भूटान का इतिहास

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ट्रोंग्सा का दुर्ग

भूटान का प्राचीन इतिहास मिथकों के रूप में है। अनुमानतः भूटान की में २००० ईसापूर्व बस्तियाँ बसनीं शुरू हुईं। दन्थकाथाओं के अनुसार इस पर ७वीं शती ईसापूर्व में कूच बिहार के राजा का अधिकार था। किन्तु ९वीं शताब्दीं में यहाँ बौद्ध धर्म आने के पूर्व का इतिहास अधिकांशतः अज्ञात ही है। इस काल में तिब्बत में अशान्ति होने के कारण बहुत से बौद्ध भिक्षु यहाँ आ गये।

१२वीं शताब्दी में स्थापित ड्रुक्पा कग्युपा सम्प्रदाय आज भी यहाँ का प्रमुख सम्प्रदाय है। इस देश का राजनीतिक इतिहास इसके धार्मिक इतिहास से निकट सम्बन्ध रखता है।

सत्रहवीं सदी के अंत में भूटान ने बौद्ध धर्म को अंगीकार किया। 1865 मे ब्रिटेन और भूटान के बीच सिनचुलु संधि पर हस्ताक्षर हुआ, जिसके तहत भूटान को सीमावर्ती कुछ भूभाग के बदले कुछ वार्षिक अनुदान के करार किए गए। ब्रिटिश प्रभाव के तहत 1907 में वहाँ राजशाही की स्थापना हुई। तीन साल बाद एक और समझौता हुआ, जिसके तहत ब्रिटिश इस बात पर राजी हुए कि वे भूटान के आंतरिक मामलों में हस्त्क्षेप नहीं करेंगे लेकिन भूटान की विदेश नीति इंग्लैंड द्वारा तय की जाएगी। बाद में 1947 के पश्चात यही भूमिका भारत को मिली। दो साल बाद 1949 में भारत भूटान समझौते के तहत भारत ने भूटान की वो सारी जमीन उसे लौटा दी जो अंग्रेजों के अधीन थी। इस समझौते के तहत भारत का भूटान की विदेश नीति एवं रक्षा नीति में काफी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई।

सन्दर्भ[संपादित करें]

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