विकिपीडिया:चौपाल/पुरालेख 29

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पुरालेख

यह पृष्ठ विकिपीडिया चौपाल की वार्ताओं का पुरालेख पृष्ठ है। नवीनतम वार्ताओं के लिए देखें विकिपीडिया:चौपाल

अनुक्रम

डॉक्टर जगदीश व्योम एवं सम्बंधित सदस्य खाते[संपादित करें]

नमस्कार।

मैं सभी सदस्यों को इस बात से अवगत कराना चाहूँगा कि हाल में की गई चेक्यूज़र जाँच (स्थायी कड़ी) के अनुसार निम्न खाते आई.पी पता एवं कुछ तकनीकी बातों में समान पाए गए हैं। यह संभव है कि ये एक ही कंप्यूटर से संपादन करते हुए अलग-अलग व्यक्ति हों, परंतु यह भी हो सकता है कि ये एक ही व्यक्ति द्वारा चलाए जा रहे खाते हों:

चूँकि इस बात से एक पूर्व-प्रबंधक के छद्म खातों का निर्माण करने का प्रश्न उठता है, अतः मैं सभी प्रबंधकों से अनुरोध करूँगा कि वे इस बात की जाँच करें। साथ ही, इन सभी सदस्यों से भी अनुरोध है कि वे कृपया इस जाँच के नतीजे को स्पष्ट करें। धन्यवाद --सिद्धार्थ घई (वार्ता) 10:00, 12 जुलाई 2012 (UTC)

विकिपीडिया पर मेरा अपना स्वतंत्र एकाउंट है जिसके माध्यम से मैं लेख बनाने और वर्तनी में सुधार का कार्य जब भी समय मिलता है तब करता रहता हूँ, जिस कम्प्यूटर का प्रयोग करता हूँ उसे अन्य जन भी प्रयोग में लाते हैं। चौपाल पर विकि की नीति का पालन करते हुए ही प्रश्न पूछे गये या तर्क किया गया है, पर लगता है कि यह कुछ लोगों ने अपनी प्रतिष्ठा का ही प्रश्न बना लिया, मेरा आशय और उद्देश्य विकि पर कुछ कार्य करने का है कोई पुरस्कार या सम्मान पाने का नहीं। अब से मैं चौपाल पर कुछ भी न लिखने का निर्णय लेता हूँ, क्योंकि इस तरह की बातों और तर्क कुतर्क तथा एक दूसरे पर व्यक्तिगत हमला समय बर्बाद करने के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है। आप लोग यदि चाहें तो मैं यहाँ काम करता रहूँ और न चाहे तो मैं यहाँ कार्य नहीं करूँगा, आप लोग तकनीकी में विशेषज्ञ हैं इसलिये इस क्षेत्र में मैं मुकाबला नहीं कर सकता।--आलोचक (वार्ता) 05:25, 13 जुलाई 2012 (UTC)
मित्रों उपर्युक्त पाँच सदस्य एक ही आई पी से संपादन कर रहे हो, यह असंभव नहीं हैं, विकिपीडिया में परिवार के लोग भी सामिल हो कर संपादन कर सकते हैं। लेकिन जिस प्रकार पिछले कई दिनों से चौपाल में विभिन्न विषयों में चर्चाएँ हुईं और उनमें not notable जीवनी हटाने की बात आई Dr.jagdish और Bill william compton के बीच भी गरमा-गर्म बहस, आखिर कार अपनी जीवनी वाले पृष्ठ को स्वयं Dr.jagdish द्वारा हटाना। Bill william compton का समरुप William bal klinton खोला जाना। User:Froklin का विकिपीडिया में योगदान करना न होकर जादातर चौपाल में बहस छेड़ना और गुटबाजी बनाना रहा है। अनुनाद जी को उकसाना, व्यर्थ की चर्चा को आगे बढ़ाना रहा है। User:आलोचक द्वारा जगदीश व्योम के हटने पर क्रोधभरे उद्गार देना, सब कुछ जो इसी चौपाल में हम देख सकते हैं। इतना ही नहीं इन सभी सदस्यों का एक उद्देश्य रहा है कि उल्लेख्य न होने पर भी जीवित लोगों के जीवनियों को इस विकि में डालना। इसी चौपाल में हम देख सकते हैं, इन सभी सदस्यों की भाषा एक है। सदस्य:Froklin ने १५ जून में पहला योगदान दिया, जो अनुभवी और परिपक्व विकिपीडियन जैसा है और चौपाल में भी पुराने सदस्य की भाँति लिखा है। Bill william compton के विरुद्ध मत रखते गए। User:Froklin ने कुमार विश्वास लेख को हटाने की बात कही थी और User:Sugandha ने इसमें शीह-प्रचार ट्याग डाला । मेरे विचार में दाल में कुछ काला दिखता है। और एक बात है Bill william compton का समरुप William bal klinton का user account खोलना आदि से छद्म खातों का संचालन होने की बात को नकार नहीं सकते।भवानी गौतम (वार्ता) 13:14, 12 जुलाई 2012 (UTC)
भवानी भाई, अनुनाद सिंह को कौन उकसा सकता है? अनुनाद सिंह व्यर्थ की चर्चा करते हैं क्या? कृपया स्पष्ट करें? चेतावनी देने वालों के नाम जानने के लिये हाल की चर्चाओं को पुनः पढ़ लीजिए। -- अनुनाद सिंहवार्ता 15:06, 12 जुलाई 2012 (UTC)
अनुनाद जी मेरा कहना यह है, वे कोशिश ऐसा करते हैं। 'आपने व्यर्थ की चर्चा की ' मेरा यह कहना नहीं हैं। सदस्य:Froklin के चर्चा को देखें आप का नाम किसी न किसी रुप में लेकर गुटबाजी का प्रयास किया है।भवानी गौतम (वार्ता) 15:24, 12 जुलाई 2012 (UTC)

इसमें अब बहुत कम शक़ रह जाता है कि यह एक ही व्यक्ति है - एक आईपी पता, एक ही समय पर प्रयोग, एक ही जैसी वार्ता और सम्पादन। यह 'sockpuppetry' के स्पष्ट चिह्न हैं। मेरी इनसे कोई द्वेष नहीं लेकिन en:Wikipedia:Sock puppetry के तहत इन्हें फ़ौरन ब्लाक कर दिया जाना चाहिए। अगर इसी आईपी पते से और उल्लंघन उठें तो उसे भी हमेशा के लिए ब्लाक कर देना चाहिए। --Hunnjazal (वार्ता) 16:51, 12 जुलाई 2012 (UTC)

एक से अधिक खातों से सम्बन्धित नीति[संपादित करें]

सिद्धार्थ जी, अपने ज्ञानवर्धन के लिये मैं जानना चाहता हूँ कि किसी साधारण सदस्य या सम्पादक द्वारा हिन्दी विकि पर एक से अधिक खाता रखना वैध है या अवैध? कृपया इस विषय से सम्बन्धित नीति या उसका लिंक बताएँ।

en:Wikipedia:Sock puppetry के तहत अवैध है और स्थाई ब्लाक का कारण है। अंग्रेज़ी विकिपीडिया की नीतियाँ हिन्दी विकी पर भी लागू हैं इसलिए हिन्दी विकी या अंग्रेज़ी विकी की बात निरर्थक है। --Hunnjazal (वार्ता) 16:51, 12 जुलाई 2012 (UTC)

श्री हुञ्जाल ने अब अपना वक्तव्य बदल दिया है। निवेदन करने पर भी वे स्वयं इसे लिखने से बच रहे हैं। कृपया उपर की चर्चा देखें। -- अनुनाद सिंहवार्ता 10:38, 13 जुलाई 2012 (UTC)
बिल जी, अच्छा हो अगर इनकी निषेध प्रक्रिया पूरी की जाए तो। en:WP:PA उल्लंघन लगातार जारी है। --Hunnjazal (वार्ता) 07:08, 14 जुलाई 2012 (UTC)
इस विषय में हुंजाल जी का उत्तर मैं निरर्थक मानता हूँ। मैने श्री हुञ्जाल जी का नीतियों से सम्बन्धित दोगलापन उजागर कर दिया है। मैं सिद्धार्थ जी से निवेदन करूँगा कि इस विषय में कुछ स्पष्ट करें क्योंकि इस संबन्ध में उन्होने ही प्रथम संदेश दिया है। -- अनुनाद सिंहवार्ता 04:29, 13 जुलाई 2012 (UTC)
This is an unambiguous en:Ad hominem attack, prohibited by en:Wikipedia:No personal attacks. Siddharth, would you recommend I file a dispute against him? --Hunnjazal (वार्ता) 06:52, 13 जुलाई 2012 (UTC)
अन्य प्रबंधक द्वारा निषेध प्रस्ताव उठा लिया गया है। इतनी कम सदस्य संख्या में ऐसा होना दुखद है लेकिन कोई चारा नहीं बचा है। धन्यवाद! --Hunnjazal (वार्ता) 09:55, 13 जुलाई 2012 (UTC)
बड़े आनन्द से करिये। लेकिन इसे भागने के रास्ते जैसा प्रयोग मत कीजिए। आपने स्पष्ट नहीं किया कि आप स्वयं से क्यों लड़ रहे हैं? - दस मिनट के अन्तरल पर दो बिल्कुल उल्टे वक्तव्य? जैसी बहे बयार पीठ ताही दिशि कीजै?-- अनुनाद सिंहवार्ता 07:14, 13 जुलाई 2012 (UTC)
बिल या सिद्धार्थ जी, नीति उल्लंघनों में वि:युद्धक्षेत्रनहीं भी जोड़ लें। 'भाग जाना', 'पीठ दिखाना' - पूर्णतः लड़ाई की भाषा और मानसिकता है, ज्ञानकोष की नहीं। --Hunnjazal (वार्ता) 09:55, 13 जुलाई 2012 (UTC)
अनुनाद जी, आपने एक से अधिक खातों के संबंध में नीति का जो प्रश्न उठाया है, उसका उत्तर है कि अनेक खातों का कुछ तरीकों से प्रयोग किया जाना गलत है। इसका उल्लेख विकिपीडिया:कठपुतली में, और विकिपीडिया:निषेध_नियमावली में पाया जा सकता है।
संक्षिप्त रूप में इन्हें कहें तो एक से अधिक खातों का प्रयोग यदि किसी भी तरीके से विकिपीडिया के कार्य (मुक्त ज्ञानकोष बनाने) में बाधा डालने के लिये किया जाए (चाहे नीतियों के उल्लंघन द्वारा, चाहे अन्य सदस्यों पर व्यक्तिगत हमले कर उन्हें परेशान कर के, या किसी और तरीके से), तो खातों का प्रयोग अवैध है।
इसके अतिरिक्त, मेरे विचार में यदि कोई सदस्य एक से अधिक खाते बनाता है, तो उसे ये बात अपने सभी सदस्य पृष्ठों पर स्पष्ट करनी चाहिये (या फिर एक पर स्पष्ट कर बाकियों को पुनर्निर्देशित करना चाहिये)। ऐसा इसलिए क्योंकि जब दो अलग सदस्य किसी चर्चा में भाग लेते हैं तो यह आम तौर पर माना जाता है कि वे दो व्यक्ति हैं। यदि एक ही व्यक्ति अनेक खाते बनाकर इस बात का फ़ायदा उठाने की कोशिश करे तो यह ग़लत है।
इन खातों के संदर्भ में जोड़ना चाहूँगा कि तीन नए खातों (Froklin, Sugandha और William_bal_klinton) के योगदान ऐसे हैं कि जैसे विकिपीडिया संपादन में माहिर कोई व्यक्ति ये संपादन कर रहा हो।
William_bal_klinton ने 27 जून को खाता खोल के तीन योगदान दिये हैं, तीनों चौपाल पर हैं, जिनमें उन्होंने केवल एक संदेश छोड़ा है। (अंतर)
Sugandha ने कुछ लेखों में योगदान दिया है, कुछ सदस्य वार्ता पृष्ठों पर योगदान हैं और चौपाल पर कुछ संदेश छोड़े हैं। उनके इस संदेश में उन्होंने हिन्दी विकिपीडिया से सम्बंधित कुछ ऐसे तथ्य रखे हैं जो केवल कोई वरिष्ठ सदस्य ही जान सकता है। हाँ, यह सारे तथ्य चौपाल पुरालेखों एवं अन्य पुरानी चर्चाओं और लॉग को देख कर ढूँढी जा सकती हैं, परंतु एक नए-नए सदस्य को एक ही दिन में इतनी चीज़ें पता नहीं लग सकतीं।
Froklin ने आते ही पहले दिन ही चौपाल पर "पूर्णविराम का सवाल" चर्चा में टिप्पणी की, और जगदीश जी के विचारों का समर्थन किया। फिर कविता कौशिक और कुमार विश्वास लेखों को (अन्य लेखों सहित) प्रशंसा की श्रेणी में बताया। इसके तीन घंटे बाद ही Sugandha ने इनपर {{शीह-प्रचार}} का टैग लगा दिया। इसके बाद Froklin ने "यह लेख जीवित व्यक्तियों पर बने हुये लेख है" चर्चा शुरू की केवल यह कहने के लिये कि बिल ने एक लेख को गलत हटाया है। इसके अतिरिक्त Froklin ने संदेशों में अनिरुद्ध और अनुनाद जी के लिये बुरी भाषा का प्रयोग किया है। फिर Froklin ने "निर्वाचित लेख" चर्चा की शुरुआत की, अर्थात Froklin को इस प्रक्रिया के बारे में जानने में केवल 6 दिन लगे। तत्पश्चात Froklin ने बिल पर षडयंत्र रचाने का इलज़ाम लगाया है। फिर Froklin ने आलोचक द्वारा शुरू की गई चर्चा "देवनागरी लिपि के ए, ये, ई, यी का प्रयोग" में भाग लिया; फिर आलोचक द्वारा शुरू की गई चर्चा "नोटेबिलिटी का टेग" में Froklin ने आलोचक का समर्थन किया। इसके बाद "कृपया संदेश हिन्दी में लिखें" चर्चा में Froklin और Sugandha ने एक ही पक्ष लिया।
इससे ऐसा प्रतीत होता है कि कम-से-कम ये दो खाते(Froklin एवं Sugandha) एक ही व्यक्ति चला रहा है, वह भी कोई विकि से भली-भाँती परिचित सदस्य। साथ ही William_bal_klinton, Froklin और Sugandha के हस्ताक्षर देख कर प्रतीत होता है कि तीनों एक ही व्यक्ति ने बनाए हैं। तीनों नए खाते हैं परंतु तीनों को विकि सिंटेक्स की अच्छी जानकारी है, तीनों मुख्य रूप से चौपाल पर मुद्दे उठा रहे हैं, Froklin और Sugandha नए खाते होने के बावजूद विकिपीडिया की प्रक्रियाओं से भली-भाँती परिचित हैं, तीनों के हस्ताक्षर एक जैसे हैं (जो बिल के हस्ताक्षर जैसे हैं), और खातों का प्रयोग चर्चाओं में किसी एक पक्ष की ओर बहुमत दिखाने, अथवा पुराने सदस्यों के आपसी मत-भेद उजागर करने के लिये किया जा रहा है।
मेरे विचार में Froklin, Sugandha एवं William_bal_klinton को ब्लॉक कर दिया जाना चाहिये।
आलोचक और Dr.jagdish पुराने खाते हैं। इनके संबंध में यह जानना कठिन है कि ये एक ही व्यक्ति हैं या नहीं। इसके लिये इनके योगदानों को ध्यानपूर्वक देखना होगा।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 15:54, 13 जुलाई 2012 (UTC)
विस्तार से उत्तर देने के लिये धन्यवाद, सिद्धार्थ जी।
आपके विस्तृत उत्तर को पढ़ने के बाद मेरा मत है कि इन खातों पर कोई कार्यवाही नहीं करनी चाहिये। इसका सबसे प्रमुख कारण है कि इन खातों के कारण किसी भी प्रकार की न कोई बाधा उपजी है न उत्पाद। चर्चा करना और तर्कविर्तक करना अच्छी बात है, अपराध नहीं। इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिये, इस पर किसी भी प्रकार से अंकुश नहीं लगाना चाहिये। मेरा दूसरा तर्क है कि किसी भी प्रकार से और कोई भी इन पर केवल शंका ही कर सकता है, असंदिग्ध रूप से कोई कहने की स्थिति में नहीं है कि ये सभी खाते एक ही हैं। मेरा तीसरा तर्क है कि आपने जो लिंक दिये हैं उनमें इसके बारे में 'नहीं के बराबर' सामग्री है। खाता अवरोध कब और किस प्रकार किया जाय इसका वर्णन नहीं है। यदि कोई अंग्रेजी विकि पर इस तरह की सामग्री होने की बात कहता है तो मेरा कहना है कि हिन्दी विकि पर इस प्रकार की कोई घोषित नीति नहीं है कि हिन्दी विकि पर कोई नीति न होने की स्थिति में अंग्रेजी विकि की तत्सम्बन्धी नीतियाँ लागू होंगी। लोग अपनी सुविधानुसार अंग्रेजी विकि की नीतियों को 'कोट' कर रहे हैं या उसे 'लागू नहीं' की श्रेणी में डाल रहे हैं। मेरा चौथा तर्क है कि हमे नये लोगों को प्रोत्साहित करना है, हतोत्साहित नहीं। इति। -- अनुनाद सिंहवार्ता 11:01, 14 जुलाई 2012 (UTC)
  • चॅक्यूज़र ने यह सुनिश्चित करा है कि ये पाँच खाते एक ही हैं ("5 accounts share IPs and technical evidence")। किसी को अगर अभी भी गलतफहमी हो तो रिपोर्ट को एकबार फ़िर ध्यान से पढ़े "it indicates one person rather than multiple people", किसी को यहाँ "शंका" नहीं होनी चाहिए। दूसरा, अगर किसी को अगर अंग्रेज़ी विकिपीडिया की नीतियों से परहेज़ है तो मेटा की निति पढ़े "creating an account to confuse other editors, disrupt discussions, distort consenus, avoid sanctions/bans/blocks/global bans or otherwise violate the rules and/or policies is called sockpuppetry and is not allowed", मतलब इस प्रकार के खाते बनाने कि अनुमति नहीं है और इस बात का ध्यान रखें कि मेटा की नीतियाँ सभी प्रयोजनाओं पर लागूँ होती हैं। और किसी को इन खातों के अपराध न दिख रहें हो तो ध्यान से सुने, इनका अपराध है चर्चा में किसी विशेष दृष्टिकोण को वज़न देना व उसके परिणाम को बदलने का पर्यत्न और यह विकिपीडिया पर अपराध है ("disrupt discussions"; "distort consenus")। ये कोई नए सदस्य नहीं हैं जो इन्हें प्रोत्साहित किया जाए। अगर किसी को बिना वजह का शक अभी भी है तो चॅक्यूज़र की रिपोर्ट ध्यान से पढ़े। मेरा मत यही है कि इन खातों को यहाँ पर प्रतिबंधित किया जाए।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 14:56, 14 जुलाई 2012 (UTC)
Hi Bill and others, I really fail to understand why are we wasting so much time over a foregone conclusion? Just to be sure, I did cross-check with the Checkuser on meta if he can conclusively say whether its one person or not and his answer is in affirmative. Furthermore, Dr. Jagdish has not bothered to reply, nor has "आलोचक" come out with his actual affilation with other accounts. Meanwhile, when Anunad himself has accepted the proposal of blocking him, why are we not moving ahead? -- लवी सिंघल (वार्ता) 16:56, 14 जुलाई 2012 (UTC)
मैं लवी जी की बात का समर्थन करता हूँ। इन कार्यवाइयों में कोई शंका नहीं है - कठपुतली खाते और लगातार व्यक्तिगत हमले दोनों स्पष्ट हैं, और प्रबंधकों में आपसी सहमती है। बिल जी, समय आ गया है कि दोनों प्रक्रियाओं को पूरा करें। धन्यवाद। --Hunnjazal (वार्ता) 18:28, 14 जुलाई 2012 (UTC)
अनुनाद जी, आपके तर्कों के उत्तर:
  • ऊपर जिस प्रकार की चर्चाओं के मैंने उल्लेख किये हैं; इस प्रकार के व्यवहार को मैं विकिपीडिया के कार्य में बाधा डालने का प्रयत्न ही मानता हूँ। आपको ये जायज़ लगती हैं यह आपका विचार है। मैं आपसे असहमत हूँ।
आपने दूसरा तर्क यह दिया है कि असंदिग्ध रूप से नहीं कहा जा सकता कि ये खाते एक ही व्यक्ति के हैं। इसका उत्तर है कि असंदिग्ध रूप से तो कभी किसी भी खाते के बारे में जानकारी नहीं हो सकती कि उसे कौन चला रहा है, जब तक की व्यक्ति के घर में घुस के उससे ना पूछा जाए। ज़ाहिर है कि असंदिग्ध रूप से जानना वास्तविक स्थिति में असंभव है, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि ऐसी जानकारी के अभाव में सदस्यों के खिलाफ़ कदम नहीं उठाए जा सकते।
आपने तीसरा तर्क दिया है कि नीतियों में "ना के बराबर" जानकारी है। यह सत्य है। "खाता अवरोध कब और किस प्रकार किया जाय इसका वर्णन नहीं है।" यह गलत है। वि:कठपुतली में लिखा है ...इस आधार पर किसी भी सदस्य जिस पर आपको सन्देह हो, को एक चेतावनी अवश्य दें। यदि इसके बाद भी वह अपना व्यवहार नहीं छोड़ता तो उसके समस्त खाते ब्लॉक किये जा सकते है। इसके अनुसार दूसरे सदस्यों पर व्यक्तिगत हमला (पर्सनल अटैक) या अवैध/अनुचित टिप्पणियाँ करने के लिये बनाया गया खाता की श्रेणी में तीनों खाते (Sugandha, Froklin एवं William_bal_klinton आते हैं)। इस नीति के अनुसार ब्लॉक किये जा सकते हैं और विकिपीडिया:सदस्य_अधिकार_हेतु_नीतियाँ#प्रबन्धक दायित्व के अनुसार उत्पात रोकना एक प्रबंधक का दायित्व है। अतः, यह निर्णय लेना कि सदस्यों को ब्लॉक करना है या नहीं, प्रबंधकों के हाथ में है। प्रबंधक उपयुक्त समझने पर शंका के आधार पर किसी सदस्य को कठपुतली होने के लिये ब्लॉक कर सकते हैं।
आपका चौथा तर्क है कि हमे नये लोगों को प्रोत्साहित करना है, हतोत्साहित नहीं। मैं इस बात से पूर्णतया सहमत हूँ। परंतु प्रथमतः तो ये तीन नए लोग हैं, इसी बात पर प्रश्न है, दूसरे इनका अब तक चौपाल पर व्यवहार असभ्य रहा है। मैं प्रोत्साहन में विशवास रखता हूँ, परंतु असभ्य व्यवहार को हतोत्साहित करने में भी यकीन करता हूँ।
जैसा मैंने ऊपर कहा, मैं तीन नए खातों को अवरोधित करने का समर्थन करता हूँ।
आलोचक और Dr.Jagdish खातों के संबंध में अन्य प्रबंधकों से अनुरोध है कि वे इनके योगदानों को जाँचे कि क्या दो खातों का कभी गलत उपयोग किया गया है? यदि गलत उपयोग पाया जाए तो उपयुक्त कदम उठाने पड़ेंगे। परंतु यदि कोई गलत उपयोग नहीं किया गया है तो मैं इन खातों के अवरोधन के विरुद्ध हूँ।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 19:59, 14 जुलाई 2012 (UTC)
सिद्धार्थ जी, उत्तर देने के लिये धन्यवाद। आपने अपने उत्तर में वि:कठपुतली का उल्लेख किया है और कहा है कि इसमें कुछ लिखा है। क्या वह हिन्दी विकिपिडिया की मान्य नीति है या कुछ लोगों के द्वारा लिखे गये नीजी विचार। कोई और भी उसमें कुछ जोड़ दे तो वह नीति कहलायेगी या नहीं? यदि यह पृष्ठ नीति है तो इसका उल्लेख साफ-साफ क्यों नहीं किया गया है? मेरा दूसरा प्रश्न है कि इन सदस्यों को कभी कठपुतली खाता खोलने के प्रति कब चेतावनी दी गयी थी? मेरा तीसरा प्रश्न है कि इन्होने क्या उत्पात किया है? आप उत्पात की श्रेणी में किसको-किसको रखते हैं? उसमें से इनके उपर क्या-क्या लागू होता है? किसी ने हिन्दी विकि की घोषित नीति का उलंघन करके एक अच्छे लेख को मिटा दिया, (जबकि नीतिसंगत यह था कि उसे किसी पूर्वरूप में लाकर छोड़ दिया जाय) क्या इसका विरोध करना उत्पात है या लेख को मिटाना उत्पात है? कृपया इनकी 'असभ्य भाषा' का उदाहरण दें ताकि मैं उसकी दोगुनी सभभ्य भाषा का उदाहरण प्रस्तुत कर सकूँ। -- अनुनाद सिंहवार्ता 11:35, 16 जुलाई 2012 (UTC)
एक और प्रश्न : सिद्धार्थ जी, कृपया यह भी बताने का कष्ट करें कि मेटा की सारी नीतियाँ स्वत: (बाई डिफाल्ट) हिन्दी विकि पर भी लागू होती हैं या नहीं। -- अनुनाद सिंहवार्ता 12:02, 16 जुलाई 2012 (UTC)
हिन्दी विकिपीडिया पर मैं काफी समय से लेखों को बनाने, सुधारने एवं वर्तनी की अशुद्धियों को ठीक करने का कार्य कर रहा हूँ, जिस तरह से एक समूह सा बनाकर हिन्दी लेखों पर कार्य करने वाले एक प्रबंधक पर हमले किये जा रहे हैं इससे मैं आहत हुआ हूँ, मेरा अपना समय भी कीमती है, यदि आप लोगों को लगता है कि मुझे यहाँ कार्य नहीं करना चाहिये तो मुझे इसका कोई विरोध नहीं करना है, मेरा अपना एक खाता है अन्य खातों से मेरा कोई सम्बंध नहीं है हाँ सहयोग मैं सभी को करता रहा हूँ जिसे भी मेरी आवश्यकता लेख सुधारने के लिये महसूस हुई है, आप लोग जल्द निर्णय ले लें कि मुझे यहाँ कार्य करना है या नहीं, यदि मेरे खाते को ब्लाग करने से विकि का भला हो रहा हो तो कृपया तत्काल कर दें ताकि जितना समय चौपाल पर इन सब में लगाया जा रहा है उतने समय में कुछ लेख बन सकें। हिन्दी विकिपीडिया पर सब अपनी स्वेच्छा से योगदान देने के लिये आते हैं, आपस में तर्क तो ठीक है पर कुतर्क ठीक नहीं है, इसमें समय ही खराब होता है। होना तो यह चाहिये कि जो तकनीकी क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं वे भाषा के लोगों का सहयोग करें और जो भाषा के क्षेत्र में जानकारी रखते हैं वे उस दिशा में सहयोग करें, पर यहाँ तो एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का कार्य होने लगा है यह ठीक नहीं है, पहले भी कई बार सदस्यों में विवाद हुये हैं और मैंने उन्हें सुलझाने में सहयोग ही किया है, खैर...... अगले निर्णय की प्रतीक्षा रहेगी। --डा० व्योम 04:14, 15 जुलाई 2012

