भारत के प्रधान मंत्रियों की सूची

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नरेंद्र मोदी, भारत के वर्त्तमान (१४वेँ) प्रधानमंत्री, २६ मई २०१४ से

भारत के प्रधानमंत्री भारत गणराज्य की सरकार के मुखिया हैं। भारत के प्रधानमंत्री, का पद, भारत के शासनप्रमुख का पद है। संविधान के अनुसार, वह भारत सरकार का मुखिया, भारत के राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार, मंत्रिपरिषद का मुखिया, तथा लोकसभा में बहुमत वाले दल का नेता होता है। वह भारत सरकार के कार्यपालिका का नेतृत्व करता है। भारत की राजनैतिक प्रणाली में, प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल में एक वरिष्ठ सदस्य होते हैं।


भारत के प्रधानमंत्रियों की सूची[संपादित करें]

कुंजी: INC
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
JP
जनता पार्टी
JD
जनता दल
BJP
भारतीय जनता पार्टी
सं. नाम कार्यकाल आरंभ कार्यकाल समाप्त राजनैतिक दल जन्म स्थान शिक्षा चुनाव क्षेत्र
01 जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त, 1947 27 मई, 1964 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश हैरो स्कूल;
ट्रीनीटी कॉलेज, कैम्ब्रीज
इलाहाबाद,उत्तर प्रदेश;
फूलपूर (इलाहाबाद),उत्तर प्रदेश
02 गुलजारीलाल नंदा* 27 मई, 1964 9 जून, 1964 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सियालकोट, पंजाब इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद मुंबई, महाराष्ट्र
03 लालबहादुर शास्त्री 9 जून, 1964 11 जनवरी, 1966 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मुगलसराय, उत्तर प्रदेश काशी विद्यापीठ, वाराणसी इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
04 गुलजारीलाल नंदा* 11 जनवरी, 1966 24 जनवरी, 1966 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सियालकोट, पंजाब इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद मुंबई, महाराष्ट्र
05 इन्दिरा गान्धी 24 जनवरी, 1966 24 मार्च, 1977 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल;
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, इंग्लैंड
रायबरेली, उत्तर प्रदेश;
मेडक, आंध्र प्रदेश
06 मोरारजी देसाई 24 मार्च, 1977 28 जुलाई, 1979 जनता पार्टी भदेली, गुजरात (अज्ञात) सूरत, गुजरात
07 चौधरी चरण सिंह 28 जुलाई, 1979 14 जनवरी, 1980 जनता पार्टी मेरठ, उत्तर प्रदेश (अज्ञात) बागपत, उत्तर प्रदेश
08 इन्दिरा गान्धी 14 जनवरी, 1980 31 अक्टूबर, 1984 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल;
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, इंग्लैंड
रायबरेली, उत्तर प्रदेश;
मेडक, आंध्र प्रदेश
09 राजीव गान्धी 31 अक्टूबर, 1984 2 दिसम्बर, 1989 कांग्रेस आई*** मुंबई, महाराष्ट्र इलाहाबाद;
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, इंग्लैंड
अमेठी, उत्तर प्रदेश
10 विश्वनाथ प्रताप सिंह 2 दिसम्बर, 1989 10 नवंबर, 1990 जनता दल इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश इलाहाबाद विश्वविद्यालय;
पुणे विश्वविद्यालय
फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
11 चंद्रशेखर 10 नवंबर, 1990 21 जून, 1991 जनता दल इब्राहिमपट्टी, बलिया, उत्तर प्रदेश इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद बलिया, उत्तर प्रदेश
12 नरसिंह राव 21 जून, 1991 16 मई, 1996 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस करीमनगर, आंध्र प्रदेश ओसमानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद;
मुंबई विश्वविद्यालय;
नागपुर विश्वविद्यालय
नंडयाल, आंध्र प्रदेश
13 अटल बिहारी वाजपेयी 16 मई, 1996 1 जून, 1996 भारतीय जनता पार्टी ग्वालियर, मध्य प्रदेश लक्ष्मीबाई कॉलेज, ग्वालियर;
डीएवी कॉलेज, कानपुर
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
14 एच डी देवगौड़ा 1 जून, 1996 21 अप्रेल, 1997 जनता दल हरदानाहल्ली, कर्नाटक हसन, कर्नाटक कनकपुरा; हसन, कर्नाटक
15 इंद्रकुमार गुज़राल 21 अप्रेल, 1997 19 मार्च, 1998 जनता दल झेलम (अब पाकिस्तान में) डीएवी कॉलेज, हैली कामर्स कॉलेज, लाहौर जलंधर, पंजाब
16 अटल बिहारी वाजपेयी 19 मार्च, 1998 22 मई, 2004 भारतीय जनता पार्टी ग्वालियर, मध्य प्रदेश लक्ष्मीबाई कॉलेज, ग्वालियर;
डीएवी कॉलेज, कानपुर
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
17 मनमोहन सिंह 22 मई, 2004 22 मई, 2009 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पंजाब प्रान्त के एक गाँव (अब पाकिस्तान में) पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ;
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय;
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
असम राज्यसभा से
18 मनमोहन सिंह 22 मई, 2009 17 मई 2014 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पजाब प्रान्त के एक गाँव (अब पाकिस्तान में) पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़;
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय;
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
असम राज्यसभा से
19 नरेन्द्र मोदी** 26 मई, 2014 अभी तक भारतीय जनता पार्टी वड़नगर, गुजरात, भारत गुजरात विश्वविद्यालय,
गुजरात
वाराणसी, उत्तर प्रदेश,
वडोदरा, गुजरात

