जलसा-ए-नमाज़

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

जलसा (इंग्लिश: Sitting_in_salah) इस्लाम में [[नमाज़[1]]] में बैठ कर जो उपासना में पढ़ा और किया जाता है उसे नमाज़ का जलसा कहते हैं। शाब्दिक अर्थ है बैठक। इसे क़ायदा नमाज़ भी कहते हैं। विवरण: नमाज़ में एक से अधिक बार बैठना होता है इस लिए जलसा को बहुवचन में जलूस (जुुुलूूूस) या क़ायदा ए नमाज़[2] पहला और दूसरा भी कहते हैं।

जलसा मेंं क्या करते और पढ़ते हैं?[संपादित करें]

  • जलसा अर्थात दो सजदों के बीच में कुछ समय बैठना।
  • क़ायदा ए नमाज़[3]: दूसरी रकात में तशह्हुद और आखरी रकात में बैठ कर तशहुद (अत्तहियात) के साथ दरूद,क़ुरआन का कुछ पाठ और सलाम होता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. irfan, sheikh. "नमाज़ का सुन्नति मस्नून तरीका हिंदी में". irfani-islam. irfani. अभिगमन तिथि 21 अक्टूबर 2021.
  2. "Namaz Ka Sahi Tarika / नमाज़ का सही तरीका". https://mimworld.in. |website= में बाहरी कड़ी (मदद)
  3. irfan, sheikh. "Namaz Ka Pura Sunnati Masnoon Tarika Roman English". irfani-islam. जलसा-ए-नमाज़. अभिगमन तिथि 21 अक्टूबर 2021.