अल्लाह

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(इस्लाम में ईश्वर से अनुप्रेषित)
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अल्लाह (अरबी: الله ، अल्लाह्) अरबी भाषा का शब्द है ।जिसका उपयोग अन्य भाषा में खुदा/रब/मालिक के लिये किया जाता है शब इसे मुख्यतः मुसलमानों और अरब ईसायों द्वारा एक रब का उल्लेख करने के लिये प्रयोग में लिया जाता है। जिसे फ़ारसी में ख़ुदा भी कहा जाता है।

अल्लाह शब्द अरबी भाषा के दो शब्दों अल-इलाह से मिलकर बना है। अल शब्द को वैसे ही इस्तेमाल करते हैं जैसे अंग्रेज़ी का शब्द ‘The’. इलाह का मतलब होता है ख़ुदा/मालिक/रब /सर्व शक्तिमान

अल्लाह शब्द एक सृजनकर्ता या पालनहार के लिए इस्तेमाल होता था। इसे हिंदुओं द्वारा प्रचलित शब्द "दुनिया बनाने वाला मालिक" के उदाहरण से समझ सकते हैं।

इस्लाम में अल्लाह को लेकर धारणा[संपादित करें]

इस्लाम का सबसे पहला स्तम्भ कलमा तय्यिबा है... ला इलाहा इल अल्लाह मुहम्मदुर्रसूल अल्लाह....यानि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नही और हज़रत मुहम्मदﷺ अल्लाह के बंदे और रसूल है

इस्लाम मे आने के लिए सबसे पहले अपनी जबान और सच्चे दिल से कलमा तय्यिबा की गवाही देनी पड़ती है यानि दिल से स्वीकार करना पड़ता है

यह इस्लाम सबसे बड़ा बुनियादी विचार है और सभी मुसलमानो का अल्लाह के बारे मे ये विचार/अक़ीदा है... अगर इन मे से किसी मे भी थोड़ा सा शक होते ही इंसान इस्लाम से बाहर हो जाएगा यानि वो मुस्लमान नही रहेगा... वो बातें निम्नलिखित है 👇


.अल्लाह सिर्फ एक है।पाकऔर बे आईव है कोई उसके जैसा नहीं है...


ना ज़ात(अस्तित्व, हस्ती वाला ) में,

ना सिफात(quality attribut,e) में

ना अफआल(काम ) में,

ना अहकाम(आदेश, नियम) में,

ना इसमा(नाम )में।



नाज़ात(अस्तित्व, हस्ती वाला ) में,

ना सिफात(quality attribute) में

ना अफआल(काम ) में,

ना अहकाम(आदेश, नियम) में,

ना इसमा(नाम )में।

्युत्पत्ती[संपादित करें]

अरबी अक्षरों से बना शब्द "अल्लाह":
1. अलीफ़
2. हम्ज़ा वस्ल (همزة وصل)
3. लाम
4. लाम
5. षद्दा (شدة)
6. अलीफ़ (ألف خنجرية)
7. ह्

शब्द अल्लाह अरबी शब्द है। अरबी के इलावा अरहमिक, इब्रानी और अन्य सेमेटिक भाषाओं में भी यह शब्द अल्लाह देखा जा सकता है। क़ुरान के अवतरण के पहले से ही यह शब्द प्रयोग में रहा है। हज़रत मुहम्मद सल्लाहु अलेयही वस्सलम के पिता का नाम अब्दुल्लाह रदीयल्लाहु अन्ह् था यानी "अल्लाह का बन्दा"। हज़रत मुहम्मद सल्लाहु अलेयही वस्सलम पैदा होने से पह्ले ही अब्दुल्ला रदीयल्लाहु अन्ह् का देहांत हो गया था। इस का मतलब यह है कि अल्लाह शब्द मुहम्मद या क़ुरान के आने बाद का नहीं है बल्कि पहले का ही है।

अल्लाह शब्द अल + इलाह शब्दों से बना है। इलाह शब्द का अर्थ सेमेटिक भाषाओं में ओर इब्रानी भाषा और पवित्र ग्रन्थों में भी देखा जा सकता है, जिस का अर्थ स्थूल रूप से "ईश्वर" है अल्लाह का मतलब होता है कि इसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं ।