एक से अधिक खातों से सम्बन्धित नीति - भाग २[संपादित करें]

आलोचक महोदय को मैं नहीं जानता लेकिन ऐसे उदाहरण आपको ज़रूर मिलेंगे जिनमें उन्होने आकर किसी चर्चा में एक तरफ़ का पलड़ा अधिक भारी दिखाने की चेष्टा की है। इन्हीं कारणों से छिद्म खाते वर्जित किये जाते हैं। मैं अंतर्राष्ट्रीय अंकों के पक्ष में था लेकिन जब मैंने देखा कि बहुत से सदस्य नागरी अंक रखना चाहते हैं तो उनकी संवेदनाओं को ध्यान में रखकर मैंने एक बार फिर नागरी अंकों को हमेशा प्रयोग में लाना शुरू कर दिया और अब तक लाता हूँ। यदि कोई उसमे छिद्म खाते बनाकर दिखाता कि ३० लोग अंतर्राष्ट्रीय अंकों के पक्ष में हैं और ५ उसके विरुद्ध हैं तो इस से विकी सहमती प्रक्रिया प्रदूषित होती है। ध्यान दें कि यह उदाहरण जो मुझे मिला उसमें 'आलोचक' उन्ही 'डा० व्योम' की बढ़ाई कर रहें हैं जो जांच के अनुसार आलोचक ही हैं (एक ही आई पी से आते हैं, एक ही मशीन का प्रयोग करते हैं और उनके उस मशीन के प्रयोग के pattern से लगता है कि एक ही व्यक्ति है)। इन चीज़ों में देखा गया है कि व्यक्ति यह एक बार न कर के बार-बार करता है। यही pattern यहाँ भी दिखता है - चिह्न हैं कि इन्होनें एक नहीं ५-५ खाते बनाए हुए हैं। अगर इनको इस दुरूपयोग के बाद भी क्षमा है तो दूसरों की क्या ग़लती है? उन्हें भी छूट मिलनी चाहिए। इस से भी एक नए प्रकार का संतुलन बनेगा, चाहे वह एक 'जंगली संतुलन' ही हो। --Hunnjazal (वार्ता) 05:10, 19 जुलाई 2012 (UTC)

 Yes check.svg Done, चेक युजर टेस्ट यह सिद्ध करता है कि यह समस्त खाते Dr.jagdish, आलोचक, Froklin, Sugandha, William bal klinton एक ही व्यक्ति के है इस टेस्ट के अन्तर्गत यह पाया गया है कि

  1. पाँचों खाते एक ही कम्पयूटर, ब्राउजर और आई पी से थे।
  2. इसके साथ यह समस्त खाते एक साथ सक्रिय हुए थे।
  3. सभी खातो का डक टेस्ट(DUCKTEST) समान पाया गया अर्थात सभी पाँचों खातों के मालिक के लेखन में हिन्दी लेखन में बहुत समानता मिली।
  4. समान लेखन रुचि

इन सबको देखते हुए केवल डा व्योम के खाते को अनावरोधित रखते हुए बाकि समस्त खाते अवरोधित किये जाते है, अंग्रेजी या किसी भी प्रतिष्ठित विकि में केवल इस टेस्ट के आधार पर ही आरोपी सदस्यों को ब्लाक किया जाता है। वि:कठपुतली के अन्तर्गत डा व्योम को यह सलाह दी जाती है कि वो भविष्य में ऐसे छदम खाते न खोले वह हिन्दी वर्तनी विभाग के श्रेष्ठ लेखकों में से एक है इसलिये "For a mark of respect" इनको भी एक अवसर अवश्य मिलना चाहिये।--Mayur (talk•Email) 18:50, 20 जुलाई 2012 (UTC)

मयूर जी, मैं आपका बहुत आदर करता हूँ लेकिन जगदीश जी को दिए जा रहे इस 'एक अवसर' का कड़ा विरोध करता हूँ। यह नीति-विपरीत है। फिर भी मैं आगे बढ़ने के लिए इसमें आपके साथ सहयोग करने को तैयार हूँ बशर्ते -

  • यह किसी भी सदस्य के लिए और हमेशा के लिए बिलकुल अंतिम छूट है। इसके बाद कोई भी छद्म खाते चलाता हुआ पकड़ा गया तो हमेशा-हमेशा के लिए उसे प्रतिबंधित किया जाएगा, चाहे वह कोई भी हो, कितना ही पुराना हो, कितना ही सक्रीय हो। चेतावनी नहीं दी जाएगी और कोई चर्चा नहीं होगी। वि:कठपुतली नियम को en:Wikipedia:Sock puppetry के बराबर सख़्त​ बनाया जाएगा।

इस बात की पुष्टि अनिरुद्ध जी, आप, बिल जी, आशीष जी, लवी जी और मैं यहाँ करें -

  • अनिरुद्ध जी -
  • आशीष जी - सहमति, वह भी मात्र इसलिये कि अन्य कई लोग असहमत हैं, व बिना किसी कारण विशेष के, मैं आम सहमति से अलग नहीं जाना चाहूंगा, वर्ना लगभग असहमति, : यानि खाता निषेध प्रस्तावित।--ये सदस्य हिन्दी विकिपीडिया के प्रबंधक है।प्रशा:आशीष भटनागरवार्ता 06:03, 26 जुलाई 2012 (UTC)
  • बिल जी - सहमति
  • लवी जी - UNACCEPTABLE Ironically, Mayur and Hunnjazal themselves have explained as to why I should be disagreeing with the above actions. To quote Hunnjazal, " यहाँ शाही परिवार नहीं चलेंगे।" Then, why is Dr. Vyom being let off? Now, that it has been duly established that he himself did indulge in sockpuppetry, banning all other accounts except for his own only amounts to cleaning up and not really a punitive action. And sockpuppetry is not his only crime. He has also been involved in creating an article page on himself using the account name "आलोचक", protecting it, removing maintenace tags from it, lobbying to let it remain on Chaupal using the other fraud accounts, then himself deleting it when the issue was raised on Chaupal, claiming victimization and most recently, again protecting his own user page even after he had been duly warned and made aware against such admin overreach. I want to know as to till how far exactly are we ready to go in order to appease such "हिन्दी वर्तनी विभाग के श्रेष्ठ लेखकों"? There's no good faith left over here. -- लवी सिंघल (वार्ता) 03:59, 21 जुलाई 2012 (UTC)
  • मयूर जी - सहमती
  • हुन्नजज़ल - सहमती

अगर यह हो जाता है, तो मैं छद्म खातों का मामला ख़त्म समझूंगा। इन खातों का मामला इतना हानिकारक है कि इनमें चेतावनी वग़ैराह का प्रश्न ही नहीं उठता। इनका प्रयोग छुपकर झूठे ज़रियों से विकी कार्यों में हेरा-फेरी करना होता है। अगर यहाँ सहमती बनती है तो जगदीश जी स्वयं को ख़ुशनसीब जानें। वरना किसी भी सम्मानजनक विकी में उनका सदस्य के रूप में बच पाना नामुमकिन था। अगर सहमती नहीं बनती है तो फिर सभी को छद्म खाते बनाने कि स्वतंत्रता दी जाती है - बेशक आप प्रतिबंधित खातों को भी फिर बहाल कर दें। मसलन अनुनाद जी पर भी छद्म खाते बनाकर आक्रमण करना किसी भी तरह से नीति-उल्लंघन नहीं होगा। अगर सहमती बन भी जाती है तो इस से अनुनाद जी के मामले पर कोई विराम नहीं पड़ता। वह प्रक्रिया अलग है और उसमें अभी आरम्भ ही हो रहा है इसलिए विराम का प्रश्न ही नहीं बनता। यहाँ नीति-नियम और विधि ही चल सकती है या फिर जंगल-राज। आपसी 'यार-दोस्त' के समझौतों का समय अनुनाद जी ने तमाम करवा दिया है। वातावरण में इतना ज़हर मिल चुका है कि उसपर अब लौटना असम्भव है। नए-पुराने का भेद-भाव हर रूप से नामंज़ूर है। यहाँ शाही परिवार नहीं चलेंगे। या तो नीति की जीत होगी या अशिष्टता और हिंसा की। --Hunnjazal (वार्ता) 02:32, 21 जुलाई 2012 (UTC)

Hunnjazal मैनें यह नहीं कहा कि व्योम जी को माफ कर दिया गया है यदि कोई अन्य प्रबन्धक उन पर कोई कार्यवाही करना चाहता है तो कर सकता है मैनें केवल इसलिये उन्हें अवरोधित नहीं किया क्योंकि उन्हें अवरोधित करने के लिये यहां एकमत नहीं था और हमारी वर्तमान नीति के अनुसार हम सदस्य को एक चेतावनी अवश्य देते है और अब इन्हें चेतावनी दे दी गयी है। इन्हें विकिमीडिया स्टीवर्ड्स पहले ही प्रबन्धक पद से हटा चुके है अत: इन सब बातो को देखते हुए मैनें यह निर्णय लिया था।--Mayur (talk•Email) 13:32, 21 जुलाई 2012 (UTC)
छद्म खातों के इस प्रकरण को मैं इसलिए समर्थन नहीं दें रहाँ हूँ कि मैं सदस्यों को उनके विकिपीडिया पर बिताए गए समय या उनकी "वरिष्ठता" को अहमियत देता हूँ। मैं ऐसा इसलिए कर रहाँ हूँ क्योंकि कुछ सदस्य अभी भी एकमत नहीं हैं कि व्योम जी के खाते को बंद किया जाए या नहीं (सर्वसम्मति की कमी) और हिन्दी विकिपीडिया पर कठपुतली निरोधक नियम की कमजोरी। परन्तु मैं इस बात पर जोर देना चाहूँगा कि अब हमें एक सख्त कठपुतली निरोधक नियम की आवश्यकता है क्योंकि राजीवमास के प्रकरण और अब व्योम जी के इस नए प्रकरण से यह बात काफ़ी साफ़ हुई है कि हिन्दी विकिपीडिया के कई सदस्यों में विकिपीडिया निति व दिशानिर्देशों के प्रति सम्मान खत्म होता जा रहा है, हर कोई अपनी मर्जी चला रहा है, छद्म खाते बना रहा है, अन्य सदस्यों को परेशान कर रहा है। मैं लवी जी की प्रतिक्रिया समझ सकता हूँ, परन्तु व्योम जी के अन्य अपराध जो इन्होंने बताएँ हैं उनकी सजा तो व्योम जी को पहले ही मिल गई है इसलिए मैं लवी जी से भी अनुरोध करूँगा कि केवल इस बार बात को समझें और मैं यह आश्वासन देता हूँ कि जबतक सख्त कठपुतली निरोधक नियम नहीं आ जाता तब तक इस चर्चा को पूर्ण विराम नहीं मिलेगा। मैं इसके लिए जल्द ही ड्राफ़्ट तैयार करता हूँ।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 03:32, 22 जुलाई 2012 (UTC)
विकि पर जो मेरे सम्बंध में निर्णय लिया गया उसके लिये धन्यवाद, मैं पुनः कहना चाहूँगा कि मेरा अपना एकमात्र खाता है अन्य किसी खाते से मेरा सम्बंध नहीं है, आलोचक जी को मैंने ही विकि पर कार्य करने के लिये प्रेरित किया था, वे मेरे सहयोगी भी रहे हैं, यह तथाकथित छद्म खाते किसके द्वारा बनाये गये हैं, मैं नहीं समझ पा रहा हूँ। मेरे पास इतना समय होता भी नहीं है कि यह सब बेकार के काम करता रहूँ, पर खाते बने हैं तो किसी ने बनाये ही होंगे और मेरा नाम भी इसमें आया, मुझे खेद है कि विकि का इतना समय नष्ट हुआ, मेरा खाता बन्द करने से यदि यह बेकार का विवाद शांत हो सके तो तुरंत बन्द कर दें, मेरी आवश्यकता जब भी विकि पर हो मैं तैयार रहूँगा।

मेरा नाम जिस तरह से घसीटा गया ( अपराध किया है, सजा मिल गई है, जैसी भाषा ) उससे मेरे स्वाभिमान और सम्मान को ठेस पहुँची है, विकि पर कार्य करते हुये मैंने अपना कीमती समय दिया ही है यहाँ से कुछ लिया नहीं है इसलिये इस तरह की अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जाना खेद जनक है। मेरे पास यह प्रमाण नहीं है कि खाते मैंने नहीं बनाये हैं पर सत्य यही है कि मैंने छद्म खाते नहीं बनाये हैं।--डा० जगदीश व्योमवार्ता 05:30, 22 जुलाई 2012 (UTC)

नारायम इनपुट[संपादित करें]

नारायम इनपुट में 'ओं' शब्द नहीं लिखा जा सकता है। जब भी ओ में बिन्दी लगाई जाती है तो वह स्वयं 'ॐ' में परिवर्तित हो जाता है। इस त्रुटि का निवारण करना आवश्यक है क्योंकि कई ऐसे शब्द हैं, जिनमें अन्त में बहुवचन में 'ओं' आता ही है। हालांकि इसका सीधा हल यह है कि ctrl +m दबाकर फिर गूगल transliteration bookmarklet द्वारा इसे लिखा जा सकता है परन्तु यह प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है तथा शायद सबको इसका बोध भी न हो। अतः इस विषय के बारे में कुछ करना आवश्यक है।--सोमेश वार्ता 14:48, 12 जुलाई 2012 (UTC)

इस बात को चौपाल पर रखने के लिये आपका धन्यवाद सोमेश जी। यह समस्या कुछ समय पहले स:Anilbhardwajnoida जी ने मुझे बताई थी और मैंने इसके लिये बग 38238 फ़ाइल किया था। वहाँ पर डेवेलपर ने प्रश्न किया है कि क्या कोई अन्य कुंजी का प्रयोग हो सकता है किसी के लिये?
इस समस्या की जड़ दरअसल इस बात में है कि ओ के लिये o टाइप करना होता है, ं के लिये M, और ॐ के लिये ओ के बाद M, अर्थात oM। चूँकि नारायम oM दबाने पर इनमें से एक ही परिवर्तन लागू कर सकता है, या तो ओं या ॐ, तो जो नियम उसकी नियमों की सूची में पहले है, वह वही नियम लागू कर के छोड़ देता है। चूँकि ॐ का नियम ं से ऊपर है, अतः ॐ बनता है।
इस समस्या का समाधान तब हो सकता है जब इनमें से एक के लिये इनपुट कुंजी बदली जाए। या तो ं को M की जगह किसी और कुंजी से लिखना होगा, या ॐ के लिये कोई और key combination का प्रयोग करना होगा। इसके लिये key combination के सुझावों का स्वागत है, चूँकि कौनसा आसान रहेगा, यह तो प्रयोक्ता ही बता सकता है। वर्तमान key combinations की सूची आप वि:नारायम पर देख सकते हैं।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 16:56, 13 जुलाई 2012 (UTC)
मेरे विचार से तो ॐ को auM से लिखा जाए तो अधिक श्रेयस्कर होगा। आगे अन्य सदस्य जिस प्रकार का सुझाव दें। धन्यवाद।--सोमेश वार्ता 19:09, 13 जुलाई 2012 (UTC)

निषेध प्रस्ताव सदस्य:अनुनाद सिंह[संपादित करें]

अनुनाद सिंह (वार्ता योगदान)
सदस्य:अनुनाद सिंह विकिपीडिया:पंचशील के चौथे बिन्दु का सीमा से अधिक बार उल्लंघन कर चुकें हैं। पहले इनका हमला केवल मेरे तक ही सीमीत था परन्तु अब इन्होंने अन्य सदस्यों पर भी व्यक्तिगत हमले करना शुरू कर दिया है और कई बार चेतावनी देने के पश्चात भी इन्होंने अपने व्यवहार में कोई बदलाव नहीं किया। आपसी चर्चा के दौरान इन्होंने मुझे "महारानी के सेवक" कहना शुरू कर दिया जो अपमानजनक है। इन्होंने नए सदस्य को भी नहीं बक्शा, उसे भी "शिखंडी" और "महारानी के सच्चे सेवक" कहने लगे, ये यह भी भूल गए कि नए सदस्यों के साथ कैसे व्यवहार किया जाता है, उन्हें भी काटने लगे। विकिपीडिया पर संवाद सम्बन्धी कोई निति न होने के बावजूद भी ये लवी सिंघल जी के पीछे पड़ गए और जब Hunnjazal जी ने नई नीति का प्रस्ताव रखा तो भी इन्हें संतुष्टि नहीं मिली और अपना गलत बर्ताव ज़ारी रखा। समस्या यहाँ तक सीमित नहीं है। इन्हें विकिपीडिया की नीतियों का पालन करना भी नहीं आता और ऐसा करने वालों के ये पीछे पड़ जाते हैं। इनके लेख सम्पादन में भी कुरुतियाँ हैं, ये विकिपीडिया पर अपना राजनीतिक उल्लू सीधा कर रहें हैं। मैंने इनसे कितनी बार कहा है कि विकिपीडिया एक ज्ञानकोष है यहाँ तटस्थ रहकर कार्य किया जाता है परन्तु इसके पश्चात भी इन्होंने एक न सुनी और दूसरा अतर्क्य पूर्ण तरीके से अपने को सही साबित करने लगे। इनके कई कारनामों में से एक है विभिन्न लेखों में गलत तरीके से बाहरी कड़ीयाँ लगाना है; ये अन्ना हजारे, जन लोकपाल विधेयक आंदोलन २०११, इंडिया अगेंस्ट करप्शन, जन लोकपाल विधेयक, आदि पर तो मिडिया से अच्छी-अच्छी बाते उठा के उनके लिंक इन लेखों में लगाते हैं, और जिन व्यक्तियों को ये शायद पसंद नहीं करते जैसे सोनिया गांधी, राहुल गांधी, भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस, मनमोहन सिंह आदि पर चुने हुई नकारात्मक लिंक देते हैं। इससे पता चलता है कि इनका यहाँ पर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट है। ये किसी की तर्कसंगत बात को सुनना ही नहीं चाहते इसका एक और उदहारण वार्ता:बायोम पर हुई चर्चा है। इन्हें यह पता ही नहीं कि एक ज्ञानकोष कैसे लिखा जाता है। सबसे घृणास्पद बात यह है कि इन्हें विकिपीडिया पर ब्रिटेन से सम्बंधित निर्वाचित लेख बनाना भारत को और गुलाम बनाने के बराबर लगता है। इनके विचार में "ब्रिटेन और अंग्रेजी के लिये" [विकिपीडिया के लिए] अलग और भारत [हिन्दी विकिपीडिया] के लिए अलग लेख होनें चाहिए और इन्हें ब्रिटेन समन्धित लेख "महत्वपूर्ण" नहीं लगते। इनके विचार में यहाँ "'महारानी के सेवक' इसे [विकिपीडिया को] 'गुलाम विकि' बनाने में जुटे हुए हैं"। इन्हें हर किसी पर शक रहता है, इन्हें Hunnjazal की "दाढ़ी में तिनका नजर आता है", इन्हें मेरे कार्यो में "ब्रिटेनवादिता" दिखती है, इन्हें प्रतिष्ठित इतिहासकारों के कार्यो पर "शंका होती है" क्योंकि अपराध यह है कि वे ग्रेट ब्रिटेन के वासी हैं/थे। इन बातों से यह साफ़ होता है कि ये अभी भी भारत के उपनिवेशण से ऊपर उठ नहीं पाए है और अपना हमला एक देश के प्रति बनाएँ हुए हैं। 'भाग जाना', 'पीठ दिखाना' - पूर्णतः लड़ाई की भाषा और मानसिकता के प्रतीक हैं, जो वि:युद्धक्षेत्रनहीं का साफ़ उल्लंघन है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए मैं यह प्रस्ताव रखता हूँ कि इन्हें इनके प्रबंधक पद से मुक्त करने के साथ-साथ विकिपीडिया:पंचशील का उल्लंघन करने के लिए हिन्दी विकिपीडिया से प्रतिबंधित (ब्लोक) किया जाए।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 08:22, 13 जुलाई 2012 (UTC)

मै इस प्रस्ताव के प्रस्ताव का स्वागत करता हूँ। मैने उक्त सारी बातें लिखी हैं किन्तु उनके अपने-अपने सन्दर्भ हैं। बिना सन्दर्भ के किसी भी बात का कोई भी अर्थ निकाला जा सकता है। मैं हर चीज का सन्दर्भ दिखा सकता हूँ किन्तु सभी से निवेदन है कि वे स्वयं सन्दर्भ देखें या याद करें और खुलकर अपना मत दें। कुछ लोगों को भूल गया होगा। मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि जिस सज्जन ने यह प्रस्ताव रखा है उनके विरुद्ध इसी चौपाल पर 'गाली-गलौज वाली भाषा लिखने' का मुकद्दमा चलाया गया था।
मैं अपना मत इस प्रस्ताव के समर्थन में देता हूँ। अर्थात अनुनाद सिंह को प्रबन्धक पद से मुक्त किया जाय और विकिपिडिया पर उन्हें प्रतिबन्धित किया जाय।-- अनुनाद सिंहवार्ता 08:50, 13 जुलाई 2012 (UTC)
समर्थन -- कई नीतियों का खुलकर उल्लंघन किया है। बारबार जातीय द्वेष की भाषा का प्रयोग किया है। व्यक्तिगत हमले जारी रखें हैं। नरमी से बात करने या समझाने का कोई असर नहीं हुआ है। --Hunnjazal (वार्ता) 09:48, 13 जुलाई 2012 (UTC)
समर्थन --चौपाल के सभी चर्चाओ को पढ़ने के वाद मैं भी इसी निष्कर्ष में पहुँचा। ब्रिटेनवादी, पाकवादी, आतंकवादी, साम्यवादी, नुक्तावादी, संस्कृतिवादी और दासमानसिकतावादी जैसे गाली बार-बार देकर कट्टरवाद और एकाधिकार स्थापित कोई भी प्रबन्धक न करें, विकिपीडिया का संबन्ध ज्ञान से होता है न कि किसी वाद और राष्ट्रियता से।-भवानी गौतम (वार्ता) 11:41, 13 जुलाई 2012 (UTC)
भवानी भाई, आपको आपकी ही सूक्ति याद दिला दूँ - 'प्रियं च नानृतं ब्रूयात' (प्रिय किन्तु झूठ नहीं बोलना चाहिये।) आपने यहाँ जो कुछ लिखा है वह 'तथ्यात्मक झूठ' है। इसे सिद्ध करने के लिये इसी पृष्ठ पर 'शराबी, कबाबी, कट्टर संस्कृतवादी' खोजिये। फिर देखिये कि यह किसके संदेश में सबसे पहले आया है। आपने ठीक से पढ़ा नहीं या जानबूझकर लिखा है?-- अनुनाद सिंहवार्ता 03:41, 17 जुलाई 2012 (UTC)
Strong support: This thing was long overdue but as the maxim goes "देर आये, दुरूस्त आये"। There are enough other troubles for hi.wiki. It can certainly do without a troublesome sysop. And since he himself has supported the resolution, we can clear it right away. There might be a need to keep a watch on the IPs used by him although. We may have to deal with some sockpuppeteers/meatpuppeteers in the near future. लवी सिंघल (वार्ता) 12:06, 13 जुलाई 2012 (UTC)

असहमत। अद्भुत है यह प्रस्ताव। विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है के एक निर्देश में लिखा गया है कि विकि जनतंत्र नहीं है। क्या है जनतंत्र का अर्थ यहाँ पर? डेमोक्रेसी वाला जनतंत्र या चुनाव के मैदान वाला जनतंत्र? जनतंत्र एक आधुनिक राजनीतिक आदर्श है। क्या इसका ऐसे हल्के में प्रयोग होना चाहिए? सामान्य बोलचाल की भाषा के प्रयोग तक पर तो अपने अपने निहितार्थ निकाले जा सकते हैं, निकाले जा रहे हैं (देखिए- वार्ता:बायोम)। मसलन, हुंजजाल जी के लिए ‘ख़ाकसार को अबस कहते हैं’ तो हुई मुहावरे की भाषा और ‘दाढ़ी में तिनका’ हो गया व्यक्तिगत प्रहार। क्या यह महज़ एक मुहावरा नहीं है जो व्यक्ति के तर्क पर संदेह होने पर भी प्रयोग किया जा सकता है? बेशक आपको नीयत पर संदेह हो सकता है, होना भी चाहिए। यही संदेह दूसरों को भी हो गया तो इतना हंगामा क्यों है बरपा? भाषा बड़ी मायावी चीज़ है। टोन और संदर्भ को मोड़ दिया जाय तो क्या से क्या कर डाले? नुक़्ते की हेर-फेर से क्या हो सकता है, बताने की ज़रूरत है क्या? नियमों का उल्लेख नहीं करूंगा क्योंकि वो प्रस्तावक लोग बेहतर जानते हैं, लेकिन बायोम की वार्ता का ज़िक्र आया है तो बता दूँ कि नियम समझाते कैसे हैं, इसे जरूर समझना चाहिए आपको। हुंजज़ाल जी मुझसे असहमत थे लेकिन अन्य विषयों पर आगे भी उनसे सार्थक बात (वार्ता:कठबोली) हुई। आशा करता हूँ आगे भी होती रहेगी। अभी भी हुंजज़ाल जी की आम भाषा की परिभाषा और परिप्रेक्ष्य से सहमत नहीं हूँ, फिर भी उनकी सही सलाह मानने में कोई हिचक नहीं है। विलियम जी ने कल एक संदेश दिया कि जिसमें उन्होंने ‘प्रलक्षित’ शब्द का प्रयोग किया था। क्या यह आम भाषा है हुंजजाल जी? अगर नहीं है तो क्या इस पर प्रबंधकों का कोई दायित्व नहीं बनता? विलियम जी ने सबाल्टर्न अध्ययन पृष्ठ को बेधड़क हटा दिया, जबकि संबंधित लेख जो विकि के अनुरूप नहीं थे, उन्हें हटाने का अनुरोध खुद मैंने किया था। विलियम ने मुझे वार्ता पर सूचना तक नहीं दी। विषय ही उल्लेखनीय नहीं लग रहा था उन्हें। यदि इतिहास और राजनीति की इतनी ही समझदारी है तो फिर आपके सुझावों और प्रस्तावों पर क्या इसीलिए अमल किया जाय कि आप संपादन में वरिष्ठ हैं और प्रबंधक हैं! जो संपादन में आपसे कमतर हैं, वो तर्क और जानकारी में भी कमतर ही होंगे वाला पूर्वग्रह वरिष्ठ प्रबंधकों (विलियम जी और हुंजजाल जी) ने भी दर्शाया है। बावजूद इसके उनकी श्रेष्ठता में संदेह नहीं किया जा सकता। अनुनाद जी की भाषा मुझे भी सही नहीं लगी और मैं उसका समर्थन कर भी नहीं सकता लेकिन क्या बायोम वार्ता पर हुई आरंभिक बातचीत पंचशील के अनुरूप है, कि एक वाक्य के संपादन से किसी को दूसरे भाषा की विकि पर जाने की सलाह दे दी जाय (इस स्पष्टीकरण के साथ कि यह मज़ाक नहीं है)। मीठी चाशनी में नीमकौड़ी ही पंचशील है क्या? रही शील और नैतिकता की बात तो विकिपीडिया:उल्लेखनीयता शीर्षक निर्देश में लैंगिक असंवेदनशील भाषा का जमकर इस्तेमाल हुआ है। महिला कलाकारों और नायिकाओं का मज़ाक के लहज़े में इस्तेमाल किया गया है। यही है पंचशील? यदि विकि जनतंत्र नहीं है तो हिंदी पर ही ७0 हजार जन कौन सा तंत्र रच रहे हैं? अगर अनुनाद ने मर्यादा तोड़ी है तो मर्यादा का हमेशा ख़्याल रखा किसने है? विलियम जी ने या हुंजजाल जी ने? साथियों मर्यादा को चादर की तरह ओढ़ना बिछाना बंद कीजिए और इस सामूहिक कार्य में सच्चे मन से जुटे रहिए। प्रशंसा और समर्थन मिल रहा है आपको, तो थोड़ी असहमति भी ले ही लीजिए। -- अजीत कुमार तिवारी वार्ता 12:13, 13 जुलाई 2012 (UTC)