* कार्यकारी
** कार्यकाल जारी
*** भारतीय नैशनल कांग्रेस बन गयी कांग्रेस आई (आई, इंदिरा के लिए)

कालखण्ड-अनुसार प्रधानमंत्रीपद का इतिहास[संपादित करें]

१९४७-१९८०[संपादित करें]

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू(दाए) और अगले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री(बाएँ), के० कामराज(मध्य) के साथ, १०५५ से पूर्व की तस्वीर
इंदिरा गांधी, १९७७

वर्ष १९४७ से २०१५ तक, प्रधानमन्त्री के इस पद पर कुल १४ पदाधिकारी अपनी सेवा दे चुके हैं। और यदि गुलज़ारीलाल नंदा को भी गिनती में शामिल किया जाए,[1] जोकि दो बार कार्यवाही प्रधानमन्त्री के रूप में अल्पकाल हेतु अपनी सेवा दे चुके हैं, तो यह आंकड़ा १५ तक पहुँचता है। १९४७ के बाद के कुछ दशकों ने भारत के राजनैतिक मानचित्र पर कांग्रेस पार्टी की लगभग चुनौतीहीन राज देखा। इस कल के दौरान, कांग्रेस के के नेतृत्व में कई मज़बूत सरकारों का राज देखा, जिनका नेतृत्व कई शक्तिशाली व्यक्तित्व के प्रधानमन्त्रीगण ने किया। भारत के पहले प्रधानमन्त्री, जवाहरलाल नेहरू थे, जिन्होंने १५ अगस्त १९४७ में कार्यकाल की शपथ ली थी। उन्होंने अविरल १७ वर्षों तक सेवा दी। उन्होंने ३ पूर्ण और एक निषपूर्ण कार्यकालों तक इस पद पर विराजमान रहे। उनका कार्यकाल, मई १९६४ में उनकी मृत्यु पर समाप्त हुआ। वे इस समय तक, सबसे लंबे समय तक शासन संभालने वाले प्रधानमन्त्री हैं।[2] जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद, उन्हीके पार्टी के, लाल बहादुर शास्त्री इस पद पर विद्यमान हुए, जिनके लघुकालीय १९-महीने के कार्यकाल ने वर्ष १९६५ की कश्मीर युद्ध और उसमे पाकिस्तान की पराजय देखी। युद्ध के पश्चात्, ताशकेंत के शांति-समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, ताशकेंत में ही उनकी अकारण व अकस्मात् मृत्यु हो गयी।[3][4][5] शास्त्री के बाद, प्रधानमन्त्रीपद पर, नेहरू की पुत्री, इंदिरा गांधी इस पद पर, देश की पहली महिला प्रधानमन्त्री के तौर पर निर्वाचित हुईं। इंदिरा का यह पहला कार्यकाल ११ वर्षों तक चला, जिसमें उन्होंने, बैंकों का राष्ट्रीयकरण और पूर्व राजपरिवारों को मिलने वाले शाही भत्ते और राजकीय उपादियों की समाप्ती, जैसे कठोर कदम लिया। साथ ही १९७१ का युद्ध और बांग्लादेश की स्थापना, जनमत-संग्रह द्वारा सिक्किम का भारत में अभिगमन और पोखरण में भारत का पहला परमाणु परिक्षण जैसे ऐतिहासिक घटनाएँ भी इंदिरा गांधी के इस शासनकाल में हुआ। परंतु इन तमाम उपलब्धियों के बावजूद, १९७५ से १९७७ तक का कुख्यात आपातकाल भी इंदिरा गांधी ने ही लगवाया था। यह समय सरकार द्वारा, आंतरिक उथल-पुथल और अराजकता को "नियंत्रित" करने हेतु, लोकतांत्रिक नागरिक अधिकारों की समाप्ति और राजनैतिक विपक्ष के दमन के लिए कुख्यात रहा।[6][7][8][9]

