अशोक गहलोत

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अशोक गहलोत
Mr. Ashok Gehlot, Chief Minister, Rajasthan. India.JPG
राजस्थान के मुख्यमंत्री

पदस्थ
कार्यालय ग्रहण 
17 दिसम्बर 2018
राज्यपाल कल्याण सिंह
पूर्वा धिकारी वसुंधरा राजे
चुनाव-क्षेत्र सरदारपुरा, जोधपुर
पद बहाल
13 दिसम्बर 2008 (2008-12-13) – 12 दिसम्बर 2013 (2013-12-12)
पूर्वा धिकारी वसुन्धरा राजे सिंधिया
उत्तरा धिकारी वसुन्धरा राजे सिंधिया
पद बहाल
1 दिसम्बर 1998 (1998-12-01) – 8 दिसम्बर 2003 (2003-12-08)
पूर्वा धिकारी भैरोंसिंह शेखावत
उत्तरा धिकारी वसुन्धरा राजे सिंधिया

पर्यटन और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री
पद बहाल
2 सितम्बर 1982 (1982-09-02) – 7 फ़रवरी 1984 (1984-02-07)
प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी / राजीव गांधी
पद बहाल
३१ दिसम्बर १९८४ – २६ सितम्बर १९८५
प्रधानमंत्री राजीव गांधी

खेल उप केन्द्रिय मंत्री
पद बहाल
७ फ़रवरी १९८४ – ३१ अक्टूबर १९८४
प्रधानमंत्री राजीव गांधी

केन्द्रीय राज्य मंत्री (कपड़ा) स्वतंत्र प्रभार
पद बहाल
२१ जून १९९१ – १८ जनवरी १९९३
प्रधानमंत्री पी वी नृसिम्हा राव

जन्म ३ मई १९५१
महामंदिर, जोधपुर
राजनीतिक दल Hand INC.svg भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
जीवन संगी सुनीता गहलोत
बच्चे वैभव गहलोत
सोनिया गहलोत
धर्म हिन्दू

अशोक गहलोत (जन्‍म 3 मई 1951, जोधपुर राजस्‍थान) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता तथा राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री है [1]। लक्ष्‍मण सिंह गहलोत के घर जन्‍मे अशोक गहलोत ने विज्ञान और कानून में स्‍नातक डिग्री प्राप्‍त की तथा अर्थशास्‍त्र विषय लेकर स्‍नातकोत्‍तर डिग्री प्राप्‍त की। गहलोत का विवाह 27 नवम्‍बर, 1977 को सुनीता गहलोत के साथ हुआ। गहलोत के एक पुत्र वैभव गहलोत और एक पुत्री सोनिया गहलोत हैं। गहलोत को जादू तथा घूमना-फिरना पसन्‍द हैं।[2]

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 श्री अशोक गहलोत

व्यक्तिगत परिचय जन्म तिथि: 3 मई, 1951 पार्टी: इण्डियन नेशनल कांग्रेस (INC)

अपनी सादगी और गांधीवादी मूल्यों के लिए पहचाने जाने वाले श्री अशोक गहलोत का जन्म 3 मई 1951 को जोधपुर राजस्थान में हुआ । स्व. श्री लक्ष्मण सिंह गहलोत के घर जन्मे श्री अशोक गहलोत ने विज्ञान और कानून में स्नातक डिग्री प्राप्त की तथा अर्थशास्त्र विषय लेकर स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। श्री गहलोत का विवाह 27 नवम्बर, 1977 को श्रीमती सुनीता गहलोत के साथ हुआ। श्री गहलोत के एक पुत्र (वैभव गहलोत) और एक पुत्री (सोनिया गहलोत) हैं। श्री गहलोत को जादू तथा घूमना-फिरना पसन्द हैं। श्री गहलोत सच्चे धरती पुत्र हैं। उन्हें फिजूलखर्ची पसन्द नहीं है। वे लोगों की पीड़ा और दुरूख-दर्द जानने के लिए उनसे सीधी मुलाकात करते हैं। श्री गहलोत 24x7 कार्य करने के लिये जाने जाते है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