समर्थन – नॉमिनेटर के रूप में।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 13:49, 13 जुलाई 2012 (UTC)
विरोध अनुनाद जी ने हिन्दी विकिपीडिया पर जितना कार्य किया है वह बहुत महत्वपूर्ण है, चौपाल पर वे खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं, चौपाल है ही विचारों के आदान प्रदान का स्थल इसलिये यहाँ सब अपनी बात कह सकते हैं, अनुनाद जी को ब्लाक करने का निर्णय बहुत ही गलत निर्णय होगा, मैं एक प्रबंधक के रूप में इसका विरोध करता हूँ, और सभी को आपस में मिलकर कार्य करने का अनुरोध भी करता हूँ, ताकि हिन्दी विकि को और ऊँचाइयों पर पहुँचाया जा सके।--डा० व्योम 04:30, 15 जुलाई 2012 (UTC)
टिप्पणी: बिल के इस प्रस्ताव में सामने लाए कुछ तथ्यों से मैं सहमत हूँ। कॉंग्रेस और जन लोकपाल सम्बंधी लेखों में जोड़ी गई बाहरी कड़ियों में साफ़ पक्षपात झलक रहा है। और वार्ता:मनमोहन सिंह देखकर यह लगता है कि अनुनाद जी इस पक्षपात का सोच-समझकर समर्थन कर रहे हैं। यह बात विकिपीडिया के लिये दुखद है। ऊपर की चर्चाओं में संदर्भ सहित देखा जा सकता है कि विवादों में दोनों पक्षों ने कोई-ना-कोई ऐसी बातें कहीं हैं जिससे दूसरा पक्ष उत्तेजित हुआ है। परंतु इसमें यह भी देख रहा हूँ कि अनुनाद जी ने सदस्यों पर व्यक्तिगत आक्षेप किये हैं। सदस्यों को 'महारानी का सेवक' और 'शिखंडी' जैसे नामों से संबोधित करना, चौपाल पर पहले हुई चर्चाओं को 'मुक्कद्दमों' का नाम देना इत्यादि ऐसे कार्य हैं जिनकी अपेक्षा एक प्रबंधक से नहीं की जाती।
प्रबंधक चाहे दूसरे पक्ष से सहमत हों या न हों, तथा दूसरे पक्ष का व्यवहार और बोल-चाल उचित हो या अनुचित, प्रबंधक होने के नाते सदस्य का (मेरे विचार में) यह कर्तव्य बनता है कि वे अपनी भाषा एवं व्यवहार सभ्य रखें, नीतियों का पालन करें, एवं अन्य सदस्यों पर व्यक्तिगत आक्षेप ना करें। अनुनाद जी इन तीनों ही कसौटियों पर खरे नहीं उतरते हैं।
परंतु हमें यह भी याद रखना चाहिये कि अनुनाद जी वर्षों से हिन्दी विकिपीडिया पर कार्य कर रहे हैं और यहाँ पर इनके बहुत योगदान हैं।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 18:01, 15 जुलाई 2012 (UTC)
समर्थन: मेरे नीचे दिये उप-प्रस्ताव का अनुनाद जी ने विरोध किया है, और उन्हें निषेध करने के इस प्रस्ताव का समर्थन। नीचे लिखी उनकी टिप्पणी से स्पष्ट है कि मैं जिस स्तर की सभ्यता और तटस्थता की उनसे अपेक्षा कर रहा हूँ, वह उन्हें स्वीकार नहीं है। अतः मैं इस प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ। --सिद्धार्थ घई (वार्ता) 16:05, 16 जुलाई 2012 (UTC)

अनिरुद्ध जी का सन्देश देखा - उनको क्या कहना है, मैं सुनना चाहूँगा। अनुनाद जी कब, क्या और क्यों करते हैं मेरे लिए अभी भी एक रहस्य है: अभी-अभी मैं इनकी भवानी जी के साथ वार्ता:मनमोहन सिंह में 'सत्यं ब्रूयात्' पर अकारण विषय से हटकर भिड़ंत पढ़ रहा था। किसी नए संपादक के साथ ऐसे उलझेंगे तो बेचारा हिन्दी विकी छोड़ के ही चला जाएगा। धन्यवाद। --Hunnjazal (वार्ता) 04:31, 17 जुलाई 2012 (UTC)

उप-प्रस्ताव : सख्त अन्तिम चेतावनी[संपादित करें]

दोनों बातों को ध्यान में रखते हुए मेरे विचार से अनुनाद जी को एक सख्त चेतावनी के साथ एक मौका दिया जाना चाहिये कि वे अपना व्यवहार सुधारें। इस चेतावनी के साथ अनुनाद जी से ये अपेक्षा होगी कि:

  • वे या तो कॉंग्रेस और लोकपाल सम्बंधी अपने कार्य में तटस्थता लाएँ, और यदि उनके लिये यह संभव नहीं है, तो उस क्षेत्र के लेखों में काम ना करें।
  • वे आगे की सभी चर्चाओं में अपना व्यवहार सभ्य रखें और कभी भी किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत आक्षेप ना करें (चाहे संदर्भ कोई भी हो और दूसरे पक्ष की भाषा कैसी भी हो)।

दूसरे पक्ष के असभ्य होने पर दूसरे पक्ष को चेतावनी दी जा सकती है, अधिक समस्या होने पर असभ्य व्यवहार करते सदस्यों को अवरोधित किया जा सकता है, पर उनपर व्यक्तिगत आक्षेप नहीं किये जा सकते।

यदि अनुनाद जी इन बातों का ध्यान नहीं रख सकते हैं तो उन्हें प्रबंधक पद से हटा देना चाहिये।

इस चेतावनी के पश्चात यदि वे व्यक्तिगत आक्षेप करते हैं अथवा कॉंग्रेस या लोकपाल सम्बंधी लेखों में पक्षपातपूर्ण संपादन करते हैं तो उन्हें किसी और चेतावनी के बिना अवरोधित किया जा सकता है।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 18:01, 15 जुलाई 2012 (UTC)

यह उपप्रस्ताव मुझे किसी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है। कोई किसी को पीटकर घड़ियाली आंसू बहाते हुए पहले थाने में पहुंच जाय तो न्यायपालिका उसे निर्दोष और दूसरे को सरासर दोषी नहीं मान लेती। बिना समग्रता से मामले को देखे 'पहले आओ न्याय पाओ' की नीति का मैं विरोध करता हूँ।
मैं कहीं भी तर्क करने से पीछे नहीं हटता। 'हाँ-हाँ-वाद' से मुझे घृणा है। तर्क करते समय यदि अंधे को अंधा कहना पड़ता है तो मैं कहता हूँ, उसे 'दृष्टि से पीड़ित' या 'दृष्टि-अक्षम' कहने को आवश्यक नहीं मानता। यदि कोई छुईमुई है तो उसे मेरे तर्कभाषा से हमेशा परेशानी होगी। मनमोहन सिंह वाले लेख में जो लिंक मैने दिये थे उसकी निष्पक्षता पर पहले भी मुझे संदेह नहीं था और अब भी नहीं है। 'टाइम्स पत्रिका' ने उसके तुरन्त बाद मेरे विचारों की सत्यता को दुनिया भर में उद्घोषित कर दिया है। यही स्थिति भ्रष्टाचार, लोकपाल बिल आदि की भी है। उन पर हुई बहसों में लोग पूछे गये प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाये इसलिये झुंझलाहट में मुझे रास्ते से हटाने के लिये रो रहे हैं। मेरे तर्कवितर्क के कारण झूठी लिंके देने वाले, सही जानकारी छिपाने वाले, 'चौराहा छाप महासिद्धान्तवादी' आदि बुरी तरह बौखला गये हैं। इति। -- अनुनाद सिंहवार्ता 09:42, 16 जुलाई 2012 (UTC)
इससे सम्बन्धित अद्यतन समाचार : अब विश्व प्रसिद्ध अखबार 'इंदिपेन्देन्त' ने कहा है, - मनमोहन सिंह सोनिया का POODLE, PUPPET और UNDERACHIEVER हैं। । किसका किसका मुँह बन्द करोगे? -- अनुनाद सिंहवार्ता 12:23, 16 जुलाई 2012 (UTC)

'चौराहा छाप', 'दोमुंहेपन', 'छुईमुई', 'बौखला गये हैं' - सिद्धार्थ जी, यह सच है कि किसी का बरसों का योगदान हो तो उसे निषेध करते हुए दुख होता है, लेकिन इनका व्यव्हार सुधर नहीं, बल्कि बिगड़ रहा है। en:Wikipedia:Assume good faith और en:WP:NPOV तो बहुत दूर की चीज़ें है, यहाँ तो साधारण शिष्टता भी नहीं दिख रही। यह चर्चाएँ अब ज्ञानकोष की कम और किसी सस्ते 'फ़ोरम' की ज़्यादा लगने लगी हैं। आपका इनके लम्बे योगदान को देखते हुए इनको एक मौक़ा और देने का प्रस्ताव इन्होने 'घड़ियाली आंसू' बता दिया। मेरा इन्हीं के विचारों को लागू करने के लिए रखा गया 'चर्चाओं में केवल-हिन्दी' वाला प्रस्ताव इन्होने 'कचरा' और 'उपदेश' बताया। विकिपीडिया कोई जंग, भाषण और व्यक्तिगत लड़ाईयों का मैदान नहीं है। इन्हें अब हिन्दी विकिपीडिया पर नहीं होना चाहिए। अगर आप इन्हें निषेध करने के लिए राज़ी हैं तो सभी प्रबंधकों में एकमत बन जाता है। कार्य पूरा करें और आगे बढ़ें। --Hunnjazal (वार्ता) 14:39, 16 जुलाई 2012 (UTC)

हुञ्जाल जी, आपका दोमुहांपन अब किसी से छिपा नहीं है। आपकी 'मनमानी भाष्यनीति' के बारे में विस्तार से सप्रमाण लिखने वाला हूँ। प्रतीक्षा कीजिये।-- अनुनाद सिंहवार्ता 03:48, 17 जुलाई 2012 (UTC)

ज़रूर लिखें माहराज। दोगले, त्रिगले, बहुगले, बन्दगले, जो मर्ज़ी आए लिखें। उपन्यास लिखें, रामायण की बराबरी का ग्रन्थ लिखें, या मैं तो कहूँगा एक ३ घंटे की फ़ीचर फ़िल्म ही बना डालें। लेकिन विकिपीडिया पर नहीं। आश्चर्य है कि आपको यह अभी तक समझ नहीं आई कि यह वि:युद्धक्षेत्रनहीं है। यहाँ ज्ञानकोष के लेखों का कार्य होता है, किसी के गुणों का बखान नहीं। --Hunnjazal (वार्ता) 04:29, 17 जुलाई 2012 (UTC)

सदस्यों से अनुरोध[संपादित करें]

मित्रो, मैने जमकर हिन्दी विकि में योगदान किया है। जमकर चर्चा की है। चर्चा में लोगों के दो-मुंहेंपन को उजागर किया है और सबके सामने रखा है। मैने चर्चा की है, प्रश्न-प्रतिप्र्श्न किये हैं और आँख मूंदकर चीजों को मानने से मना किया है। हिन्दी विकि का दुर्भाग्य है कि यहाँ पर एक गुटबाज चौकड़ी कब्जा जमाने की फिराक में है। मैने इनके सारे तर्कों को ध्वस्त किया, इन्हें निरुत्तर किया है। इनकी बहुत सी चालें हैं जिनमें से एक है कि किसी भी नीति को फटाफट कोट कर दो । सामने वाला कहाँ पढ़ने जाता है । कोई पढ़कर उसपर प्रतिप्रश्न करता है तो पहले उसे गलत निष्कर्षों में घुमाते हैं । अधिक गहराई में जाने पर उस नीति को छोड़कर किसी अन्य अप्रासंगिक नीति को पकड़ लेते हैं। मेरा सभी सदस्यों से निवेदन है कि इस इस 'नीति' को अच्छी तरह समझें और आगे भी इसका दमदार प्रतिरोध करते रहें। आइये अब कुछ उदाहरण देखते हैं-

१) विलियम कॉम्प्टन ने कुछ दिन पहले एक ऐसी नीति कोट कर दी जिस पर साफ-साफ लिखा था कि वह केवल अंग्रेजी विकि के लिये है। प्रतिप्रश्न करने पर कहा कि जो नीतियाँ हिन्दी में नहीं हैं वहाँ अंग्रेजी विकि की नीतियों को ही हिन्दी विकि में मानने की नीति है। और अधिक चर्चा और खोजबीन से पता चला है कि ऐसी कोई नीति अभी तक हिन्दी विकि में नहीं है।

(२) अब कॉम्प्टन द्वारा लिखित यह बयान देखिये:
भूगोलीय स्थान की उल्लेखनीयता से सम्बन्धित निबंध के अनुसार "populated, legally-recognized places are, by a very large consensus, considered notable, even if the population is very low"
जिस लेख से यह उठाया गया है वहाँ और भी अनेकों विचार हैं। किन्तु सबसे मजेदार बात यह है कि इस लेख में सबसे उपर एक बक्से में लिखा है :

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क्या ऐसी चीजों को उद्धृत करके तर्क करना और तर्क के निष्कर्षों को गलत दिशा में ले जाना नीतिसंगत है?

कम से कम पाँच उदाहरण (विलियम कॉम्फ्टन के) मैं गिना सकता हूँ।

इसी प्रकार श्री हुञ्जाल ने भी किया है। उनके दोमुंहेपन को उजागर करने वाला वक्तव्य अगली किस्त में। अभी इतना ही।

डॉ मनमोहन सिंह एवं भ्रष्टाचार आदि से सम्बन्धित लेखों पर मेरे द्वारा दिये गये लिंक[संपादित करें]

चूँकि डॉ मनमोहन सिंह वाले लेख पर खूब चर्चा हुई है, इसलिये अपनी बात उसी के सन्दर्भ में करूँगा-

(१) अब इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि समाचारपत्रों के लिंक लेखों में नहीं दिये जा सकते।

(२) जो लिंक मैने दिये थे वे मेरे अपने विचार नहीं थे बल्कि भारत के सम्मानित समाचारपत्रों के थे। इस दृष्टि से वे अच्छे स्रोत हैं। मजेदार बात है कि कुछ ही दिनों बाद टाइम पत्रिका ने मनमोहन सिंह को 'अन्डरएचिवर' कह दिया। निष्पक्षता या 'न्यूट्रल प्वाइट आफ विउ' का अर्थ यही है कि जो जैसा है वैसा लिखा जाय। बल्कि किसी को जबरजस्ती अच्छा बनाना निष्पक्षता का उलंघन है। क्या सत्य के विपरीत लिखना मेरे लिये जरूरी है?
-- अनुनाद सिंहवार्ता 09:23, 16 जुलाई 2012 (UTC)

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मैंने ऊपर की चर्चा तो पढ़ी है किन्तु अभी उससे संबंधित संदर्भ पाठ्य देखने का अवसर नहीं मिला है। अतएव इतना कहना चाहूंगा:

  • यदि किसी ने कुछ मुहावरे के रूप में कह भी दिया है तो अधिक न चुभने वाली बातों को जो किसी अत्यधिक कार्य्क्षमता वाले सदस्य की ओर से है, तो अनदेखा कर उसके तातपर्य पर आगे बढ़ा जा सकता है।
  • यह भी उल्लेखनीय है कि अधिक कार्यक्षमता वाले सदस्य को अधिक सहनशीलता का लाभ मिलना ही चाहिये।

साथ ही यह भी आवश्यक है

  • कि संबंधित सदस्य भी अपनी भाषा पर नियंत्रण रखें, यहां बोलना नहीं होता है कि जो बोल दिया क्रोध में बोल दिया, वरन लिखना होता है, जिसे संभल कर भी लिखा जा सकता है।
  • यदि किसी कारणवश कुछ ऐसा लिख भी दिया जिसका किसी अन्य को बुरा लगा, तो उसके लिये क्षमा मांग कर विवाद को समापन दिया जाये, न कि लंबा खींचा जाये। याद रखें कि फ़लते वृक्ष सदा झुक जाते हैं व ठूठ सदा सीधे अकड़े खड़े रहते हैं।
  • किसी भी संदर्भ में हों, किन्तु कुछ वाक्यांश न ही प्रयोग हों तो अच्छा रहेगा, क्योंकि अन्यथा कभी भविष्य में इन्हें उद्धृत किया गया तो ऐसी ही स्थिति आयेगी, जैसी अब है व लज्जित कर सकते हैं।
  • मात्र किसी आरोपित के स्वयं अपराध स्वीकार कर लेने पर अपराध के लिये किया जाने वाला जाँच एवं मुकदमा उसे दोषी मान कर सीधे बंद नहीं किया जाता है।
अतः अनुनाद जी के लंबे सुसंपादन इतिहास व साथ को देखते हुए एवं इनकी सहृदयता के परिप्रेक्षय में कहूंगा कि वे कुछ शब्दों में इस बात को समाप्त करने का प्रयास करें। न हमें ऐसे कार्यकर्त्ता को खोना अच्छा लगेगा, न ही अन्य सदस्य (जिनका ढेर भरा योगदान है) का रोष या असंतोष ही अच्छा लगेगा। इतने पर समाप्त करता ऊं< व आशा करता हूं, कि इसके २-३ इंच नीचे तक ये वार्त्ता विराम लेगी।--ये सदस्य हिन्दी विकिपीडिया के प्रबंधक है।प्रशा:आशीष भटनागरवार्ता 04:32, 17 जुलाई 2012 (UTC)
हिंदी विकिया पर प्रतिबंध की अंग्रेजी संस्कृति का विकृत रूप लाने की आवश्यकता नहीं है। और दुर्घटनावश या संयोगवश प्रबंधकीय अधिकार पा गए सदस्यों द्वारा आम सहमति से निर्वाचित प्रबंधक अधिकार वाले व्यक्ति या सम्मानित सदस्य के प्रति प्रतिबंधन का प्रस्ताव स्वयं इतना अपमानजनक है कि इसके लिए प्रस्तावकर्ता चेतावनी के पात्र हैं। अपनी कुंठा निकालने के अवसर की तलाश करने के बजाय सभी को हिंदी विकिया के लिए सचमुच कुछ बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए। और सारे तर्क-वितर्क पढ़ने के बाद मैं प्रबंधकों को अधिकारों का अतिक्रमण न करने की सलाह दे रहा हूँ। कृपया इसे चेतावनी के रूप में लें। अनुनाद जी पर प्रतिबंध की बात सोचने और कुछ करने का दायित्व यदि जरूरी लगे तो आशीश जी पर सौंप सकते हैं। क्योंकि अभी केवल वहीं अनुनाद जी के समतुल्य वरिष्ठ सदस्य हैं। और मैं आशीश जी की निर्णय क्षमता का कायल हूँ। - अनिरुद्ध  वार्ता  23:50, 17 जुलाई 2012 (UTC)
प्रिय मित्रों, वैसे तो मैनें हिन्दी विकि पर संपादन न करने का निर्णय ले रखा है परन्तु इस चर्चा को देखकर एवं हिन्दी विकि को टूटते बिखरते देखकर मैं अपने आप को रोक नहीं सका। मैनें ऊपर हुई समस्त चर्चा को पढ़ा, इस संदर्भ में मेरे विचार इस प्रकार है-
  1. अनुनाद जी हिन्दी विकि के सबसे पुराने वर्तमान संपादक है यहां तक कि पूर्णिमा वर्मन एवं आशीष जी से भी पुराने संपादक, यह एकमात्र ऐसे सदस्य है जिन्होनें बिना किसी विकिअवकाश के निरन्तर हिन्दी विकि पर अपना योगदान दिया है, इन्होनें हिन्दी विकि पर अनेको लेख बनाये है चाहे वो अंग्रेजी विकि की नीतियों के अनुरुप भले ना हो परन्तु इन्होने अपना बहुमूल्य समय हिन्दी विकि के विकास में लगाया है।
  2. यह आवश्यक है कि चर्चाओ में हमें सभ्य भाषा प्रयोग करनी चाहिये परन्तु कई बार ऐसा देखा गया है कि अपने मत को डकेलने के लिये प्रबंधक या सदस्य एक दूसरे पर व्यक्तिगत आक्षेप कर बैठते है ऐसी स्थिति में हमें उस सदस्य को तीन बार अन्तिम चेतावनी देनी चाहिये, इससे पहले कार्यवाही करना उचित नहीं, इस बारे में विस्तार से वि:व्यक्तिगत आक्षेप देखें।
  3. अब बात आयी कि यदि अनुनाद जी अगर किसी लेख में neutrality नहीं रख पा रहे है तो इसके लिये इनको प्रतिबंधित करना बिल्कुल भी उचित नहीं क्योंकि यदि किसी को ऐसा लगता है तो वह स्वयं उस लेख को सुधार सकता है या उस पर चर्चा कर सकता है फिर यदि चर्चा के निष्कर्ष के विपरीत वह सदस्य कार्य करता है उस परिस्थिति में उस पर कोई कार्यवाही करनी चाहिये।
  4. मेरा अन्य सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया इस घटना को भूलकर हिन्दी विकि के उत्थान में अपना मन लगाये, वैसे भी यहां बहुत कम सक्रिय सदस्य है अतएव हिन्दी विकि एक भी सक्रिय सदस्य की क्षति नहीं झेल सकता।
  5. बिल, सिद्धार्थ इत्यादि अपनी जगह सही है यह ऐसे विकिपीडीयन है जिन्हें विकिनीतियों के अनुरुप कार्य करना पसन्द है परन्तु अनुनाद जी ने हिन्दी विकिपीडीया पर योगदान अपने हिन्दी प्रेम की वजह से दिये, भले ही उन्होनें भारतीयता के नाते योगदान दिये हो परन्तु हम उनके योगदानों को अनदेखा नहीं कर सकते विकिपीडीया पर ऐसा कोई नियम नहीं कि कोई भाषा प्रेम की वजह से अपना योगदान नहीं दे सकता। यदि ऐसी कोई नीति बनानी है तो हमें यहां चौपाल पर चर्चा करके ऐसी नीतियां बनानी चाहिये
  6. अंत में मैं समस्त सदस्यों से अनुरोध करुँगा कि अनुनाद जी के अनुभव एवं कार्य को देखते हुए और हिन्दी विकि के उत्थान के लिये अपने दिल से अनुनाद जी के प्रति कड़वाहट निकाल दे और अनुनाद जी से भी अनुरोध करुँगा कि वे भी हिन्दी विकि के उत्थान के लिये अपने दिल से बाकि सदस्यों के प्रति कड़वाहट निकाल दे, आखिर हम सब का उद्देश्य एक ही है और वह है हिन्दी विकि की उन्नति, तो आइये फिर से एकजुट होकर हिन्दी विकि के उत्थान में लग जाये।--Mayur (talk•Email) 05:51, 18 जुलाई 2012 (UTC)
मयूर जी, अनिरुद्ध जी और आशीष जी, मैं आपका आदर करता हूँ लेकिन आपसे असहमत हूँ। अनुनाद जी ने इतना द्वेष दर्शाया है कि उस से पूरा वातावरण प्रदूषित जो गया है। और उन्होंने अपने बुरे व्यवहार की कोई क्षमा-याचना नहीं करी है, यानि वे उसे ज़रूर दोहराएँगे। ऐसे में यह बात छोड़ी नहीं जा सकती क्योंकि कल को फिर खड़ी होगी - आपको Rajeevmass तो याद होंगे ही। और अगर उनके व्यवहार का और छद्म खाते चलने का कोई परिणाम नहीं तो फिर सभी यह करने को स्वतन्त्र हैं। क्या अब विकिपीडिया पर एक राजघराना है, जिसके लिए नियम अलग हैं? अगर नहीं, तो या तो अनुनाद जी चेतावनियों के बाद भी बार-बार 'शिखंडी', 'दासमानसिकता', 'दोगला' इत्यादि शब्द इस्तेमाल करने के लिए दंड के पात्र हैं, वरना ऐसी ही भाषा अन्य सदस्य भी प्रयोग करने के लिए स्वतन्त्र हैं। आपकी राय में इनमें से कौन सा चुना जाए? एक विशेष वर्ग के लिए मनचाहा व्यवहार स्वीकार्य हो और दुसरे के लिए नहीं - यह असम्भव है। --Hunnjazal (वार्ता) 03:25, 19 जुलाई 2012 (UTC)
आपकी चर्चा अनुनाद जी पढ़ ही रहे हैं। मुझे यकीन है कि वे आगे से ऐसे शब्द नहीं दुहराएंगें। मुश्किल यह है कि जिन तर्कों के आधार पर हम अनुनाद जी पर प्रतिबंध की माँग का समर्थन करेंगें वे ही बिल को भी प्रतिबंधित करा देंगें। और हम हिंदी विकिया के इन दो बेहद क्रियाशील सदस्यों का साथ खोने की स्थिति में नहीं हैं। साथ ही ऐसा कोइ प्रतिबंध जनवरी २0१२ के पहले के प्रबंधकों द्वारा लगाया जाय वही ठीक होगा। हाँ यदी आपकी आशंका ठीक निकली तो मैं आपके साथ रहूँगा। अनिरुद्ध  वार्ता  23:40, 19 जुलाई 2012 (UTC)

यह पार्याप्त नहीं है और मैं यह सब देखा-अनदेखा करने को राज़ी नहीं हूँ। अगर अनुनाद जी इतनी अशिष्टता करने के बाद बिना किसी दुत्कार के साफ़ निकलते हैं तो यह बात सभी को उन तरीकों को अपनाने का संकेत है। सारे-के-सारे छिद्म खाते या तो बंद हों या फिर सभी को इनकी स्वतंत्रता मिले। एक विशेष वर्ग की बदतमीज़ीयों को अनदेखा करना बिलकुल, और किसी भी माप पर, स्वीकार्य नहीं है। अगर बिल की ग़लती है तो वह भी नियम के मोहताज हैं। अब पहले की स्थिति पर वापस जाना असम्भव है। मुझसे भी अब पहले वाली नरमी की उम्मीद न रखियेगा। वह नहीं होने वाला। अनुनाद जी लगातार पक्षपात, द्वेष और जातीयता का रुख़ अपनाते हैं। पाकवादी, दासमान्सिकतावादी, शिखंडी, 'दस मिनट में ज्ञानी', इत्यादि। यह सब भूल जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। --Hunnjazal (वार्ता) 05:07, 20 जुलाई 2012 (UTC)

