अंगिका भाषा

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
(अंगिका से अनुप्रेषित)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
अंगिका भाषा
अङ्गिका भाषा
बोली जाती है भारत, नेपाल
क्षेत्र बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल
कुल बोलने वाले 7,40,892 (लगभग 7,25,000 भारत में, 15,892 नेपाल में)
भाषा परिवार हिन्द-यूरोपीय
भाषा कूट
ISO 639-1 bh (बिहारी)
ISO 639-2 anp
ISO 639-3 anp
Indic script
इस पन्ने में हिन्दी के अलावा अन्य भारतीय लिपियां भी है। पर्याप्त सॉफ्टवेयर समर्थन के अभाव में आपको अनियमित स्थिति में स्वर व मात्राएं तथा संयोजक दिख सकते हैं। अधिक...

अंगिका एक भाषा है जो झारखण्ड के उत्तर पूर्वी भागों में बोली जाती है जिसमें गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, देवघर, कोडरमा, गिरिडीह जैसे जिले सम्मिलित हैं। यह भाषा बिहार के भी पूर्वी भाग में बोली जाती है जिसमें भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, अररिया आदि सम्मिलित हैं। यह नेपाल के तराई भाग में भी बोली जाती है। अंगिका भारतीय आर्य भाषा है।

लिपि[संपादित करें]

अंगिका को देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। इसे अंग भाषा के नाम से भी पुकारा जाता है। देवनागरी में 12 स्वर ( सहित) और 49 व्यंजन होते हैं और एक अवग्रह् भी होते हैं, इसे बाएं से दायें ओर लिखा जाता है।

अंग लिपि[संपादित करें]

यदि हिन्दी और संस्कृत शब्दों की बात की जाये तो कुल 49 व्यंजन और 12 स्वर हैं, परन्तु अंगिका को अगर हिन्दी और संस्कृत से रहित देखा जाये तो वर्णों की स्थिति बिल्कुल अलग तरह से होगी।

स्वर वर्ण[संपादित करें]

इस स्थिति में कुल 11 स्वर वर्ण होंगे।

स्वर वर्ण के साथ मात्रा
का
की
कू
के
कै
को
कौ
कॊ
अऽ कऽ
अं कं

व्यंजन वर्ण[संपादित करें]

व्यंजन वर्ण की संख्या 33 होगी।

व्यंजन वर्ण टिप्पणी
वर्ण अंगिका में उपयोग नहीं होता अपितु उपयोग होता है।
भी उपयोग नहीं होता उसके स्थान पर उपयोग होता है।
के स्थान पर न उपयोग होता है, परन्तु आप चाहें तो का उपयोग कर सकते हैं।
स/श का उपयोग केवल संस्कृत के शब्दों में उपयोग होता है अंगिका में इसका उच्चारण होता है।
ड़
ढ़
श्र
त्र

इतिहास[संपादित करें]

अंगिका मुख्य रूप से प्राचीन अंग यानि भारत के उत्तर-पूर्वी एवं दक्षिण बिहार, झारखंड, बंगाल, आसाम, उड़ीसा और नेपाल के तराई के इलाक़ों मे बोली जानेवाली भाषा है। यह मैथिली की एक बोली के तौर पर जानी जाती है। इसका यह प्राचीन भाषा कम्बोडिया, वियतनाम, मलेशिया आदि देशों में भी प्राचीन समय से बोली जाती रही है। अंगिका भाषा आर्य-भाषा परिवार का सदस्य है और भाषाई तौर पर बांग्ला, असमिया, उड़िया और नेपाली, ख्मेर भाषा से इसका काफी निकट का संबंध है। प्राचीन अंगिका के विकास के शुरूआती दौर को प्राकृत और अपभ्रंश के विकास से जोड़ा जाता है। लगभग 1.5 से 2 करोड़ लोग अंगिका को मातृ-भाषा के रूप में प्रयोग करते हैं और इसके प्रयोगकर्ता भारत के विभिन्न हिस्सों सहित विश्व के कई देशों मे फैले हैं। भारत की अंगिका को साहित्यिक भाषा का दर्जा हासिल है। अंगिका साहित्य का अपना समृद्ध इतिहास रहा है और आठवीं शताब्दी के कवि सरह या सरहपा को अंगिका साहित्य में सबसे ऊँचा दर्जा प्राप्त है। सरहपा को हिन्दी एवं अंगिका का आदि कवि माना जाता है। भारत सरकार द्वारा अंगिका को जल्द ही भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल किया जाएगा। अब ये तो भविष्य ही बातयेगा की अंगिका को जोड़ा जाता है की नहीं।

