इस्लामी आतंकवाद

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२००१ से २०१४ के बीच इस्लामी आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्र

अपने को 'मुसलमान' कहने वाले चरमपंथियों द्वारा किये गये आतंक को इस्लामी आतंकवाद कहते हैं। ये तथाकथित मुसलमान भांति-भांति के राजनीतिक तथा/या मजहबी उद्देश्यों की पूर्ति के लिये आतंक फैलाते हैं।

इस्लामी आतंकवाद मध्य पूर्व, अफ्रीका, यूरोप, दक्षिणपूर्व एशिया, भारत एवं अमेरिका में बहुत दिनों से मौजूद है। आतंकी संगठनों में ओसामा बिन लादेन द्वारा स्थापित अल कायदा नामक सैनिक संगठन कुख्यात है।

आतंक का अर्थ होता है घबराहट , डर , भय अब यदि आतंक के साथ वादी लगा दिया जाये तो वो आतंकवादी बन जाता है यानि भय का जन्म दाता , डर को बढ़ावा देने वाला लोगों में अपना डर पैदा करने वाला ही आतंकवादी कह लाता है निर्दोष लोगों की हत्या करने वाला आतंकवादी कहलाता है अब प्रश्न यह पैदा हो जाता है के आखिर मुसलमान ही आतंकवादी कैसे ?

यहाँ पर मैं समझाने के लिए अतंकवादियो को श्रेणी में बाँट रहा हूँ– यदि कोई महिला घरेलु हिंसा की शिकार होती है तो उस के लिए उसका पति आतंकवादी है। यदि किसी महिला का बलात्कार किया जाता है तो उस के लिए बलात्कारी आतंकवादी है। यदि किसी महिला को बस, ऑफिस या रस्ते में छेड़खानी की जाती है तो उस के लिए छेड़खानी करने वाला आतंकवादी है। यदि कोई मनुष्य किसी की हत्या करता है तो वो हत्यारा उस के लिए आतंकवादी है। यदि कोई मनुष्य सरकार के खजाने से चोरी करें तो वो देश के लिए आतंकवादी है। यदि कोई मनुष्य भड़काओ, आपत्ति जनक भाषा का प्रयोग करके लोगों की भावनाओ को ठेस पहुचाये वो भी आतंकवादी है। यदि कोई किसी विशेष धर्म के पर किसी भी प्रकार का हमला करे वो आतंकवादी है। यदि कोई व्यक्ति अपने देश के संविधान का पालन न करें वो भी आतंकवादी है आदि।

यदि हम यह कहें के आतंकवादी केवल खून बहाना जनता है तो ऐसा नही है आतंकवादी दो प्रकार के होते हैं। एक वो जो केवल खून बहाना जानते है भले ही उनके सामने कोई बच्चा आ जाये या बूढ़ा या जवान या हिन्दू हो या मुस्लमान या ईसाई। यह कहना ग़लत न होगा के आतंकवादी मानवता के दुश्मन होते हैं इन का कोई धर्म नही होता इनका सिर्फ खून बहाने का धर्म होता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]