पूर्वोत्तर भारत

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पूर्वोत्तर भारत
मणिपुरी: Bharatki Awang Nongpok[1]
North Eastern Region (NER)
Northeast india map.png
निर्देशांक: 26°N 91°E / 26°N 91°E / 26; 91निर्देशांक: 26°N 91°E / 26°N 91°E / 26; 91
Country India
States
Largest cityGuwahati
Major cities (2011 Census of India)[2]
क्षेत्रफल
 • कुल262,179 किमी2 (1,01,228 वर्गमील)
जनसंख्या (2011 Census of India)
 • कुल45,772,188
 • घनत्व173 किमी2 (450 वर्गमील)
वासीनाम
समय मण्डलIndian Standard Time (यूटीसी+5:30)
Scheduled languages
State official languages
पूर्वोत्तर भारत

उत्तर पूर्वी भारत

Location of Northeast India

समय क्षेत्र IST (यु टी सी+5:30)
क्षेत्र 262,230 km²
भारत के राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा
उत्तर पूर्वी भारत के बडे शहर (2008) गुवाहाटी, अगरतला, शिलाँग, आइजोल, इम्फाल
आधिकारिक भाषाएँ असमी, बंगाली, बोडो, मणिपुरी
जन संख्या 38,857,769
जन संख्या घनत्व 148 /km²
जन्म दर
मृत्यु दर
शिशु मृत्यु दर

पूर्वोत्तर भारत से आशय भारत के सर्वाधिक पूर्वी क्षेत्रों से है जिसमें कुल आठ भारतीय राज्य - असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैण्ड, और सिक्किम शामिल हैं। सिक्किम के अतिरिक्त बाकी एक साथ जुड़े राज्यों को "सात बहनों" के नाम से भी जाना जाता है।

इन आठ राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 1971 में पूर्वोतर परिषद (नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल / NEC)[18] का गठन एक केन्द्रीय संस्था के रूप में किया गया था। नॉर्थ ईस्टर्न डेवेलपमेण्ट फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (NEDFi)[19] का गठन 9 अगस्त 1995 को किया गया था और उत्तरपूर्वीय क्षेत्र विकास मन्त्रालय (DoNER)[20][21] का गठन सितम्बर 2001 में किया गया था।

उत्तरपूर्वीय राज्यों में सिक्किम 1947 में एक भारतीय संरक्षित राज्य और उसके बाद 1975 में एक पूर्ण राज्य बन गया। पश्चिम बंगाल में स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसकी औसत चौड़ाई 21 किलोमीटर से 40 किलोमीटर के बीच है, उत्तरपूर्वीय क्षेत्र को मुख्य भारतीय भू-भाग से जोड़ता है। इसकी सीमा का 2000 किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र अन्य देशों : नेपाल, चाइना, भूटान, बर्मा और बांग्लादेश के साथ लगती है। पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों की सीमाऐं अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं से लगती हैं, जैसे - सिक्किम (नेपाल, चीन, भूटान), मेघालय, त्रिपुरा (बांग्लादेश), मिजोरम (बांग्लादेश एवं म्यानमार), मणिपुर व नागालैण्ड (म्यानमार), अरूणाचल प्रदेश (चीन), असम (भूटान)।

इतिहास[संपादित करें]

असम में बाइहाटा चारियाली के पास मदन कामदेव में एक क्रूर शेर खुदाया हुआ है जो शक्तिशाली कामरूप-पालस का प्रतिनिधित्व है (सी. 9 वीं-10 वीं शताब्दी ई.)
1950 के दशक में राज्य असम के मानचित्र
इन्हें भी देखें: भारत का राजनीतिक एकीकरण

