बीदर सल्तनत

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बीदर सल्तनत
बारिद शाही राजवंश

राजधानीबीदर
धर्म मुस्लिम
सरकार राजशाही
मुद्रा मुहर

बीदर सल्तनत देर मध्ययुगीन दक्षिणी भारत के दक्खन सल्तनतों में से एक थी।[1]

इतिहास[संपादित करें]

कासिम बारिद और अमीर बारिद[संपादित करें]

सल्तनत की स्थापना 1492 में क़ासिम बारीद द्वारा की गई थी,[2] जो तुर्की के पूर्व गुलाम थे।[3] वह बहमनी सुल्तान मुहम्मद शाह तृतीय की सेवा में शामिल हुए। उन्होंने अपने पेशे की शुरुआत सर-नौबत के रूप में की थी, लेकिन बाद में बहमनी सल्तनत के मिर-जुमला (प्रधानमंत्री) बन गए। महमूद शाह बहमनी (शा.1482 - 1518) के शासनकाल के दौरान, वह वास्तविक शासक बन गया।

1504 में उनकी मृत्यु के बाद, उनके बेटे आमिर बारिद प्रधानमंत्री बने और बहमनी सल्तनत के प्रशासन को नियंत्रित किया। 1518 में महमूद शाह बहमनी की मृत्यु के बाद, उन्हें एक के बाद एक चार सुल्तानों ने प्रतिस्थापित किया, लेकिन वे सभी अमीर बरीद के हाथों की कठपुतली ही बने रहे।[4][5]

जब 1527 में अंतिम बहमनी शासक कलीमुल्ला बीदर भाग गया, तो अमीर बारिद व्यावहारिक रूप से स्वतंत्र हो गए। लेकिन उन्होंने कभी कोई शाही पदवी नहीं ली।[6]

अली बारीद शाह[संपादित करें]

1542 में, उसका बेटा अली बारिद शाह उत्तराधिकारी बना, जिसने पहली बार शाह का शाही शीर्षक धारण किया।[7] अली बारिद जनवरी, १५६५ में विजयनगर साम्राज्य के खिलाफ तालिकोटा की लड़ाई में अन्य दक्कन सुल्तानों के साथ मिला हुआ था।

बाद के शासक[संपादित करें]

1580 में उनकी मृत्यु के बाद, अली बारिद को उनके बेटे इब्राहिम बारिद द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, जिन्होंने 1587 में अपनी मृत्यु तक सात साल तक शासन किया।[8] उसके बाद उसके छोटे भाई कासिम बारिद II उत्तराधिकारी बन।[9] १५९१ में उसकी मृत्यु के बाद, उसके नवजात पुत्र अली बारिद द्वितीय को गद्दी पर बैठाया गया, जिसे जल्द ही उसके एक रिश्तेदार अमीर बारिद द्वितीय ने हटा दिया। उसे भी 1601 में, उसके एक रिश्तेदार मिर्जा अली बारिद द्वारा हटा दिया गया था।

1609 में, मिर्ज़ा अली बारीद अंतिम शासक, अमीर बारिड तृतीय[9] द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, जिसने 1616 में मलिक अंबर के नेतृत्व में मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। 1619 में, वह बीजापुर के सुल्तान इब्राहिम आदिल शाह II से हार गया था। बीदर को बीजापुर सल्तनत द्वार अधिकृत कर लिया गया। अमीर बरिद तृतीय और उनके बेटों को बीजापुर लाया गया और उन्हें "निगरानी में" रखा गया।[10]

संस्कृति[संपादित करें]

शासकों ने फ़ारसी संस्कृति का संरक्षण किया। फ़ारसी कविता उनके मकबरों पर अंकित है।

वास्तुकला[संपादित करें]

बीदर सल्तनत ने बीदर किले में काफी कुछ जोड़ा है। उनकी कब्रें बीदर में भी स्थित हैं।[11][12] शासकों ने इन इमारतों के निर्माण के लिए हिंदू वास्तुकारों और इंजीनियरों को नियुक्त किया, जिसके परिणामस्वरूप इस काल की वास्तुकला के भीतर कुछ हिंदू विशेषताओं का समामेलन दिखाई पड़ता है।[13]

शासक[संपादित करें]

नाम शासन काल
कासिम बारिद प्रथम 1489 - 1504
अमीर बरीद प्रथम 1504 - 1542 [14]
अली बारिद शाह प्रथम 1542 - 1580 [15]
इब्राहिम बारिद शाह 1580 - 1587
कासिम बारिद शाह द्वितीय 1587 - 1591
अली बारिद शाह द्वितीय 1591
अमीर बारिद शाह द्वितीय 1591 - 1601
मिर्ज़ा अली बारिद शाह तृतीय 1601 - 1609
अमीर बारिद शाह तृतीय 1609 - 1619

चित्र दीर्घा[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Barīd Shāhī dynasty | Muslim dynasty". Encyclopedia Britannica (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2018-12-09.
  2. Sen 2013, पृ॰ 118.
  3. Bosworth 1996, पृ॰ 324.
  4. "India - Bahmanī consolidation of the Deccan". Encyclopedia Britannica (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2018-12-09.
  5. Haig 1928, पृ॰प॰ 431.
  6. Yazdani, 1947, पृ॰प॰ 25.
  7. Yazdani, 1947, पृ॰प॰ 13.
  8. Yazdani, 1947, पृ॰प॰ 160.
  9. Yazdani, 1947, पृ॰प॰ 14.
  10. Majumdar 2007, पृ॰ 466-468.
  11. Law, John. Modern Hyderabad (Deccan). पपृ॰ 15–17.
  12. Centre, UNESCO World Heritage. "Monuments and Forts of the Deccan Sultanate". UNESCO World Heritage Centre (अंग्रेज़ी में). मूल से 2018-12-09 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2018-12-09.
  13. Yazdani, 1947, पृ॰प॰ 26.
  14. Haig 1928, पृ॰प॰ 429.
  15. Haig 1928, पृ॰प॰ 681 & 683.