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कलिंग

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कलिंग का प्रभाव क्षेत्र

कलिंग पूर्व भारत में गंगा से गोदावरी तक विस्तृत एक शक्तिशाली साम्राज्य था। वर्तमान के ओडिशा, आन्ध्र कलिंग, छत्तीसगढ़, झारखण्ड और बंगाल और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में यह व्याप्त था। कलिंग को प्रारंभ में उग्रसेन नंद ने जीत लिया था, लेकिन सहल्य के शासनकाल में इसने अपनी स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त किया, और यह अशोक मौर्य के शासनकाल तक ऐसा ही रहा जिसे उसने फिर जीता।[1]

ग्रीक् के लेखक यहां के लोगों को ओरेट्स कहते थे, क्यों कि ये प्रतिकुल प्राकृतिक परिस्थितियों में भी ओरू अर्थात् चावल बहु मात्रा में ऊगा पाते थे। कलिंग राज्य की राजधानी तोशाली थी।

महाभारत के पौराणिक ग्रंथ में कलिंगों का उल्लेख एक प्रमुख जनजाति के रूप में किया गया है। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में कलिंग युद्ध के परिणामस्वरूप यह क्षेत्र मौर्य शासन के अधीन आ गया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Das 1986, pp 31-32