भारतीय स्वतन्त्रता के बाद ब्रिटिश भारत के उत्तरपूर्वीय क्षेत्र को असम के एकल राज्य के अन्तर्गत वर्गीकृत कर दिया गया था। बाद में स्वतंत्र त्रिपुरा कमेटी जैसे कई स्वतन्त्रता आन्दोलन समस्त उत्तरपूर्वीय राज्यों को असम के अन्तर्गत समूहीकृत करने के विरोध में चलाए गए थे। 1960-70 के दशक में नागालैण्ड, मेघालय और मिजोरम राज्यों का गठन किया गया। असम की राजधानी शिलाँग से दिसपुर विस्थापित कर दी गयी, जो अब गुवाहाटी का एक भाग है। शिलाँग मेघालय की राजधानी बन गई। इन सभी राज्यों के साथ इनकी अनूठी संस्कृति और इतिहास जुड़ा है। इनमे से अधिकांश क्षेत्र ब्रिटिश राज के दौरान भारत की मुख्यधारा में शामिल किए गए थे जब ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारियों ने पारंपरिक अलग अलग सीमाओं वाले राज्यों को अपने क्षेत्र और बाह्य शक्तियों के बीच एक मध्यवर्ती क्षेत्र बनाने के लिए जोड़ दिया (जैसे: उत्तरपूर्व में असम, मणिपुर और त्रिपुरा और उत्तरपश्चिम में बलोचिस्तान तथा उत्तर पश्चिम सीमान्त प्रदेश). 1947 में आजादी के बाद भारतीय राज्यों और राजनीतिक प्रणालियों का विस्तार एक चुनौती रहा है।[22]

अरुणाचल प्रदेश के अधिकांश भाग पर चीन अपना दावा करता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के कारण चीन-भारत संबंधों में खटास आ गई। युद्ध के कारणों को लेकर अब भी भारत और चीन दोनों पक्षों के स्त्रोतों में विवाद है। 1962 में युद्ध के दौरान, पीआरसी (PRC) ने 1954 में भारत द्वारा बनाये गए एनइएफए (NEFA) (उत्तर-पूर्वीय सीमान्त संस्था) के अधिकांश भाग पर कब्ज़ा कर लिया। हालाँकि, शीघ्र ही चीन ने स्वयं ही जीत की घोषणा कर दी और यू॰एन॰ (U.N.) में सोवियत संघ के वीटो के कारण मैकमोहन लाइन तक वापिस खिसक गया और 1963 में युद्ध के दौरान बंदी बनाए गए कैदियों को भी छोड़ दिया. हालाँकि भारत में मोदी सरकार के आने के बाद अरुणाचल में भारत काफी मजबूत हुआ है और अब चीन का तवांग पर दावा कमजोर पड़ता दिख रहा है।

यह क्षेत्र अपनी अनूठी संस्कृति, हस्तशिल्प, मार्शल आर्ट और प्राकृतिक सुन्दरता के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र की समस्याओं में विद्रोह, बेरोजगारी, मादक पदार्थों का सेवन और आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत से ही अध्ययनों के माध्यम से यह प्रकट हुआ है कि विकास के मामले में यह क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में पिछड़ा हुआ है।

भूगोल[संपादित करें]

पूर्वोत्तर के राज्य
सिक्किम से हिमालय का दृश्य.

उत्तरपूर्वीय भारत की जलवायु मुख्यतः नम अर्ध-ऊष्णकटिबन्धीय है और ग्रीष्मकाल गर्म व उमस भरा होता है तथा अत्यधिक वर्षा होती है और हल्की ठण्ड पड़ती है। भारत के पश्चिमी तट के साथ साथ, इस क्षेत्र में भी भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ बचे हुए वर्षा वन स्थित हैं। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम राज्यों की पर्वतीय जलवायु ठण्डी हिमाच्छादित सर्दियों के साथ हलकी गर्म है।

राजनीतिक मुद्दे[संपादित करें]

इन्हें भी देखें: पूर्वोत्तर भारत में अलगाववाद

ब्रिटिश साम्राज्यवाद के परिणामस्वरूप उत्तरपूर्वीय राज्यों का अलगाव तब ही से शुरू हो गया था जब इस क्षेत्र को अपने पारंपरिक व्यवसायिक भागीदारों (भूटान, म्यांमार और भारत-चीन) से अलग किया जाने लगा था।[23] 1947 में भारतीय स्वतंत्रता और विभाजन ने इस एकाकी क्षेत्र को भंग करते हुए इसे एक स्थलसीमा क्षेत्र बना दिया जिसे देरी से पहचाना गया, किन्तु अभी तक इस पर अध्ययन नहीं किया जा सका है।[24] शीघ्र ही यह मुख्याधारा के भारत के लिए एक आबद्ध बाज़ार बन गया।[25]

उत्तरपूर्वीय राज्यों में मतदाताओं का तुलनात्मक प्रतिशत कम है (भारत की कुल जनसंख्या का 3.8 प्रतिशत) इसलिए उन्हें लोक सभा की कुल 543 सीटों में से मात्र 25 सीटें (कुल सीटों का 4.6 प्रतिशत) ही आवंटित की जाती हैं।

