सात्यकि

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सात्यकि महाभारत में एक वीर जो यादवो का सेनापति था।

सात्यकि, शिनि का पुत्र जिसको 'दारुक', 'युयुधान' तथा 'शैनेय' भी कहते हैं। द्वारका में श्रीकृष्ण की सेना के एक अधिकारी सत्यक के पुत्र होने से इसका नाम सात्यकि पड़ा। इसने अर्जुन से धनुर्विद्या सीखी थी और महाभारत के समय श्रीकृष्ण की पूरी सेना ने कौरवों की तरफ से युद्ध किया परंतु गुरु (अर्जुन) विरुद्ध युद्ध ना करने की प्रार्थना को श्रीकृष्ण ने स्वीकार कर सात्यकि को पांडवों की ओर से युद्ध की अनुमति दी थी श्रीकृष्ण का सारथी और नातेदार था। पांडवों की ओर से लड़ा और द्वारका के कृतवर्म को मार डाला जिसके कारण कृतवर्म के मित्रों ने इसकी हत्या कर डाली। सात्यकि महाभारत में अर्जुन के कारण जीवित बचा रहा, उसकी म‌त्यु बाद में यादवों के आपसी युद्ध में हुई।