हदीस

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एक हदीस (अरबी: حديثहदीस या हदीथ[1], बहुवचन: أحاديث अहादीस [2]), पैग़म्बर मुहम्मद के कथनों, कार्यों या आदतों का वर्णन करने वाले विवरण या रिपोर्ट को कहते हैं। [2] यह शब्द अरबी भाषा से आता है और इसके अर्थ "रिपोर्ट (विवरण)", "लेखा" या "रिवायत" हैं। क़ुरआन से अलग, एक समान साहित्यिक काम जो सभी मुस्लिमों द्वारा मान्यता प्राप्त है। हदीस इकलौता संग्रह नहीं हैं।

अहादीस अलग-अलग हदीसों के संग्रह को दर्शाता है, और इस्लाम की विभिन्न शाखाएं (सुन्नी, शिया) हदीसों के विभिन्न संग्रहों से परामर्श (हवाला) लेती हैं जबकि क़ुरआनीयत का एक अपेक्षाकृत छोटा पक्ष किसी भी हदीस संग्रह के प्रमाण को पूरी तरह से अस्वीकार करता हैं।[3][4]

परिचय[संपादित करें]

इस्लाम धर्म और दुनिया के सभी मुसलमानो के लिए पवित्र क़ुरआन के बाद सबसे ज़्यादा महत्व अगर किसी किताब का है तो हदीसों का हैं, कुछ के लिए ये क़ुरआन जितनी ही महत्व रखती हैं जो ये मानते हैं कि पैगम्बर मुहम्मद का हर कथन हर बात उनकी एक ईश्वरीय सन्देश हैं जिसके बिना क़ुरआन समझना संभव नहीं यानि उनकी बातें क़ुरआन की व्यहवारिक विस्तार में समझ है।

इस्लाम और एक उसकी के मूल ग्रंथ क़ुरआन में अधिकतर विषयों पर जो आदेश-निर्देश, सिद्धांत, नियम, क़ानून, शिक्षाएँ, पिछली क़ौमों के वृत्तांत, रसूलों के आह्नान और सृष्टि व समाज से संबंधित बातों तथा एकेश्वरत्व के तर्क, अनेकेश्वरत्व के खंडन और परलोक-जीवन आदि की चर्चा हुई है, वह संक्षेप में है। इन सब की विस्तृत व्याख्या का दायित्व इस्लाम के अनुसार ईश्वर ने पैग़म्बर पर रखा।

हदीसों का प्रसार[संपादित करें]

हज़रत पैगम्बर मुहम्मद के समय उनके साथ रहने वाले उनके साथी उनकी बातें उनके तरीके लिख लिया या याद कर लिया करते थे इसी को हदीस कहा गया , बाद में हदीस और फ़िक़ह के जानकार इमामों ने इन हदीसो को संग्रह कर के एक जगह ला दिया।

इस्लाम का हज़रत मुहम्मद के रसूल बनने के साथ उसके विशुद्ध रूप में जब पुनः आगमन हुआ, उससे पहले के धर्म-ग्रथों में जो विकार आ गया था, उसके कई कारणों में से एक यह भी था कि ईश-वाणी, रसूल के कथन और दूसरे इन्सानों व धर्माचार्यों, उपदेशकों, वाचकों, सुधारकों और धर्मविदों आदि के कथन भी आपस में मिल-जुल गए। ईशवाणी और मनुष्य-वाणी के मिश्रण में, मूल ईश-ग्रंथ कितना है और इसके अंश कौन-कौन से हैं, यह पता लगाना असंभव हो गया था। पैग़म्बर के साथी हज़रत अबू सलमा की बयान की गई एक हदीस के मुताबिक़ आप ने हदीस-वर्णनकर्ताओं को सख़्त चेतावनी दी थी कि

‘‘जो व्यक्ति मुझ से संबंध लगाकर वह बात कहे जो मैंने नहीं कही, वह अपना ठिकाना जहन्नम (नर्क) में बना ले।’’
—हज़रत मुहम्मद, हज़रत अबू सलमा की बयान की गई एक हदीस

हदीस-संग्रह[संपादित करें]

हदीस के निम्नलिखित छः विश्वसनीय संग्रह हैं जिनमें 29,578 हदीसें संग्रहित हैं :

  1. सहीह बुख़ारी : संग्रहकर्ता—अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद-बिन-इस्माईल बुख़ारी, हदीसों की संख्या—7225
  2. सहीह मुस्लिम : संग्रहकर्ता—अबुल-हुसैन मुस्लिम बिन अल-हज्जाज, हदीसों की संख्या—4000
  3. सुनन अल-तिर्मिज़ी : संग्रहकर्ता—अबू-ईसा मुहम्मद-बिन-ईसा तिर्मिज़ी, हदीसों की संख्या—3891
  4. सुनन अबू-दाऊद : संग्रहकर्ता—अबू-दाऊद सुलैमान-बिन-अशअ़स सजिस्तानी, हदीसों की संख्या—4800
  5. सुनन इब्ने माजह : संग्रहकर्ता—मुहम्मद-बिन-यज़ीद-बिन-माजह, हदीसों की संख्या—4000
  6. सुनन अन-नसाई : संग्रहकर्ता—अबू-अब्दुर्रहमान-बिन-शुऐब ख़ुरासानी, हदीसों की संख्या—5662

हदीस साहित्य[संपादित करें]

हदीसों के संग्रह सामान्यतः विषयों के आधार पर अध्यायीकरण करके संकलित किए गए हैं, ये विषय जीवन के हर पहलू, हर क्षेत्र पर आधारित हैं। इन संग्रहों के बाद बहुत ही बड़े पैमाने पर इन (में उल्लेखित) हदीसों की व्याख्या पर व्यापक साहित्य तैयार किया गया है। फिर, विभिन्न विषयों को समाहित करने वाली पुस्तकें तैयार की गई है। इस प्रकार एक विशाल हदीस-साहित्य तैयार हो चुका है। ये संग्रह व साहित्य इस्लामी विद्यालयों के पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंश होते हैं। गोष्ठियों, बैठकों, सभाओं में पूरे विश्व में हदीस पाठ (दर्स-ए-हदीस) के प्रयोजन किए जाते हैं। इस तरह हदीस का ज्ञान और उसकी शिक्षाएँ मुस्लिम समाज में निरन्तर प्रवाहित होती रहती हैं।[5]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. साँचा:Dictionary.com
  2. Brown, Jonathan A.C. (2009), पृ॰ 3.
  3. Aisha Y. Musa, The Qur’anists, Florida International University, accessed May 22, 2013.
  4. Neal Robinson (2013), Islam: A Concise Introduction, Routledge, ISBN 978-0878402243, Chapter 7, pp. 85-89
  5. http://www.islamdharma.org/article.aspx?ptype=A&menuid=26