प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, "दिल्ली धोषणा" के मसौदे पर हस्ताक्षर करते हुए
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, सोवियत संघ के कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव, शर्बित्स्की के साथ, १९८२

इस आपातकाल के कारण, इंदिरा के खिलाफ उठे विरोध की लहार के कारन, विपक्ष की तमाम राजनैतिक दलों ने आपातकाल के समापन के बाद, १९७७ के चुनावों में, संगठित रूप से जनता पार्टी की छात्र के नीचे, कांग्रेस के खिलाफ एकजुट होकर लड़ा, और कांग्रेस को बुरी तरह परस्जित करने में सफल रही। तथा, जनता पार्टी की गठबंधन के तरफ से मोरारजी देसाई देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमन्त्री बने। प्रधानमन्त्री मोरारजी देसाई की सरकार अत्यंत विस्तृत एवं कई विपरीत विचारधाराओं की राजनीतिक दलों द्वारा रचित थी, जिनका एकजुट होकर साथ चलना और विभिन्न राजनैतिक निर्णयों पर एकमत व समन्वय बरकरक रखना बहुत कठिन था। अंत्यतः ढाई वर्षों के बाद, २८ जुलाई १९७९ को मोरारजी के इस्तीफ़े के साथ ही उनकी सरकार गिर गई।[10] तत्पश्चात्, क्षणिक समय के लिए, मोरारजी की सर्कार में उपप्रधानमन्त्री रहे, चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस के समर्थन से, बहुमत सिद्ध किया और प्रधानमन्त्री की शपथ ली। उनका कार्यकाल केवल ५ महीनों तक चला(जुलाई १९७९ से जनवरी १९८०)। उन्हें भी घटक दलों के साथ समन्वय बना पाना कठिन हो रहा था, और अंत्यतः कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के कारण उनहोंने भी बहुमत खो दिया, और उन्हें भी इस्तीफा देना पड़ा।[11] इन तकरीबन ३ वर्षों की सत्ता से बेदखली के बाद, कांग्रेस पुनः भरी बहुमत के साथ सत्ता में आई, और इंदिरा गांधी को अपने दुसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचित किया गया। इस दौरान, उनके द्वारा की गयी सबसे कठोर एवं विवादस्पद कदम था ऑपरेशन ब्लू स्टार, जिसे अमृतसर के हरिमंदिर साहिब में छुपे हुए खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ किया गया था। अंत्यतः, उनका कार्यकाल, ३१ दिसंबर १९८४ की सुबह को उनकी हत्या के साथ समाप्त हो गया।