प्रयोग[संपादित करें]

इस्लामिक अरब के पूर्व[संपादित करें]

अल्लाह शब्द के क्षेत्रीय रूप बुतपरस्त और ईसाई पूर्व-इस्लामिक दोनों शिलालेखों में पाए जाते हैं। पूर्व-इस्लामिक बहुसंख्यकवाद में अल्लाह की भूमिका के बारे में विभिन्न सिद्धांतों का प्रस्ताव किया गया है। कुछ लेखकों ने सुझाव दिया है कि बहुदेववादी अरबों ने नाम का उपयोग एक निर्माता देवता या उनके देवता के सर्वोच्च देवता के संदर्भ के रूप में किया है। [२३] [२४] हो सकता है कि यह शब्द मेककन धर्म में अस्पष्ट हो।[1] एक परिकल्पना के अनुसार, जो जूलियस वेलहॉसेन पर वापस जाता है, अल्लाह (कुरैशी के आसपास के आदिवासी महासंघ का सर्वोच्च देवता) एक ऐसा पदनाम था, जिसने अन्य देवताओं के मुकाबले हुबल (कुरैश के सर्वोच्च देवता) की श्रेष्ठता को संरक्षित किया था। [8] हालांकि, इस बात के भी प्रमाण हैं कि अल्लाह और हुबल दो अलग-अलग देवता थे। [evidence] उस परिकल्पना के अनुसार, काबा को पहले अल्लाह नाम के एक सर्वोच्च देवता के रूप में अभिषेक किया गया था और फिर मुहम्मद सल्लाहु अलेयही वस्सलम के समय से लगभग एक शताब्दी पहले मक्का की उनकी विजय के बाद कुरैशी के पैन्थियन की मेजबानी की गई थी। []] कुछ शिलालेख सदियों पहले एक बहुदेववादी देवता के नाम के रूप में अल्लाह के उपयोग को इंगित करते प्रतीत होते हैं, लेकिन हम इस उपयोग के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं। [indicate] कुछ विद्वानों ने सुझाव दिया है कि अल्लाह ने एक दूरदराज के निर्माता भगवान का प्रतिनिधित्व किया हो सकता है जिसे धीरे-धीरे अधिक विशिष्ट स्थानीय देवताओं द्वारा ग्रहण किया गया था। [२६] [२ Allah] इस बात पर असहमति है कि क्या अल्लाह ने मक्का के धार्मिक पंथ में प्रमुख भूमिका निभाई है। अल्लाह का कोई प्रतिष्ठित प्रतिनिधित्व मौजूद नहीं है। [२ Allah] [२ ९] मक्का में अल्लाह ही एकमात्र ऐसा देवता है जिसकी मूर्ति नहीं थी। [३०] मुहम्मद के पिता का नाम अब्दुल्लाह रदीयल्लाहु था जिसका अर्थ था "अल्लाह का बंदा"।

क़ुरान में अल्लाह का शब्द और विचार[संपादित करें]

कुरान की शुरूआत होतीं है "बिस्मिल्लाह हिर्रह्मा निर्रहीम"। मतलब यह कि अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं जो दयालु और कृपाशील है"। इस पंक्ती में अल्लाह का अर्थ ईश्वर का है, जिसका नाम लेकर कोई भी कार्य शुरू किया जाता है।

क़ुरान का पहला अध्याय सूरा फ़ातिहा यह प्रकट कर्ता है "अल-हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, अर-रह्मा निर्रहीम"। अर्थात सारी प्रशंशा उस अल्लाह (ईश्वर) के लिये हैं, जो सारे जगतों का रब (पालने वाला) है, और वह अमित दयावान और कृपाशील है।

क़ुरान का ११२ वां अध्याह सूरा इख़लास यह प्रकट करता है

" क़ुल हु अल्लाहु अहद, अल्लाह उस-समद, लम-यलिद, वलम-यूलद वलम-यकुन-लहु कुफ़ुवन अहद"। अर्थात "कहो (हे मुहम्मद) अल्लाह (ईश्वर) एक है, वह चिरंतन है, वह न ही किसी से जना है न ही किसीको जना है, उसके समान कोई नहीं है।"