अशोक वाजपेयी[संपादित करें]

  • यह पृष्ठ व्यक्तिगत है।
  • इसमें कोई संदर्भ नहीं है।
  • सम्बन्धित व्यक्ति न तो अल्लेखनीय है और न ही कोई उल्लेखनीय कार्य किया है।
  • व्यक्ति किसी विश्वविद्यालय के उपकुलपति रह चुके हैं कोई उल्लेखनीयता का मापदण्ड नहीं है।

अतः मेरा यह विचार है कि यह पृष्ठ हटा देना चाहिए।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 22:25, 13 जुलाई 2012 (UTC)

यह व्यक्ति प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार हैं। ललित कला अकादमी के अध्यक्ष हैं। 'किसी विश्वविद्यालय के उपकुलपति' नहीं महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं। संदर्भ के लिए थोड़ा इंतज़ार कर लें। -- अजीत कुमार तिवारी वार्ता 03:08, 14 जुलाई 2012 (UTC)

तिवारी जी, यह व्यक्ति चाहे 'किसी विश्वविद्यालय के उपकुलपति' न होकर किसी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के ही उपकुलपति क्यों न हों। क्या इस आधार पर उनसे पहले तथा उनके बाद बने सारे उपकुलपतियों का पृष्ठ बनाना उचित है? आपके तर्क के आधार पर तो भारत के आज तक के सारे विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों के तथा सारे ललित कला अकादमी के अध्यक्षों के पृष्ठ बनाना न्यायसंगत जान पड़ता है। यह साइट मूलतः ज्ञानवर्धन के लिए है। क्या यह व्यक्ति इतने विख्यात हैं कि लोगों को इनका नाम पता होगा और इनके विषय में अधिक जानकारी की जिज्ञासा होगी? मेरे ख़याल से तो नहीं। लेकिन इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने से एक चलन बनने का डर है कि जिसको भी जब किसी भी व्यक्ति की जीवनी विकि पर लिखने का मन करेगा तो वह पुराने उदाहरणों की दुहाई देकर ऐसा कर सकेगा और तब हिन्दी विकि महज़ एक जीवनियों की साइट बनकर रह जायेगी। अतः मेरा मत अभी भी यही है कि यह लेख हटा दिया जाए। आगे प्रबन्धक जैसा उचित समझें। मैं किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं हूँ लेकिन हिन्दी विकि के भविष्य को ध्यान में रख कर यह बात कर रहा हूँ। कृपया इसको अन्यथा न लिया जाए। यदि अपने विचार रख कर मैंने किसी को आहत किया है तो पहले से ही क्षमाप्रार्थी हूँ। धन्यवाद।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 04:11, 14 जुलाई 2012 (UTC)
विकि नियमानुसार गूगल सर्च करने से जो भी (नोटेबिलिटी) के प्रमाण मिले, जिनसे लेख हटाने लायक सिद्ध नहीं होता यदि इस लेख को हटाने का प्रस्ताव किसी भी सदस्यको लाना है तो यहाँ पर रखें। -भवानी गौतम (वार्ता) 05:43, 14 जुलाई 2012 (UTC)

हिंदी विकि के भविष्य को लेकर चिंतित न हों सोमेश जी। भविष्य उज्ज्वल है। रही बात उल्लेखनीयता की तो थोड़ी मशक्कत कर लिया करें। क्या आपको वास्तव में कोई स्रोत या संदर्भ नहीं मिला था अशोक वाजपेयी पर? इन साहिबान में मेरी भी कोई ख़ास रुचि नहीं है। किसी की रुचि से विषय की उल्लेखनीयता का कोई संबंध नहीं है। संबंधित पृष्ठ की अच्छी तरह छानबीन करके ही कोई प्रस्ताव रखा जाय तो उचित होगा। कम से कम अंग्रेजी विकि ही देख लेते आप। कुलपतियों पर बेज़ा बहस न करें। कहाँ की बात कहाँ ले रहे हैं। किसी विश्वविद्यालय से क्या मतलब है? विश्वविद्यालय का कोई नाम तो होगा? बस, उस वाक्य का यही संदर्भ था। -- अजीत कुमार तिवारी वार्ता 06:35, 14 जुलाई 2012 (UTC)

ख़ैर, हम क्यों इस विषय को लेकर बहस में पड़ें। जो निर्णय सर्वमान्य होगा वही निर्णय अंतिम होगा। मैं फिर दोहराता हूँ कि यदि मेरी वजह से किसी को ठेस पहुँची है तो मुझे क्षमा करें। बहरहाल मुझे जो उचित लगा मैंने प्रस्ताव रख दिया है।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 07:33, 14 जुलाई 2012 (UTC)

आकाशगंगा[संपादित करें]

जहाँ तक इस पृष्ठ के नाम का सवाल है तो उसे तारामण्डल (galaxy) होना चाहिए न कि आकाशगंगा। आकाशगंगा हमारे तारामण्डल का नाम है। लेखक ने शायद लिखने में कोई ग़लती कर दी लगती है। पूरे पृष्ठ में तारामण्डल की जगह आकाशगंगा शब्द का प्रयोग किया गया है। मेरे मत से तो इस विषय को सुधारना चाहिए अगर सर्वसम्मति से अनुमति मिलती है तो। --सोमेश त्रिपाठी वार्ता 22:42, 13 जुलाई 2012 (UTC)

तारामंडल (Constellation), शिकारी या ओरायन (अंग्रेज़ी: Orion) तारामंडल, शिकारी तारामंडल, हन्स तारामंडल, सर्प तारामंडल, खगोलशास्त्र, नक्षत्र और तारागुच्छ भी है।
नीचे लिखे मुझे गलत लगे:
  1. आकाशगंगा अंग्रेजी के en:Galaxy के लिए लिखा गया है।
  2. क्षीरमार्ग अंग्रेजी के en:Milky Way के लिए लिखा गया है।

होना चाहिए:Milky Way=आकाशगंगा,Galaxy=तारकपुंज। जिसे मैंने ठीक कर दिया।-भवानी गौतम (वार्ता) 01:18, 14 जुलाई 2012 (UTC)

भवानी जी व सोमेश जी,

पहले कुछ पृष्ठभूमि। इनमें से अधिकतर लेख मैंने बनाए है और कुल मिलाकर इनकी संख्या लगभग ४०० होगी। वास्तव में हिंदी स्रोतों में इन चीज़ों के नामों के लिए सहमती नहीं हैं, इसलिए इनमें चुनाव करना पड़ा है।

  • milky way को आकाशगंगा, मंदाकिनी और क्षीर कहा जाता है। इनमें क्षीर (अर्थ: दूध) संस्कृत का प्राचीन नाम है - इसका एक स्रोत
  • galaxies को आकाशगंगाएँ या मंदाकिनियाँ या तारापुंज या तारामंडल कहा जाता है। कुछ प्रयोग देखें: यहाँ और यहाँ
  • constellations को तारामंडल (जैसे की यहाँ) कहा जाता है।
  • clusters को तारागुच्छ या तारामंडल कहा जाता है।

यह चारों अलग चीज़ें हैं और निसंदेह इनके अलग नाम भी मिलेंगे। इनमें से एक का चयन करके उसे विकिपीडिया का मानक बना कर चलना होगा। मैंने देखा कि बहुत-सी हिन्द-यूरोपीय भाषाओँ में milky way का नाम दूध से सम्बंधित होता है। क्योंकि क्षीर संस्कृत परंपरा में भी एक प्राचीन नाम है, इसलिए मैंने इसपर क्षीर मार्ग बना दिया क्योंकि कुछ स्थानों पर यह दुधिया मार्ग था। मैंने संस्कृतकरण कर दिया। प्राचीनकाल में एक ही आकाशगंगा ज्ञात थी इसलिए उसे ही आकाशगंगा कहा जाता था। अब आकाशगंगा और मंदाकिनी शब्दों में शंका रहती है कि लेखक किसी भी आकाशगंगा कि बात कर रहा है या विशेष रूप से हमारी वाली की। अंग्रेज़ी में इसका इलाज सभी को galaxy और हमारी वाली को milky way कह कर किया गया है, हालांकि दोनों का मतलब 'दूध की राह/वृत' ही है। फ़ारसी में इस उलझाव को मिल्की वे को राह-ए-शीरी कह कर किया गया है। इसका शीरी शब्द संस्कृत के क्षीर शब्द का सजातीय शब्द है और दोनों का अर्थ दूध है। मैंने सोचा की जो नाम ५००० से ६००० वर्षों से भारतीय संस्कृति में चल रहा है उसी का प्रयोग किया जाए। आधुनिक काल में 'क्षीर' का अर्थ केवल दूध है इसलिए मार्ग जोड़ दिया। इस से मिल्की वे जानने वाले भी समझ जाएँगे कि क्या है। उस समय मेरे अलावा कोई लेख नहीं बना रहा था और मुझे बुरा लगा कि इन विषयों पर हिंदी विकिपीडिया में न के बराबर लेख थे। मैंने चौपाल पर भी मदद मांगी थी और अनिरुद्ध जी एवं अन्य सदस्यों ने मेरी तारों के नाम इत्यादि खोजने में मदद की थी।

अब आगे की बात। मुझे नाम के बदलाव से *बिलकुल भी* कोई आपत्ति नहीं। लेकिन आप इसका अधूरा काम न करें। आपको लगभग मेरे बनाए ४०० लेख बदलने होंगे। इन लेखों के आपस में बंधन ऐसे हैं कि दुर्भाग्य से इनमें आप सरल 'रिप्लेस' नहीं कर सकते। लेख में अन्दर जाकर समझना होगा कि कौनसा नाम कहाँ बदलना है। यह आपके लिए लगभग एक महीने का काम है, इसलिए समझ से समय निकालकर करें। अगर अधूरा काम किया तो इन लेखों में अर्थों का घोलमोल होगा। उदाहरण के लिए आपका क्षीरमार्ग से आकाशगंगा वाले बदलाव के बाद -

  • 'आकाशगंगा, मिल्की वे या मन्दाकिनी हमारी आकाशगंगा (गैलॅक्सी) को कहते हैं' परिभाषा बेमतलब है। इसकी श्रेणी भी ग़लत हो गई है और उसमें २६ सदस्य लेख ग़लत हो गए हैं। कृपया उन सबको ठीक करें। इसके अलावा 'आकाशगंगा' शब्द पर खोज करें और सभी मिलने वाले लेखों का मानकीकरण करें।
  • तारामंडल और उस से सम्बंधित लेख ग़लत हो गए हैं। इस श्रेणी में ६७ लेख हैं। कृपया हर एक में जाकर उनका मानकीकरण करें।
  • बहुत से तारों के लेखों में शब्द ग़लत हो गए हैं। उस श्रेणी में १३२ लेख हैं। कृपया प्रत्येक में जाकर ठीक करें।
  • इसके अलावा यह परिभाषाएँ अन्य लेखों में भी हैं, इसलिए सावधानी से उन्हें ढूढ़ लें।

अगर आप पूर्ण बदलाव करें तो इन लेखों का आपसी तालमेल बना रहेगा। मुझे यह सब बनाने में ६ मास लगे थे, इसलिए कृपया मेरी मेहनत बेकार न करें। अगर अभी समय नहीं है तो अपने बदलाव वापस ले लें और तब करें जब आप यह समय लगा सकते हैं। अगर आपको मेरी बताए क्रम के बाद क्षीरमार्ग पसंद है (केवल अगर यह संस्कृत जड़ें और अंग्रेज़ी/लातिनी/अन्य नामों के भाषा-रूपांतर दोनों होने के नाते en:WP:OR का उल्लंघन न समझा जाए तो) तो उसे भी रख सकते हैं क्योंकि इसका हिंदी में एक तय नाम नहीं है और यह वाला नाम प्राचीन संस्कृत परंपरा के अनुसार है। अगर लेखों में आपसी टकराव होगा तो टूटी खिड़कियों का सिद्धांत सक्रीय होगा। आगे के खगोलशास्त्र के लेख इन अलग-अलग टकराती परिभाषाओं के साथ बनेंगे तो हमारे ज्ञानकोष के लिए अच्छा नहीं। कोई प्रशन को तो बेझिझक पूछें। अगर बदलाव में मेरी सहायता चाहें तो मैं भी आपकी सेवा में हाज़िर हूँ। धन्यवाद! --Hunnjazal (वार्ता) 06:24, 14 जुलाई 2012 (UTC)

प्रस्ताव: खगोलीय कार्य दल[संपादित करें]

Hunnjazal जी, कृपया मेरे विचारों को अन्यथा न लें। मैंने जब पृष्ठ देखा तो ऐसा लगा कि सुधार की आवश्यकता है। मैंने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है और जैसा आप बता रहे हैं कि यह ४०० लेखों का एक संग्रह है तो इसको सही करने की न मेरे में क्षमता है और न ही समय। यदि और कोई सदस्य इसका बीड़ा उठाते हैं तो अति उत्तम। धन्यवाद।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 07:54, 14 जुलाई 2012 (UTC)
नहीं, नहीं, सोमेश जी, आपका प्रशन और कायवाई दोनों ठीक थीं। होता यह है कि कुछ विषय में लेख एक समूह में बनाने होते हैं। वास्तव में शुरू में मुझे यह बात खली थी कि किसी भी तारे का हिंदी नाम और ब्यौरा आसानी से नहीं मिलता था। मैंने ठानी की अंग्रेज़ी के बराबर सबसे रोशन तारों की सूची बनाऊँगा। लेकिन हर एक तारे के लिए फिर मुझे विभिन्न तारामंडल के लेख बनाने पड़े, और फिर तारों की श्रेणियों, दानव तारे, उपदानव तारे, वग़ैराह पर बनाने पड़े। हर तारामंडल के क्षेत्र में आकाशगंगाएँ भी होती हैं, इसलिए उनके प्रकारों पर भी बनाने पड़े (जैसे अंडाकार आकाशगंगा, लेंसनुमा आकाशगंगा, डन्डीय सर्पिल आकाशगंगा, इत्यादि) और आकाशगंगाओं के रेशे और रिक्ति (खगोलशास्त्र) जैसे लेख भी बनाने पड़े। इसी चक्कर में मैंने सैंकड़ों लेख हिंदी विकिपीडिया पर बनाए। मैंने देखा कि यह काम अन्य भारतीय भाषाओँ के लिए भी लाभदायक हुआ क्योंकि मेरे लेखों का गुजराती विकिपीडिया (उदाहरण gu:સૌથી તેજસ્વી તારાઓ), नेपाली विकिपीडिया (उदाहरण ne:सबैभन्दा चम्किला ताराहरुको सूची) और पंजाबी विकिपीडिया (उदाहरण pa:ਸਬਤੋਂ ਰੋਸ਼ਨ ਤਾਰਿਆਂ ਦੀ ਸੂਚੀ) पर उनके सदस्यों ने बिना मेरी सहायता के अनुवाद कर दिया। मैंने देखा कि हिंदी ब्लोगों में भी इनमें बनाई सामग्री आने लगी। जब आपने क्षीरमार्ग बदला तो आपको यह सब ज्ञात नहीं था। वैसे भी यह कोई ऐसा पवित्र नाम नहीं है जो बदला न जा सके - केवल यह एक धागा है जिसे खींचने से बहुत से हिंदी विकी के खगोलशास्त्र लेख उधड़ जाएँगे। इसलिए बदला ज़रूर जा सकता है लेकिन उन्हें ज़रा फिर से बुनने की ज़रुरत होगी। यह लेख मेरी संपत्ति तो हैं नहीं। आपका इनपर उतना ही अधिकार है जितना कि मेरा। और वि:पंचशील साफ़ कहता है - "आत्मविश्वास और निडरता के साथ लेखों को सुधारें और नए लेख बनाएँ। लेख लिखने में माहिर होना एक अच्छा ध्येय ज़रूर है लेकिन यह लेखकों के लिए बिलकुल अनिवार्य नहीं है। यह चिंता मन से निकाल दें कि आप कोई ग़लती कर बैठेंगे और आपके फेर-बदल से लेख ख़राब हो जाएगा।" इस विषय में हुनरमंद होना ज़रूरी नहीं है। आपसी तालमेल से ही यह आगे बढ़ेगा। धन्यवाद! --Hunnjazal (वार्ता) 18:57, 14 जुलाई 2012 (UTC)
Hunnjazal जी सोमेश जी के प्रस्ताव को देखा और मैनें (हिंदी माध्यम) के पाठ्य पुस्तक में जो भी पढ़ा था उसी के आधार पर इसको बदला है। मानक शव्दों का ही प्रयोग होना चाहिए यह मेरा मानना है परन्तु मानक शव्द चयन के लिए मानक साधन क्या हैं, यह हिन्दी विकिपीडिया के लिए बड़ा प्रश्न है। दूसरी बात - आपने जो महीनों कष्ट किया जो हिंदी विकि में नहीं थे, अनुवाद किया। तीसरी बात- मैंने उसको एकदम उलट-पुलट किया या बदल दिया। आप हिन्दी विकि मे सक्रिय हैं इसलिए आप जान गए। मैं आप का इज्जत करता हूँ, इसलिए रिभर्ट करुँगा। लेकिन फिर भविष्य( जब आप विकि में सक्रिय नहीं रहेंगे) में दूसरा सदस्य आएगा फिर मेरा जैसा करेगा। एक श्रेणी के ६७ लेख दूसरी श्रेणी के १३२ लेखों में गड़बडी होगी ही। ऐसे लेख मामूली लेख नहीं हैं, विज्ञान से संबन्धित है और आज का युग विज्ञान का है, जिन्हें अंग्रेजी नही आती उन्हें इन्ही लेखों से ज्ञानार्जन करना होता है। ज्ञानका महासागर तो लंबे समय तक बहेगा। मेरा आपसे अनुरोध करता हूँ, सहयोग करें। मैं हठ भावना नहीं रखता, मैं गलत भी हो सकता हूँ, बदलाव वापस लेने में मूझे आपत्ति नहीं होगी पर क्या यही इसका समाधान है?
मैं आपकी भी बड़ी इज्ज़त करता हूँ भवानी जी। एक क्षण को भी मेरे दिल में यह विचार नहीं आ रहा है कि आप क़तई कोई हठ वाली बात कह रहें हैं। वास्तव में मुझे लगता है कि मुझसे लेख बनाते हुए एक ग़लती हुई थी जो तब ग़लत नहीं लग रही थी। 'आकाशगंगा' का प्रयोग 'मिल्की वे' के लिए भी होता है और 'गैलेक्सी' के लिए भी। मुझे उसे हिंदी विकी पर 'गैलेक्सी' के लिए मानक शब्द नहीं बनाना चाहिए था। हिंदी में किसी चीज़ का एक मानक शब्द न होने पर ऐसा हो जाता है। अगर आप और सोमेश जी सहमत हैं तो एक काम करते हैं:
  • इन खगोलीय वस्तुओं के लिए मानक नाम निर्धारित कर लेते हैं - star clusters, nebula, galaxy, constellation, nakshatras, milky way - और हम तीनों आपसी तालमेल से कुछ हफ़्तों में विधिपूर्वक इन लेखों के नाम इन नए मानक नामों पर ले आते हैं
  • एक 'खगोलीय कार्य दल' बना लेते हैं जिसमें हम आइन्दा ऐसे प्रश्नों को आपसी सुझावों से सुलझा पाएँ
क्या कहते हैं? --Hunnjazal (वार्ता) 19:28, 14 जुलाई 2012 (UTC)

जी हाँ, बहुत बड़िया प्रस्ताव रखा आपने। हमने मीडियाविकि सन्देशों को हिन्दीकरण में जिस प्रकार सहयोग से काम किया।भवानी गौतम (वार्ता) 09:46, 15 जुलाई 2012 (UTC)

उपर्युक्त बात से अलग हटकर मेरा(व्यक्तिगत) विचार दूसरा है:- जितने भी वैज्ञानिक शव्द हैं उनका उसी रुप में लिखने की परंपरा हिंदी विकि में होनी चाहिए। जैसे मिल्की वे, युनिवर्स, ऑक्सिजन, नाइट्रॉजन आदि आदि। ये सभी व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper noun) है इसमें अनुवाद की आवश्यकता भविष्य में नही रहेगी। आज से पचास साल पीछे जाकर आकाशगंगा, मंदाकिनी, क्षीर, तारा गुच्छ, पुंज आदि शव्दों को सायद ही कोई बोलेगा और लिखेगा। क्योंकि आज ही हमें ऐसे शव्दों को संस्कृत के कोषों मे ढूँढ़ने और बनाने पड़ रहे हए हैं और जिनके लिए मतैक्य भी नहीं रहता।-भवानी गौतम (वार्ता) 08:28, 14 जुलाई 2012 (UTC)

इस विषय में मैं कोई भी मानक लेकर चलने को तैयार हूँ। केवल अंग्रेज़ी नामों में एक ख़तरा यह है कि बहुत से वस्तुओं के प्राचीन नाम 'खोए' जा सकते हैं। उदाहरण के लिए जब मैंने 'अल्फ़ा सॅन्टौरी' का लेख बनाया तो मुझे छानबीन करने पर ज्ञात हुआ कि इसका नाम मित्र तारा है। मैंने कुछ स्थापित बड़ी भाषाओँ की परंपरा पर भी नज़र रखी। 'कैनिस मेजर' एक तारामंडल है। इसका फ़ारसी में लेख 'सग-ए-बुज़ुर्ग' है, मराठी में 'बृहल्लुब्धक' है, रूसी में 'बोल्शोई पेस' है, इत्यादि। मैंने उसी परंपरा का हिंदी में भी अनुसरण किया और इसे 'महाश्वान तारामंडल' बनाया - लेकिन साथ-ही-साथ अंग्रेज़ी वाला नाम भी रखा। इन चीज़ों को मैं चौपाल पर भी लाता रहा हूँ और अनिरुद्ध जी एवं अन्य सदस्यों ने मेरी सहायता की है। मैं समझता हूँ कि हमें अन्य भाषाओँ से भिन्न कुछ अजीब-ओ-ग़रीब काम नहीं करना चाहिए लेकिन अगर कोई प्रक्रिया आम है तो विवेक से उसका पालन करने में हानि नहीं है - सीधे, सरल और सक्षिप्त अनुवाद हों तो वे en:WP:OR और en:WP:MTAA का भी पालन करेंगे। ऐसे अनुवाद जो कठिन लगे, मूल अंग्रेज़ी से लम्बे हों या दूसरी भाषाओँ में जो अनुवाद हो रहें हैं उनसे कोई बिलकुल ही विचित्र चीज़ करें, नहीं करने चाहिए - यह हानिकारक संस्कृतकरण है और संभवतः en:WP:OR और en:WP:MTAA का उल्लंघन भी है। फिर भी, अंकों की ही तरह, मैं इन विषयों पर कोई भी एक मानक लेकर चलने को तैयार हूँ! अगर देखा जाए तो अभी सैंकड़ों और लेख बनाने हैं। अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर तारों के हज़ारों लेख हैं। बहुत काम पड़ा है। तारों के इतने प्रकार हैं (उदाहरण बेटा सॅफ़ॅई परिवर्ती तारा) की उनको लिखते-लिखते ही साल गुज़र जाएँगे। इस विषय में आपकी रूचि का मैं स्वागत करता हूँ। --Hunnjazal (वार्ता) 19:27, 14 जुलाई 2012 (UTC)

पुराने जमाने में विज्ञान जितना विकसित था उसी के अनुरुप (सीमित आज की तुलना में) शव्द मिलते हैं और जिन्हें हमें नहीं छोड़ना चाहिए, यह मैं भी मानता हूँ; जैसे- पृथ्वी, सूर्य, चन्द्र आदि और जैसे आपने मित्र तारा बताया। उस समय के गणित नें जहाँ तक बताया- अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी आदि नक्षत्रों के नाम, ग्रहों के नाम। Universe हिन्दी में ब्रह्माण्ड लेकिन Multiverse को हिन्दी में क्या लिखें, उस समय ब्रह्माण्ड ही सबसे बड़ा सोचा गया था। और अभी(भारत के बाहर विगत दो-तीन शतकों के) के खोजे गए खगोल संबन्धित तथा वैज्ञानिक नामों का हिन्दीकरण मैं असम्भव मानता हूँ वह इसलिए कि विभिन्न तारे, तारों के झुण्ड अथवा ब्रह्माण्ड के अन्य अंश जो भी नासा और अन्य संगठनों अथवा (वैज्ञानिकों) ने खोज किया और वैज्ञानिकों अथवा खोजकर्ता के नाम पर उनके नाम रखे गए हैं।
कार्यदल बनाने का आपने जो प्रस्ताव रखा उसका आन्तरिक हृदय से समर्थन करता हूँ।-भवानी गौतम (वार्ता) 09:46, 15 जुलाई 2012 (UTC)

Perhaps, I might only be rewording what Hunnjazal has proposed but how about starting a full-fledged विकिपीडिया:विकिपरियोजना खगोलशास्त्र similar to विकिपीडिया:विकिपरियोजना फ़िल्म? I'm willing to share some of the work that I do best, cleaning! Regards, लवी सिंघल (वार्ता) 10:30, 15 जुलाई 2012 (UTC)
Yes, we can do that, you are welcomed to share the work. भवानी गौतम (वार्ता) 11:20, 15 जुलाई 2012 (UTC)
और लवी सिंघल जी की सुझाई गई परियोजना विकिपीडिया:विकिपरियोजना खगोलशास्त्र शुरु करने से पहले मैंने शव्दों के अनुवाद पर चर्चा यहाँ पर शुरु की है। भवानी गौतम

मैंने पहले विकिपरियोजना नहीं बनाई है - इसमें आप में से कोई पहल करे तो अच्छा होगा। भवानी जी, आपकी सूची में मैं जाकर जल्द ही कुछ प्रस्तावित अनुवाद जोड़ दूंगा। --Hunnjazal (वार्ता) 14:55, 16 जुलाई 2012 (UTC)

उपर्युक्त चर्चा के बाद मैंने विकिपरियोजना का स्वरुप इस तरह बनाया। अनुरोध करता हूँ कि इसे देखकर सुधारने वा आगे बढाने के लिए काम करें।भवानी गौतम (वार्ता) 12:30, 17 जुलाई 2012 (UTC)
भवानी जी, आपके द्वारा बनाया पृष्ठ देखा और उसमें अपनी यथा सामर्थ टिप्पणी भी दी है। और क्या कहूँ बस यही कहूँगा कि अति उत्तम। आपको तथा Hunnjazal जी को हार्दिक धन्यवाद।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 08:20, 18 जुलाई 2012 (UTC)
बहुत बढ़िया काम है भवानी जी! मैं आपका आभारी हूँ! --Hunnjazal (वार्ता) 03:19, 19 जुलाई 2012 (UTC)

अंक परिवर्तक[संपादित करें]

नमस्कार।

मैं सभी को एक नए उपकरण (गैजेट) अंक परिवर्तक के बारे में बताना चाहता हूँ। यह उपकरण अरबी और नागरी अंकों में परिवर्तन करने के लिये है। इसे सक्षम करने पर एक मेन्यू दिखाई देता है जिसमें से सदस्य अपनी इच्छा अनुसार अंक चुन सकते हैं। यह कुकी द्वारा सदस्य का चुनाव याद रखता है। काफ़ी समय से चली आ रही अंकों के चुनाव की समस्या का एक समाधान यह हो सकता है कि इस उपकरण को सदस्यों द्वारा जाँचे और परखे जाने के पश्चात इसे सभी के लिये डिफ़ॉल्ट रूप से सक्षम कर दिया जाए। इससे कंप्यूटर पर (या जावास्क्रिप्ट-समर्थन वाले अन्य किसी यंत्र पर) विकिपीडिया के पाठक अपनी इच्छा अनुसार अंक चुन पाएँगे।

सदस्यों से अनुरोध है कि अपनी वरीयताओं के गैजेट भाग में जाकर सबसे नीचे के शक्लोसूरत सम्बंधी उपकरण भाग में से इसे सक्षम करें और विभिन्न ब्राउज़रों में इसकी जाँच करें। इसकी अधिक जानकारी वि:अंक परिवर्तक पर पाई जा सकती है। धन्यवाद --सिद्धार्थ घई (वार्ता) 19:23, 14 जुलाई 2012 (UTC)

यह अभी काम कर रहा है।भवानी गौतम (वार्ता) 13:29, 15 जुलाई 2012 (UTC)
जानकारी के लिये धन्यवाद भवानी जी। यदि संभव हो तो कृपया ब्राउज़र की जानकारी भी दें (कि ये किस ब्राउज़र में चल रहा है)। मैंने फ़िलहाल इसे विन्डोज़ 7 में क्रोम 20 और फ़ायरफ़ौक्स 12 में परखा है, जिनमें ये ठीक काम कर रहा है। यदि किसी अन्य ब्राउज़र अथवा ऑपरेटिंग सिस्टम में इसे जाँचें तो कृपया जानकारी अवश्य दें। सहायता के लिये धन्यवाद--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 18:11, 15 जुलाई 2012 (UTC)
वर्किंग फ़ाइन विद् ऑल द लेटेस्ट वर्ज़न्स ऑफ इंटरनेट एक्सप्लोरर, फ़ायरफ़ौक्स, क्रोम, एण्ड ऑपेरा (इन विन्डोज़ 7 एण्ड 8).<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 13:38, 16 जुलाई 2012 (UTC)

सहायता[संपादित करें]

हिन्दी विकिपीडिया का एक दुर्भाग्य है की इसपर लोग हटाय जाने (डिलीट) और शीघ्र हटाय जाने (स्पीडी डिलीट) का अंतर नहीं समझते. फिर यदि आप पन्ने के रहने के पक्ष में कुछ भी कहलें, आपकी बात कोई नहीं सुनेगा और अचनिक वह पन्ना गायब हो जायगा. मैं पिछले कुछ समय से हिन्दी में एड्स/एचआइवी के विषय में लेख लिख रहा हूँ जिसमें रोग से जुड़े पन्नों के इलावा सरकारी संसथानों पर भी लेख लिखना शामिल है. मेरे एक मित्र ने मेरे द्वारा लिखे गए तीन लेखों को शीघ्र हटाय जाने के लिए नामांकित कर चुके क्यूंकि उनके अनुसार इनमें "साफ प्रचार" छलकता है. मेरा निवेदन यह है कि यह लेख सरकारी संस्थाओं से जुड़े हैं और मैं इनमें से किसी संगठन का प्रतिनिधि नहीं हूँ, साथ ही लेखों को आकार के रूपमें स्वीकार करते हुए इन्हें और अच्छे लेखों के रूप में विकास करने में मेरी सहायता करें. लेख इस तरह हैं:

User:Hindustanilanguage (वार्ता) 09:05, 16 जुलाई 2012 (UTC).