भाषा परिवार[संपादित करें]

अंगिका हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार परिवार के अन्दर आती है। ये हिन्द आर्य उपशाखा के अन्तर्गत वर्गीकृत है। हिन्द-आर्य भाषाएँ वो भाषाएँ हैं जो संस्कृत से उत्पन्न हुई हैं। उर्दू, कश्मीरी, बंगाली, उड़िया, पंजाबी, रोमानी, मराठी, मैथिली, नेपाली जैसी भाषाएँ भी हिन्द-आर्य भाषाएँ हैं।

'अंगिका' शब्द की व्युत्पत्ति[संपादित करें]

अंगिका शब्द अंग से बना है। अंगप्रदेश (वर्तमान में भागलपुर के आस पास का क्षेत्र) में बोली जाने वाली भाषा को अंगिका नाम दिया गया। अंगिका को लोग छेछा के नाम से भी जानते हैं।

अंगिका सिनेमा[संपादित करें]

अंगिका भाषा में निर्मित पहली फ़िल्म खगड़िया वाली भौजी (फ़िल्म) 2007 को बिहार में प्रदर्शित किया गया।[1] सुनील छैला बिहारी ने नई अंगिका फ़िल्म बनाने के बारे में सोच रहें हैं। वो जब बांका आये थे तो उन्होंने इस विषय पर दैनिक जागरण से बातचीत की थी। उन्हों ने कहा था की लोगो के समक्ष अंगिका के अश्लील चलचित्र और संगीत परोसा जा रहा है जिससे अंगिका की छवि ख़राब हो रही है। उन्होंने अश्लील संगीत बनाने वालों पर निशाना साधा था। एक नई फ़िल्म अंग पुत्र अप्रैल 2010 को प्रदर्शित हुई थी, जसमे अंगिका के लोक गीत में माहिर सुनील छैला बिहारी जी ने मुख्य भूमिका निभाया था। [2]

कुछ सर्वाधिक प्रयुक्त अंगिका शब्द[संपादित करें]

दिए गए कुछ अंगिका के शब्द हिन्दी के समान्तर है क्योंकि उन शब्दों को संस्कृत से लिया गया है।

अंगिका उच्चारण अंग्रेजी तुल्य हिन्दी अंगिका उच्चारण अंग्रेजी तुल्य हिन्दी अंगिका उच्चारण अंग्रेजी तुल्य हिन्दी अंगिका उच्चारण अंग्रेजी तुल्य हिन्दी
कऽ Ka का, के, की आरो aaro और एगो ego एक तकॊ Takao तक
मऽ Ma में छै chai है तोहं tonhon आप, तुम कि Ki कि
है hai यह हॊ hao वह छेलै छेलै था लऽ la, l लिए
पऽ Pa पर केवल Keval केवल सदा Sadaa सदा साथ Saath साथ
ओकरॊ okrao उसके u वह हमऽ hama मैं बाद Baad बाद
होना Hona होना खाना, खाय छै Khana, khay chai खाना, खाता है माय Maay माँ सऽ Sa से
या Ya या नाम/नॊ Naam/Nao नाम घॊर Ghaor घर द्वारा Dwara द्वारा
शब्द Sabdh word पर् Par लेकिन नाय् Naay नहीं की Ki क्या
सब्भे Sabhe सब छेलै chelae थे हमऽ Huma हम जबऽ Jaba जब
भाषा Bhasha भाषा उपयोग Upyog उपयोग देश Desh देश प्रत्येक Pratek प्रत्येक
अन्य Anya अन्य अधिक Adhik अधिक संख्या Sangya संख्या धन्यवाद Dhanyavaad धन्यवाद

अंगिका व अन्य भाषा[संपादित करें]

अंगिका और हिन्दी[संपादित करें]

अंगिका और हिन्दी भाषा के वाक्य संरचना एक समान होते हैं।

क्र.सं. अंगिका हिन्दी
1 राम (कर्ता) आम (संज्ञा) खाय (कर्म) छै राम (कर्ता) आम (संज्ञा) खाता (कर्म) है
2 हमऽ पढ़ै छियै मैं पढ़ता हूँ
3 उऽ हसै छै वह हँसता है

अंगिका और मैथिली[संपादित करें]

