विजय कौशल

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विजय कौशल भारत के एक सन्त हैं जो राम कथा के माध्यम से समाज में हिन्दू धर्म का प्रसार करते हैं। समाज को संस्कारित करने का लक्ष्य लेकर उन्होंने राम कथा[1] को साधन बनाया।

विजय कौशल उन विरले सन्तों में हैं जो स्वीकार करते हैं कि सन्तों की समाज में पहुँच तो बढ़ी है लेकिन उनका प्रभाव कम हुआ है। इसका कारण वे यह बताते हैं कि आज के युग में सन्तों की तपस्या क्षीण पड़ गयी है। सम्भवत: इसीलिये समाज पर सन्तों से अधिक अभिनेताओं का प्रभाव दिखता है।[2] उनका मुख्य ध्येय ही यह है कि कथा के माध्यम से धार्मिक संस्कारों को समाज के सम्पन्न घरों तक पहुँचाया जाये। क्योंकि ये लोग जैसा व्यवहार करते हैं वही समाज में नीचे तक जाता है। अगर सम्पन्न घरों में साप्ताहिक यज्ञ, सामूहिक दैनिक भोजन व राम कथा श्रवण होने लगे तो इसका असर समाज के निम्न वर्ग तक अवश्य ही पहुँचेगा। इससे समाज और देश दोनों का ही भला होगा। बहरहाल यही काम विजय कौशल कर रहे हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

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