जा-ए-नमाज़
| सलात / सलाह | |
|---|---|
नमाज़ के दौरान रुकू करते हुए मुस्लिम | |
| आधिकारिक नाम | صلاة |
| अन्य नाम | इस्लाम में उपासना |
| अनुयायी | मुस्लिम |
| प्रकार | इस्लाम |
| उद्देश्य | फ़िक़ह के अनुसार अल्लाह की इबादत का तरीक़ा |
| अनुष्ठान | |
| संबंधित | तिलावत, रुकू, सजूद |
जा-ए-नमाज़ एक कपड़े या चटाई का आयताकार टुकड़ा होता है जिसे बिछाकर मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं। शाब्दिक अर्थ है; "नमाज़ पढ़ने की जगह"।[1] नमाज़ के पाबंद लोग इसे घर पर रखते हैं और यात्रा में भी साथ रखते हैं।
विवरण
[संपादित करें]इस्लाम में नमाज़ के लिए स्थान पवित्र और स्वच्छ होना चाहिए। वुज़ू के बाद मुसलमान जहाँ नमाज़ पढ़ते हैं वहाँ कपड़े या प्लास्टिक से बने जा-ए-नमाज़ को बिछाते हैं। इसे मुसल्ला भी कहा जाता है। अधिक नमाज़ियों के लिए चटाई, गलीचा या कालीन का उपयोग किया जाता है।
आकार
[संपादित करें]एक नमाज़ी के लिए जा-ए-नमाज़ सामान्यतः लगभग 2 फ़ुट चौड़ा और 3 फ़ुट लंबा होता है। अब कपड़े के अलावा प्लास्टिक से बने हुए मुसल्ले भी प्रचलित हैं। अधिक नमाज़ियों के लिए चटाई की लंबाई समान रखी जाती है ताकि सज्दा करना आसान रहे, जबकि चौड़ाई आवश्यकता अनुसार बढ़ाई जाती है।
शर्तें
[संपादित करें]- किसी गंदी चीज़ से न बना हो।
- किसी जानदार का चित्र न बना हो।
- यदि अकेले खुले में नमाज़ पढ़ी जा रही हो तो सुत्राह का प्रबंध किया जाए।
डिज़ाइन
[संपादित करें]हर देश में वहां की संस्कृति और कलाकारों के अनुसार डिज़ाइन बनाए जाते हैं। अधिकतर डिज़ाइनों में क़िब्ला अथवा काबा का चित्रण होता है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ ""जा-ए-नमाज़" का अर्थ". रेक़्ता. अभिगमन तिथि: 22 सितम्बर 2025.