विद्यार्थी जीवन से ही राजनीति और समाजसेवा में सक्रिय रहे श्री गहलोत 7वीं लोकसभा (1980-84) के लिए वर्ष 1980 में पहली बार जोधपुर संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए। श्री गहलोत एक करिश्माई नेता हैं तथा उन्होंने जोधपुर संसदीय क्षेत्र का 8वीं लोकसभा (1984-1989), 10वीं लोकसभा (1991-96), 11वीं लोकसभा (1996-98) तथा 12वीं लोकसभा (1998-1999) में प्रतिनिधित्व किया।

सरदारपुरा (जोधपुर) विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होने के बाद श्री गहलोत फरवरी, 1999 में 11वीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने । प्रदेश की जनता में लोकप्रिय श्री गहलोत इसी विधानसभा क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा के लिए 2003, 2008, 2013 को निर्वाचित हुए तथा 15वीं राजस्थान विधानसभा के लिए 11/12/2018 को सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से ही पुनरू निर्वाचित हुए ।

केन्द्रीय मंत्री

श्री गहलोत एक सच्चे राजनेता हैं जिन्होंने अपना ध्यान गरीबों के सर्वांगीण विकास पर केन्द्रित रखा। उन्होंने स्व. श्रीमती इन्दिरा गांधी, स्व. श्री राजीव गांधी तथा स्व. श्री पी.वी.नरसिम्हा राव के मंत्रीमण्डल में केन्द्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया । वे तीन बार केन्द्रीय मंत्री बने । जब स्व. श्रीमती इन्दिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं उस समय अशोक गहलोत 2 सितम्बर, 1982 से 7 फरवरी, 1984 की अवधि में श्रीमती इन्दिरा गांधी के मंत्रीमण्डल में पर्यटन और नागरिक उड्डयन उपमंत्री रहे । इसके बाद श्री गहलोत खेल उपमंत्री बनें । उन्होंने 7 फरवरी, 1984 से 31 अक्टूबर 1984 की अवधि में खेल मंत्रालय में कार्य किया तथा पुनरू 12 नवम्बर, 1984 से 31 दिसम्बर, 1984 की अवधि में इसी मंत्रालय में कार्य किया । उनकी पारदर्शी कार्यशैली तथा प्रत्येक विषय-वस्तु को गहराई से जानने की लगन के कारण स्व. श्रीमती इन्दिरा गांधी और स्व. श्री राजीव गांधी जैसे नेता उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करते थे । उनकी इस कार्यशैली को देखते हुए उन्हें केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया । 31 दिसम्बर, 1984 से 26 सितम्बर, 1985 की अवधि में श्री गहलोत ने केन्द्रीय पर्यटन और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया । इसके पश्चात् उन्हें केन्द्रीय कपड़ा राज्य मंत्री बनाया गया । यह मंत्रालय पूर्व में प्रधानमंत्री के पास था तथा श्री गहलोत को इसका स्वतंत्र प्रभार दिया गया । श्री गहलोत इस मंत्रालय के 21 जून, 1991 से 18 जनवरी, 1993 तक मंत्री रहे ।

राजस्थान सरकार में मंत्री

जून, 1989 से नवम्बर, 1989 की अल्प अवधि के बीच श्री गहलोत राजस्थान सरकार में गृह तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मंत्री रहे ।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी /कांग्रेस कार्यकारी कमेटी में भूमिका

जनवरी, 2004 से 16 जुलाई, 2004 तक श्री गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में विशेष आमन्त्रित सदस्य के रूप में कार्य किया और इस पद पर रहते हुए हिमाचल प्रदेश व छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी के रूप में सफलता पूर्वक जिम्मेदारी का निर्वहन किया। 17 जुलाई, 2004 से 18 फरवरी, 2009 तक श्री गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में कार्य किया इस दौरान श्री गहलोत ने उत्तरप्रदेश, दिल्ली, समस्त फ्रन्टल इकाईयों व सेवादल के प्रभारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।श्री गहलोत को 30 मार्च, 2018 को कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के पद पर मनोनीत किया।