१९८०-२०००[संपादित करें]

प्रधानमंत्री राजीव गांधी, वर्ष १९८९
प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह

इंदिरा के बाद, भारत के प्रधानमन्त्री बने, उनके छोटे पुत्र, राजीव गांधी, जिन्हें, ३१ अक्टूबर की शाम को ही कार्यकाल की शपथ दिलाई गयी। उन्होंने पुनः निर्वाचन करवाया और इस बार, कांग्रेस ऐतिहासिक बहुमत प्राप्त कर, विजई हुई। १९८४ के चुनाव में कांग्रेस ने लोकसभा में ४०१ आसान प्राप्त किया था, जोकि किसी भी दाल द्वारा प्राप्त किया गया अधिकतम सङ्ख्या है। ४० वर्ष की आयु में प्रधानमन्त्रीपद की शपथ लेने वाले राजीव गांधी, इस पद पर विराजमान होने वाले सबसे युवा व्यक्ति हैं।[12] राजीव गांधी के बाद, राष्ट्रीय मञ्च पर उबरे, विश्वनाथ प्रताप सिंह, जोकि राजीव गांधी की कैबिनेट में, वित्तमंत्री और रक्षामंत्री के पद पर थे। अपनी साफ़ छवि के लिए जाने जाने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपने वित्तमंत्रीत्व और रक्षामंत्रीत्व के समय, भ्रष्टाचार, कला-बाज़ारी और टैक्स-चोरी जैसी समस्याओं के खिलाफ कई कदम उठाये थे, ऐसा अनुमान लगाया जाता है की इन कदमों में कई ऐसे भी थे, जिनके कारण कांग्रेस की पूर्व सरकारों के समय किये गए घोटालों पर से पर्दा उठ सकता था, और इसीलिए अपनी पार्टी की साख पर खतरे को देखते हुए, उन्हें राजीव गांधी ने मंत्रिमंडल से १९८७ में निष्कासित कर दिया था। १९८८ में उन्होंने जनता दल नमक राजनैतिक दल की स्थापना की, और अनेक कांग्रेस-विरोधी दलों की मदद से नेशनल फ्रंट नमक गठबंधन का गठन किया। १९८९ के चुनाव में कांग्रेस ६४ सीटों तक सीमित रह गयी, जबकि नेशनल फ्रंट, सबसे बड़ा गुथ बन कर उबरा। भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों के बाहरी समर्थन के साथ नेशनल फ्रंट ने सर्कार बनाई, जिसका नेतृत्व विश्वनाथजी को दिया गया। वी.पी. सिंह के कार्यकाल में सामाजिक न्याय की दिशा में कई कदम उठाये गए थे, जिनमे से एक था, मंडल आयोग की सुझावों को मानते हुए, अन्य पिछड़े वर्ग में आने वाले लोगो के लिए नौकरी और शिक्षण संस्थानों में कोटे का प्रावधान पारित करना। इसके अलावा, उन्होंने, राजीव गांधी के काल में, श्रीलंका में तमिल अयंकवादियों के खिलाफ जरी सेना की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी। अमृतसर के हरिमंदिर साहिब में ऑपरेशन ब्लू स्टार हेतु क्षमा-याचना के लिए उनकी यात्रा, और उसके बाद के घटनाक्रमों ने बीते बरसों से पंजाब में तनाव को लगभग पूरी तरह शांत कर दिया था। परंतु अयोध्या में "कारसेवा" के लिए जा रहे लालकृष्ण आडवाणी के "रथ यात्रा" को रोक, आडवानी की गिरफ़्तारी के बाद, भाजपा ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। वी.पी.सिंह ने ७ नवंबर १९९० को अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंप दिया।[13][14][15][16] सिंह के इस्तीफे के बाद, उनके पुर्व साथी, चंद्रशेखर ने ६४ सांसदों के साथ समाजवादी जनता पार्टी गठित की और कांग्रेस के समर्थन के साथ, लोकसभा में बहुमत सिद्ध किया। परंतु उनका प्रधानमन्त्री काल, अधिक समय तक टिक नहीं सका। कांग्रेस की समर्थन वापसी के कारण, नवंबर १९९१ को चंद्रशेखर का एक वर्ष से भी कम का कार्यकाल समाप्त हुआ, और नए चुनाव घोषित किये गए।[17]