इन लेखों की ओर ध्यान दिलाने के लिये आपका धन्यवाद। इनसे शीघ्र हटाने के नामांकन हटा दिये गए हैं क्योंकि इन लेखों का लहजा प्रचारक नहीं है।
हाँ, इनकी उल्लेखनीयता पर प्रश्न उठाया जा सकता है, परंतु चूँकि उल्लेखनीयता ना होना शीघ्र हटाने का मापदंड नहीं है, अतः इन्हें चर्चा के बिना उस कारण से नहीं हटाया जा सकता।
नामांकनकर्ता से, एवं आपसे अनुरोध है कि इनकी उल्लेखनीयता के बारे में चर्चा करें, कि क्या सभी ज़िलों की संस्थाएँ उल्लेखनीय हैं (अर्थात क्या इनमें निहित उल्लेखनीयता है), और क्या सभी पर अलग-अलग लेख होने चाहियें? या फिर कुछ संस्थाएँ उल्लेखनीय हैं और कुछ नहीं (अर्थात उल्लेखनीयता सिद्ध करनी होगी)? इस बारे में चर्चा के पश्चात ही इन लेखों पर (एवं इन तीन जैसे अन्य लेखों पर) कोई कदम उठाया जा सकता है।
हाँ, आपसे ये अनुरोध है कि इस चर्चा के सम्पूर्ण होने से पहले इस विषय में और लेख ना बनाएँ। धन्यवाद--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 09:51, 16 जुलाई 2012 (UTC)

भारत सरकार एड्स के बढते खतरे को देखते हुए पहले तो राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन का गठन किया, फिर हर राज्य की एक एड्स नियंत्रण सोसाइटी का गठन हुआ। राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के माध्यम से ज़िला-स्तर पर भी सोसाइटी का गठन हुआ है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य लोगों को एड्स जैसी भयानकर बीमारी से परिचय करना, रोगियों को इलाज तथा पुनर्वास का प्रबंध, समाज से कलंक मिटाना, स्वेछित रक्तदान को प्रोत्साहन, जैसे विषय जुड़े हैं। हिंदी विकिपीडिया पर निम्न लिखित विषयों पर लेख लिखे जा चुके हैं:

  1. राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन
  2. राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी
  3. जिला-स्तरीय एड्स नियंत्रण सोसाइटी

इस समय चर्चा का विषय अंतिम श्रेणी है जिला-स्तरीय एड्स नियंत्रण सोसाइटी और उसके विषय में मेरा मत है कि केवल वही जिला-स्तरीय एड्स नियंत्रण सोसाइटी पर लेख लिखे जाएँ जिनके बारे में कोई उल्लेखनीय बात हो। मैं अपने साथियों से इस विषय में राय जानने का इच्छुक हूँ। [[User:Hindustanilanguage ]] (वार्ता) 13:12, 16 जुलाई 2012 (UTC).

इस सन्दर्भ में एक वरिष्ट योगदानकर्ता का मत मैं अपने वार्ता-पन्ने से यहाँ दोबारा लिख रहा हूँ:

एड्स सम्बंधित लेख

Hindustanilanguage जी, आपने जो लेख बनाएँ हैं उनमें से ज्यादातर ज्ञानवर्धक और ज्ञानकोषीय हैं, इसके लिए मैं आपका ध्न्यवाद करता हूँ। परन्तु कुछ लेख जो जिला एड्स नियंत्रण सोसायटियों पर बने हैं क्या आपको लगता है कि वे सभी उल्लेखनीय हैं? राज्य स्तर के तो अवश्य ही उल्लेखनीय हैं परन्तु जिला स्तर पर तो लेख जब ही बनाना चाहिए जब उनके द्वारा कोई ऐसा कार्य किया गया हो जो मिडिया द्वारा कवर भी किया गया हो मसलन उनके द्वारा किया गया कोई विशेष कार्य जिस से एड्स उन्मूलन में सहायता मिली हो। आपके क्या विचार हैं अवश्य बताएँ।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 13:17, 16 जुलाई 2012 (UTC)

कुछ विशेष ज़िला-स्तरीय एड्स नियंत्रण सोसाइटी-संगठन[संपादित करें]

यदि नाको द्वारा राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की इस सूचि को देखें, तो पता चलता है कि अहमदाबाद, चेन्नई और मुंबई को भी राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की सूचि में शामिल किया गया है इसलिए उन पर राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी ही की तरह लेख लिखे जा सकते हैं। विशाखापट्टनम एड्स नियंत्रण सोसाइटी इसलिए भी विशेष है क्यूंकि इसका गठन और कार्ययोजना अहमदाबाद से प्रेरित है। एक और विशेषता यह है कि ग्रेटर विशाखापट्टनम नगर निगम (GVMC) एचआइवी / एड्स-पीड़ितों के लिए देश में पहली बीमा योजना २००९ में शुरू की जिसके अंतरगत प्रीमियम का ५० फीसदी योगदान दिया ग्रेटर विशाखापट्टनम नगर निगम अदा करना होगा। योजना का आरंभ मानव संसथानों की राज्य मंत्री श्रीमती पुरंदेश्वरी ने किया था। सूरत नगर निगम की सक्रीयता का उदाहरण यह है कि अर्बन मनेजमेंट सेंटर नमक संस्था का एचआइवी मामलों के अध्यन (केस स्टडी) के लिए भारत के अहमदाबाद, चेन्नई, मुंबई और सूरत शहरों को चुना गया है।

जिन तीन पन्नों पर हम चर्चा कर रहे हैं, उनके सन्दर्भ में मैं अपने मित्रों से जानना चाहूँगा:
  1. क्या इन राज्य-एड्स नियंत्रण सोसाइटी से जुडी जिला सोसाइटी-पन्ने को राज्य-एड्स नियंत्रण सोसाइटी के पन्ने में शामिल करके हटाना चाहिए क्योंकि समाचार पत्रों और वेबसाईट से बहुत ही उल्लेख्न्य गतिनिधियाँ उनके सन्दर्भ में नहीं देखी गयी हैं?
  2. क्या एक विशेष पन्ने को बनाया जाय जिसे जिला-स्तरीय एड्स सोसाइटी (या सोसाइटियाँ) नाम दिया जाय और उसमें देश-भर में जिला-स्तरीय एड्स सोसाइटियों से जुडी जानकारी शामिल कर दें?
  3. कोई और विकल्प जो मेरे मित्र मुझसे कहना चाहेंगे? User:Hindustanilanguage (वार्ता) 08:14, 17 जुलाई 2012 (UTC).
यही बेहतर है कि प्रत्एक राज्य की जिलास्तरिए एड्स नियंत्रन समुदायों पर लेख बनाकर उस राज्य की सभी जिला समुदायों को उसमें सामिल करें। जब कोइ खास जिला समुदाय विशेष तौर पर उल्लेखनीय कार्य करे तो उसपर जरूर अलग स्वतंत्र लेख बना दें। मसलन हरियाणा के सभी जिलों के समुदाय हरियाणा की जिला एड्स नियंत्रण सोसायटी नामक पन्ने पर बनाना चाहिए। अनिरुद्ध  वार्ता  23:28, 17 जुलाई 2012 (UTC)

अब तक मैं अपने दो मित्रों (बिल विलियम कॉम्पटन जी और अभी-अभी विकिमेनिया से लौटे माननीय मित्र अनिरुद्ध) के प्रकट किये गए विचारों के अनुसार और जो कुछ मैंने ऊपर लिखा है, उसे देखते हुए मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि इस चर्चा से यह नतीजा निकला है चर्चा के मुख्य पात्र रहे इन तीन लेखों को उनके राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी से जुड़े लेख में शामिल करना चाहिए। चर्चा में भाग लेने के लिए मैं अपने मित्रों को धन्यवाद कहना चाहूँगा और हमारी विकिपीडिया के कोई प्रबंधक इन तीन लेखों (चित्रकूट ज़िला एड्स नियंत्रण सोसाइटी, मैनपुरी ज़िला एड्स नियंत्रण सोसाइटी, चंदौली ज़िला एड्स नियंत्रण सोसाइटी) को हटाना चाहें तो वो निस्संकोच हटा सकते हैं । User:Hindustanilanguage (वार्ता) 05:54, 18 जुलाई 2012 (UTC).

विकिमिनिया २0१२[संपादित करें]

मित्रों वाशिंगटन में हुए विकिमिनिया विश्व सम्मेलन २0१२ के दिलचस्प अनुभव अपनी टिप्पणियों के रूप में आपके साथ बाँटना चाहता हूँ। कृप्या अनुनाद जी या छद्म खाते पर या चौपाल की भाषा नीति पर किसी निर्णय पर पहुँचने से पूर्व मुझे २४ घंटे का समय दें। अभी-अभी लौटा हूँ और दिनभर के लिए अन्य गतिविधियों में व्यस्त हूँ। अनिरुद्ध  वार्ता  00:58, 17 जुलाई 2012 (UTC)

अपने प्रिय देश भारत में आपका दोबारा हार्दिक स्वागत है । User:Hindustanilanguage (वार्ता) 11:03, 17 जुलाई 2012 (UTC).
विकिया समुदाय ने ग्रह के प्रत्एक व्यक्ति तक ज्ञान के कुछ हिस्से को उनकी भाषा में पहुँचाने का आंदोलन जिस आक्रमक सक्रियता से जारी रखा है तथा उसकी गति को निरंतर तीव्रतम और पहुँच को व्यापकतम बनाने का निश्चय किया है उससे परिचय मेरे लिए सचमुच एक रोमांचक अनुभव था। चौपाल पर कुछ अनुभव साझआ कर रहा हूं। विस्तार से अपने सदस्य पृष्ठ पर लिखूँगा।
  • विकिया मोबाइल के सहारे अगले एक वर्ष में उन ५ अरब लोगों तक पहुँचने का गंभीर प्रयास कर रही है जो इंटरनेट क्रांती के लाभ से अबतक वंचित रहे हैं। इसके लिए M.WIKIPEDIA.ORG के अलावा 0.WIKIPEDIA.ORG भी बनाया जा रहा है। जहाँ प्रयोक्ता विकिया को निःशुल्क देख करेंगें। इसके लिए दो बड़ी फोन सेवा प्रदाता कंपनियाँ राज़ी हो गई हैं और अगले १ वर्ष में अफ्रिका, ब्राजील और भारत में यह सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही विकिया एक सार्वभौमिक मोबाइल नंबर की व्यवस्था कर रही है जिसपर किसी शब्द को समस के जरिए भेजने पर विकिया लेख मोबाइल संदेस के रूप में प्राप्त होंगें और पूर्णतः निःशुल्क। इसके लिए विकिया समुदाय को थोड़े सरल और साथ ही स्तरिए और चित्र रहित आलेखों की जरूरत होगी।
  • विकिया ने सैंकड़ों अप्रचलित भाषाओं को संरक्षित करने का गंभीर प्रयास किया है। तमाम ऑनलाइन प्रोजेक्ट के साथ ही विकिया फाउंडेशन दो ऑफलाइन परियोजनाओं को भी आर्थिक और अन्य सहायता पहुँचा रही है। एक तो पोलिस भाषा के एक अन्य रूप की परियोजना है जिसके बोलने वाले १५ हजार हैं और उनमें से कंप्युटर तथा विकिया की जानकारी किसी को नहीं है। पोलिस लोग उस समुदाय के लोगों से मिलकर उनकी भाषा ध्वन्यांकित करते हैं, कागज पर लेख लिखते हैं और शहरों में आकर उस भाषा की विकि में लेख बनाते हैं। यह मेरे लिए सुखद सूचना थी कि ऐसी दूसरी परियोजना भारत में संथाली भाषा में चल रही है।
  • एक सत्र में स्कूल के बच्चों की विकिया बनाने की योजना पर विचार हुआ जिसमें हिंदी आदी भारतीय भाषाओं में स्कूल के स्तर के लिए शुरु हुई आसान हिंदी विकिया जैसी चर्चा का भी जिक्र आया और यह भी कि पता नहीं इन चर्चाओं का क्या हुआ?
  • जिमि ने उरुग्वे विकि के एकमात्र प्रबंधक को विकि सम्मान प्रदान किया जिन्होंने एक महीने में बॉट से ३0 हजार लेख बनाकर उरुग्वे के लेखों की संख्या तीस से साठ हजार तक पहुँचा दी थी। जिमि ने याद दिलाया कि अंग्रेजी में भी इसी तरह से बॉट से साठ हजार लेख बनाए गए थे। महत्वपूर्ण यह था कि उरुग्वे भाषा के सक्रीय योगदानकर्ताओं की संख्या इन प्रयासों से १ से बढ़कर ४२ हो गई थी।
मेरे सम्मेलन के अनुभव के कुछ निष्कर्ष-
  • हिंदी विकिया को नए योगदानकर्ताओं की बेहद जरूरत है। जिन्हें पा सकने के लिए प्रतियोगिता,, प्रशिक्षण, जागरुकता आदी कार्यक्रमों की जरूरत है। और इसके लिए हमें हमें शैक्षणिक एवं संग्रहालय, पुस्तकालय आदि संस्थाओं को इससे जोड़ने की जरूरत है। मलयालम और मराठी में हुए प्रयासों की तरह दिल्ली में सेजु और उनके साथियों द्वारा चलाए जा रहे ऐसी कोशिशों का हमें यथासंभव सहयोग करना चाहिए।
  • हमें गंभीरता पूर्वक एक आसान हिंदी विकिया के बारे में सोंचने की जरूरत है। हमें उच्च और पूर्ण सामर्थ्य से युक्त भाषिक स्तर वाले और आसान हिंदी विकिया दोनों की जरूरत है। मुझे लगता है कि हिंदी में योगदान कर्ताओं की संख्या थोड़ी और बढ़ने पर हमें इसके लिए प्रयास शुरु करना चाहिए। आसान हिंदी माध्यमिक स्कूल तक के बच्चों और मोबाइल संदेस के सहारे विकिया सूचना पाने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी होगी।
  • सम्मेलन में नए सदस्यों के प्रति पुराने सदस्यों द्वारा अपनाए जा रहे रवैये पर गंभीर चिंता सामने आइ जिसने नए सदस्यों के लिए आना और काम करना बेहद मुश्किल बना दिया है। यह राय मुझे ठीक लगी कि विकिया में योगदान करना सामान्यतः फेसबुक जितना ही आसान होना चाहिए। अंग्रेजी विकि के संबंध में जाहिर यह चिंता अब हिंदी विकि के मार्ग की भी बाधक बन रही है।
  • लगभग ८0% विकिया पर अंग्रेजी के नियम के बजाय समुदायों ने उनसे बहुत से भिन्न नियम बनाए हैं। हमें भी अंग्रेजी के नियमों से उपयुक्त लगने पर ही अपनी विकिया के लिए नियम बनाने चाहिए। अन्यथा अपनी स्थिति को विचार में रखते हुए नियम तय करने चाहिए।
पिछले बारह वर्षों से आयोजित हो रहे इस विश्वस्तरिए सम्मेलन में ८७ देशों के सौ से अधिक विकिया के लोग जमा हुए थे किंतु हिंदी विकि का कोइ व्यक्ति शायद पहली बार वहाँ था। हाँ भारत के अन्य भाषाओं के दर्जन भर से अधिक लोग वहाँ जरूर थे। हममें से किसी-न-किसी को प्रत्एक वर्ष वहाँ होना चाहिए। ताकि विकि आंदोलन को गहरे स्तर पर समझकर हम हिंदी विकि को उसी दिशा में अग्रसर करने की कोशिश कर सकें। अनिरुद्ध  वार्ता  01:45, 18 जुलाई 2012 (UTC)
अनिरुद्ध जी, इस सम्मेलन में भाग लेने और उसके बाद अपना अनुभव साझा करने के लिये धन्यवाद। विकिपीडिया का पहला कदम ही क्रांतिकारी था। अब नयी-नयी प्रौद्योगिकियों को ध्यान में रखते हुए नये-नये कदम उठा रहे हैं, यह हिन्दी सहित विश्व की हजारों भाषाओं के लिये सुखद है। ज्ञान का लोकीकरण कैसे हो, यह विकिपिडिया वालों से बेहतर कोई नहीं जानता। उन्होने इस भ्रम को तोड़ कर रख दिया है कि "ज्ञान कुछ भाषाओं में सीमित हो चुका है ; आगे भी उनमें ही ज्ञान का संचरण हो सकता है; शेष भाषाओं में ज्ञान के योगदान और विकास की बात करना समय की बर्बादी है, आदि" । हम हिन्दी विकि को उनकी आशा के अनुरूप सर्वांग विकसित कर सकें, यही प्रयास और कामना है।-- अनुनाद सिंहवार्ता 03:43, 18 जुलाई 2012 (UTC)
अनिरुद्ध जी, आपने विकिया के विश्वस्तरीय सम्मेलन में भाग लिया और अपने विचार यहाँ लिखे, यह बहुत अच्छा है, हिन्दी विकि के लिये कुछ नियम तो बनाने ही होंगे जो अंग्रेजी विकि या अन्य विकि से भिन्न हों क्योंकि प्रत्येक भाषा और समाज की अपनी एक अलग पहचान भी होती है इसलिये अँग्रेजी विकि के सभी नियम यहाँ यदि कड़ाई से लागू किये जायेंगे तो वे योगदानकर्ता जिन्हें विकि पर कार्य करने के लिये प्रेरित करके अन्य सदस्यों द्वारा लाया जा रहा है यहाँ ठहर नहीं पाते हैं, इन्हें विकि पर कार्य करने के लिये सहयोग देना होगा और इनके साथ अच्छा व्यवहार भी करना होगा। मैंने स्वयं कई लोगों को विकि से जोड़ा है पर यहाँ उनके लिये अंग्रेजी विकि की दुहाई देकर उनका अपमान किया जा रहा है, महिला सदस्यों की खिल्ली उड़ाई जा रही है और खाते ब्लाक करने की धमकी दी जा रही है, यह सब ठीक नहीं है।

आपने सम्मेलन से लौटकर जो संदेश चौपाल पर लिखा है दरअसल यह ही वह संदेश है जो विकि के किसी वरिष्ठ सदस्य के संदेश की गरिमा रखता है, आशीष भटनागर ने भी बहुत ही सधी हुई भाषा में ऊपर लिखा है। हिन्दी विकि जिस गति से आगे बढ़ रही थी उसमें निश्चय ही गतिरोध आया है, आपके इस संदेश से विकि को पुनः गति मिलेगी। क्या हिन्दी विकि का कोई सम्मेलन हम दिल्ली या किसी शहर में नहीं कर सकते ? कृपया विचार करें, यदि ऐसा हो सकता है तो कुछ अन्य लोग भी विकि से जुड़ेंगे और इसे एक अतिरिक्त गति मिल सकेगी।--आलोचक (वार्ता) 05:49, 18 जुलाई 2012 (UTC)

मेरे विचार में अवश्य हिंदी विकिपीडिया का सम्मलेन आयोजित कर सकते हैं। चूँकि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, इसलिए हमें औद्योगिक / व्यापारिक घरानों का भी समर्थन प्राप्त हो सकता है। इस संदर्भ में मैं मलयाली विकिमीडियाइयों के सम्मलेन की मिसाल देना चाहूँगा । विकिमेनिया से लौटे माननीय मित्र अनिरुद्ध ने तो जैसे हमारी सोच में क्रांति ला दी है । User:Hindustanilanguage (वार्ता) 06:21, 18 जुलाई 2012 (UTC)

एक बात और बताना प्रासंगिक होगा कि विकिया संबंधी किसी भी सकारात्मक कदम में आर्थिक समस्या कभी आड़े नहीं आएगी। चाहे नई परियोजना शुरु करनी हो या हिंदी का या भारतीय भाषाओं का या वैश्विक स्तर पर विकिया का सम्मेलन आयोजित करना हो विकिया फाउंडेशन आर्थिक मदद के लिए तत्पर है। यह मैं उनके वादे के और अबतक के कदमों के आधार पर ही कह रहा हूँ। लेकिन हमें एक ही शहर में रहने वाले सैकड़ों स्वयंसेवकों की जरूरत पड़ेगी साथ ही पचासों समर्थ और प्रतिबद्ध लोगों की भी जो एक वर्ष तक लगातार कर्मशील रहकर ऐसे आयोजनों को संभव कर सकें। वाशिंगटन सम्मेलन की सफलता के पीछे गूगल जैसी बड़ी कंपनियों का साथ और अमेरिकी कॉंग्रेस पुस्तकालय के प्रमुख या वाशिंगटन विश्वविद्यालय जैसे सरकारी संस्थानों में कार्यरत पदाधिकारियों की सक्रीय हिस्सेदारी थी। वाशिंगटन में आए विभिन्न भारतीय लोगों ने महसूस किया कि इन सबके लिए एक सशक्त विकिया समुदाय की जरूरत है और विकिया लेख लिखने के साथ ही हमें इस समुदाय के निर्माण की भी कोशिश करनी होगी। मनाता हूँ कि हम अगले पांच वर्षों में वैश्विक सम्मेलन को भारत के किसी शहर में आयोजित करने का सपना साकार कर सकेंगें। अभी तो इसके लिए बहुत काम करने की जरूरत है। साथ ही एक साथ ऐसा कोइ स्वप्न देखने की भी जरूरत है जो हमें ऐसे काम के लिए गतिशील रख सके। अनिरुद्ध  वार्ता  01:50, 19 जुलाई 2012 (UTC)

छद्म खाते और शिष्ट वार्ता[संपादित करें]

अनिरुद्ध जी, अनुनोद जी ने यहाँ मेरे समेत बहुतों-से अपमानजनक बातें कहीं हैं और धूर्तता-पूर्ण आचरण दिखाया है (उदाहरण दूसरों के शब्दों को तोड़-मरोड़ कर अपनी बेतुकी दलीलें देना), लेकिन मैंने संयम बर्ता क्योंकि मैं नियमों के दाएरे में रहा हूँ। और लोग छद्म खाते चला रहें हैं लेकिन मैं नहीं चला रहा क्योंकि मैं नियमों के दाएरे में रहा हूँ, वरना यहाँ हर चर्चा में मेरे १० अवतारों के भयंकर शब्द गरज रहें हों। अगर बदतमीज़ी, गाली-गलोच और बहरूपिये खातों के साथ मक्कारी करने का कोई दंड नहीं तो सभी यह करेंगे। फिर मजबूरन अच्छों को भी यही करना होगा। मैं लेख बनाने में अनथक रहा हूँ लेकिन मुझे आसान हिंदी भी बहुत पसंद है। मैं भी लेख बनाना छोड़कर दूसरों के बनाए लेखों में उनका 'सरल-माप' पर परीक्षण करके उनका अनथक सरलीकरण करना शुरू कर सकता हूँ। इसमें विकी की भलाई भी होगी। इतना कहे देता हूँ कि नियमों का न होना अराजकता को दावत देना है। अगर नियम नहीं तो सभी अनुनाद जी जैसे टेढ़ी और पक्षपाती चालें चलते रहेंगे - और इतना यकीनी है कि अगर मैं उस रास्ते पर उतर आया तो अनुनाद जी की मुझसे कहीं पहले सीटी बज जाएगी - वैसे भी मेरी सीधी लाठी शायद उनका नाज़ुक मिज़ाज झेल न पाए :-) मैं भी 'कठिन हिन्दी की निहित दुष्टता' पर एक स्रोतहीन निबंध बना सकता हूँ - लेख हटाना वैसे भी अब वर्जित है, चाहे जो जी चाहे डालो, चाहे जितना पक्षपात हो करो। क्या हम यही जंगल राज चाहते हैं? सज्जनों के समाज में सज्जन होना चाहिए, लेकिन जंगल में तो जंगली ही बनना होगा। अगर सज्जन-समाज में जंगली होने का कोई हर्ज़ाना नहीं तो सज्जन-समाज नहीं बच सकता। मैं यह सब शायद न करूँ, लेकिन जंगलीपन के द्वार खोलने से पहले सोच लेना चाहिए कि यह बाद में बंद करने बहुत कठिन होते हैं। मैंने कभी 'धूर्तता-पूर्ण' जैसे शब्दों को पहले यहाँ प्रयोग नहीं किया है - अनुनाद जी के मुझे 'दोगले' जैसे शब्दों के साथ उकसाने के बाद भी नहीं - लेकिन अगर यहाँ अपशब्दों का ही राज होना है तो क्या चारा बचता है? हमारे पास एक ही चुनाव है -