उत्तरपूर्वीय राज्य कई जातीय समूहों की गृहभूमि हैं जो स्व-रक्षण में लगे हुए हैं।[संदिग्ध][कृपया उद्धरण जोड़ें] हाल के समय में, इनमे से कुछ संघर्षों ने हिंसक रूप ले लिया जिसके फलस्वरूप उल्फा (ULFA), एनएलएफटी[26] (NLFT), एनडीएफबी[27] (NDFB) और एनएससीएन[28] (NSCN) जैसे सशस्त्र विद्रोही समूहों का प्रसार होने लगा. 1962 के भारत-चीन युद्ध के शीघ्र बाद ही और विशेष रूप से क्षेत्र में विद्रोह उठने के बाद, यहां नियमों में सुरक्षा प्रभाव बढ़ा दिये गए हैं।[29]
कुछ समय से इस क्षेत्र के नियम निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों के बीच इस तथ्य को व्यापक स्तर पर मान्यता दी गयी है कि उत्तरपूर्वीय क्षेत्र के विकास में अवरोध का प्रमुख कारण इसकी भौगोलिक अवस्थिति है।[30] वैश्वीकरण के आने के फलस्वरूप विक्षेत्रीकरण और सीमारहित विश्व की धारणा का प्रसार हुआ है जिसको प्रायः आर्थिक एकीकरण के साथ जोड़ा जाता है। इसकी सीमा का 98 प्रतिशत भाग चीन, म्यांमार, भूटान, बांग्लादेश और नेपाल के साथ होने के कारण वैश्वीकरण के युग में उत्तरपूर्वीय भारत में विकास की संभावनाएं अधिक हैं।[31] परिणामस्वरूप, बुद्धिजीवियों और राजनीतिज्ञों के बीच एक नयी नीति विकसित हुई कि एक मात्र दिशा जिसकी ओर उत्तरपूर्वीय क्षेत्र को अभिमुख होना चाहिए, वह यह है कि शेष भारत के साथ राजनीतिक एकीकरण और शेष एशिया, विशेषकर पूर्व और दक्षिणपूर्व एशिया के साथ आर्थिक एकीकरण के द्वारा ही विकास के नए मार्ग खुलेंगे क्योंकि शेष भारत से आर्थिक एकीकरण के फलस्वरूप कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। इस नयी नीति के विकास के साथ भारत सरकार ने उत्तरपूर्वीय क्षेत्र के विकास के लिए लुक ईस्ट पॉलिसी घोषित कर दी है। इस पॉलिसी का जिक्र बाह्य मामलों के मंत्रालय की 2004 की वर्षांत समीक्षा में है, जिसमें कहा गया है कि: "भारत की लुक ईस्ट पॉलिसी को अब यूपीए (UPA) सरकार द्वारा नए आयाम दिए गए हैं। विशेषकर अपने पूर्वीय ओर उत्तरपूर्वीय क्षेत्र के लिए, बीआईएमएसटीइसी (BIMSTEC) में और भारत-एएसइएएन (ASEAN) शिखर वार्ता द्वारा, दोनों को अर्थव्यवस्था और सुरक्षा हितों के लिए अनिवार्य रूप से जोड़ते हुए, अब भारत एएसइएएन (ASEAN) देशों के साथ साझेदारी की ओर विचार कर रहा है।"[32]

समुदाय[संपादित करें]

नागालैंड से नागा लड़की
  • असमिया
  • मिसिंग
  • बोडो
  • दिमासा
  • गारो
  • नेपाली
  • कार्बी
  • खासी
  • कुकी
  • मणिपुरी
  • मिज़ो
  • नागा
  • राभा
  • राजबोंगशी
  • तिवा
  • त्रिपुरी
  • बंगाली
  • बिष्णुप्रिया मणिपुरी

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Sharma, Gourachandra. Chahi Taret Khuntalngeida Manipurbu Pumnou Nouna Semgatkhiba (मणिपुरी में). पृ॰ 12.
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  4. "Manipuri language | Britannica". www.britannica.com (अंग्रेज़ी में).
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  31. थोंग्खोलाल होकिप, "भारत के पूर्वोत्तर नीति: निरंतरता और बदलाव" http://www.freewebs.com/roberthaokip/articles/India's_Northeast_Policy_Continuity_and_Change.pdf Archived 2017-04-28 at the Wayback Machine
  32. इयर एंड रिव्यू 2004, विदेशी मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार. नई दिल्ली.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]