प्रधानमंत्री नरसिंह राव(मध्य में) की तस्वीर
राष्ट्रीय विज्ञानं केंद्र में प्रधानमंत्री नरसिंह राव

प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर के ६ महीनों के शासनकाल के पश्चात्, कांग्रेस पुनः सत्ता में आई, इस बार, पमुलापति वेङ्कट नरसिंह राव के नेतृत्व में। नरसिंह राव, दक्षिण भारतीय मूल के पहले प्रधानमन्त्री थे। साथ ही वे न केवल नेहरू-गांधी परिवार से बहार के पहले कांग्रेसी प्रधानमन्त्री था, बल्कि वे नेहरू-गांधी परिवार के बहार के पहले ऐसे प्रधानमन्त्री थे, जिन्होंने अपना पूरे पाँच वर्षों का कार्यकाल पूरा किया था। नरसिंह राव जी का कार्यकाल, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक एवं ऐतिहासिक परिवर्तन का समय था। अपने वित्तमंत्री, मनमोहन सिंह के ज़रिये, नरसिंह राव ने भारतीय अर्थव्यवस्था की उदारीकरण की शुरुआत की, जिसके कारन, भारत की अबतक सुस्त पड़ी, खतरों से जूझती अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। इन उदारीकरण के निर्णयों से भारत को एक दृढतः नियंत्रित, कृषि-उद्योग मिश्रित अर्थव्यवस्था से एक बाज़ार-निर्धारित अर्थव्यवस्था में तबदील कर दिया गया। इन आर्थिक नीतियों को, आगामी सरकारों ने जरी रखा, और भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाया।[18][19] इन आर्थिक परिवर्तनों के आलावा, नरसिंह राव के कार्यकाल ने अयोध्या की बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि के विवादित ढांचे का विध्वंसन और भारतीय जनता पार्टी का एक राष्ट्रीय स्तर की दल के रूप में उदय भी देखा। नरसिंह राव जी का कार्यकाल, मई १९९६ को समाप्त हुआ, जिसके बाद, देश ने अगले तीन वर्षों में चार, लघुकालीन प्रधानमयों को देखा: पहले अटल बिहारी वाजपेयी की १३ दिवसीय शासनकाल, तत्पश्चात्, प्रधानमन्त्री एच डी देवगौड़ा (1 जून, 1996 से 21 अप्रेल, 1997) और इंद्रकुमार गुज़राल(21 अप्रेल, 1997 से 19 मार्च, 1998), दोनों की एक वर्ष से कम समय का कार्यकाल एवं तत्पश्चात्, पुनः प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी की १९ माह की सरकार।[20][21] १९९८ में निर्वाचित हुए प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने कुछ अत्यंत ठोस और चुनौती पूर्ण कदम उठाए। मई १९९८ में सरकार के गठन के एक महीने के बाद, सरकार ने पोखरण में पाँच भूतालिया परमाणु विस्फोट करने की घोषणा की। इन विस्फोटों के विरोध में अमरीका समेत करी पश्चिमी देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, परंतु रूस, फ्रांस, खाड़ी देशों और कुछ अन्य के समर्थन के कारण, पश्चिमी देशों का यह प्रतिबंध, पूर्णतः विफल रहा।[22][23] इस आर्थिक प्रतिबंध की परिस्थिति को बखूबी संभालने को अटल सरकार की बेहतरीन कूटनीतिक जीत के रूप में देखा गया। भारतीय परमाणु परीक्षण के जवाब में कुछ महीने बाद, पाकिस्तान ने भी परमाणु परिक्षण किया।[24] दोनों देशों के बीच बिगड़ते हालातों को देखते हुए, सरकार ने रिश्ते बेहतर करने की कोशिश की। फ़रवरी १९९९ में दोनों देशों ने लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किये, जिसमें दोनों देशों ने आपसी रञ्जिश खत्म करने, व्यापर बढ़ने और अपनी परमाणु क्षमता को शांतिपूर्ण कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की घोषणा की।

