फल्गू नदी

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फल्गु नदी झारखण्ड के पलामू जिले से निकली हैं।[1] फल्गु नदी जहानाबाद जिले में जाकर अपना प्रवाह पूरा करती है। यह नदी बिहार में गंगा नदी में मिल जाती है। फल्गु नदी पे बहुत सारे बांध है जैसे कि घोड़ा बांध, उदेरास्थान बांध। यह नदी बिहार में दरियापुर,सुकियावा,कैरवा,शर्मा होते हुए मोकामा टाल में समाप्त हो जाती है।

यह नदी छोटा नागपुर के पठार से निकलती है, यह निरंजना के नाम से भी बिहार में प्रसिद्ध है पौराणिक दृष्टिकोण से यह पवित्र माना जाता है,इस नदी का वर्णन वायु पुराण में भगवान विष्णु के छवि दर्शन का उल्लेख किया गया है। यह नदी हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मृत आत्मा की शांति के लिए बिहार के गया जिला में पिंड दान एवं दुग्ध अर्पण के लिए महत्वपूर्ण एवं धार्मिक माना जाता है। यह बिहार के बोधगया के समीप दो अन्य नदियां यथा मोहना एवं लीलाजन नदी के साथ मिलकर अपवाह क्षेत्र टाल में फैलती हुई गंगा में विलीन हो जाती है।। बिहार में फल्गु नदी की लंबाई लगभग 235 किलोमीटर है। बिहार की पौराणिक पर्व यानी सूर्य-उपासना अर्थात छठ पूजा में इस नदी में बिहार की महिलाएं दुग्ध-अर्पण,अन्न-अर्पण, के साथ-साथ व्रत एवं छठी मैया की आराधना करते हैं। बिहार विश्व का एक ऐसा क्षेत्र माना जाता है जहां प्रकृति ऊर्जा बहुल स्रोत सूर्य देवता की पूजा करते हैं यहां के लोग बरे ही उद्यमी एवं मेहनती होते हैं ।यहां के लोग सूर्य को देवता मानते हैं लोगों के द्वारा उपजाया गया अनाज प्रयोग करने से पहले छठ पर्व के दिन अर्पित करते हैं । यह पौराणिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सभ्यता का प्रतीक है।।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Bengal District Gazaetter - Gaya By L.S.S. O'malley". pp. 8-9. Google books. अभिगमन तिथि 2010-05-05.