नौला गाँव, बीरपुर (बेगूसराय)

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नौला गढ
—  गाँव  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश  भारत
राज्य बिहार
ज़िला बेगूसराय
जनसंख्या 25,000
साक्षरता
• पुरुष
• महिला
75%
• 60%
• 50%
आधिकारिक भाषा(एँ) हिन्दी, मगही, मैथिली, भोजपुरी, अंगिका, उर्दु, अंग्रेज़ी
आधिकारिक जालस्थल: http://begusarai.bih.nic.in

निर्देशांक: 25°09′N 85°27′E / 25.15°N 85.45°E / 25.15; 85.45

नौला प्र्ंंखड-बीरपुर, थाना-भगवानपुुुर, जिला -बेगूसराय, बिहार स्थित एक गाँव है। पहले इसे नवलगढ़, नौलागढ के नाम कहा जाता था। पशुपाालन, कृषि, नौकरी इस गांव के लोगों का मुख्य पेशा है।

भूगोल[संपादित करें]

दृष्टि से देखा जाय तो इसके चारो तरफ पास में बलान, बैती, बुढी गंडक नदी की संगम धारा गांव की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है और वहीं पश्चिम, उत्तर की और लहलहाते खेत जहाँ पर नौलागढ की पुरी आबादी खेती करके अपना जीवन यापन करते हैं। लगभग 15000 बीघा में फैला हुआ खेत जहां एक बार आदमी चल जाये तो आने का मन नहीं करेगा। बगल में 5 किमी पूर्व बीरपुर प्रखंड मे कागजी काम में यहां की जनता को और भी आसानी होती है दक्षिण में जोकिया गांव है जिसे नौला का भाई कहा जाता है। मखबा, गोपालपुर, गाड़ा,बदिया, भीठ ,डीह, रामनगर नौला के छोटे मुहल्ला हैं।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

जनसंख्या के मामले से यह गांव बड़ा है जबकि क्षेत्रफल,घनत्व की दृष्टि से समान्य गांव है लगभग 1000-1150 परिवार यहां बसे हैं लगभग 6500-7500 आदमी यहाँ निवास करते हैं। जिसमे 3000 पुरुष जबकि 2850 महिला हैं बाकी बच्चे।

यातायात[संपादित करें]

यातायात के मामले में नौलागढ सबसे अच्छा गांव है बेगूसराय से दलसिंहसराय, रोसड़ा, समस्तीपुर,दरभंगा,मधुबनी,मुजफ्फरपुर वाया नौला कम समय मे आसानी आ जा सकते है। पूरे गांव में ऐसा कोई जगह नहीं है जहां आपको कच्ची सड़क दिखे। यहां से बेगूसराय 18 किमी, बरौनी 12 किमी, मंझोल 10 किमी, मोकामा 32 किमी, सिमरिया 20 किमी, जिरोमाईल 16 किमी है। नौलागढ से डायरेक्ट दलसिंहसराय, समस्तीपुर, पटना, वैशाली, बेगूसराय के लिए बस मिलता है।

आदर्श स्थल[संपादित करें]

यहां पर बैती नदी के सोझी घाट पर बना शिव मंदिर, पुल चौक पर हनुमान मंदिर, काली मंदिर, धोबी घाट पर ब्रह्मदेवकी स्थान, गहबर नागपंचमी पुजन, हाईस्कूल के पास 150 वर्ष पुराने राम जानकी ठाकुरबारी, दुर्गा मंदिर, हर वर्ष फाल्गुन महीने बंजरगबली पुजा, मेला, कुश्ती ,बैती औंर बालान नदियों के बीच महेन्द्री ठाकुरबारी देखने लायक जगह है। जिसमें हज़ारों श्रद्धालुओं का भीड़ लगता है। छठ पूजा में बैती नदी के पास श्रद्धालुओं की जो भीड़ लगती है वो अति शोभनीय रहता है।

यहां का बड़ा कुआँ काफी प्रसिद्ध है जो रातों रात दैत्य ने निर्माण किया था। जो अभी सड़को से 10 फीट ऊंची चालू हालात मै है।


तरूण नाट्य कला परिषद के कलाकार मनोरंजन कार्यक्रम, नाटक मशहूर है। नौलाागढ के किक्रेट टीम जिला मे चैैैमपिंंयन है।

प्राचीन काल मे पाल वंश के राजा नल के किले माउंड अभी तक 2 किमी तक फैला हुआ हैं। MRD सड़क दो हिस्सों में माउंड को घुमाती है।उत्तरी माउंड प्राकृतिक और मानव निर्मित जल चैनलों के साथ अपने परिदृश्य के लिए उल्लेखनीय है। पूर्व में भिठ से फांसीरी टोला तक लंबा क्षेत्र है, पूर्व में बालान और दक्षिण में बैती माउंड के लिए एक उल्लेखनीय टोपोलॉजी बनाता है। दोनों नदियों पूर्व में लगभग 1 किमी में शामिल हो जाते हैं। केंद्र से वास्तव में, माउंड को विभिन्न हिस्सों में विभाजित किया गया है - 360 एकड़, 1400 एकड़ और 800 एकड़ के केंद्रीय किलेदार क्षेत्र। सौढनी माउंड गढ़ (किले) के उत्तर में 400 मीटर x 100 मीटर और फहराया क्षेत्र के पूर्व में नौला डीह और नौला भिठ की चोटी को मापता है.जिसे एआईएच और पुरातत्व विभाग जी डी कॉलेज, बेगूसराय के प्रोफेसर की देखरेख में आर के चौधरी ने 1 950-52 में इस विशाल क्षेत्र की खोज और सर्वेक्षण किया था। एक स्थानीय निवासी श्री अरविंद प्रसाद सिंह, जो भूमि (माउंड के मुख्य भाग) के मालिक हैं कृषि कार्य के समय इस महासागर से प्राचीन संग्रह और सिक्कों को जी डी कॉलेज, बेगूसराय के संग्रहालय में दान दिया। विग्रा पाला III के शिलालेख के साथ एक काले पत्थर टूटी मूर्तियां संग्रहालय में प्रदर्शित की गई है।

शिक्षा[संपादित करें]

शिक्षा के मामले में यह गांव सामान्य है एक समय मे बेगूसराय का सबसे अधिक सुविधा यहां के विधालय मे था. शिक्षा के क्षेत्र में स्व. श्री चौधरी चन्द्रमौली सिंह सन् 1947 मे नौला मे मिडिलस्कूल, हाईस्कूल के लिए अपना बेशकीमती जमीन दान मे देकर स्थापित किए। उनका प्रयास सराहनीय है। वर्तमान समय मे उनके परिवार भी शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]