक थे। यह नगर यमुना तट पर कानपुर झांसी मार्ग पर स्थित एक महानगर था जो आज एक कस्बा है।

बताते चलें कालपी क्षेत्र में

महिर्षि वेद व्यास कालपी,ऋषि पराशर परासन, ऋषि बाल्मीकि बबीना, ऋषि कुम्भज कुरहना, रोपण ऋषि इटोरा के अतरिक्त पंडित महेश दास दुबे इटोरा सहित कई ऋषि मुनियों ऐतिहासिक पुरुषों ने जन्म लेकर कालपी क्षेत्र को पावन और पवित्र किया है।

बीरबल की मां आनाभा की शादी कालपी में रहने वाले गंगादास से हुई थी।बीरबल फारसी और संस्कूत के विद्वान थे और कविताएं भी लिखा करते थे। इसके अलावा उनकी शिक्षा संगीत में भी हुई थी।यही वजह है कि सबसे पहले उन्हें जयपुर के महाराजा के दरबार में और बाद में रीवा के महाराज के दरबार में बतौर राज कवि रखा गया था।

बीरबल जालौन जनपद के ही मूल निवासी थे अपनी योग्यता की दम पर अकबर के दरबार में पहुंच कर उसके नो रत्नों में शामिल हुए। इतिहास कारों ने इनका जन्म कालपी के पास एक गांव में होना लिखा है। स्थानीय मान्यताओं और अन्य संदर्भों से पता चलता है कि इनका जन्म जनपद के इटोरा ग्राम में हुआ था।

बीरबल का नाम महेश दास है इनका जन्म १५२८ में हूआ था पिता गंगादास बाबा रुपधर थे।रूपधर संस्कृत और फारसी के ज्ञाता तथा कवि थे।यह भट्ट ब्राह्मण परिवार था। पितामह के प्रभाव से महेश दास भी बृम्हा नाम से कविता करने लगे।

जब १५८३ में अकबर कालपी आया उस समय कालपी का जागीरदार  मुतालिख खां था उसने अकबर की अनेक प्रकार से खातिर दारी की अकबर यमुना नदी से नाव द्वारा दिल्ली से कालपी आया था। यहां यमुना नदी के किनारे ही शाही शामियाना लगाकर रुका था। तब अकबर ने बीरबल से उनकी जन्म भूमि देखने की इच्छा जताईऔर इटोरा पहुंचे

ग्राम इटोरा के ऋषि रोपण गुरु की महिमा से बादशाह अकबर बहुत प्रभावित हुआ बताते चलें कि "प्राणी विलास"नामक ग्रंथ में गुरु रोपण के संबंध में काफी जानकारी मिलती है जो राम चरित मानस की पद्धति में लिखा है ।जब गुरु रोपण की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान हरि ने उनको दर्शन दिए जिसका विवरण उस ग्रंथ में है उसकी कुछ लाईनों से परिचित कराते हैं।

पुनि हरि कहा मांग वर लेहू।

रोपण कहा निज भक्तिहि देहू।।

रोपण गुरु तब नाम प्रकाशा।

निरजन की कर पूर्ण आशा ।।

अकबर और रोपण गुरु की मुलाकात इटोरा में हुई थी और ऐसी हुई कि किसी को समय का ज्ञान ही नहीं रहा।खाने पीने का समय निकल गया गुरु के यहां प्रसाद में सबको माल पुआ खाने को मिला इतना स्वादिष्ट मालपुआ अकबर ने कभी नहीं खाया था और न हि उसका नाम जानता था

तब राजा ने बीरबल से इसका नाम पूछा तो बीरबल तो बीरबल सीधे जबाव देने से रहे एक पहेली में ही जबाब दिया उसकी पहली लाइन याद नहीं आ रही है दूसरी लाइन कुछ इस प्रकार थी-- बिन बेलन यह बेला है कहे बीरबल सुने अकबर यह भी एक पहेला है। पहली लाइन में इसके मीठे और स्वादिष्ट के गुंड़ केबारे में कहा गया है।चलते समय अकबर ने रोपण गुरु से कहा कि मैं आपके लिए कुछ करना चाहता हूं आज्ञा करें तब रोपण गुरु ने कहा कि पानी की कमी हैं एक तालाब बना दें तो ठीक रहेगा। तब अकबर ने कहा तालाब तो बनेगा ही आपके लिए एक मंदिर भी सरकारी खर्चे से बनेगा।प्राणी विलास में इसका भी उल्लेख है देखिऐ---

संवत सोलह सौ ऋष नयना।

कोनी माघ मास शुभ ऐना।।

पुष्प नक्षत्र चंद्र शुभ बारा।

तेहि दिन आज्ञा दीन भुआरा।।

करो धाम कर अब प्रारंभा।

चंहु दिश शुभग लगावो खंभा।।

यह कहि पूनि यक ग्राम बसावो।

हमरो नाम प्रसिद्ध करावो।।

चारि खंड तंह शुभग बनाई। चहुं दिश खंभा दिए लगाई।।

तेंहि ऊपर शुभ रचयो बिताना।

द्विज गण बैठि करहिं निज गाना।।

मलय गिरि कपाट तिन कीन्हें।

शुभ्र गुफा के द्वार हो दीन्हें।।

पुनि एक ग्राम बसाय सू दीन्हां।

अकबरपुर तेहि नाम जू कीन्हां।।

जालौन जिले के गजेटियर में उल्लेख है कि अकबर ने इटोरा के पास एक गांव अपने नाम से बसाकर वहां एक तालाब और मंदिर का निर्माण करवाया था इसी इटोरा को बीरबल की जन्म स्थली कहा जाता है।

           मनोज पाण्डेय

     तहसील संवाददाता

    दैनिक राष्ट्रीय स्वरुप

                     कालपी

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