क़ुरआन की आलोचना

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क़ुरआन इस्लाम मत की प्रमुख पुस्तक है ।

गैर मुस्लिमों के लिए हिंसक[संपादित करें]

कुरान कई स्थानों (कम से कम 149) पर गैरमुस्लिमों के लिए हिंसक आदेश देता है उदाहरनार्थ :

  • "जब पवित्र महीने बीत जाऐं, तो 'मूर्तिपूजकों को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और गिरफ्तार करोऔर उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो। फिर यदि वे 'तौबा' कर लें 'नमाज' पढने लगे और, जकात दें (इस्लाम कुबूल कर लें) तो उनका मार्ग छोड़ दो। निःसंदेह अल्लाह (हर मुसलमान पर) बड़ा क्षमाशील और दया करने वाला है।'' (सूरा. 9, आयत 5)
  • ''हे 'ईमान' लाने वालो 'मुश्रिक' (मूर्तिपूजक) नापाक हैं।'' (9.28)
  • ''निःसंदेह 'काफिर तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' (4.101)
  • ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन 'काफिरों' से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सखती पायें।'' (9.123)
  • जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया, उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' (4.46)
  • ''अल्लाह 'काफिर' लोगों को मार्ग नहीं दिखाता'' (१०.९.३७ पृ. ३७४)
  • ''फिटकारे हुए, (मुनाफिक) जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।'' (33.61)
  • 'हे नबी! 'काफिरों' और 'मुनाफिकों' के साथ जिहाद करो, और उन पर सखती करो और उनका ठिकाना 'जहन्नम' है, और बुरी जगह है जहाँ पहुँचे'' (66.9)
  • ''उन (काफिरों) से लड़ों! अल्लाह तुम्हारे हाथों उन्हें यातना देगा, और उन्हें रुसवा करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी सहायता करेगा, और 'ईमान' वालों लोगों के दिल ठंडे करेगा'' (9.14)

कुरान में अवैज्ञानिकता[संपादित करें]

कुरान 2/29 –‘वही तो है जिसने तुम्हारे लिये जमीन की सारी चीजे पैदा की , फिर आकाश की ओर रुख किया ,ठीक तौर पर सात आकाश बनाये वह हर चीज को जानता है”

देखे कुरान 41/9-12 –“कहो:” क्या तुम उसका इंकार करते हो जिसने धरती को दो दिनो मे पैदा किया और तुम उसको समकक्ष ठहराते हो ? वह तो सारे संसार का रब है, और उसने उस [धरती] मे उसके उपर पहाड़ जमाये, उसमे बरकत रखी, और उसमे उसकी खुराको को ठीक अंदाजे मे रखा ! मांग करनेवालो के लिये यह सब चार दिन मे हुआ! फिर उसने आकाश की ओर रुख किया जब कि वहां मात्र धुंआ था — और उसने उससे और धरती से कहा और स्वेच्छा के साथ या अनिच्छा के साथ! उन्होने कहा की हम स्वेच्छा के साथ आये! फिर दो दिनो मे उनको अर्थात सात असमान बनाकर पूरा किया और प्रत्येक आकाश मे उससे सम्बंधित आकाश की प्रकाशना कर दी ! दुनिया के [निकटवर्ती] आकाश को अपने दीपो से सजाया [रात मे यात्रियो को दिशानिर्देश आदि के लिये ] और सुरक्षित करने के उद्देश्य से! वह अत्यंत प्रभुत्वशाली सर्वज्ञ के लिये ठहराया हुआ है !”

देखे कुरान 79/27–33 क्या तुम्हे पैदा करना अधिक कठिन कार्य है या आकाश को? अल्लाह ने उसे बनाया उसकी ऊँचाई को खूब ऊँचा करके उसे ठीक ठाक किया ! और उसकी रात को अंधकारमय बनाया और उसका दिवस प्रकाश प्रकट किया और धरती को देखो उसके पश्चात उसे फैलाया ! उसमे से उसका पानी और चारा निकाला और पहाड़ो को देखो ! उन्हे उस [धरती] मे जमा किया ! तुम्हारे लिये तुम्हारे मवेशियो के जीवन सामग्री के रूप मे

देखे कुरान 16/15-16″ और उसने धरती मे अटल पहाड़ डाल [गाड़] दिये की तुम्हे लेकर झुक न पड़े और नदियाँ बनाई! और प्राकृतिक मार्ग बनाये ताकि तुम मार्ग पा जाओ ! और मार्ग चिन्ह भी बनाये तारो के द्वारा लोग मार्ग पा लेते है !

देखे कुरान 16/40 किसी चीज के लिये हम जब उसका इरादा करते है, तो हमारा कहना बस यही होताहै की उससे कहतेहै की “हो जा!” [कुन] और वह हो जाती है ! जब कुरान मे सृष्टि [कायनात ] बनाने के सम्बंध मे पढ़ते है तब कुछ प्रश्न खड़े होते है ! जैसे- [1] धरती पहले बनी या आकाश पहले बना, अल्लाह के बयान मे इतना अंतर क्यो है

[2] अल्लाह कहते है कि धरती पैदा की? धरती बनाई या पैदा की ?

[3] जमीन मे पहाड़ गाड़े गये ? ताकि धरती हिले न ! क्या पहाड़ पहले कही और थे? जो बाद मे जमाये गये ! या धरती के अंदर से पहाड़ निकले! देखने मे तो यही आता है की धरती के अंदर से पहाड़ निकले है ! पहाड़ो को चोटी उंची और नुकीली जैसी होती है धरती की तुलना मे धरती मे उसका घेराव बहुत बड़ा होता है !

[4] अभी पाकिस्तान मे समुद्रसे भूकंप आया, समुद्रके बीच मे मे ही एक टापू जैसा पहाड़ प्रकट हुआ वह समुद्र मे गाड़ा नही गया था!

[5] हैदराबाद भी पथरीली जमीन है उसमे पहाड़ नही दिखते ! लेकिन जमीन के अंदर पहाड़ जरूर है!

[6] जब अल्लाह जी यह कहते है की कुन [हो जा ] वह हो जाती है! फिर कायनात बनाने मे 6 दिन कैसे लग गये !

[7] क्या सारी सृष्टि 6 दिन मे बनी हो सकती है या कई लाख साल का समय लगा होगा ! 6 दिन मे तो मनुष्य की सन्तान व कुछ जानवरो के बच्चे भी [गर्भ मे] नही बन पाते फिर इतनी बड़ी सृष्टि “वही ” अल्लाह ने कैसे बना दी ?

[8] कुरान की तफ़सीर [व्याख्या ] करने वाले मौलाना फरुखुददीन जी ने अपनी किताब तफ़सीर कादरी भाग 2 पेज 375 मे लिखा है कि रविवार को धरती बनाई और सोमवार को धरती फैलाई गयी!

[9] क्या धरती फैलाई जाती है? क्या धरती पहले छोटी बनी बाद मे उसको फैलाया गया!

[10] क्या रात मे तारो की सहायता से रास्ता देखा जा सकता है 1 या किसी भी चीज को देखा जा सकता है ! अमावस्या की रात को देखकर अनुभव भी कर लीजिये ! !

[11] धरती से कहा, धरती ने जवाब दिया! क्या ऐसा संभव है !