उग्रश्रव सौती

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उग्रश्रव सौती या उग्रश्रवः पौराणिक काल के भाट थे जिन्होंने महाभारत,[1]भगवत पुराण,[2][3]हरिवंश,[4] और पद्म पुराण[5] का विमोचन किया था और उनका व्याखान मूलतः नैमिषारण्य में ऋषि-मुनियों के सामने किया था। जब ऋषि वैशम्पायन ने जनमेजय को भरत से लेकर कुरुक्षेत्र युद्ध तक कुरु वंश का सारा वृत्तांत सुनाया, उस समय सौती वहीं मौजूद थे। उन्होंने भी यह महाकाव्य सुना और नैमिषारण्य में जाकर सारे ऋषि समूह, जो शौनक ऋषि के आश्रम में एकत्रित हुये थे, को सुनाया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Winternitz, Moriz; V. Srinivasa Sarma (1996). A History of Indian Literature, Volume 1. Motilal Banarsidass Publ. पृ॰ 303. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-208-0264-3. अभिगमन तिथि 2012-05-10.
  2. Hiltebeitel, Alf (2001). Rethinking the Mahābhārata: a reader's guide to the education of the dharma king. University of Chicago Press. पृ॰ 282. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-226-34054-8.
  3. Hudson, D. Dennis; Margaret H. Case (2008). The body of God: an emperor's palace for Krishna in eighth-century Kanchipuram. Oxford University Press. पृ॰ 609. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-19-536922-9.
  4. Matchett, Freda (2001). Krishna, Lord or Avatara?: the relationship between Krishna and Vishnu. Routledge. पृ॰ 36. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-7007-1281-6.
  5. Winterlitz, p. 513.