  • छद्म खतों को बंद करें और अनुनाद जी को गाली-गलोच और अन्य निति-उल्लंघन का दंड दें, या
  • छद्म खाते और गाली-गलोच को छूट दें

पुराना सदस्य होने से कोई नियम से ऊपर नहीं उठ जाता। नियम सबके लिए बराबर होते हैं, या फिर वे नियम होते ही नहीं। अब मैं देख रहा हूँ कि अनुनाद जी के साथ और छद्म खातों के साथ क्या होता है - यह आने वाले महीनो-सालों में हिन्दी विकी का भविष्य तय करेंगे। अगर उनका निति-रहित रास्ता जीतता है तो फिर अन्य सदस्य भी उसे अपनाएँगे। --Hunnjazal (वार्ता) 03:14, 19 जुलाई 2012 (UTC)

छद्म खाते रखना वर्जित है और होना चाहिए। इसके लिए जगदीश एवं आलोचक नामक खाते को छोड़कर शेष खातों के वार्ता पृष्ठ पर आवश्यक चेतावनी चिपका कर उन्हें अपनी स्वतंत्र स्थिति सिद्ध करने को लिखते हैं। यदि दो सप्ताह में वे ऐसा न कर सके तो हम उन्हें प्रतिबंधित कर सकते हैं। या प्रतिबंधित न भी करें तो भी जाहिर है कि वे खाते अब हमारी नजर में महत्वहीन होंगें।
एक ही आइपी से जुड़े खाते को छद्म मान लेने की नीति गलत है और हमें ऐसी नीति बनाने से बचना चाहिए। हाल ही में सिद्धार्थ और मैं दिल्ली कला संग्रहालय में एकसाथ पहुँचे थे जहाँ हिंदी विकि संबंधी एक परियोजना चल रही है। इसमें कुछ ही अभिकलित्र का प्रयोग कई लोग खाता बनाने में और संपादन करने में कर रहे हैं। विकि को गति देने की योजना जिन विद्यालयों, महाविद्यालयों में शुरु की जाएगी वहाँ भी कुछ ही आईपी से कई खाते बनेंगें। ऐसे में समान आईपी के आधार पर खाते एक ही व्यक्ति के मानने की नीति गलत होगी। सुगंधा, फ्राक्लीन आदि का अवतरन जिन परिस्थितियों में हुआ है उसे लेकर संदेह नहीं हो सकता है कि ये छद्म खाते हैं और प्रतिबंधित होने चाहिए। किंतु हो सकता है हमारी सोच गलत हो इसलिए सभी को सफाई का मौका जरूर मिलना चाहिए।
अनुनाद जी के कई शब्द विकि वार्ता के अनुपयुक्त हैं किंतु गलती उन लोगों ने भी की है जो उनपर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं। बिल के आने से पूर्व के अनुनाद सिंह की वार्ताओं में ऐसे शब्द नहीं हैं। और बाद में अपमानजनक भंगिमा वाले शब्द और कर्म भी एकतरफा नहीं हुए हैं। असल में विरोधी विचारों को धर्यपूर्वक सहने की शक्ति हमें अभी भी अर्जित करनी होगी और उसके विवेकपूर्ण समाधान का रास्ता निकालना होगा। हम ऐसे किसी भी शब्द के संपादन को वापस कर सकते हैं जिनमें अपमानजनक शब्द हों। संपादन सारांश सामने के व्यक्ति के गुस्से को ठंढा करने में बहुत काम आएगा। एक अपशब्द के बदले में दूसरे अपशब्द का प्रयोग कर हम अपनी ही सम्मान में थोड़ी कमी करते हैं। विकिया पर अराजकता नहीं आएगी और आशा है कि ऐसे प्रयासों में हमें आपका साथ मिलता रहेगा। जरा सोचिए कि हिंदी विकि के अच्छे ४0 हजार लेखों में लगभग १५ हजार अनुनाद जी के होंगें। अगले दस सालों में और १५ हजार लेखों से क्या हम अपनी मानसिक तुष्टि के लिए हिंदी विकि को वंचित करने का कदम उठाएं। मुझे विश्वास है कि बात को विराम दें तो समस्या खुद सुलझ जाएगी। मसलन नागरी के अन्य और नए व्यक्तियों के तर्कों का तो मैने जबाब दिया है किंतु बिल के तर्कों का जबाब एक सीमा के बाद मैने नहीं दिया है। क्योंकि बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी। साम्राज्यवाद, नस्लवाद, उपनिवेशिक मानसिकताजातीय अहंकार , पता नहीं क्या-क्या आ जाएंगें। जिनका कुछ भी मूल्य नहीं है। महत्व उन निर्माणात्मक कार्यों का है जो अनुनाद जी, बिल, आपने एवं अन्य सदस्यों ने जारी रखा है। कृप्या निर्माणात्मक सक्रियता को बनाए रखिए। अनिरुद्ध  वार्ता  14:38, 19 जुलाई 2012 (UTC)
अनिरुद्ध जी, आपका यह कहना कि "एक ही आइपी से जुड़े खाते को छद्म मान लेने की नीति गलत है" यह भी एक गलत तथ्य है। चॅकयूज़र केवल आईपी देख कर अपनी रिपोर्ट नहीं देते, कई अन्य तकनीकी विश्लेषण के बाद ही यह बताया जाता है कि आखिर क्या संदिग्ध खाते एक ही व्यक्ति द्वारा चलाएँ जा रहें हैं या ये अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा एक ही आईपी से चलाएँ जा रहें हैं और इस रिपोर्ट में साफ़-साफ़ कहा गया है कि ये खाते एक ही व्यक्ति द्वारा चलाएँ जा रहें हैं, तो इसमें अब सोचने के लिए क्या रह जाता है? सिद्धार्थ ने भी बड़ी अच्छी तरह से समझाया है कि किस प्रकार यह खाते संदिग्ध हैं और इनका अवतरन जिन परिस्थितियों में हुआ है उस पर भी संदेह है।
आपका यह कहना तो बड़ा अजीब सा है कि मेरे आने से अनुनाद बात करने की तमीज़ ही भूल गए। मैं कोई जादूगर तो हूँ नहीं कि उन पर मैंने कोई काला जादू कर दिया हो, अगर मैने ऐसा कुछ जादू किया भी है तो इनका व्यवहार अन्य विकिपीडिया सदस्यों के लिए क्यों ख़राब हो गया? लवी, Hunnjazal के साथ-साथ इन्होंने नए सदस्यों से भी अपमानजनक भाषा में बात करना शुरू कर दिया क्या इसमें भी मेरी गलती है? इंसान अपने स्वभाव और अपनी संस्कृतिके अनुरूप ही बोलता है इसमें दूसरा कुछ नहीं कर सकता। और मेरे आने से बस इतना अंतर आ गया है कि पहले हिन्दी विकिपीडिया पर जिसका जो मन करता था वो वही करता था, सदस्य अपने ऊपर लेख बनाते थे, और अनुनाद जी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी करते थे, परन्तु अब इन सब पर कोई टोकने वाला हो गया है। मैं सच्च बोलता हूँ इसलिए कुछ सदस्यों को यह कटु लगता है। और यहाँ मुद्दा सिर्फ़ गलत शब्दों के प्रयोग तक ही सीमित नहीं है यहाँ इस बात पर भी विवाद है कि एक ज्ञानकोष की गरिमा को कब तक और किस स्तर तक ठेस पहुँचाई जाएगी। अनुनाद जी के लिए भारत के आलावा अन्य देशों के विषय महत्वपूर्ण ही नहीं हैं और विशेष कर पश्चिमी सभ्यता के तो ये एकदम खिलाफ़ हैं, मुझे इस बात से कोई समस्या न होती अगर ये अपने इन विचारों को अपने तक ही सीमित रखते परन्तु चौपाल पर व अन्य कई स्थानों पर भी इस बात का रोना कि "भारत गुलाम बन जाएगा अगर यहाँ ब्रिटेन सम्बन्धी लेख निर्वाचित होंगे" यह तो मुझे सबसे अधिक मूर्खता लगती है, इनके विचार से हिन्दी विकिपीडिया पर भारत के सभी गाँवों पर लेख होने चाहिए परन्तु अन्य राष्ट्रों के नहीं। इनकी नजर में ज्ञानकोष की परिभाषा ही कुछ दूसरी है जो विकिपीडिया के एकदम विरुद्ध है। Hunnjazal ने बिल्कुल सही कहा है कि अगर नियम नहीं होंगे तो अराजकता आएगी और यह अराजकता हिन्दी विकिपीडिया पर न जाने कब से आई हुई है।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 15:28, 19 जुलाई 2012 (UTC)
हंज्जल जी, आप अपनी और बिल की टिप्पणी को ही देखिए। क्या इसमें गरिमा का खयाल रखा गया है या यह और भी अशिष्ट भाषा लिखने के लिए उकसाने वाली टिप्पणी है। माना कि यह प्रतिक्रिया है किंतु इससे भी उग्र इसकी भी तो प्रतिक्रिया हो सकती है। इसिलिए कहता हूँ कि अनुनाद जी पर प्रतिबंध नहीं लगाना उतना ही जरूरी है जितना की बिल पर। और कम से कम इन टिप्पणियों का उत्तर न देकर अनुनाद जी ने जो संयम दिखाया है उसे आप भी दिखाएंगें और इस बात को अपनी ज़िद नहीं बनाएंगें। अनिरुद्ध  वार्ता  23:24, 19 जुलाई 2012 (UTC)

अनिरुद्ध जी, जब यहाँ किसी को नीति उल्लंघन की सज़ा ही नहीं तो अपशब्दों पर लगाम का प्रश्न ही नहीं है। मुझे कोई किस बुनियाद पर टोक सकता है? अनुनाद जी तो गाली-गलोच आराम से करते हैं, छिद्म खाते तो आराम से सहमती-प्रक्रिया को अर्थहीन बना चुके हैं। तो फिर बेलगाम अशिष्ट व्यक्ति से शिष्टता दिखाने का कारण भला क्या होगा? --Hunnjazal (वार्ता) 05:12, 20 जुलाई 2012 (UTC)

यह भी[संपादित करें]

  1. अशिष्ट भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए।
  2. किसी विशेषण (शिखण्डी, पाकवादी, महारानी के सेवक) आदि विशेषणों से संबोधित नहीं करना चाहिए।
  3. किसी भी सदस्य को ( user name) से ही संबोधित करना चाहिए।
  4. हिंदी विश्वभाषा है, जो भी (विदेशी और जिसकी मातृभाषा नहीं है तो तो भी, और अहिंदी भाषी) हिन्दी विकि में कार्य करना चाहता है, उसे सहयोग करना चाहिए।
  5. नये लोगों को दबाने और धमकाने के लिए सिनियर और जुनियर विकि में नही होता ( यह केवल पॉलिटिक्स में हो सकता है)। लेकिन योगदान का कद्र होना चाहिए।
  6. उपर्युक्त सभी चर्चाएँ, हटाने का प्रस्ताव, इसका समर्थन वा विरोध और फ्रोक्लिन, क्लिन्टन आदि सदस्यों को बनाना या बनना जो भी हो, ऐसा लगता जीवनी की उल्लेखनीयता के कारण है। (विकि नियमानुसार) उल्लेखनीय न होने पर भी जब तक हम विकि में सक्रिय रहेंगे तब तक तो रख सकते हैं। पर भविष्य में नये प्रबन्धक नियम मुताबिक हटाएंगे ही। ऐसे लोग भी हैं जो अपने को प्रचार करने के लिए ही विकि में आते है, अपनी जीवनी को दूसरे से डलवाते हैं और कितने लोग तो खुद लिखते है। इसलिए जीवनियों की उल्लेखनीयता की जाँच प्रबन्धकों द्वारा शीघ्रता होनी चाहिए ।

भवानी गौतम (वार्ता) 01:19, 20 जुलाई 2012 (UTC)

सदस्य वार्ता:Somesh Tripathi[संपादित करें]

प्रिय अनिरुद्ध जी ! नमस्कार !! सर्वप्रथम तो विकीमीनिया कान्फ्रेंस में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिये मेरी ओर से हार्दिक बधाई! दूसरी बात जो मुझे आपसे शेयर करनी है वह यह कि जब भी कभी सदस्य वार्ता:Somesh Tripathi पृष्ठ पर कोई भी कुछ भी परिवर्तन करता है उसकी सूचना का ई-मेल मुझे तत्काल आ जाता है। मुझे जहाँ तक स्मरण है मैंने एक वार विकिपीडिया:चौपाल पर किन्हीं User:Somesh_virgo के अनुरोध करने पर उनका यूजर पेज बना दिया था। कहीं उस कारण से तो यह समस्या उत्पन्न नहीं हुई? मेरा अभी तक विकीपीडिया पर User:Krantmlverma (यूजर क्रान्तएमएलवर्मा) के ही नाम से वैश्विक खाता बना हुआ है। मैंने आज तक किसी अन्य नाम से और कोई खाता बनाया ही नहीं। आप सहित सभी विकीपीडिया प्रबन्धकों का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए मैं सबसे यह अनुरोध करता हूँ कि इस ओर कृपया शीघ्रातिशीघ्र ध्यान दें। कहीं आगे चलकर कोई मुझे ही खामोखाँ में विवाद का विषय न बना दे क्योंकि भाई लोगों का कोई भरोसा नहीं। धन्यवाद डॉ०क्रान्त एम०एल०वर्मा (वार्ता) 06:09, 18 जुलाई 2012 (UTC):डॉ०'क्रान्त'एम०एल०वर्मा (talk•Email)

क्रान्त जी, निश्चिन्त रहें। पहली बात, कोई भी सदस्य एक से अधिक खाते बनाने के लिए स्वतन्त्र है बशर्ते वह इस बात का खुलासा कर दे। कठिनाई केवल तभी होती है जब अनेकों खातों से छिपे रूप से काम किया जा रहा हो। क्या आपका इस खाते पर नियंत्रण है - इसमें लोगिन करने की क्षमता है? यदि हाँ, तो उसमें जाकर आप कह सकते हैं कि यह अब बंद है। दूसरी बात, अगर कोई और आपके ऐसे बनाए खाते पर क़ब्ज़ा कर के उसे चला रहा है, फिर भी न घबराइये क्योंकि उनका आई पी पता, मशीनी पहचान और कार्य-समय की छाप आपसे अलग होगी। कोई भी जांचने वाला उसे आप से नहीं मिलाएगा। --Hunnjazal (वार्ता) 05:28, 19 जुलाई 2012 (UTC)
क्रान्त जी, सबसे पहले तो आपने मेरा userpage बनाया उसके लिए धन्यवाद। देरी से धन्यवाद देने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। दूसरा यह कि Somesh_virgo तथा Somesh Tripathi एक ही व्यक्ति हैं अर्थात् मैं स्वयं। मुझे पहला नाम कुछ अटपटा लग रहा था अतः उसे अपने सही नाम पर अनुप्रेशित कर दिया। इसी कारण से आपने देखा होगा कि अब मैं अपने हस्ताक्षर में भी पूरे नाम का उपयोग कर रहा हूँ। कृपया निश्चिन्त रहें, मेरी तरफ़ से आपको कोई असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। धन्यवाद।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 06:31, 19 जुलाई 2012 (UTC)
प्रिय हुञ्जाल जी! एवं सोमेश जी! बात एक व्यक्ति दो व्यक्ति या अधिक व्यक्ति होने की नहीं है, बल्कि यह है कि किन्ही अवधेश पाण्डेय जी ने मेरे नाम से हिन्दी व अंग्रेजी विकीपीडिया में लेख क्या बना दिये पूरे विकीपीडिया जगत में भूचाल आ गया। कुछ लोग तो यहाँ तक कहने लगे कि क्रान्तएमएलवर्मा और अवधेश पाण्डेय एक ही व्यक्ति हैं। वह तो भला हो विकी वालण्टियर शिजू अलैक्स का जो मुम्बई विकीकांफ्रेन्स में एक साथ होने के कारण मुझे जानते थे। वे स्वयं मेरे निवास पर अवधेश पाण्डेय को लेकर आये, मुझसे वार्ता की, मेरी लिखी हुई तमाम पुस्तकें देखीं व मेरा विकीपीडिया के प्रति समर्पण भाव देखा और पूरी तरह से आश्वस्त होकर गये। उसके बाद मैं अपना काम पहले की तरह हिन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत विकीपीडिया पर करता रहा। यकायक मैंने एक ऐसे व्यक्ति के सम्पादन में कुछ संशोधन क्या कर दिया कि उन्होंने लावीइंग करके मुझे अंग्रेजी विकीपीडिया से अनिश्चित काल के लिये ब्लॉक करवा दिया। अब मुझे हिन्दी विकीपीडिया पर भी धमकी दे दी गयी है कि मुझे यहाँ से भी चलता कर दिया जायेगा। ऐसी धमकी अवधेश पाण्डेय को भी उसके वार्ता पृष्ठ पर दे दी गयी है। तब से उसने विकीपीडिया पर योगदान करना बिल्कुल ही बन्द कर दिया है। वह कम्प्यूटर एक्सपर्ट होने के कारण मुझसे अधिक कार्य कुशल था उसकी मेरे मुकाबले उम्र भी बहुत कम थी लगभग एक तिहाई का अनुपात था हम दोनों में। यदि वह योगदान जारी रखता तो विकीपीडिया को लाभ ही पहुँचता हानि की तो कोई सम्भावना ही न थी। अस्तु, मुझे जो कहना था कह दिया। आशा है आप लोगों में से कोई अन्यथा नहीं लेगा। डॉ०क्रान्त एम०एल०वर्मा (वार्ता) 17:55, 19 जुलाई 2012 (UTC):डॉ०'क्रान्त'एम०एल०वर्मा (talk•Email)

साँचा:विकिफ़ाइ[संपादित करें]

इस साँचे में जो वजह दी हुई हैं उनमें एक अन्य बिन्दु (point) जोड़ने की आवश्यकता है - *लेख की भाषा उत्कृष्ट करें, क्योंकि अक्सर यह देखने को मिलता है कि सदस्य en wiki या किसी अन्य विकि से गूगल अनुवादक की मदद से हिन्दी विकिपीडिया में लेख आयात कर तो लेते हैं लेकिन गूगल अनुवादक में आंतरिक कमी होने के कारण वाक्य का रचनाक्रम तथा व्याकरण सब डाँवाडोल हो जाते हैं। अतः यह आवश्यक है कि विकिफ़ाइ टैग लगाने पर भविष्य के संपादक से अन्य दिए हुए कारणों के साथ-साथ यह निवेदन भी कर लिआ जाए कि वह लेख की भाषा भी उत्कृष्ट बना लें।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 08:08, 18 जुलाई 2012 (UTC)

सोमेश जी, आप अन्य भाषा से खराब तरीके से अनूदित लेखों के लिये {{खराब अनुवाद}} साँचे का प्रयोग कर सकते हैं। क्या इससे समस्या का समाधान होता है या फिर विकिफ़ाई में ही यह बात जोड़ने की आवश्यकता है? --सिद्धार्थ घई (वार्ता) 19:31, 18 जुलाई 2012 (UTC)
सिद्धार्थ जी, मेरे विचार से तो बात बन जाएगी परन्तु मैं चाहता था कि जब विकिफ़ाई टैग है तो उसे ही all inclusive क्यों न बनाया जाये ताकि एक ही टैग में सारे मुद्दे address हो जायें? कृपया विचार कीजियेगा। धन्यवाद।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 03:19, 19 जुलाई 2012 (UTC)

नारायम में ॐ के लिये इनपुट में परिवर्तन[संपादित करें]

नमस्कार।

मैं यह नया भाग सदस्यों का ध्यान नारायम में ओं लिखना असंभव होने की समस्या की ओर आकर्षित करने के लिये बना रहा हूँ।

इस समय नारायम में oM टाइप करने से ओं आने की जगह सदैव ॐ आता है। अतः "भाषाओं, घटाओं, कलाओं" इत्यादि जैसे शब्द लिखना असंभव है।

इसके लिये ऊपर नारायम इनपुट भाग में सोमेश जी ने सुझाव दिया है कि ॐ लिखने की इनपुट को बदलकर auM कर दिया जाए। मैंने यही सुझाव डेवेलपर्स को इस समस्या के लिये खोले बग 38238 पर दिया है।

डेवेलपर्स के अनुसार यह एक बड़ा बदलाव है जिसके लिये समुदाय की सहमति प्राप्त की जानी चाहिये। और यह बात सही भी है, चूँकि यदि ॐ की इनपुट oM से बदलकर auM कर दि गई तो ओं लिखना तो संभव हो जाएगा, परंतु औं लिखना असंभव हो जाएगा (चूँकि auM से इस समय यह आता है)। अतः प्रश्न उठता है कि क्या औं किसी शब्द में प्रयोग किया जाता है (मुझे तो कोई ज्ञात नहीं)? यदि हाँ तो शायद इस समस्या का अन्य समाधान ढूँढना पड़ेगा, यदि नहीं तो अनुरोध है कि सदस्य इस परिवर्तन का समर्थन करें ताकि इसे शीघ्रातीशीघ्र लागू किया जा सके। धन्यवाद--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 19:25, 18 जुलाई 2012 (UTC)

मेरे जानकारी में तो किसी जगह पर 'औं' की आवश्यकता नहीं पड़ती है। ॐ के लिए aum ही सर्वथा उपयुक्त होगा। हाँ, इस विषय में अन्य सदस्यों के विचार भी अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि हो सकता है कि कोई ऐसे शब्द हों जो 'औं' का इस्तेमाल करते हों और मेरे ध्यान में नहीं आये हों। धन्यवाद।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 03:39, 19 जुलाई 2012 (UTC)
सिद्धार्थ जी, 'औंधा' लिखना हो तो 'औं' आता है। मेरा सुझाव है कि auM में शृंखला को तोड़ने के लिये 'अण्डरस्कोर' ( _ ) का प्रयोग किया जाय। मैने कई फोनेटिक सम्पादित्रों में यही व्यवस्था देखी है। अर्थात् ॐ के लिये auM और औं के लिये 'au_M' . -- अनुनाद सिंहवार्ता 03:43, 19 जुलाई 2012 (UTC)
 Yes check.svg  मैं अनुनाद जी की विचारधारा से सहमत हूँ।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 06:21, 19 जुलाई 2012 (UTC)
ॐ एक विशेष चिह्न है इसलिए इसके लिए एक विशेष शृंखला रखना ठीक रहेगा। अगर 'aM' अं है और 'bhM' भं है तो 'auM' को भी विधिपूर्वक औं ही होना चाहिए। कभी-कभी स्थानीय नामों में भी औं आ जाता है जैसा कि औंगारी सूर्य मंदिर या औंराडीह गाँव, गुरुआ (गया) है। अनुप्रेषण में भी यह आना चाहिए क्योंकि लोग 'on-' से शुरू होने वाले नामों को अक्सर इस के साथ लिप्यन्तरित करके ढूंढ सकते हैं। मसलन 'औंकोलोजी' (oncology, कैंसर चिकित्सा)। ॐ के अलावा और भी स्वस्तिक 卐 जैसे विशेष चिह्न हैं। मुझे लगता है कि इन सबके लिए एक नई सरल विधि बनाई जाई। 'V' (बड़ा 'v') कैसा रहेगा। 'aumV' या 'omV' दोनों ही ॐ बनाए। 'svV' या 'svaV' स्वस्तिक बनाए इत्यादि। पता नहीं यह डेवेलोपरों के लिए कितना आसान या कठिन होगा। --Hunnjazal (वार्ता) 04:43, 19 जुलाई 2012 (UTC)
शृंखला तोड़ने वाला 'जुगाड़' और भी कई जगह उपयोगी होता है। उदाहरण के लिये किसी को 'अउर' (और), 'राउत' , 'राउर' आदि लिखना हो तो इसके बिना समस्या होगी क्योंकि au साथ में आने पर औ की मात्रा (ौ) बना देगा। इसका हल अण्डरस्कोर के द्वारा शृंखला को तोड़कर किया जा सकता है। जैसे 'राउर' लिखने के लिये 'raa_ur' आदि। -- अनुनाद सिंहवार्ता 06:32, 19 जुलाई 2012 (UTC)
'राउर' का उदाहरण शृंखला नहीं तोड़ता और वास्तव में मेरे प्रस्ताव का ही एक और रूप है। इसमें 'aur' अभी भी 'और' ही होगा और 'au_r' ही 'अउर' होगा - यानि विशेष चिह्न ही शृंखला को विशेष रूप से तोड़ता है। शृंखला कहती है कि 'auM' को औं होना चाहिए। शृंखला तोड़ने के लिए कुछ विशेष चीज़ होगी - चाहे अंडरस्कोर हो, चाहे 'V', चाहे कुछ और। --Hunnjazal (वार्ता) 07:06, 19 जुलाई 2012 (UTC)
विधिवत लागू करने वालों को बहुत सी चीजें और सम्पूर्ण परिप्रेक्ष्य देखना होगा। किन्तू महत्वपूर्ण यह है कि शृंखला-तोड़ू कुंजी अवश्य रखी जाय। प्रायः 'विक्शनरी' लिखने में मुझे कठिनाई हो जाती है और मेरा टंकित किया हुआ 'विक्षनरी' बन जाता है। (मैं नारायम का के स्थान पर अन्य औजार उपयोग करता हूँ।)-- अनुनाद सिंहवार्ता 07:43, 19 जुलाई 2012 (UTC)
अन्वितार्थ यह नहीं है। व्रीण अध्वन् की यथाप्रकृति ही ऊर्ध्वपथ केतनों का परिग्रह करें। प्रवर्तयितृीय अरण्येतिलक में प्रामादिकत्व ही पाया जाएगा। --Hunnjazal (वार्ता) 16:31, 20 जुलाई 2012 (UTC)
'औं' के प्रयोग सम्बंधी जानकारी के लिये धन्यवाद। मैंने बग पर यह स्पष्ट कर दिया है कि 'औं' भी आवश्यक है, अतः औं की जगह ॐ डालना गलत होगा।
एक प्रश्न जो मैं उठाना चाहूँगा, वह यह है कि क्या ॐ चिन्ह का आम पाठ में इतना प्रयोग होता है कि उसके लिये सीधे इनपुट कुंजी की आवश्यकता है, या फिर ॐ और 卐 जैसे चिन्हों को संपादन विंडो के नीचे के संपादन टूल्स में देवनागरी में रखने से काम चल सकता है? यदि इन चिन्हों का प्रयोग बहुत कम है तो इनके लिये इनपुट की शायद आवश्यकता ही ना हो। कृपया अन्य सदस्य इस संबंध में अपने विचार रखें।
अनुनाद जी ने शृंखला तोड़ने वाली कुंजी की जो बात कही है, वह मैंने अभी बग पर नहीं रखी है। मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि वर्तमान रूप में नारायम में यदि किसी कुंजी को तोड़ू कुंजी के तौर पर प्रयोग किया जाना शुरू किया गया तो उससे आम तौर पर जो लिखा जाता है, वह लिखना संभव नहीं रहेगा (जैसे ~ टाइप करना नारायम को अक्षम किये बिना संभव नहीं है)। अतः यदि _ को तोड़ू कुंजी बना दिया जाए तो _ लिखना असंभव हो जाएगा। हाँ, यह ज़रूर सम्भव है कि au_M को ॐ चिन्ह के लिये निर्धारित कर दिया जाए, परंतु यह लिखना थोड़ा कठिन भी है। क्या संपादन विंडो के नीचे के टूल्स में से इसे जोड़ना ज़्यादा आसान नहीं होगा?--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 19:55, 22 जुलाई 2012 (UTC)