महात्मा गांधी के ऐतिहासिक दांडी मार्च के 75 वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस एवं महात्मा गांधी फाउण्डेशन की ओर से आयोजित दांडी यात्रा के समन्वयक के रूप में कार्य करते हुए सफलता पूर्वक सम्पन्न कराया।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल

श्री गहलोत को 3 बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष रहने का गौरव प्राप्त हुआ है। पहली बार श्री गहलोत 34 वर्ष की युवा अवस्था में ही राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बन गये थे । राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उनका पहला कार्यकाल सितम्बर, 1985 से जून, 1989 की अवधि के बीच में रहा । 1 दिसम्बर, 1994 से जून, 1997 तक द्वितीय बार व जून, 1997 से 14 अप्रैल, 1999 तक तृतीय बार वे पुनरू राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर रहे ।

वर्ष 1973 से 1979 की अवधि के बीच श्री गहलोत राजस्थान छैन्प् के अध्यक्ष रहे और उन्होंने कांग्रेस पार्टी की इस यूथ विंग को मजबूती प्रदान की । श्री गहलोत वर्ष 1979 से 1982 के बीच जोधपुर शहर की जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे । इसके अलावा वर्ष 1982 में श्री गहलोत राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (इन्दिरा) के महासचिव भी रहे ।

सामाजिक पृष्ठभूमि

गरीबों और पिछड़े वर्ग की सेवा को तत्पर श्री गहलोत ने पश्चिम बंगाल के बंगांव और 24 परगना जिलों में वर्ष 1971 में बांग्लादेश युद्ध के दौरान आयोजित शरणार्थी शिविरों में काम किया । समाज सेवा में गहरी रूचि रखने वाले श्री गहलोत ने तरूण शान्ति सेना द्वारा सेवाग्राम, वर्धा, औरंगाबाद, इन्दौर तथा अनेक जगहों पर आयोजित शिविरों में सक्रिय रूप से कार्य किया तथा कच्ची बस्ती और झुग्गी क्षेत्रों के विकास के लिए अपनी सेवाएं दी । नेहरू युवा केन्द्र के माध्यम से उन्होंने प्रौढ शिक्षा के विस्तार में उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया । श्री गहलोत सक्रिय रूप से कुमार साहित्य परिषद और राजीव गांधी मेमोरियल बुक-बैंक से जुड़े हुए है ।

श्री गहलोत भारत सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं । यह संस्थान समाज सेवा को समर्पित हैं तथा एम्बूलेन्स सेवा प्रदान करती है । इसके अलावा यह संस्थान राजीव गांधी मेमोरियल बुक बैंक के माध्यम से गरीब छात्रों के लिए निरूशुल्क पुस्तकें उपलब्ध करवाती है । संस्थान ने जोधपुर में राजीव गांधी सेवा सदन में एक वाचनालय भी स्थापित किया है ।

श्री गहलोत राजीव गांधी स्टडी सर्किल, नई दिल्ली के भी अध्यक्ष हैं । यह संस्था देशभर के विश्वविद्यालय/महाविद्यालय के छात्रों एवं शिक्षकों के हितों की देखभाल करती है ।

विदेश यात्रा

श्री गहलोत ने भारतीय प्रतिनिधिमण्डल के सदस्य के रूप में विदेशों में भी भारत का प्रतिनिधित्वकिया है । उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमण्डल के सदस्य के रूप में जनवरी, 1994 में चीन की यात्रा की । श्री गहलोत ने कॉमनवैल्थ यूथ अफेयर्स काउन्सिल के भारतीय प्रतिनिधिमण्डल के नेता के रूप में साइप्रस की यात्रा की । उन्होंने बुल्गारिया जाने वाले भारतीय प्रतिनिधिमण्डल का भी नेतृत्व किया । श्री गहलोत ने बैंकॉक, आयरलैण्ड, फ्रेंकफर्ट, अमेरीका, कनाडा, हांगकांग, यूके, इटली तथा फ्रांस देशों की यात्रा की। मुख्यमंत्री राजस्थान, श्री गहलोत ने 5 केबिनेट मंत्रियों व 5 अधिकारियों के प्रतिनिधिमण्डल के साथ 1-5 जुलाई 2010 के दौरान यू. एस. ए. में अप्रवासी राजस्थानियों की ओर से आयोजित राना कॉन्क्लेव में भाग लिया। उन्होने भारत वापसी के समय दिनांक 6-9 जुलाई 2010 के मध्य इंग्लैण्ड का अल्पावधि का दौरा किया। वहाँ इंग्लैण्ड में रह रहे राजस्थानियों से भेंट की और उद्योगपति श्री एल. एन. मित्तल व श्री अनिल अग्रवाल से प्रदेष के आद्यौगिक विकास के बारे में विचार विमर्श किया। श्री गहलोत ने 25 अप्रैल से 1 मई 2013 तक इजराइल का राजकीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने इजराइल में प्रयोग में लाई जा रही कृषि तकनीकी का अध्ययन किया ताकिउसे राजस्थान में भी लागू किया जा सके। इन यात्राओं से उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों तथा इन देशों के विकास कार्यों को जानने का अवसर मिला ।

