फल्गू नदी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
फल्गू नदी
Phalgu River
Phalgu or Falgu River.JPG
गया, बिहार में फल्गू नदी
स्थान
देश  भारत
राज्य बिहार
नगर गया
भौतिक लक्षण
नदीशीर्षलीलाजन नदी और मोहाना नदी का संगम
 • स्थानगया के समीप
 • निर्देशांक24°43′41″N 85°00′47″E / 24.72806°N 85.01306°E / 24.72806; 85.01306
नदीमुख पुनपुन नदी
जलसम्भर लक्षण

फल्गू नदी (Phalgu river) भारत के बिहार राज्य में बहने वाली एक नदी है। यह गया के पवित्र नगर से गुज़रती है और इस नदी का हिन्दूबौद्ध धर्मों में महत्व है। भगवान विष्णु का विष्णूपाद मंदिर इसके किनारे खड़ा है। यह नदी गया के समीप लीलाजन नदी और मोहाना नदी के संगम से आरम्भ होती है और इसकी धाराएँ अंत में पुनपुन नदी में विलय हो जाती हैं, जो स्वयं गंगा नदी की एक उपनदी है।[1][2]

विवरण[संपादित करें]

फल्गु नदी झारखण्ड के पलामू जिले से निकली हैं।[3] फल्गु नदी जहानाबाद जिले में जाकर अपना प्रवाह पूरा करती है। यह नदी बिहार में गंगा नदी में मिल जाती है। फल्गु नदी पे बहुत सारे बांध है जैसे कि घोड़ा बांध, उदेरास्थान बांध। यह नदी बिहार में दरियापुर,सुकियावा,कैरवा,शर्मा होते हुए मोकामा टाल में समाप्त हो जाती है।

यह नदी छोटा नागपुर के पठार से निकलती है, यह निरंजना के नाम से भी बिहार में प्रसिद्ध है पौराणिक दृष्टिकोण से यह पवित्र माना जाता है,इस नदी का वर्णन वायु पुराण में भगवान विष्णु के छवि दर्शन का उल्लेख किया गया है। यह नदी हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मृत आत्मा की शांति के लिए बिहार के गया जिला में पिंड दान एवं दुग्ध अर्पण के लिए महत्वपूर्ण एवं धार्मिक माना जाता है। यह बिहार के बोधगया के समीप दो अन्य नदियां यथा मोहना एवं लीलाजन नदी के साथ मिलकर अपवाह क्षेत्र टाल में फैलती हुई गंगा में विलीन हो जाती है।। बिहार में फल्गु नदी की लंबाई लगभग 235 किलोमीटर है। बिहार की पौराणिक पर्व यानी सूर्य-उपासना अर्थात छठ पूजा में इस नदी में बिहार की महिलाएं दुग्ध-अर्पण,अन्न-अर्पण, के साथ-साथ व्रत एवं छठी मैया की आराधना करते हैं। बिहार विश्व का एक ऐसा क्षेत्र माना जाता है जहां प्रकृति ऊर्जा बहुल स्रोत सूर्य देवता की पूजा करते हैं यहां के लोग बरे ही उद्यमी एवं मेहनती होते हैं ।यहां के लोग सूर्य को देवता मानते हैं लोगों के द्वारा उपजाया गया अनाज प्रयोग करने से पहले छठ पर्व के दिन अर्पित करते हैं । यह पौराणिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सभ्यता का प्रतीक है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Tourism and Its Prospects in Bihar and Jharkhand Archived 2013-04-11 at the Wayback Machine," Kamal Shankar Srivastava, Sangeeta Prakashan, 2003
  2. "Bihar Tourism: Retrospect and Prospect Archived 2017-01-18 at the Wayback Machine," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999
  3. "Bengal District Gazaetter - Gaya By L.S.S. O'malley". pp. 8-9. Google books. अभिगमन तिथि 2010-05-05.