सिद्धार्थ जी, हाँ, इसे टूल्स में नीचे जोड़ देना ही ठीक लगता है। ॐ का चिह्न लेखों में इतना अधिक भी नहीं प्रयोग होता। --Hunnjazal (वार्ता) 03:06, 24 जुलाई 2012 (UTC)

कुछ वर्णों/चिह्नों के लिये 'सॉफ्ट-कुंजीपटल' का प्रावधान तो हमेशा उपयोगी रहता है। उपर वर्णित अत्यन्त कम उपयोग किये जाने वाले वर्णों/संकेतों के अलावा 'Zero-Width Non-Joiner' (ZWNJ) तथा 'Zero-Width Joiner' (ZWJ) भी देवनागरी के लिये बहुत उपयोगी हैं जो मुख्यतः संयुक्ताक्षरों को मनोवांछित रूप में लिखने के लिये अत्यन्त उपयोगी हैं। जहाँ तक अण्डरस्कोर की शृंखला-तोड़ू के रूप में उपयोग की बात है, यह सही है कि इसका इस रूप में उपयोग करने के बाद अपने सामान्य रूप में उपयोग करने के लिये 'नारायम-मोड' से बाहर आना होगा। किन्तु यह तो अनेकानेक स्थितियों के लिये सत्य है। हमे प्राय: रसायन एवं अन्य विज्ञानों की सामग्री लिखते समय रोमन और देवनागरी दोनों का मिश्रित उपयोग करना पड़ता है। वहाँ k भी लिखना हो तो आपको मोड को बदलना पड़ेगा। -- अनुनाद सिंहवार्ता 04:32, 24 जुलाई 2012 (UTC)
ऐसे चिन्हों को संपादन टूल्स में जोड़ा जाना चाहिये।
शृंखला तोड़ू का सुझाव बग पर दे दिया है।
बग 38238 पर सुझाया गया है कि ॐ के लिये _auM_ या _aum_ का प्रयोग किया जाए (चूँकि सर्च बॉक्स के लिये संपादन टूल उपलब्ध नहीं होते)। यदि किसी को इनसे आपत्ति हो तो अवश्य बताएँ, यदि नहीं हो तो इनमें से किसी का प्रयोग किया जा सकता है। धन्यवाद--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 09:33, 26 जुलाई 2012 (UTC)
बढ़िया! जब यह प्रक्रिया कार्यान्वित हो जायेगी तो इसपर काम करके देखेंगे, यदि परेशानी आयेगी तो पुनः अनुरोध करेंगे। वैसे परेशानी होने की उम्मीद अब कम है। धन्यवाद सिद्धार्थ जी।--Somesh virgo (वार्ता) 08:42, 27 जुलाई 2012 (UTC)

दो विकियों का प्रस्ताव[संपादित करें]

अनिरुद्ध जी ने आसान हिन्दी की जो बात रखी है वह अच्छी लगी। लगने लगा है कि हम सब इकठ्ठे काम करने में अक्षम है और सभी के लिए दो में से एक गुट को चुनना अनिवार्य बन गया है -

  • गुट १ - सरल हिन्दी, आम प्रयोग के उर्दू और अंग्रेज़ी शब्द स्वीकार्य, अंतर्राष्ट्रीय अंक पसंद, अंग्रेज़ी विकी की नीतियाँ स्वीकार्य, कठिन हिन्दी नापसंद, रोज़मर्रा की भाषा में ज्ञानकोष लेख बनाना मुख्य ध्येय
  • गुट २ - संस्कृतनिष्ठ/पाठकीय हिन्दी से प्रेम, आम प्रयोग के उर्दू-अंग्रेज़ी शब्द नापसंद, देवनागरी अंक पसंद, विशेष सदस्यों के लिए विशेष रियायत, शुद्ध हिन्दी भाषा की रक्षा करना मुख्य ध्येय

मुझे यह गुटबाज़ी बिलकुल पसंद नहीं है इसलिए मैंने इन विषयों पर अधिकतर नरमी रखी है। लेकिन अब देख रहा हूँ कि वातावरण इतना द्वेष से भर रहा है कि आगे बहुत कठिनाइयाँ होंगी। शायद अनिरुद्ध जी के अच्छे विचार का जल्दी अनुसरण कर लेना चाहिए। दो हिन्दी विकिपीडिया बनाए जा सकते हैं - आसान हिन्दी और शुद्ध हिन्दी। वे फिर अपने नियम इत्यादि बनाने को स्वतन्त्र होंगे। रोज़-रोज़ की नकारात्मक बहसें भी ख़त्म होंगी। क्या कहते हैं? --Hunnjazal (वार्ता) 06:24, 19 जुलाई 2012 (UTC)

जी हाँ, विकिपीडिया (en) और सिम्पल विकिपीडिया (simple) जैसा, अच्छा रहेगा। हिंदी बहुत बड़ी भाषा है, पाठक भी ऐसे ही दो प्रकार के होते हैं। भवानी गौतम (वार्ता) 12:47, 19 जुलाई 2012 (UTC)

Help decide about more than $10 million of Wikimedia donations in the coming year[संपादित करें]

(आने वाले साल में विकीमीडिया के लिये दस लाख डॉलर दान जुटाने में सहायता करें)

Wikimedia Foundation RGB logo with text.svg

(Apologies if this message isn't in your language. Please consider translating it)

Hi,

As many of you are aware, the Wikimedia Board of Trustees recently initiated important changes in the way that money is being distributed within the Wikimedia movement. As part of this, a new community-led "Funds Dissemination Committee" (FDC) is currently being set up. Already in 2012-13, its recommendations will guide the decisions about the distribution of over 10 million US dollars among the Foundation, chapters and other eligible entities.

Now, seven capable, knowledgeable and trustworthy community members are sought to volunteer on the initial Funds Dissemination Committee. It is expected to take up its work in September. In addition, a community member is sought to be the Ombudsperson for the FDC process. If you are interested in joining the committee, read the call for volunteers. Nominations are planned to close on August 15.

--Anasuya Sengupta, Director of Global Learning and Grantmaking, Wikimedia Foundation 20:07, 19 जुलाई 2012 (UTC)

Distributed via Global message delivery. (Wrong page? Fix here.)

आने वाले वर्ष में विकिमीडिया दान के दस लाख से अधिक डॉलर तय करने में मदद करें
Wikimedia Foundation RGB logo with text.svg

नमस्कार,

जैसा कि आप में से कई जानते हैं, विकिमीडिया ट्रस्टीस बोर्ड ने हाल ही में उस प्रणाली में महत्वपूर्ण तब्दीलियाँ शुरू की हैं जिससे की विकिमीडिया आंदोलन के भीतर धनराशी वितरित किया जा रही है। इसी के हिस्से के तौर पर, एक नयी समुदाय के नेतृत्व वाली फंड प्रसार समिति (Funds Dissemination Committee- FDC) अभी स्थापित की जा रही है। २०१२-१३ में पहले से ही अपनी सिफारिशें से फाउंडेशन, अध्याय और अन्य पात्र संस्थाओं के बीच १० लाख से अधिक अमेरिकी डॉलर के वितरण के बारे में इस समिति के निर्णय मार्गदर्शन करेंगे।

इस समय सात सक्षम, जानकार और भरोसेमंद समुदाय के सदस्यों को प्रारंभिक फंड प्रसार समिति के लिए स्वयंसेवक के रूप में आवश्यकता है। यह सितंबर से अपना काम शुरू करने की सम्भावना है। इसके अलावा, एक समुदाय के एक सदस्य को फंड प्रसार समिति की प्रक्रिया के लिए लोकपाल के तौर पर भी मांग है। यदि आप समिति में शामिल होने में रुचि रखते हैं, तो स्वयंसेवकों के लिए आमंत्रण को पढ़ें। नामांकन १५ अगस्त को बंद करने की योजना बनाई गयी है।

अनसूया सेनगुप्ता, निर्देशक, विश्व अध्यन अथवा दानवित्रण, विकिमीडिया फाउंडेशन. (हिन्दी अनुवाद: Hindustanilanguage (वार्ता) 06:32, 23 जुलाई 2012 (UTC).)

हिन्दी विकि के नीति सम्बन्धी पन्ने[संपादित करें]

हिन्दी विकि अभी विकासमान है। इसलिए आश्चर्य नहीं कि अभी भी बहुत सी चीजें अस्पष्ट हैं। नीति सम्बन्धी कुछ विशेष लेख इसके उदाहरण हैं। वि:कठपुतली को लीजिये। मैं आप सबके विचार जानना चाहता हूँ कि क्या इस पन्ने पर लिखी बातों को इसके वर्तमान रूप में हिन्दी विकिपिडिया की मान्य नीति माना जा सकता है? -- अनुनाद सिंहवार्ता 04:14, 20 जुलाई 2012 (UTC)

"९०० चूहे खाकर बिल्ली हज़ को चली।" I was taught this idiom in my school-days. Hunnjazal, can we and should we make a page on this on hi.wiki? You certainly would make a very beautiful one! -- लवी सिंघल (वार्ता) 15:42, 22 जुलाई 2012 (UTC)
P.S.: This post is because anyone can attack any other person on hi.wiki. This is just a trailer. It is not even a violation of any of the rules right now. And, also because I'm a reasonably experienced editor. Isn't it?
-). I saw the one you made. And it is true, you are not violating any rule whatsoever. Which is also why I contested Aniruddh's 'warning'. I might as well warn someone for using the word 'की' because I don't like it at this moment. I must confess though that I still don't understand the reluctance of people that I know to be good-hearted and kind to do what is patently right. It reminds me of a quote I heard about a politician once, he has the pained look of a man tasked with defending a system that is beneath his intelligence. --Hunnjazal (वार्ता) 05:18, 23 जुलाई 2012 (UTC)
अपने व्यवहार के बाद आपको इन चर्चाओं को छेड़ने या इनमें होने का बूँद-मात्र भी नैतिक अधिकार ही नहीं है। आप सहमती बनाएँगे? अच्छा मज़ाक है! लोगों के कथनों को झूठे रूप से तोड़ना-मरोड़ना, इत्यादि आपने लगातार किया है। जैसा कि स्पष्ट लगता है, यहाँ पर व्यक्तिगत आक्रमणों का कोई भी दुषपरिणाम नहीं है, इसलिए आप यह ढोंग छोड़ ही दें तो अच्छा है। कुछ ही घंटे पहले आपने मुझे 'दोगला' बुलाया। आपने मुझपर 'दस मिनट में बयान बदलने' का इलज़ाम लगाया? मैंने आपके लिए कभी नरम शब्दों के अलावा कुछ नहीं कहा था। क्या ग़लती थी मेरी? कि मैंने आपको प्रसन्न करने के लिए एक नीति बनवाने की कोशिश की थी? अभी तक अपने करे की क्षमा नहीं मांगी है आपने। अब चंद ही घंटों में पलटकर हरीश्चन्द्र बन रहें हैं? वाह! --Hunnjazal (वार्ता) 05:23, 20 जुलाई 2012 (UTC)
हुंजाल जी, लिखने के लिये धन्यवाद। मैं आपको बता दूँ कि मेरे पास एक 'पाप-गणित्र' या 'पाप-काउण्टर' है। वह अब चालू है। वह पाप > १०० पर एलार्म देता है। अब दूसरी बात। आपको पता है कि विकि चर्चा कोई हवा में नहीं होती, सब कुछ अक्षरों में लिखा हुआ है और उसे आगे-पीछे करके कभी भी देखा जा सकता है। मैने अब तक जो कुछ कहा है वह सप्रमाण कहा है। अब भी मैं हवा में बातें नहीं करूँगा। मैने आपके 'सुसंस्कारित शब्दों' की एक पूरी सारणी (टेबल) ही बना रखी है जिसे सबके अवलोकनार्थ रखने वाला था। किन्तु आपके कुछ वक्तव्यों को देखकर उसे अभी तक अप्रकाशित ही रखा है। (उसमें से कुछ की झलक मैने दिखाई भी थी तथा श्री अजीत कुमार तिवारी जी ने भी संकेतों में कुछ का जिक्र किया था।) इति। -- अनुनाद सिंहवार्ता 06:11, 20 जुलाई 2012 (UTC)

अच्छा, तो आप कह रहें हैं कि आप इन्ही अलार्मों के झटकों से ऐसे बन गए हैं? अच्छी कोशिश है लेकिन मैं इस बहाने को नहीं मान सकता। वैसे ऐसे पाप के काउंटर और महा-शुद्धि कि तमन्ना तालिबान भी रखती है। आपकी सारिणी मुझसे कहीं लम्बी है और ज़रुरत पड़ने पर समारोह में वह भी ज़ोर-शोर से प्रस्तुत की जाएगी। यहाँ अशिष्टता का कोई अंजाम नहीं इसलिए मैं भी ज़रा खुलकर आपसे बातें कर लूँ। सूक्ष्म-सोच ने हिन्दी जगत को कुँए का मेंडक बना दिया है। अब कुआँ छोटा पड़ गया है इसलिए बेड़ियाँ काटनी ही होंगी और हिन्दीभाषियों को तंग दृष्टि की बलि चढ़ाने वालों के चंगुल से बचाना ही होगा। कृपया नीति बनाने की बातें उनपर छोड़ दें जिनका आचरण नीति दर्शाता हो। जिन लोगों का इस से दूर-दूर का रिश्ता नहीं उनके मुँह से यह बातें अच्छी नहीं लगती। पिति, लिति, टिति।। --Hunnjazal (वार्ता) 07:05, 20 जुलाई 2012 (UTC)

अनुनाद जी पर जारी चर्चा[संपादित करें]

अनिरुद्ध जी, मैं आपसे एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ। मुझे नीति-नियम से काम करना पसंद है और अगर मैं किसी राह लग जाऊँ तो मेरे प्रयास जीवन के हर क्षेत्र में अनथक होते हैं। मैंने भी हिन्दी विकी पर हज़ारों लेख बनाए हैं। मैं अनुनाद जी की उपस्थिति को हिन्दी विकी के भविष्य के लिए ख़तरा समझने लगा हूँ। यह इसका सही प्रकार से विकास नहीं होने देंगे और इनके पक्षों से असहमत सदस्यों के लिए 'शिखंडी', 'दास', 'दोगले', 'नुक्ता-पसंद', 'पाकवादी' जैसे अपशब्द लगाने से नहीं चूकेंगे। क्या आप जानते हैं कि इनकी प्रयोगित भाषा कुछ देशों में जातीय-नफरत फैलाने के लिए ग़ैर-कानूनी होती है? यह विकिपीडिया भारत की मिलकियत नहीं है और कोई देशभक्ति या शुद्ध-हिन्दी-भक्ति का प्रचार केंद्र नहीं है। यह तो इनके पक्षपात और बदतमीज़ियों का कोई अंजाम दिखाईये या फिर दूसरों से भी इसी प्रकार के आचरण को स्वीकारिये। माफ़ी तक तो इन्होने मांगी नहीं है। --Hunnjazal (वार्ता) 05:43, 20 जुलाई 2012 (UTC)

आपने प्रेमचंद की 'पंच परमेश्वर' कहानी तो पढ़ी होगी। अच्छे पंचों के गुट, दोस्त और सम्बन्धी नहीं हुआ करते। उनका केवल नीति और न्याय से सम्बन्ध होना चाहिए। यदि न हों तो व्यवस्था निश्चित रूप से भ्रष्ट होती है। --Hunnjazal (वार्ता) 08:13, 20 जुलाई 2012 (UTC)
पंच का निर्णय विरोध में जाने पर जुम्मन शेख को लगता है कि पंच न्याय नहीं कर रहे हैं और अलगू चौधरी ने धोखा दिया है। आशा है कि सही परिस्थिति की समझ के लिए निर्दोष बैल को किसी समझू साहू के स्वार्थों की भेंट नहीं चढ़ना पड़ेगा। और मुझे नहीं लगता है कि अनुनाद जी का किसी और प्रबंधक के साथ विकि परिचय के अलावा कोइ संबंध होगा। प्रतिकात्मक भाषा के सहारे तर्क नहीं समझाए जा सकते किंतु यदि कुछ समझ सकें तो बेहतर ही होगा। अनिरुद्ध  वार्ता  23:54, 21 जुलाई 2012 (UTC)

मुझपर या अनुनाद जी पर कोई लगाम है?[संपादित करें]

हिन्दी विकी में क्या किसी सदस्य को चिमड़ जाने की भी कोई नीति नहीं है? यदि मैं अपना १००% समय अनुनाद जी के लिखे लेखों का सरलीकरण करने और उनके कुकथनों की दुरुस्ती करने में लगाऊँ, तो मुझे रोकने वाली कोई नीति है क्या? यदि कोई सर्वसम्मति की नीति रोकती है, तो मैं ज़रूर पालन करूँगा, वरना तो उनका रो देना निश्चित है क्योंकि मैं महीनों-सालों तक यह करने को तैयार हूँ। अराजकता में सबसे ज़्यादा हिंसात्मक व्यक्ति ही जीतता है। अंग्रेज़ी विकी में यह सब प्रतिबंधित है - वि:युद्धक्षेत्रनहीं, और विकी पर अपनी बात मनवाने के लिए अड़चने डालने पर प्रतिबन्ध, इत्यादि - मैंने यह सोचकर अनुवाद किये थे कि यह तो सभी लागू होंगे ही, लेकिन अनिरुद्ध जी एवं अन्य साथी-प्रबंधकों ने स्पष्ट कर दिया कि यह हिन्दी पर लागू नहीं हैं। मेरा हाल का व्यवहार बिलकुल नीतिसंगत है क्योंकि मैं अनुनाद जी के ही तरीकों का अनुसरण कर रहा हूँ और उन्हें छूट दी गई है। अभी मैंने छद्म खाते नहीं बनाए हैं, लेकिन अगर उनपर भी छूट है तो बिना किसी नीति का उल्लंघन करे बना लेता हूँ। जल्द ही अनुनाद जी पर अलग-अलग नामों से छह-छह सदस्यों की मेहरबानियाँ होंगी :-) मैं यह सब नहीं चाहता और सन्दर्भित उदाहरण दे रहा हूँ कि बिना नीति-नियमों के क्या होता है। स्पष्ट कर दूँ कि मैंने किसी लेख में कोई परिवर्तन नहीं किया है। पक्षपात, अपवाद (छुपा हुआ अपवाद और द्वेष भी), छिद्म खाते - इन्हें प्रतिबंधित करना विकी के बुनियादी असूल हैं। आगे कैसे बढ़ना है अनिरुद्ध जी? अनुनाद जी को बिना फटकार के नहीं छोड़ा जा सकता। और छिद्म खातों को हम कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? मुझे समझ नहीं आ रहा कि प्रबंधकों का गुट ऐसे लकवाग्रस्त क्यों है? निडर होकर आगे बढ़िये -

  • अनुनाद जी को निषेध करिए
  • छिद्म खातों को बंद करिए
  • यदि मुझे भी नीति-अनुसार निषेध करना है तो ज़रूर करिए - हिन्दी विकी को निष्पक्ष और ज्ञान-केन्द्रित बनाने के लिए इसे मैं बहुत ही हलकी कीमत समझता हूँ

यह मुद्दा ख़त्म नहीं हो सकता क्योंकि अनुनाद जी इसे कुरेदते रहेंगे। मैंने दिनों इतना संयम दिखाया और वह एक सन्देश का भी दिखाने में असमर्थ हैं। उन्हें अपनी करनी का ज़रा पछतावा नहीं है। यह बात अपने-आप में मेरे लिए कोई चिंता का विषय नहीं होती लेकिन इसमें इस बात के गहरे संकेत हैं कि वे Rajeevmass जैसे ही हैं। वह अन्य सदस्यों के लिए और हिन्दी विकी के विधिपूर्वक चलन के लिए लगातार अड़चने खड़ी करते रहेंगे। --Hunnjazal (वार्ता) 07:26, 20 जुलाई 2012 (UTC)

  • The behavior that Hunnjazal has exhibited above is but a glimpse to the foredooming anarchy on hi.wiki unless we mend our ways NOW. And Aniruddh, let me ask a very pointed question. You said, and I quote,
अनुनाद जी पर प्रतिबंध की बात सोचने और कुछ करने का दायित्व यदि जरूरी लगे तो आशीश जी पर सौंप सकते हैं।

My question is very simple. Why? Is this a declared policy on hi.wiki that an editor can be blocked/relieved of his rights only by an editor more senior to him? -- लवी सिंघल (वार्ता) 08:02, 20 जुलाई 2012 (UTC)

P.S.: I'm expecting a lot of brickbats in return.

Hunnjazal जी हिन्दी विकि का हित न तो आपको अवरोधित करने में है और न अनुनाद जी को, हम सब अनुनाद जी को यह एक अवसर इसलिये देना चाहते है क्योंकि अनुनाद जी ने हिन्दी विकिपीडीया के बुनियादी स्तम्भ रखे है जब यहां कोई भी सम्पादन नहीं करता था तब भी वह निरन्तर संपादन करते थे इसलिये "For a mark of respect" आपको अनुनाद जी को एक अवसर अवश्य देना चाहिये। मेरे आने पर उन्होने ने मुझे भी उत्साहित किया और आपको भी, इसी प्रकार अनेको सदस्यों को उन्होने समय समय पर प्रोत्साहित किया है। यदि किसी कारणवश हममें मतभेद हो जाता है तो हमें एक दूसरे को क्षमा करते हुए आगे बढ़ना चाहिये, वैसे भी किसी सदस्य को अवरोधित करने से पहले हम तीन चेतावनियाँ अवश्य देते है अत: इसे आप हर उस पक्ष के लिये अन्तिम चेतावनी माने जिसने आज तक हिन्दी विकि में अपशब्द कहें है। यदि माफी की बात है तो अनुनाद जी की तरह से मैं आपसे क्षमाप्रार्थी हूँ, किसी समाज को तोड़ने में चाहे ज्यादा समय न लगे परन्तु उसके निर्माण में काफि अधिक समय लग जाता है। किसी भी विकि पर यह समान्य प्रक्रिया है कि किसी भी सदस्य को किसी भी नीति के भंग करने पर तीन बार अवश्य चेतावनी दी जाती है तत्पश्चात उस सदस्य को बिना किसी चर्चा के अवरोधित कर दिया जाता है। अत: अबसे निश्चिन्त हो जाये यदि कोई भी सदस्य तीन चेतावनी मिलने के पश्चात भी विकिनीतियाँ भंग करता है तो उसे अवश्य अवरोधित किया जायेगा। आशा है इस चर्चा को विराम मिलेगा।--Mayur (talk•Email) 17:33, 20 जुलाई 2012 (UTC)

मयूर जी, आपने हिन्दी विकी और हिन्दीभाषियों की जो सेवा की है उसके लिए नतमस्तक प्रणाम। लेकिन कुछ मूल चीज़ें हैं जो संभवतः ठीक से समझी नहीं जा रहीं -

  • नियम के दायरे में सभी आते हैं। इस से किसी को छूट नहीं। हिन्दी विकी में अभी लाखों लेख बनने हैं। कोई भी इसपर मनमानी, पक्षपात, अशिष्टता, छद्म खाते जैसे काम करेगा तो इस कार्य में अड़चने होंगी। जब किसी सदस्य को एक चबूतरे पर बैठकर उसे 'प्रतिष्ठित', 'दिव्य', 'पुराना', इत्यादि बुलाया जाए तो यह स्वीकार्य नहीं है। विशेषकर जब वह ग़लत काम करके कोई पछतावा न दिखाए और अन्य लोग उसके लिए माफ़ियाँ मांगे। अनुनाद जी और किसी नए सदस्य की क़ीमत नीति में एक बराबर है।
  • अनुनाद जी ने जब मुझसे अशिष्ट बर्ताव शुरू किया तो मैं हक्का-बक्का रह गया। मुझे समझ नहीं आया कि वह कर क्या रहें हैं। मैं तो उनका साथ दे रहा था और उन्होंने 'यह कचरा है', 'आप दोगले हैं', इत्यादि बातें शुरू कर दीं। उनके अपशब्दों की धारा लगातार चली तब जाकर मेरे मन में उनके लिए आदर मरा। ख़ैर, उनके साथ भी काम किया जा सकता है जिनके लिए कोई आदर नहीं। मैंने यही कहा कि
  • जब यह ज़ाहिर हुआ कि उन्हें पूरी छूट दी जा रही है, जो यह बात भी स्थापित करती है कि सभी को गाली-गलोच करने की स्वतंत्रता है। शिष्टता अपनी मर्ज़ी पर निर्भर है। कोई आपके साथ सहमत हो तो शिष्टता ठीक है और कोई असहमत हो तो गाली-गलोच भी की जा सकती है। अनुनाद जी को निष्परिणाम छोड़ देने का यही तो अर्थ है। यह ठीक वही ग़लती है जो Rajeevmass जी के लिए की गई थी। उनका भी तो हिन्दी विकी पर बहुत योगदान था। अभी तक मैं अक्सर उनके बनाए लेखों में पहुँच जाता हूँ।
  • अगर अनुनाद जी के साथ-साथ मैं भी निषेध होता हूँ, मुझे सहर्ष मंज़ूर है। उनको मैं हिन्दी विकी के लिए हानिकारक मानता हूँ। वे इसी तरह पक्षपाती (यानि कम गुणवत्ता वाले) लेख बनाएँगे और व्यक्तिगत आक्रमणों और अपशब्दों से नहीं चूकेंगे। कुछ छद्म खाते उनके पक्षों का सहयोग कर रहे थे इसलिए उन्होंने उनका साथ दिया। वे एक आम हिन्दीभाषी के लिए लाभदायक और सरल ज्ञानकोष नहीं बनने देंगे। उन्हें एक भारतीय राष्ट्रीयता, शुद्ध भाषा और अपने पसंदीदा पक्षों का प्रसार केंद्र बनाना है। इसके रास्ते में जो आएगा वह उनका शत्रु बन जाता है।