सदस्यता

श्री अशोक गहलोत स्वयं को हमेशा जनता के धन और सम्पत्ति का ट्रस्टी मानते हैं । वर्ष 1980 से 1982 के बीच श्री गहलोत पब्लिक एकाउण्ट्स कमेटी (लोकसभा) के सदस्य रहे । श्री गहलोत संचार मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति (10वीं लोकसभा) के सदस्य भी रह चुके हैं । उन्होंने रेल मंत्रालय की स्थाई समिति (10वीं और 11वीं लोकसभा) के सदस्य के रूप में कार्य किया । इसके अलावा श्री गहलोत विदेश मंत्रालय से सम्बद्ध सलाहकार समिति (11वीं लोकसभा) के सदस्य भी रहे हैं ।

मुख्यमंत्री राजस्थान

श्री अशोक गहलोत 01/12/1998 से 08/12/2003 एवं 13/12/2008 से 13/12/2013 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे । उनका यह कार्यकाल अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियों के अलावा अभूतपूर्व सूखा प्रबन्धन, विद्युत उत्पादन, संसाधनों का विकास, रोजगार सृजन, औद्योगिक और पर्यटन विकास, कुशल वित्तीय प्रबन्धन और सुशासन के लिए जाना जाता है ।

मुख्यमंत्री के रूप में श्री गहलोत के पहले कार्यकाल के दौरान राजस्थान में इस सदी का भयंकार अकाल पड़ा । उन्होंने अत्यन्त ही प्रभावी और कुशल ढ़ंग से अकाल प्रबन्धन का कार्य किया । उस समय अकाल प्रभावित लोगों के पास इतना अनाज पहुंचाया गया था जितना अनाज ये लोग शायद अपनी फसलों से भी प्राप्त नहीं कर सकते थे । प्रतिपक्ष भी खाद्यान्न और चारे की अनुपलब्धता के सम्बन्ध में सरकार की तरफ अंगुली तक नहीं उठा सके क्योंकि श्री गहलोत ने व्यक्तिगत रूप से अकाल राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की थी । श्री गहलोत को गरीब की पीड़ा और उसके दुरूख दर्द की अनुभूति करने वाले राजनेता के रूप में जाना जाता है ।

मुख्यमंत्री के दूसरे कार्यकाल के दौरान पचपदरा बाड़मेर में रिफाइनरी, जयपुर मैट्रो रेल, सूरतगढ़ में सुपर थर्मल पावर स्टेशन की दो इकाइयॉ, बाड़मेर लिफ्ट परियोजना, रतलाम से डूंगरपूर वाया बांसवाडा 188 कि.मी. रेल लाईन का निर्माण, बाड़मेर जिले के नागाणा गांव में मंगला टर्मिनल से पाईप लाईन आदि मेगा प्रोजेक्टस प्रारम्भ किये गये। मुख्यमंत्री निरूशुल्क दवा योजना, मुख्यमंत्री निःशुल्क जाँच योजना, वृद्धावस्था तथा एकलनारी (विधवा/परित्यक्ता/तलाकशुदा) पेंशन योजना, राजस्थान जननी शिशु सुरक्षा, सुनवाई का अधिकार अधिनियम, मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना ,राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारन्टी अधिनियम , वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना, उद्योगों के लिए एकल खिड़की योजना,मुख्यमंत्री पशुधन निरूशुल्क दवा योजना एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रारम्भ किया।