अंगिका और मैथिली का बहुत पुराना सम्बन्ध है। अगर कहा जाये की अंगिका भाषा की रचनाकर्ता मैथिली भाषा है तो गलत नहीं होगा। अंगिका में मैथिली से कई शब्द आएं हैं। जैसे: आपनै, हिनका(आदर के साथ 'आप'), भौजाय(भाभी), तरकारी(सब्जी)। अत्यंत आदर शुचक शब्द मैथिली से ली गई है।

अंगिका और भोजपुरी[संपादित करें]

भोजपुरी से भी कुछ शब्द मिलते जुलते है परन्तु भोजपुरी से लिए नहीं गए। जैसे: ओकरा (उसको), जेजे (जो जो), कहलॊ {भोजपुरी में कहलऽ} (कहा)। ये शब्द है जो भोजपुरी से मिलते हैं।

अंगिका और बंगाली[संपादित करें]

अंगिका और बंगाली भाषा में काफी समानताएं हैं। बंगाली के कई शब्द है जो हूबहू अंगिका में उपयोग होतें हैं। यदि आप हिन्दी में कहेंगे क्या हुआ तो अंगिका और बंगाली में की होलो बोला जायेगा। कहीं कहीं कुछ शब्द के उच्चारण में बदलाव आता है। जैसे व्यापक (हिंदी) >> ब्यापक (अंगिका) >> ब्यपॊक (बंगाली)।

अंगिका और गुजराती[संपादित करें]

अंगिका के हिन्द आर्य भाषा होने के कारण इसके कुछ शब्द गुजराती से भी मिलते हैं। जैसे: केन्हॊ छौ।>>केम छो (કેમ છો)।

अंगिका और हिन्दी-उर्दू[संपादित करें]

अंगिका में हिन्दी व उर्दू से भी कुछ शब्द आये हैं। जैसे नशा, दोस्त, अजीब, ज़िंदा, अमीर ......इत्यादि। अंगिका में उर्दू के शब्दों को कम ही उपयोग किया जाता है।

व्याकरण[संपादित करें]

स्वर वर्ण[संपादित करें]

कुछ ऐसे स्वर वर्ण भी हैं जो अंगिका को लिखने में मुख्य रूप से साथ देता है।

वर्ण उद्धाहरण हिन्दी
अॊ आबॊ आईये
ल॑ जायल॑ जाने के लिए
अऽ सऽ से

यहाँ अॊ वर्ण बंगाली भाषा की उच्चारण को दर्शाता है। ल॑ वर्ण "ल" के उच्चारण को आधा से थोड़ा कम प्रदर्शित करता है, और सऽ वर्ण "स" को सामान्य से थोड़ा अधिक उच्च उच्चारण करता है।

वाक्य व्याकरण[संपादित करें]

यदि आप हिन्दी से अंगिका में बोलेंगे तो आपको निचे दिए गए उद्धाहरण से समझना होगा।

क्र.सं हिन्दी वाक्य अंगिका रूपांतरण
1 ये अंगिका भाषा का एक वाक्य उद्धाहरण है। ई अंगिका भाषा क एगो वाक्य उद्धाहरण छेकै।
2 आप एक महान व्यक्ति हैं। तोहों एगो महान व्यक्ति छेखॊ।
3 आपसे मिल के अच्छा लगा। तोरा स मिली क अच्छा लागलॊं।
4 यहाँ दो चूहे दौड़ रहे हैं। हिन्ह दू मुसॊ दौड़ी रहलौ छै।

वचन[संपादित करें]

हिन्दी भाषा के तरह अंगिका में भी वचन प्रणाली होती है, परंतु हिन्दी के समान नहीं। आप नीचे दिए गए उद्धाहरण से समझ सकते हैं।

हिन्दी वाक्य एकवचन/द्विवचन बहुवचन
वहां दो कुत्ते हैं। हुन्नऽ (एगो) कुत्ता छै/हुन्नऽ दुगो कुत्ता छै। हुन्नऽ कुत्तासीनी छै।
पेड़ पर केवल एक आम है। गाछी पऽ केवल एगो आम छै। गाछी पऽ ढेरीसीनी आम छै।
इन आमो को खाइये नहीं क्योंकि ये अबतक पकें नहीं। है आम कऽ खाइयौ नाय् केन्हकी इ अभी तक पकलॊ नाय् छै। है आमसीनी का खाइयौ नाय केन्हकी इ अभी तक पकलॊ नाय् छै।