इन हेतुवों के अर्थ में देखें तो अल्लाह एक है और सर्वत्र कर्तृत्व परायण, सर्व जगत की निर्माता कहा गया है।

अल्लाह के निन्यानबे नाम[संपादित करें]

गुण, विशेषताओं और विशेषणों के आधार पर अल्लाह के ९९ नाम हैं। पूरा विवरण के लिए देखें अल्लाह के ननानवे नाम/ अल्लाह के निन्यानबे नाम प्रसिद्ध हैं जिनमें से अधिकांश कुरान में हैं। अल्लाह व्यक्तिगत नाम है और यह निन्यानबे गुणों नाम हैं जिन्हें आसमाय अल्लाह हसन कहा जाता है। जैसे रहमान, आलरहीम, आलनोर आदि। अल्लाह के बारे में अधिक विवरण पुस्तकों में मिल सकता है।

टाइपोग्राफी[संपादित करें]

विभिन्न लेखन प्रणालियों में अल्लाह शब्द लिखा है।

अल्लाह शब्द के लिखित रूप में "ल" और "ह" के बीच आने वाले "आ" स्वर के लिए एलिफ का इस्तेमाल नहीं होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शुरूआती अरबी वर्तनी में आदतन "आ" के लिए अलिफ़ अक्षर का प्रयोग नहीं किया जाता था। हालांकि, मुखर वर्तनी में, उच्चारण को इंगित करने के लिए शादाब के शीर्ष पर एक छोटी सी डाईक्रिटिक एलिफ जोड़ी जाती है।

एक अपवाद इस्लाम-पूर्व ज़बाद शिलालेख में प्राप्त हो सकता है,[2] जहाँ अल्लाह लिखित रूप में एक अस्पष्ट चिह्न के साथ समाप्त होता है। यह विशिष्ट चिह्न एक लम्बी शुरुआत के साथ देर तक उच्चारित होने वाले "ह" के लिए हो सकता है अथवा ला और ह के किसी विशेष उच्चारण को बताने वाला कोई गैर-मानक संयुक्ताक्षर हो सकता है: -

  • الاه : यह पढ़ना अल्लाह के लिए अलिफ़ के साथ ध्वन्यात्मक रूप से वर्तनी होगा।
  • الله : यह वाचन अल-इल्ह = 'द गॉड' (एक पुराना रूप, बिना संकुचन के), पुराने वर्तनी अभ्यास के बिना if के लिए होगा।

कई अरबी प्रकार के फोंट में अल्लाह के लिए विशेष संयुक्ताक्षर हैं। [3]

यूनिकोड[संपादित करें]

यूनिकोड में अल्लाह के लिए एक कोड बिंदु आरक्षित है, ﷲ = U + FDF2, अरबी प्रस्तुति फ़ॉर्म-ए ब्लॉक में, जो "कुछ पुराने, विरासत चरित्र के साथ संगतता के लिए मौजूद है जो सीधे प्रस्तुति रूपों को इनकोड करता है"; [4][5] यह नए पाठ के लिए हतोत्साहित करता है। इसके बजाय, अल्लाह शब्द को अपने व्यक्तिगत अरबी अक्षरों द्वारा दर्शाया जाना चाहिए, जबकि आधुनिक फ़ॉन्ट तकनीक वांछित संयुक्ताक्षर प्रदान करेगी।

कोड के बिंदु U + 262B (☫) पर, विविध प्रतीकों के रेंज में, ईरान के हथियारों के कोट के रूप में उपयोग किए जाने वाले शब्द का सुलेख संस्करण यूनिकोड में एन्कोड किया गया है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "अल्लाह को इकलौता नहीं, सबसे बड़ा देवता माना जाता था". मूल से 15 अक्तूबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 जून 2020.
  2. "Zebed Inscription: A Pre-Islamic Trilingual Inscription In Greek, Syriac & Arabic From 512 CE". Islamic Awareness. 17 March 2005. मूल से 2013-10-13 को पुरालेखित.
  3. The Unicode Consortium. FAQ - Middle East Scripts Archived 1 अक्टूबर 2013 at the Wayback Machine
  4. "''Unicode Standard 5.0'', p.479, 492" (PDF). मूल (PDF) से 2014-04-28 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2014-01-14.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

टाइपोग्राफी