जयपुर व जोधपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की। जोधपुर में IIT एवं NIFT उदयपुर में IIM और बीकानेर में पशुधन विष्वविद्यालय की स्थापना की।

उन्होंने ‘ पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ वृक्ष लगाओ, बेटी बचाओ ‘ का नारा दिया जिसे राज्य की जनता ने पूर्ण मनोयोग से अंगीकार किया ।

श्री गहलोत ने 17 दिसम्बर, 2018 को तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण किया।





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नोडल अधिकारी : श्री राजेश सैनी , ओआईसी (कम्प्यूटर प्रकोष्ठ), मु. का. जयपुर| संपर्क : +91-141-2820457 | IP :21061

राजनीतिक पृष्‍ठभूमि[संपादित करें]

विद्यार्थी जीवन से ही राजनीति और समाजसेवा में सक्रिय रहे गहलोत 7वीं लोकसभा (1980-84) के लिए वर्ष 1980 में पहली बार जोधपुर संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए। उन्‍होंने जोधपुर संसदीय क्षेत्र का 8वीं लोकसभा (1984-1989), 10वीं लोकसभा (1991-96), 11वीं लोकसभा (1996-98) तथा 12वीं लोकसभा (1998-1999) में प्रतिनिधित्‍व किया।

सरदारपुरा (जोधपुर) विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होने के बाद गहलोत फरवरी, 1999 में 11वीं राजस्‍थान विधानसभा के सदस्‍य बने। गहलोत पुन: इसी विधानसभा क्षेत्र से 12वीं राजस्‍थान विधानसभा के लिए 04/12/2003 को निर्वाचित हुए तथा 13वीं राजस्‍थान विधानसभा के लिए 08/12/2008 को सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से ही पुन: निर्वाचित हुए। 14 वीं राजस्थान विधानसभा मे पुनः निर्वाचित हुए। 15 वीं राजस्थान विधानसभा मे एक बार फिर निर्वाचित हुए व मुख्यमंत्री बने।

केन्‍द्रीय मंत्री[संपादित करें]

उन्‍होंने इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी तथा पी.वी.नरसिम्‍हा राव के मंत्रिमण्‍डल में केन्‍द्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। वे तीन बार केन्‍द्रीय मंत्री बने। जब इन्दिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं उस समय अशोक गहलोत 2 सितम्‍बर, 1982 से 7 फ़रवरी 1984 की अवधि में इन्दिरा गांधी के मंत्रीमण्‍डल में पर्यटन और नागरिक उड्डयन उपमंत्री रहे। इसके बाद गहलोत खेल उपमंत्री बनें। उन्‍होंने 7 फ़रवरी 1984 से 31 अक्‍टूबर 1984 की अवधि में खेल मंत्रालय में कार्य किया तथा पुन: 12 नवम्‍बर, 1984 से 31 दिसम्‍बर, 1984 की अवधि में इसी मंत्रालय में कार्य किया। उनकी इस कार्यशैली को देखते हुए उन्‍हें केन्‍द्र सरकार में राज्‍य मंत्री बनाया गया। 31 दिसम्‍बर, 1984 से 26 सितम्‍बर, 1985 की अवधि में गहलोत ने केन्‍द्रीय पर्यटन और नागरिक उड्डयन राज्‍य मंत्री के रूप में कार्य किया। इसके पश्‍चात् उन्‍हें केन्‍द्रीय कपड़ा राज्‍य मंत्री बनाया गया। यह मंत्रालय पूर्व प्रधानमंत्री के पास था तथा गहलोत को इसका स्‍वतंत्र प्रभार दिया गया। गहलोत इस मंत्रालय के 21 जून 1991 से 18 जनवरी 1993 तक मंत्री रहे।

राजस्‍थान सरकार में मंत्री[संपादित करें]

जून, 1989 से नवम्‍बर, 1989 की अल्‍प अवधि के बीच गहलोत राजस्‍थान सरकार में गृह तथा जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियां‍त्रिकी विभाग के मंत्री रहे।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी[संपादित करें]