२०००-वर्त्तमान[संपादित करें]

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के साथ प्रधानमंत्री वाजपेयी
तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

१७ अप्रैल १९९९ को जयललिता की पार्टी आइएदमक ने सर्कार से अपना समर्थन है दिया, और नए चुनावों की घोषणा करनी पड़ी।[25][26] तथा अटल सर्कार को चुनाव तक, सामायिक शासन के स्तर पर घटा दिया गया। इस बीच, कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ की खबर आई, और अटलजी की सर्कार ने सैन्य कार्रवाई के आदेश दे दिए। यह कार्रवाई सफल रही और करीब २ महीनों के भीतर, भारतीय सऐना ने पाकिस्तान पर विजय प्राप्त कर ली। १९९९ के चुनाव में भाजपा के नेतृत्व की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बहुमत प्राप्त की, और प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी अपनी कुर्सी पर बरकरार रहे। अटल ने आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया को बरक़रार रखा और उनके शासनकाल में भारत ने अभूतपूर्व आर्थिक विकास दर प्राप्त किया। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी सहूलियतों के विकास के लिए सरकार ने कई निर्णायक कदम उठाए, जिनमें, राजमार्गों और सडकों के विकास के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाएँ शामिल हैं।[27][28] परंतु, उनके शासनकाल के दौरान, वर्ष २००२ में, गुजरात में गोधरा कांड के बाद भड़के हिन्दू-मुस्लिम दंगों ने विशेष कर गुजरात एवं देश के अन्य कई हिस्सों में, स्वतंत्रता-पश्चात् भारत के सबसे हिंसक और दर्दनाक सामुदायिक दंगों को भड़का दिया। सरकार पर और गुजरटी के तत्कालीन मुख्यमंत्री , नरेंद्र मोदी, पर उस समय, दंगो के दौरान रोक-थाम के उचित कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया गया था। प्रधानमन्त्री वाजपेयी का कार्यकाल मई २००४ को समाप्त हुआ। वे देश के पहले ऐसे ग़ैर-कांग्रेसी प्रधानमन्त्री थे, जिन्होंने अपना पूरे पाँच वर्षों का कार्यकाल पूर्ण किया था। २००४ के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, लोकसभा में बहुमत प्राप्त करने में अक्षम रहा, और कांग्रेस सदन में सबसे बड़ी दल बन कर उबरी। वामपंथी पार्टियों और कुछ अन्य दलों के समर्थन के साथ, कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए(संयुक्त विकासवादी गठबंधन) की सर्कार स्थापित हुई, और प्रधानमन्त्री बने, मनमोहन सिंह। वे देश के पहले सिख प्रधानमन्त्री थे। उन्होंने, दो पूर्ण कार्यकालों तक इस पद पर अपनी सेवा दी थी। उनके कार्यकाल में, देश ने प्रधानमन्त्री वाजपेयी के समय हासिल की गए आर्थिक गति को बरक़रार रखा।[29][30] इसके अलावा, सरकार ने आधार(विशिष्ट पहचान पत्र), और सूचना अधिकार जैसी सुविधाएँ पारित की। इसके अलावा, मनमोहन सिंह के कार्यकाल में अनेक सामरिक और सुरक्षा-संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ा। २६ नवंबर २००८ को मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद, देश में कई सुरक्षा सुधर कार्यान्वित किये गए। उनके पहले कार्यकाल के अंत में अमेरिकाके के साथ, नागरिक परमाणु समझौते के मुद्दे पर, लेफ़्ट फ्रंट के समर्थन वापसी से सरकार लगभग गिरने के कागार पर पहुँच चुकी थी, परंतु सर्कार बहुमत सिद्ध करने में सक्षम रही। २००९ के चुनाव में कांग्रेस, और भी मज़बूत जनादेश के साथ, सदन में आई, और प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह प्रधानमन्त्री के आसान पर विद्यमान रहे।[31] प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह का दूसरा कार्यकाल, अनेक उच्चस्तरीय घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही। साथ ही आर्थिक उदारीकरण के बाद आई प्रशंसनीय आर्थिक गति भी सुस्त पद गयी, और अनेक महत्वपूर्ण परिस्थितियों में ठोस व निर्णायक कदम न उठा पाने के कारण सरकार सर्कार की छवि काफी ख़राब हुई थी। प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह का कार्यकाल, २०१४ में समाप्त हो गया।[32] २०१४ के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी, जिसने भ्रस्टाचार और आर्थिक विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था, ने अभूतपूर्व बहुमत प्राप्त किया, और नरेंद्र मोदी को प्रधानमन्त्री नियुक्त किया गया। वे पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमन्त्री हैं, जोकि पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर विद्यमान हुए हैं। साथ ही वे पहले ऐसे प्रधानमन्त्री हैं, जोकि आज़ाद भारत में जन्मे हैं।[33]

