मैत्रक राजवंश

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मैत्रक राजवंश इस राजवंश की स्थापना गुप्त वंश के सूबेदार भट्टार्क ने ई स ४७० में गुजरात के वलभिपुर में की थी। इस वंश का कुलधर्म शिव था। मैत्रक वंश का दूसरा प्रतापी राजा गृहसेन (५५३-५६९) था। उसके दानपात्रों से पता चलता है कि वो एक प्रजाप्रिय राजा था। शिलादित्य पहला "धर्मादित्य" नाम से जाने जाते थे। मेट्रो वंश की सत्ता सौराष्ट्र और गुजरात के उत्तर भाग में थी यह वंश ने ई स ४७० से ७८८ तक राज किया ७८८ मै अरबी राजाओं ने इस वंश का अंत किया।