गिर वन्यजीव अभ्यारण्य

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गिर वन्य जीव अभयारण्य
आईयूसीएन श्रेणी द्वितीय (II) (राष्ट्रीय उद्यान)
Map Guj Gir NatPark Sanctuary.png
गिर वन्य जीव अभयारण्य
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अवस्थिति जूनागढ़ जिला, भारत
निकटतम शहर जूनागढ़
निर्देशांक 21°08′08″N 70°47′48″E / 21.13556°N 70.79667°E / 21.13556; 70.79667निर्देशांक: 21°08′08″N 70°47′48″E / 21.13556°N 70.79667°E / 21.13556; 70.79667
क्षेत्रफल 1,412 km²
स्थापित 1965
आगंतुक 60,000   (2004 में)
शासी निकाय वन विभाग, गुजरात
गिर में एक एशियाई शेर

गिर वन्यजीव अभयारण्य भारत के गुजरात राज्य में लगभग 1424 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह जंगल शेरों के लिये मसहूर है इसके अतरिक्त इस वन्य अभयारण्य में अधिसंख्‍य मात्रा में पुष्प और जीव-जन्तुओं की प्रजातियां मिलती है। यहां स्तनधारियों की 30 प्रजातियां, सरीसृप वर्ग की 20 प्रजातियां और कीडों- मकोडों तथा पक्षियों की भी बहुत सी प्रजातियां पाई जाती है। दक्षिणी अफ्रीका के अलावा विश्‍व का यही ऐसा एकलौता स्थान है जहां शेरों को अपने प्राकृतिक आवास में रहते हुए देखा जा सकता है। जंगल के शेर के लिए अंतिम आश्रय के रूप में गिर का जंगल, भारत के महत्वपूर्ण वन्य अभयारण्यों में से एक है। गिर के जंगल को सन् 1969 में वन्य जीव अभयारण्य बनाया गया और 6 वर्षों बाद इसका 140.4 वर्ग किलोमीटर में विस्तार करके इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में स्थापित कर दिया गया। यह अभ्‍यारण्‍य अब लगभग 258.71 वर्ग किलोमीटर तक विस्तृत हो चुका है। वन्य जीवों को सरक्षंण प्रदान करने के प्रयास से अब शेरों की संख्या बढकर 312 हो गई है।

सूखें पताड़ वाले वृक्षों, कांटेदार झाड़ियों के अलावा हरे-भरे पेड़ों से समृद्ध गिर का जंगल नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां के मुख्य वृक्षों में सागवान, शीशम, बबूल, बेर, जामुन, बील आदि है।

वर्ष संख्या बाघ:बाघिन:शावक
1968 177 -
1974 180 -
1979 205 76:100:85
1984 239 88:100:64
1990 284 82:100:67
1995 304 94:100:71
2000 327 -
2005 359 -

भारत के सबसे बड़े कद का हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, चिंकारा और बारहसिंगा भी यहां देखा जा सकता है साथ ही यहां भालू और बड़ी पूंछ वाले लंगूर भी भारी मात्रा में पाए जाते है। कुछ ही लोग जानते होंगे कि गिर भारत का एक अच्छा पक्षी अभयारण्य भी है। यहां फलगी वाला बाज, कठफोडवा, एरीओल, जंगली मैना और पैराडाइज फलाईकेचर भी देखा जा सकता है। साथ ही यह अधोलिया, वालडेरा, रतनघुना और पीपलिया आदि पक्षियों को भी देखने के लिए उपयुक्त स्थान है। इस जंगल में मगरमच्छों के लिए फॉर्म का विकास किया जा रहा है जो यहां के आकर्षण को ओर भी बढा देगा।

दर्शकों के लिए गिर वन्य अभयारण्य मध्य अक्टूबर महीने से लेकर मध्य जून तक खोला जाता है लेकिन मानसून के मौसम में इसे बन्द कर दिया जाता है।

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