बहराइच

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बहराइच
Bahraich
बहराइच की उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
बहराइच
बहराइच
उत्तर प्रदेश में स्थिति
सूचना
प्रांतदेश: बहराइच ज़िला
उत्तर प्रदेश
Flag of India.svg भारत
जनसंख्या (2011): 1,86,223
मुख्य भाषा(एँ): हिन्दी
निर्देशांक: 27°34′30″N 81°35′38″E / 27.575°N 81.594°E / 27.575; 81.594

बहराइच (Bahraich) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच ज़िले में स्थित एक नगर है। यह उस ज़िले का मुख्यालय भी है। बहराइच पूर्व-मध्य उत्तर प्रदेश और नेपाल के नेपालगंजलखनऊ के बीच रेलमार्ग पर स्थित है। तहसील और 14 विकास खंड (ब्लाॅक) हैं।[1][2]

बहराइच जिले की तहसीलें[संपादित करें]

बहराइच, कैसरगंज, (तहसील), बहराइच, नानपारा, (तहसील), बहराइच, महसी (तहसील), बहराइच,पयागपुर (तहसील) बहराइच ,

बहराइच जिले के ब्लाॅक[संपादित करें]

हुजूरपुर, शिवपुर, महसी, फखरपुर, जरवल कस्बा, पयागपुर, कैसरगंज, तजवापुर, नवाबगंज, चित्तौरा, मिहींपुरवा, विशेश्वरगंज, रिसिया,बलहा।

इतिहास[संपादित करें]

बहराइच को भगवान ब्रह्मा की धरती भी कहा जाता है। बहराईच का पुराना नाम भरराईच था ।जो भर/ राजभर राजाओ का साम्राज्य हुवा करता था। बहराईच के चकदा डीह महाराज सुहेलदेव राजभर जी का किला था। 9वीं सदी में बहराइच पर शासन करने वाले महाराजा त्रिलोकचंद्र अर्कवंशी ने बहराइच में एक विशाल सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था। उनके द्वारा बनवाए गए इस मंदिर को बालार्क मंदिर का नाम दिया गया था। महाराजा त्रिलोकचंद्र अर्कवंशी ने ही बहराइच से अपनी सेना लेकर दिल्ली के शासक को युद्ध में हराया था जिसके बाद महाराजा त्रिलोकचंद्र अर्कवंशी ने दिल्ली पर अपना शासन स्थापित किया और इनकी 9 पीढ़ियों ने दिल्ली पर शासन किया। 14वीं सदी में इस्लामिक आक्रमणकारी तुगलक ने इस भव्य और हिंदूओं के मंदिर को तुड़वा डाला और इस हिंदू मंदिर की जगह सैय्यद सलार मसूद गाजी की दरगाह बनवा दी। इस हमलावर सैय्यद सलार मसूद गाजी को बहराइच में राज कर रहे महाराजा सुहेलदेव भारशिव ने मौत के घाट उतार दिया था। इसका वर्णन मिरात ए मसूदी में भी किया गया है। यह युद्ध सन् 1034 ई0 के आस पास लड़ा गया था जिसमें 17 हिंदू राजाओं ने संगठित होकर महाराजा सुहेलदेव भारशिव के नेतृत्व में सैय्यद सलार मसूद गाजी की इस्लामी जिहाद की 1,50,000 (डेढ़ लाख) सेना को गाजर मूली की तरह काट डाला था। आज उसी बालार्क मंदिर जिसे महाराजा त्रिलोकचंद्र अर्कवंशी ने बनवाया था उसे तोड़कर उसकी जगह इस सैय्यद सलार मसूद गाजी की दरगाह बना दी गई है।

व्यापार[संपादित करें]

बहराइच नेपाल के साथ होने वाले व्यापार जिनमें कृषि उत्पाद और इमारती लकड़ी प्रमुख है, का केंद्र है। यहाँ चीनी की मिलें भी हैं।

कृषि[संपादित करें]

इसके आसपास के कृषि क्षेत्र में धान, मकई, गेहूँ और चना (सफ़ेद चना) उगाया जाता है। यहां गन्ना भी मुख्य रूप से उगाया जाता है।

दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

  • सिद्धनाथ मंदिर पांडव कालीन मंदिर है जो बहराइच शहर के बीचोबीच स्थित है।

यहाँ वर्ष में 2 बड़े उत्सव - भाद्रपद में कजरीतीज और होली से पहले महाशिवरात्री मनाए जाते हैंं। इनमेंं दूर-दूर से भक्त कांवर यात्रा ले कर आते है और जलाभिषेक करते हैंं।

  • कतरनिया घाट: सरकार द्वारा घोषित संरक्षित वन क्षेत्र है।
  • यहाँँ पर गोलवा घाट पुल के पास ही एक मरीमाता मंदिर भी है।
  • यहाँ से नेपाल बॉर्डर भी पास है

जनसंख्या[संपादित करें]

2001 की जनगणना के अनुसार बहराइच नगर की जनसंख्या 161376 है और ज़िले की कुल जनसंख्या 23,84,2439 है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
  2. "Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975