जनवरी, 2004 से 16 जुलाई 2004 तक गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में विशेष आमन्त्रित सदस्‍य के रूप में कार्य किया और इस पद पर रहते हुए हिमाचल प्रदेश व छत्‍तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी के रूप में सफलता पूर्वक जिम्‍मेदारी का निर्वहन किया। 17 जुलाई 2004 से 18 फ़रवरी 2009 तक गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में कार्य किया। इस दौरान गहलोत ने उत्‍तरप्रदेश, दिल्‍ली, समस्‍त फ्रन्‍टल इकाईयों व सेवादल के प्रभारी के रूप में अपनी जिम्‍मेदारी का निर्वहन किया। महात्‍मा गांधी के ऐतिहासिक दांडी मार्च के 75 वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस एवं महात्‍मा गांधी फाउण्‍डेशन की ओर से आयोजित ढाडी यात्रा के समन्‍वयक के रूप में कार्य करते हुए सफलता पूर्वक सम्‍पन्‍न कराया।

राजस्‍थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष के रूप में कार्यकाल[संपादित करें]

गहलोत को 3 बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्‍यक्ष रहने का गौरव प्राप्‍त हुआ है। पहली बार गहलोत 34 वर्ष की युवा अवस्‍था में ही राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष बन गये थे। राजस्‍थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष के रूप में उनका पहला कार्यकाल सितम्‍बर, 1985 से जून, 1989 की अवधि के बीच में रहा। 1 दिसम्‍बर, 1994 से जून, 1997 तक द्वितीय बार व जून, 1997 से 14 अप्रैल 1999 तक तृतीय बार वे पुन: राजस्‍थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष पद पर रहे। वर्ष 1973 से 1979 की अवधि के बीच गहलोत राजस्‍थान NSUI के अध्‍यक्ष रहे और उन्‍होंने कांग्रेस पार्टी की इस यूथ विंग को मजबूती प्रदान की। गहलोत वर्ष 1979 से 1982 के बीच जोधपुर शहर की जिला कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष रहे। इसके अलावा वर्ष 1982 में गहलोत राजस्‍थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (इन्दिरा) के महासचिव भी रहे।

सामाजिक पृष्‍ठभूमि[संपादित करें]

गरीबों और पिछड़े वर्ग की सेवा को तत्‍पर गहलोत ने पश्चिम बंगाल के बंगाँव और 24 परगना जिलों में वर्ष 1971 में बंग्‍लादेश युद्ध के दौरान आयोजित शरणार्थी शिविरों में काम किया। समाज सेवा में गहरी रूचि रखने वाले गहलोत ने तरूण शान्ति सेना द्वारा सेवाग्राम, वर्धा औरंगाबाद, इन्‍दौर तथा अनेक जगहों पर आयोजित शिविरों में सक्रिय रूप से कार्य किया तथा कच्‍ची बस्‍ती और झुग्‍गी क्षेत्रों के विकास के लिए अपनी सेवाएं दी। नेहरू युवा केन्‍द्र के माध्‍यम से उन्‍होंने प्रौढ शिक्षा के विस्‍तार में उन्‍होंने अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दिया। गहलोत सक्रिय रूप से कुमार साहित्‍य परिषद और राजीव गांधी मेमोरियल बुक-बैंक से जुड़े हुए हैं।

गहलोत भारत सेवा संस्‍थान के संस्‍थापक अध्‍यक्ष भी हैं। यह संस्‍थान समाज सेवा को समर्पित हैं तथा एम्‍बूलेन्‍स सेवा प्रदान करती है। इसके अलावा यह संस्‍थान राजीव गांधी मेमोरियल बुक बैंक के माध्‍यम से गरीब छात्रों के लिए नि:शुल्‍क पुस्‍तकें उपलब्‍ध करवाती है। संस्‍थान ने जोधपुर में राजीव गांधी सेवा सदन में एक वाचनालय भी स्‍थापित किया है। गहलोत राजीव गांधी स्‍टडी सर्किल, नई दिल्‍ली के भी अध्‍यक्ष हैं। यह संस्‍था देशभर के विश्‍वविद्यालय/महाविद्यालय के छात्रों एवं शिक्षकों के हितों की देखभाल करती है।

