सरयू

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अयोध्या में सरयू नदी का एक दृश्य

सरयू नदी (अन्य नाम घाघरा, सरजू, शारदा) हिमालय से निकलकर उत्तरी भारत के गंगा मैदान में बहने वाली नदी है जो बलिया और छपरा के बीच में गंगा में मिल जाती है।

अपने ऊपरी भाग में, जहाँ इसे काली नदी के नाम से जाना जाता है, यह काफ़ी दूरी तक भारत (उत्तराखण्ड राज्य) और नेपाल के बीच सीमा बनाती है।

सरयू नदी की प्रमुख सहायक नदी राप्ती है जो इसमें उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बरहज नामक स्थान पर मिलती है। इस क्षेत्र का प्रमुख नगर गोरखपुर इसी राप्ती नदी के तट पर स्थित है और राप्ती तंत्र की अन्य नदियाँ आमी, जाह्नवी इत्यादि हैं जिनका जल अंततः सरयू में जाता है।

बहराइच, सीतापुर, गोंडा, फैजाबाद, अयोध्या, टान्डा, राजेसुल्तानपुर, दोहरीघाट, बलिया आदि शहर इस नदी के तट पर स्थित हैं।

नाम[संपादित करें]

सरयू नदी को इसके ऊपरी हिस्से में काली नदी के नाम से जाना जाता है, जब यह उत्तराखंड में बहती है। मैदान में उतरने के पश्चात् इसमें करनाली या घाघरा नदी आकर मिलती है और इसका नाम सरयू हो जाता है।

ज्यादातर ब्रिटिश मानचित्रकार इसे पूरे मार्ग पर्यंत घाघरा या गोगरा के नाम से प्रदर्शित करते रहे हैं किन्तु परम्परा में और स्थानीय लोगों द्वारा इसे सरयू (या सरजू) कहा जाता है।

इसके अन्य नाम देविका, रामप्रिया इत्यादि हैं।

धार्मिक और मिथकीय उल्लेख[संपादित करें]

सरयू पार करते हुए श्रीराम, सीता और लक्ष्मण - राजा रवि वर्मा द्वारा रचित एक चित्र

यह एक वैदिक कालीन नदी है जिसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। इस संदर्भ में यह वितर्क किया जाता है कई ऋग्वेद में इंद्र द्वारा दो आर्यों के वध की कथा (RV.4.13.18) में जिस नदी के तट पर इस घटना के होने का वर्णन है वह यही नदी है।[1] इसकी सहायक राप्ती नदी के भी अरिकावती नाम से उल्लेख का वर्णन मिलता है।[2]

रामायण की कथा में सरयू अयोध्या से होकर बहती है जिसे दशरथ की राजधानी और राम की जन्भूमि माना जाता है। वाल्मीकि रामायण के कई प्रसंगों में इस नदी का उल्लेख आया है। उदाहरण के लिये, विश्वामित्र ऋषि के साथ शिक्षा के लिये जाते हुए श्रीराम द्वारा इसी नदी द्वारा अयोध्या से इसके गंगा के संगम तक नाव से यात्रा करते हुए जाने का वर्णन रामायण के बाल काण्ड में मिलता है।[3] कालिदास के महाकाव्य रघुवंशम् में भी इस नदी का उल्लेख है।[4]बाद के काल में रामचरित मानस में तुलसीदास ने इस नदी का गुणगान किया है।[5]

बौद्ध ग्रंथों में इसे सरभ के नाम से पुकारा गया है। कनिंघम ने अपने एक मानचित्र पर इसे मेगस्थनीज द्वारा वर्णित सोलोमत्तिस नदी (Solomattis River) के रूप में चिन्हित किया है और ज्यादातर विद्वान टालेमी इसे द्वारा वर्णित सरोबेस (Sarobes) नदी के रूप में मानते हैं।[6][7]

पर्यावरणीय दशा[संपादित करें]

सरयू नदी तंत्र की नदियों का काफ़ी जल सिंचाई परियोजनाओं द्वारा नहरों के लिये फीडर पम्पों और बाँधों के माध्यम से निकाला जाता है। उदाहरण के लिये शारदा नहर परियोजना भारत की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। अतः इस नदी का जल प्राकृतिक अपवाह से काफ़ी कम हो चुका है और यह नदी भी अपनी प्राकृतिक जलजीवों के लिये सुरक्षित नहीं रह गयी है।[8] शिंशुमार या स्थानीय भाषा में सूँस इस नदी के सर्वाधिक प्रभावित जंतु हैं जिनकी आबादी समाप्ति के खतरे से जूझ रही है।

महत्व[संपादित करें]

सरयू नदी पर उत्तराखण्ड में टनकपुर के पास बाँध बनाकर शारदा नहर निकाली गई है। यह भारत की सर्वाधिक बड़ी नहर प्रणालियों में से एक है। अन्य कई स्थानों पर फीडर पम्प द्वारा नहरें निकाली गयी हैं जिन्हें शारदा सहायक के नाम से जाना जाता है। दोहरी घाट,बिल्थरा रोड तथा राजेसुल्तानपुर नामक स्थानों से ऐसी सहायक नहरें निकाली गई हैं।

राजेसुल्तानपुर अम्बेडकर नगर के पश्चिम में अवस्थित ग्राग अहिरौलीरानीमऊ होकर बभनपुरा में नहर का पानी सरयू की सहायक नदी

पिकिया नदी में जादा होने पर गिराने हेतु बना था ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. David Frawley, Gods, Sages and Kings: Vedic Secrets of Ancient Civilization
  2. Kapoor, Subodh. Encyclopaedia of Ancient Indian Geography. Google books. http://books.google.co.in/books?id=43Fzt-G_-XYC&pg=PA6&lpg=PA6&dq=Aciravati&source=bl&ots=Cz895bNylA&sig=IWOBCViVlpAFRBjLEvOSWWXyydU&hl=en&ei=UoNsTITBNMSecf7arYYB&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CC0Q6AEwAw#v=onepage&q=Aciravati&f=false. अभिगमन तिथि: 2014-07-14. 
  3. रामायण- बालकाण्ड, सर्ग २४ (अंग्रेजी अनुवाद)
  4. राम गोपाल, Kālidāsa: His Art and Culture
  5. 'त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरूप सिंधु समुहानी’
  6. Rivers in Mythology
  7. Hydrology and Water Resources of India
  8. प्रियंका प्रियम तिवारी, सरयू नदी भी खतरे में इण्डिया वाटर पोर्टल से