यहाँ दिए गए उद्धरणों से ये स्पष्ट है की वाक्य द्विकवचन में रहने से अंगिका के वाक्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, अर्थात वो एकवचन में ही रहता है। यदि दो से अधिक संज्ञा है तब संज्ञा के साथ सीनी लगता है और वो बहुवचन वाक्य कहलता है।

वाक्य संरचना[संपादित करें]

अंगिका में वाक्य संरचना हिन्दी के समान है। जिस प्रकार हिन्दी में आदर शुचक शब्द आप होता है ठीक उसी प्रकार अंगिका में भी आदर शुचक शब्द होता है। उद्धाहरण के तौर पर:

हिन्दी वाक्य अंगिका रूपांतरण
अत्यधिक आदर शुचक आप कौन हैं। आपनै के छेखात्/छेखैन्।
आदर शुचक आप कौन हैं। तॊहों के छेकौ।
अनादर शुचक तुम कौन हो। तॊहं के छेकैं।

शुद्ध व अशुद्ध अंगिका[संपादित करें]

नीचे दिए गए वाक्यों में शुद्ध अंगिका को दर्शया गया है, ये वो वाक्य हैं जिसे लोग अक्सर बोलने में गलती करते हैं।

क्र. सं. अशुद्ध अंगिका शुद्ध अंगिका हिन्दी अनुवाद
1 तोहं हुन्डऽ जाभैं तोहं हुन्नह जैभैं। तुम वहाँ जाओगे।
2 तौयें खाभऽ की नाय। तौं खैभऽ की नाय। आप खाएंगे की नहीं।
3 हम्मऽ हुन्नऽ खायल॑/खायल् जाबै हम्मऽ हुन्नऽ खायलऽ जैबै। मैं वहां खाने लिए जाऊंगा।
4 हमऽ गोड्डा जैतलतीयैय् हमऽ गोड्डा जैतीयौं। मैं गोड्डा जाता।
5 रूपा कार्जयालय आपनॊ भायक्/ भाय कऽ लेजतै रूपा कार्जयालय आपनॊ भायक्/ भाय कऽ लैजैतै। रूपा कार्यालय आपने भाई को ले जाएगी।

लिंग व्याकरण[संपादित करें]

अंगिका भाषा में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग ना के बराबर होता है। स्त्रीलिंग और पुल्लिंग का पता केवल सम्बोधन के समय चलता है या फिर भूतकाल में । भूतकाल में केवल स्त्रीलिंग का पता चलता है।

स्त्रीलिंग पुल्लिंग क्रिया
भूतकाल राधा खायल॑ गेली/गेलॊ छै। राम खायल॑ गेलॊ छै। जाना
सम्बोधन हे! तृप्ति कीन्ह रहय छौ। हो! प्रशून किन्ह रहय छौ। रहना

उपयुक्त इन्ही स्थानों पर स्त्रीलिंग एवं पुल्लिंग का ज्ञात होता है। जब लोग अज्ञात लोगों को बुलाते हैं तो कहीं कहीं हेहो का भी उपयोग करते है। ये कोई जरुरी नहीं है की आप हेहो का उपयोग ही करें, ये आपके ऊपर निर्भर करता है।

अवलोकन[संपादित करें]

अंगिका मूल्यतः बिहार और झारखण्ड में बोली जाती है। अंगिका के शब्दों को मूलतः संस्कृत के शब्दकोष से लिया गया है, परंतु अंगिका के कई शब्द बंगाली और मैथिली से भी मेल खाते हैं।

अंगिका प्रणाली[संपादित करें]

अंगिका मुख्यतः अंग क्षेत्र में बाली जाने वाली भाषा है परंतु अंगिका को लोग अपनाने से इतरा रहें हैं। अंगिका तीन भाग में विभाजित होने के करण ये तय नहीं कर पा रहे की शुद्ध अंगिका कौन सी है। कुछ लोग अंगिका को बर्बाद कर रहे हैं। अंगिका में आई जबरदस्त कुशब्द का प्रभाव लोगो के लिए मानसिकता पैदा कर रहा है। अंगिका के कुछ शब्द भोजपुरी के प्रभाव में बिगड़ रहे हैं, क्योंकि भोजपुरी जैसे सुंदर भाषा का भी यही हाल है। हालाँकि मैथिली एवं कुरमाली भाषा से अंगिका को अभी तक कोई हानि नहीं हुआ है। इसीलिए लोगों से प्रार्थना है की शुद्ध अंगिका और अशुद्ध अंगिका में अंतर समझे।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]