अधिरथ

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ये महाभारत में वर्णित पाँडव-माता कुंती के विवाह पूर्व भगवान सूर्य से उत्पन्न पुत्र कर्ण को पालने वाले पिता थे। अधिरथ अंग वंश में उत्पन्न सत्कर्मा के पुत्र थे। इनकी पत्नी का नाम राधा था। संजय से पहले ये धृतराष्ट्र के सखा और सारथी थे। कर्ण के जन्म ग्रहण करते ही कुन्ती ने उन्हें एक मंजूषा में रखकर गंगा में प्रवाहित कर दिया। यह पेटी अधिरथ और राधा को गंगा में जल-क्रीडा करते समय मिली। दम्पति निस्सन्तान थे, अत: कर्ण का पुत्र की भाँति भरण-पोषण किया। कर्ण को पाल-पोसकर इन्होंने ही बड़ा किया था।

व्यवसाय[संपादित करें]

व्यवसाय एवं जाति से ये सूत या सारथि थे व हस्तिनापुर नरेश महाराज धृतराष्ट्र के यहाँ कार्यरत थे।