कालक्रम[संपादित करें]

नरेन्द्र मोदी मनमोहन सिंह अटल बिहारी वाजपेयी इंद्रकुमार गुज़राल एच डी देवगौड़ा अटल बिहारी वाजपेयी नरसिंह राव चंद्रशेखर विश्वनाथ प्रताप सिंह राजीव गान्धी इन्दिरा गान्धी चौधरी चरण सिंह मोरारजी देसाई इन्दिरा गान्धी गुलजारीलाल नंदा लालबहादुर शास्त्री गुलजारीलाल नंदा जवाहर लाल नेहरू

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. गुलज़ारीलाल नंद की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट )
  2. जवाहरलाल नेहरू की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  3. प्रधानमन्त्री शास्त्री-प्रधानमन्त्री वीडियो सीरीज, यूट्यूब (वीडियो)
  4. प्रधानमन्त्री शास्त्री के मृत्यु के बाद-प्रधानमन्त्री, यूट्यूब वीडियो सीरियस
  5. की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  6. इंदिरा गांधी की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  7. आपात्काल, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और स्मृतियां – भाग-१
  8. इमरजेंसी: लोकतंत्र का काला अध्याय (राजस्थान पत्रिका)
  9. आपातकाल और लोकतंत्र (प्रवक्ता डॉट कॉम)
  10. मोरारजी देसाई की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  11. चरण सिंह की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  12. राजीव गांधी की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  13. बोफोर्स घोटाले की कहानी-प्रधानमन्त्री
  14. मंडल कमीशन और वी पी सिंह का अंत-प्रधानमन्त्री वीडियो सीरीज, यूट्यूब
  15. "विश्वनाथ प्रताप सिंह". जागरण जंक्शन. http://politics.jagranjunction.com/2011/08/09/former-prime-minister-vishwa-nath-pratap-singh/. अभिगमन तिथि: 17 जुलाई 2015. 
  16. वी पी सिंह की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  17. प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  18. देश की आर्थिक आजादी के मसीहा: नरसिंह राव, बिज़नस-स्टॅण्डर्ड
  19. नरसिंह राव की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  20. देवगौड़ा जी की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  21. गुजराल जी की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
  22. "भारत के प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी". एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिक. 25 दिसंबर 1924. http://www.britannica.com/EBchecked/topic/621705/Atal-Bihari-Vajpayee. अभिगमन तिथि: 2012-11-24.  (अंग्रेजी)
  23. भारत का परमाणु परिक्षण (अंग्रेजी)
  24. श्री-अटल-बिहारी-वाजपेयी की संक्षिप्त जीवनी, प्रधानमन्त्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट
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