विदेश यात्रा[संपादित करें]

गहलोत ने भारतीय प्रतिनिधिमण्‍डल के सदस्‍य के रूप में विदेशों में भी भारत का प्रतिनिधित्‍व किया है। उन्‍होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमण्‍डल के सदस्‍य के रूप में जनवरी, 1994 में चीन की यात्रा की। गहलोत ने कॉमनवैल्‍थ यूथ अफेयर्स काउन्सिल के भारतीय प्रतिनिधिमण्‍डल के नेता के रूप में साइप्रस की यात्रा की। उन्‍होंने बुल्‍गारिया जाने वाले भारतीय प्रतिनिधिमण्‍डल का भी नेतृत्‍व किया। गहलोत ने बैंकॉक, आयरलैण्‍ड, फ्रेंकफर्ट, अमेरीका, कनाडा, हांगकांग, यूके, इटली तथा फ़्रान्स देशों की यात्रा की। इन यात्राओं से उन्‍हें अन्‍तरराष्‍ट्रीय सम्‍बन्‍धों तथा इन देशों के विकास कार्यों को जानने का अवसर मिला।

सदस्‍यता[संपादित करें]

अशोक गहलोत स्‍वयं को हमेशा जनता के धन ओर सम्‍पत्ति का ट्रस्‍टी मानते हैं। वर्ष 1980 से 1982 के बीच गहलोत पब्लिक एकाउण्‍ट्स कमेटी (लोकसभा) के सदस्‍य रहे। गहलोत संचार मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति (10वीं लोकसभा) के सदस्‍य भी रह चुके हैं। उन्‍होंने रेल मंत्रालय की स्‍थाई समिति (10वीं और 11वीं लोकसभा) के सदस्‍य के रूप में कार्य किया। इसके अलावा गहलोत विदेश मंत्रालय से सम्‍बद्ध सलाहकार समिति (11वीं लोकसभा) के सदस्‍य भी रहे हैं।

मुख्‍यमंत्री राजस्‍थान[संपादित करें]

01/12/1998 से 08/12/2003 तक राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री रहे। उनका यह कार्यकाल अन्‍य महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों के अलावा अभूतपूर्व सूखा प्रबन्‍धन, विद्युत उत्‍पादन, संसाधनों का विकास, रोजगार सृजन, औद्योगिक और पर्यटन विकास, कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन और सुशासन के लिए जाना जाता है। मुख्‍यमंत्री के रूप में गहलोत के पहले कार्यकाल के दौरान राजस्‍थान में इस सदी का भयंकार अकाल पड़ा। उन्‍होंने अत्‍यन्‍त ही प्रभावी और कुशल ढ़ंग से अकाल प्रबन्‍धन का कार्य किया। उस समय अकाल प्रभावित लोगों के पास इतना अनाज पहुँचाया गया था जितना अनाज ये लोग शायद अपनी फसलों से भी प्राप्‍त नहीं कर सकते थे। प्रतिपक्ष भी खाद्यान्‍न और चारे की अनुपलब्‍धता के सम्‍बन्‍ध में सरकार की तरफ अंगुली तक नहीं उठा सके क्‍योंकि गहलोत ने व्‍यक्तिगत रूप से अकाल राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की थी। गहलोत को गरीब की पीड़ा और उसके दु:ख दर्द की अनुभूति करने वाले राजनेता के रूप में जाना जाता है। उन्‍होंने 'पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ' का नारा दिया जिसे राज्‍य की जनता ने पूर्ण मनोयोग से अंगीकार किया। अशोक गहलोत को 13 दिसम्‍बर, 2008 को दूसरी बार राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। 8 दिसम्‍बर, 2013 के चुनावी नतीजों के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा के दिया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. मुख्यमंत्री, राजस्थान - (Rajassembly.nic.in), 13 अगस्त 2018
  2. "अशोक गहलोत: राजस्थान की राजनीति के 'जादूगर'". बीबीसी हिन्दी. २८ नवम्बर २०१३. अभिगमन तिथि २८ नवम्बर २०१३.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]