उलूक

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उलूक गंधार नरेश शकुनि व रानी ‍आरशी का पुत्र था। कुरुक्षेत्र का युद्ध आरंभ होने से पूर्व उसे अंतिम संरेशवाहक के रूप में पाण्डवों को धमकाने के लिए भेजा गया और उसने उपपलव्य जाकर पाण्डवों को दुर्योधन का अपमानजनक संदेश सुनाया।[1]

उलूक का वध नकुल ने १४ वें दिन किया था। उसके अन्य भाइयों का वध अभिमन्यु द्वारा किया गया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. https://sa.wikisource.org/wiki/महाभारतम्-05-उद्योगपर्व-163

बाहरी सम्पर्क[संपादित करें]