मैंने भी यहाँ हज़ारों लेख बनाए हैं। अगर रहता तो अभी आगे और हज़ारों बनाता लेकिन यह काम करना हिन्दी विकी के लिए ज़्यादा ज़रूरी है। --Hunnjazal (वार्ता) 06:28, 21 जुलाई 2012 (UTC)

साँचा:आधार[संपादित करें]

आधार के साँचे में तिथि लिखने और उसके दिखाए जाने का विकल्प होना चाहिये ताकि पता चल सके कि साँचा डालने के बाद लेख में क्या-क्या बदलाव हुये हैं। मेरा मतलब है सकारात्मक बदलावों से था, सिर्फ़ वर्तनी परिवर्तन से नहीं। वैसे तो लेख के इतिहास देखने से भी बदलावों का पता चल जाता है, लेकिन यह नहीं पता चलता है कि यह बदलाव आधार साँचा डालने से पहले के हैं या बाद के।--सोमेश त्रिपाठी वार्ता 18:42, 20 जुलाई 2012 (UTC)

नीति या अराजकता[संपादित करें]

छद्म खातों और अनुनाद जी की नीति-विरुद्ध व्यवहार से हिन्दी विकी में एक कठिनाई का दौर आ गया है। प्रबंधक इस से निबटने में अक्षम दिखते हैं। या तो अपना फ़र्ज़ निभाईये या फिर इस पद से इस्तीफ़ा दीजिये, वरना आपके होने या न होने में क्या अंतर है? अगर भाईचारा चले और सब शिष्ट रहें तो प्रबंधक की कोई ज़रुरत नहीं होती। आपकी आवश्यकता तभी है जब कठिनाई हो। मिटटी के माधो बनने से यह टल नहीं जाएगा। यह चीज़ महीनों-सालों बार-बार उभर कर आएगी।

  • मैंने मयूर जी के छद्म खातों पर उठाए क़दम की सहायता करने की कोशिश की थी। अब वह भी नाकाम है क्योंकि लवी जी ने असहमति से दी है। अगर यही काम ४-५ दिन पहले किया होता तो शायाद यह सफल रहता। अब यहाँ एक-दूसरे पर विशवास बिलकुल नहीं रहा है। समय आ गया है। जगदीश जी का खाता बंद करें वरना वातावरण अभी और भी बिगड़ेगा। जो झूठ और मक्कारी से विकी प्रक्रियाएँ प्रदूषित करते हैं उनका यहाँ कोई काम नहीं है।
  • अगर आप किसी कोई दोगला, दासमानसिक, षड्यंत्री, इत्यादि बुलाएँगे तो सच ही है कि उस से आप अपने रिश्ते को जला रहें हैं और फिर उस से आप मित्रतापूर्वक कुछ नहीं करवा सकते। कभी मैं अनुनाद जी से इज्ज़त से बात किया करता था। अब मुझे उनपर ज़रा भरोसा नहीं है। वे अपने से अलग विचार रखने वालों पर हमले करते हैं और करते रहेंगे।
  • कम-से-कम अनुनाद जी को फ़ौरन ही प्रबंधक पद से हटा देना चाहिए। आज यह क़दम उठाएँ ताकि उनपर कुछ सहमती बन सके। वैसे तो किसी भी प्रतिष्ठित विकी से उनका निषेध होना पक्का ही था। अगर अपनी बदतमीज़ियों का उन्हें कोई भुगतान नहीं करना पड़ता तो कोई अन्य लोगों को किस मुँह से बदतमीज़ी से रोकेगा?
  • अगर अनुनाद जी को नहीं निषेध किया जाता तो कोई उनपर भी हमले करने को आज़ाद है - मैं भी। मैं आगे चलकर निषेधित हुआ तो वे भी होंगे। हमारे प्रबंधक निति-पसंद होते तो उनका सहारा होता। किसी भी नियम के न होने पर इस से बड़ी हिन्दी विकी की सेवा मैं नहीं सोच सकता। बात उनके क्षमा मांगने की नहीं है। बात यह है कि वे अपना पक्षपात और बड़े-छोटे व्यक्तिगत हमले बंद नहीं करेंगे। उन्हें अभी भी नहीं लगता कि उन्होंने कुछ भी ग़लत किया है।

तीन कार्य फ़ौरन कीजिये और अपनी गरिमा बचाईए -

  • सारे छद्म खाते बंद करें
  • अनुनाद जी पर कार्यवाई करें - उनकी तरफ़ से माफ़ी माँगना कोई कार्यवाई नहीं है, चाहे उन्होंने हिन्दी के एक लाख लेख स्वयं ही लिखे हों - उनका निषेध होना चाहिए
  • अगर मैंने भी उल्लंघन किया है, मुझ पर भी ज़रूर कार्यवाई करें - भले ही निषेध कर दें

इस सदस्य समाज में ज़हर घुल रहा है और घुलता रहेगा अगर आप नीतिसंगत काम नहीं करेंगे। अपने कर्तव्य का पालन करें। --Hunnjazal (वार्ता) 05:25, 21 जुलाई 2012 (UTC)

चेतावनी[संपादित करें]

तीन छद्म खातों को अवरोधित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। जगदीश और आलोचक के संबंध में उपयोगकर्ता जाँच रपट पढ़कर भी मैं आश्वस्त नहीं हूँ। साथ ही ये खाते इतने पुराने और सक्रीय हैं कि इनके संबंध में ऐसा निर्णय तत्काल लेना मुझे ठीक नहीं लगा है। हाँ मयूर की छद्म खाता प्रयोग न करने की अंतिम चेतावनी देने की कार्यवाई उचित है। अनुनाद जी के संबंध में भी मैने ऊपर लिखा है कि चर्चा की प्रतिक्रियाओं में बिल और हंजजल और अनुनाद जी द्वारा समान रूप से गरिमा का खयाल नहीं रखा गया है। इसलिए वर्तमान चर्चाओं के बाद भी यदि अनुनाद जी ऐसा करते हैं तो मैं प्रतिबंध का समर्थन करुँगा। पिछले तीन दिनों की चर्चा से स्पष्ट है कि अनुनाद जी ने तो संयम दिखाया है किंतु हंजजल जी सभी के आग्रह को सिरे से नकारते हुए असंयत भाषा का प्रयोग लगातार कर रहे हैं। इसलिए बाध्य होकर उन्हें ऐसा न करने की प्रथम चेतावनी दे रहा हूँ। आशा है कि आगे किसी चेतावनी की जरूरत नहीं पड़ेगी। तथा हम छद्म खातों को छोड़कर अन्य खातों को अवरोधित करने के बजाय सामग्री निर्माण पर खुद को केंद्रित कर सकेंगें। अनिरुद्ध  वार्ता  23:43, 21 जुलाई 2012 (UTC)

अनिरुद्ध जी चार छद्म खातों को अवरोधित करने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है, और चर्चा भी खाते बन्द करने के निर्णय से सामाप्त हो गई। देखें।--भवानी गौतम (वार्ता) 02:24, 22 जुलाई 2012 (UTC)
अनिरुद्ध जी, सर्वप्रथम आपसे यह निवेदन करूँगा कि बिना वज़ह हुन्नजज़ल जी और मेरे द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाली भाषा को अनुनाद जी की अपमानजनक व व्यकितगत हमले करने वाली भाषा से तुलना न करें। हाँ मैं मानता हूँ कि कुछ समय मैने अपना आपा खोया था और शायद जिस प्रकार की वाणी का प्रयोग करना चाहिए था वैसा नहीं कर पाया, परन्तु इसके पीछे अनुनाद जी का किसी की बात को न मानना, सरल नियमों तक को अस्वीकार करना, सदस्यों के नाम बिगाड़ना, नस्लीय टिप्पणियाँ देना, आदि शामिल हैं। परन्तु फ़िर भी मैं अपने व्यवहार के लिए सार्वजनिक तौर पर क्षमा माँगता हूँ। परन्तु अनुनाद जी ने तो माफ़ी माँगना तो दूर सिद्धार्थ द्वारा लाए गए अनुकूल प्रस्ताव तक को मानने से इनकार कर दिया और फ़िर अपने व्यकितगत हमले करने और विकिपीडिया समाज की मर्यादा को नुकसान पहुँचाने पर आ गए, ये सब बस केवल इतना दिखाता है कि अनुनाद जी अब विकिपीडिया के सभ्य समाज के बीच कार्य करने में अक्षम हैं। यही कारण है की पाँच सदस्यों ने उनके निषेध प्रस्ताव का स्वागत करा है। आप खुद अगर निष्पक्षता से विचार करेंगे तो आपको भी समस्या की गम्भीरता समझ आएँगी। अगर इंसान गलती करके और उस गलती को स्वीकार करके आगे बढ़ जाएँ तो सभी उसकी गलतियों को भूल के उसका सहयोग देते हैं परन्तु अगर इंसान यही मानने से इनकार कर दे कि उसने कोई गलती की ही नहीं तो इसका अर्थ है कि उसे झूठा अहंकार हो गया है और अब वह सही-गलत में अंतर नहीं कर सकता। आप हमेशा सामग्री निर्माण पर ही जोर देते है, परन्तु जो सबसे महत्वपूर्ण है, समुदाय निर्माण, उस को भूल जाते हैं। किसी ज्ञानकोष का विकास जब ही संभव है जब वहाँ संपादक होंगे और यह बात कई रिपोर्ट में भी सामने आई है कि हिन्दी विकिपीडिया की लेख बढाने की अंधाधुंध निति के कारण यहाँ सक्रीय सदस्यों की संख्या में कमी आई है (इसके लिए आप विकिपीडिया ब्लॉग पढ़ सकते हैं) और उस मंच पर शायद ही कोई नया सदस्य आना पसंद करेगा जहाँ उसे उसके पहले दिन ही "शिखंडी" और "महारानी के सच्चे सेवक" जैसी अपमानजनक कटाक्ष का सामना करना पड़े। इसलिए कहता हूँ समाज को विकसित करें, लेख तो बनते चले जाएँगे।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 03:12, 22 जुलाई 2012 (UTC)
  • आप हमेशा सामग्री निर्माण पर ही जोर देते है, परन्तु जो सबसे महत्वपूर्ण है, समुदाय निर्माण, उस को भूल जाते हैं।
  • यह बात कई रिपोर्ट में भी सामने आई है कि हिन्दी विकिपीडिया की लेख बढाने की अंधाधुंध निति के कारण यहाँ सक्रीय सदस्यों की संख्या में कमी आई है
  • उस मंच पर शायद ही कोई नया सदस्य आना पसंद करेगा जहाँ उसे उसके पहले दिन ही "शिखंडी" और "महारानी के सच्चे सेवक" जैसी अपमानजनक कटाक्ष का सामना करना पड़े।

बिल जी। क्षमा माँगने की इस भाषा के लिए भी आपको सावधान कर रहा हूँ। इसे बदलिए जिसमें एक साथ तीन विकि प्रबंधों पर अनावश्यक टिप्पणी की गई है। मयूर से निवेदन है कि यह स्पष्ट करें कि उन्होंने कैसे निश्चय किया कि आलोचक और जगदिश व्योम एक ही संगणक से कार्य करने वाले दो मित्र नहीं हैं। संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में मैं अनावरुद्ध करने के विकल्प का प्रयोग करुँगा। अनिरुद्ध  वार्ता  05:22, 22 जुलाई 2012 (UTC)

अनिरुद्ध जी, चेक युजर टेस्ट यह सिद्ध करता है कि यह समस्त खाते Dr.jagdish, आलोचक, Froklin, Sugandha, William bal klinton एक ही व्यक्ति के है इस टेस्ट के अन्तर्गत यह पाया गया है कि
  1. पाँचों खाते एक ही कम्पयूटर, ब्राउजर और आई पी से थे।
  2. इसके साथ यह समस्त खाते एक साथ सक्रिय हुए थे।
  3. सभी खातो का डक टेस्ट(DUCKTEST) समान पाया गया अर्थात सभी पाँचों खातों के मालिक के लेखन में हिन्दी लेखन में बहुत समानता मिली है।
  4. समान लेखन रुचि
किसी भी विकि में केवल चेक युजर के परिणाम के अधार पर ही समस्त आरोपी सदस्यों को अवरोधित किया जाता है और मूल अकाउन्ट को एक अन्तिम चेतावनी अवश्य दे दी जाती है जो मैनें दे दी है। आलोचक एवं जगदीश व्योम लगभग हमेशा एक साथ ही सक्रिय रहे है और दोनो की लेखन रुचियाँ भी समान थी। चेक युजर के बाद भी यदि इतनी समानता मिले तो सदस्य के समस्त छदम खातों को अवरोधित कर दिया जाता है। अंग्रेजी विकि पर तो केवल चेक युजर के परिणाम के आधार पर सदस्यों को अवरोधित कर दिया जाता है पर यहाँ मैनें, हुंजजाल, बिल ने काफि शोध कर कुछ और समानताएं भी पायी है। आलोचक के बारे में हुंजजाल भी अपनी प्रतिक्रिया दे चुके कि

आलोचक महोदय को मैं नहीं जानता लेकिन ऐसे उदाहरण आपको ज़रूर मिलेंगे जिनमें उन्होने आकर किसी चर्चा में एक तरफ़ का पलड़ा अधिक भारी दिखाने की चेष्टा की है। इन्हीं कारणों से छिद्म खाते वर्जित किये जाते हैं। मैं अंतर्राष्ट्रीय अंकों के पक्ष में था लेकिन जब मैंने देखा कि बहुत से सदस्य नागरी अंक रखना चाहते हैं तो उनकी संवेदनाओं को ध्यान में रखकर मैंने एक बार फिर नागरी अंकों को हमेशा प्रयोग में लाना शुरू कर दिया और अब तक लाता हूँ। यदि कोई उसमे छिद्म खाते बनाकर दिखाता कि ३० लोग अंतर्राष्ट्रीय अंकों के पक्ष में हैं और ५ उसके विरुद्ध हैं तो इस से विकी सहमती प्रक्रिया प्रदूषित होती है। ध्यान दें कि यह उदाहरण जो मुझे मिला उसमें 'आलोचक' उन्ही 'डा० व्योम' की बढ़ाई कर रहें हैं जो जांच के अनुसार आलोचक ही हैं (एक ही आई पी से आते हैं, एक ही मशीन का प्रयोग करते हैं और उनके उस मशीन के प्रयोग के pattern से लगता है कि एक ही व्यक्ति है)। इन चीज़ों में देखा गया है कि व्यक्ति यह एक बार न कर के बार-बार करता है। यही pattern यहाँ भी दिखता है - चिह्न हैं कि इन्होनें एक नहीं ५-५ खाते बनाए हुए हैं। अगर इनको इस दुरूपयोग के बाद भी क्षमा है तो दूसरों की क्या ग़लती है? उन्हें भी छूट मिलनी चाहिए। इस से भी एक नए प्रकार का संतुलन बनेगा, चाहे वह एक 'जंगली संतुलन' ही हो।

इतना सब कुछ होने पर भी यदि हम यह नहीं रोकेंगे तो हिन्दी विकि का माहौल अत्यंत खराब हो सकता है।--Mayur (talk•Email) 12:12, 22 जुलाई 2012 (UTC)

रजा परवेज़ अशरफ़ के नाम से नया पन्ना[संपादित करें]

मैंने आज ही पाकिस्तान के वर्तमान प्रधान मन्त्री रजा परवेज़ अशरफ़ के नाम से एक नया पन्ना बनाया था। उसमें श्रेणी डालने के लिये खोज करने लगा तो ज्ञात हुआ कि हिन्दी विकीपीडिया पर राजा परवेज़ अशरफ के नाम से एक पन्ना २००९ से चला आ रहा है जिसे अपडेट नहीं किया गया। उस समय सम्भवत: वे केन्द्रीय विधान सभा के सदस्य रहे होंगे। मेरी समझ से अब उस पृष्ठ को या तो हटा देना चाहिये या कुछ संशोधन के साथ ("राजा" के स्थान पर "रजा" करके) इसमें विलीन कर देना चाहिये। प्रबन्धकों की इस बारे में क्या राय है क्या कोई बता सकेगा? डॉ०क्रान्त एम०एल०वर्मा (वार्ता) 06:30, 22 जुलाई 2012 (UTC)

प्रिय अजीत कुमार तिवारी जी! कृपा करके इस लेख में आप बार-बार रजा को राजा (किंग) मत बनाइये। वर्तनी की दृष्टि से उर्दू में इसे "रे+अलिफ+जीम+हे" ही लिखा जाता है परन्तु चूँकि यह हिन्दी विकीपीडिया है अत: हिन्दी में इसे रज: (विसर्ग हटाने पर) रजा ही लिखना मेरी दृष्टि से उचित होगा। और अधिक स्पष्टीकरण के लिये उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा प्रकाशित उर्दू हिन्दी शब्दकोश देख सकते हैं। धन्यवादडॉ०क्रान्त एम०एल०वर्मा (वार्ता) 08:01, 22 जुलाई 2012 (UTC)
क्या यह चर्चा यहाँ करनी ज़रूरी थी? लेख के वार्ता पृष्ठ पर क्या समस्या थी? आपके दृष्टिकोण से किसी का नाम नहीं बदल जाएगा। अलिफ 'आ' की मात्रा के लिए होता है। आप बार-बार रजा को राजा (किंग) मत बनाइये, क्या मतलब है इसका? अन्यथा नहीं ले रहा हूँ, फिर भी मर्यादा का ध्यान रखा जाय। मेरे बनाने से तो वो 'राजा' बन नहीं जाएंगे, आप बेशक अपनी 'रजा' पूरी कर लें। ख़ैर, आप कुछ बेहतर ही कर रहे हैं। उसी पर ध्यान केंद्रित करें। धन्यवाद। -- अजीत कुमार तिवारी वार्ता 08:30, 22 जुलाई 2012 (UTC)
मेरे मित्र! मेरी इच्छा-अनिच्छा का कोई प्रश्न ही नहीं है। न ही मैने कोई मर्यादा भंग की है। "रजा परवेज़ अशरफ़" शब्द का हिन्दी में अर्थ है "प्रतिष्ठित कुल की इच्छा"। शायद यही सोचकर उनके माता पिता ने यह नाम रखा होगा। मैंने इस शब्द का व्युत्पत्ति सहित अर्थ मुहम्मद मुस्तफ़ा खाँ 'मद्दाह' के उर्दू-हिन्दी शब्दकोश (पृष्ठ ५६६, ३७१ व २८) से जाँच-परख कर ही रजा परवेज़ अशरफ़ के नाम से नया पन्ना बनाया था इसके अतिरिक्त मेरी कोई दूसरी मंशा नहीं थी। रही राजा बनने की बात, सो पाकिस्तान के वजीरे-आज़म बनकर अशरफ़ जी अपने खानदान की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरे उतरे हैं। मुझे उम्मीद है मेरी बात को आप या कोई भी अन्यथा नहीं लेगा बस इतना-सा निवेदन मैं अवश्य करूँगा। आपका ही- डॉ०क्रान्त एम०एल०वर्मा (वार्ता) 09:02, 22 जुलाई 2012 (UTC)

Copyvio image on main page[संपादित करें]

I'm cross-posting this message due to the urgency that the matter demands. Ashish has, perhaps by mistake, linked a most certainly copyvio image File:Rajesh Khanna Actor.jpg to be displayed on the main page of hi.wiki. Any sysop should undo it asap. Regards, लवी सिंघल (वार्ता) 15:35, 22 जुलाई 2012 (UTC)

चेतावनी - २[संपादित करें]

अनिरुद्ध जी, आपके व्यक्तव्य में कुछ गहरी ग़लतियाँ हैं -

  • 'सभी ने' मुझ से कुछ भी करने को नहीं कहा है। केवल आप और आशीष जी ने ही मुझसे रुकने को कहा है - कुल मिलाकर केवल दो लोग। आपका मुझे रुकाने का तर्क एक स्तम्भ पर आधारित है - 'अनुनाद जी विशेष हैं, उन्हें विशेष छूट दी जाएगी, वे जमकर गाली-गलोच भी करें तो उनको कुछ कहना एक अज़ीम ऊँचे व्यक्ति का अपमान करना है'। इसके विपरीत, पांच सदस्यों ने मिलकर अनुनाद जी को निषेध करने के प्रशन पर अपना समर्थन दिया है। मयूर जी केवल हिन्दी विकी सदस्य समाज को दो गुटों में बंटने से रोकना चाहते हैं - उनके लिए मेरे मन में केवल आदर-ही-आदर है।
  • आप मुझे किस आधार पर चेतावनी दे रहें हैं? कृपया लागू नियम दिखाएँ और उसी आधार पर मैं आपको दिखाऊंगा कि हम सब अनुनाद जी को निषेध करने के लिए भी बंधे हुए हैं। यदि आप नियम नहीं दिखाते, तो फिर आपका कुछ कहना या न कहना केवल एक व्यक्तिगत मत है। और अगर यहाँ मनमानी का राज है तो फिर प्राकृतिक है कि मेरी मनमानी आपसे भी तीखी होगी - जैसा कि 'If you have facts, show me facts. If all we have are opinions, then mine wins'। मैं यह भी कहूँगा कि कुल मिलाकर मुझे यह अनुनाद जी और छद्म खातों को नीति को अनदेखा करते हुए बचाने का प्रयास प्रतीत होता है। इसलिए मैं सोच-समझकर आपको भी प्रथम चेतावनी देता हूँ कि भविष्य में मुझे या किसी भी अन्य सदस्य को धमकाएँ न और केवल स्पष्ट नीति दिखलाएँ। यह कहते हुए मुझे बहुत दुःख हो रहा है क्योंकि आपने मेरा काफ़ी साथ दिया है और मैंने आपका भी - आप ही के कहने पर नागरी अंक मैंने अपनाए, आप ही ने मुझे तारों के लेखों में संस्कृत नामों को खोजने के लिए प्रेरित किया। लेकिन आप शायद अनुनाद जी से वर्षों के बाद इतने करीब हो गए हैं कि देख नहीं पा रहे कि वह अब हिन्दी विकी को कितना गहरा नुकसान पहुँचा रहें हैं।
  • मेरा अनुनाद जी से कोई भी वैर नहीं था। मैंने उनसे हमेशा नरमी से बात करी - जब वह मुझे चार-पाँच गालियाँ दे चुके थे, तब भी। लेकिन फिर उनके अपशब्द तीखे होते चले गए। मेरा उनपर कोई विशेष पक्ष नहीं। मैं उनसे कोई द्वेष नहीं रखता। केवल उनका व्यवहार बहुत ही ख़तरनाक है। पहले उसमें गहरे जातीयता (racism) के तत्व हैं - ब्रिटेन, अमेरिका, पाकिस्तान, इत्यादि के विरूद्ध द्वेष स्पष्ट है। आप देखें कि उन्होंने नुक्तों के प्रयोग और आतंकवादी होने की दो चीज़ों को एक ही धारा में जोड़ा है। दूसरा वह पक्ष लेने में कोई झिझक नहीं करते - मनमोहन सिंह जी का उदाहरण तो है ही लेकिन और भी हैं। इसमें उनकी राष्ट्रीयता की भावना बहुत सक्रीय है और जो उन्हें भारत या हिन्दी को ठेस पहुंचता हुआ लगता है (चाहे वह हो या नहीं) वे उसमें सेंसर और प्रोपोगंडा बोर्ड बनकर बैठ जाते हैं। तीसरा उनमें अलग मत रखने वालों की तरफ़ हिंसात्मक रवैया है। यह किसी मामूली चीज़ पर हो सकता है (जैसे वे भवानी गौतम के साथ विषय भूलकर श्लोक पर लड़ पड़े) या किसी बड़ी चीज़ पर (जैसे कि ब्रिटेन पर लेख बनाने वालों को 'महारानी के सेवक' - queen's servants - कह देना)। यह तीनों तत्व मिलकर उन्हें यहाँ पर एक बड़ी अड़चन बना रहें हैं। मेरा मत है कि वह हिन्दी विकी के विकास के लिए हानिकारक हैं। racism, non-neutrality, soapbox, battleground, textbook, personal attacks - he has broken every one of them, repeatedly, in the face of warnings! किसी भी अच्छी विकी पर वह नहीं टिक पाते। यहाँ उनको केवल दो या तीन प्रबंधकों का 'व्यक्तिगत स्नेह' बचाए हुए है।
  • शायद अनुनाद जी को एक मौक़ा और देने का प्रस्ताव बन सके लेकिन उसमें (१) उनको स्वयं कुछ वायदे करने होंगे और (२) उसी प्रबंधक गुट को जिनका नाम मैंने छिद्म खाते वाले (अब खारिज) प्रस्ताव में दिया था एकमत होकर कहना होगा कि अगर वह इनमें से किसी एक (racism, non-neutrality, soapbox, battleground, textbook, personal attacks) का किन्ही तीन प्रबंधकों के मत में केवल एक बार भी उल्लंघन करें, तो उन्हें बिना चर्चा के निषेध किया जाएगा। ऐसा कुछ नहीं हो रहा जो केवल तब ही हो सकता है जब यहाँ अराजकता हो। मुझे उनसे माफ़ी-क्षमा नहीं चाहिए - मेरी सहनशक्ति उनसे कोसो आगे है वरना इतनी देर उनकी गालियाँ बिना जवाब दिया सहता न रहता (और यही वजह है कि अगर गाली-गलोच पर कोई रोक है ही नहीं तो मेरी सीटी बजने से कहीं पहले उनकी बस हो जाएगी)। सवाल मेरी संवेदनाओं का नहीं है - सवाल हिन्दी विकी में उनके करे नुकसान का है। आने वाले संपादकों को निष्पक्ष और गाली-मुक्त वातावरण देने के लिए मुझे यह करना ही होगा। मेरे हज़ारों लेख बनने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। लेख मैं केवल अकेला बनाऊँगा लेकिन यह कर के मैं दर्ज़नों संपादकों के लिए वातावरण खुला कर दूंगा, चाहे स्वयं आगे चलकर मेरा निषेध ही क्यों न हो। कोई किसी का खून कर के कुछ देर के लिए ग़ायब हो जाए तो क्या यह कहेंगे कि 'देखो, वह संयम बरत रहा है'? आप इसे एक मामूली तू-तू मैं-मैं के विवाद के स्तर पर दबाना चाह रहे हैं। यह मूल मुद्दे को ही समझने में एक ग़लती है।
  • छद्म खातों का मसला या तो आप तकनीकी स्तर पर समझ नहीं पा रहे अन्यथा किसी कारण से (जो संभवतः शुभ-नियत पर ही आधारित है) उसमें जगदीश जी को शरण देना चाह रहें हैं। अगर कोई अपराधी बोले कि 'हाँ, माना कि खून करने वाला मेरी शकल, मेरे कपड़ों, मेरी आवाज़, मेरे तौर-तरीकों वाला ही कोई था, जो मेरे ही घर में भागकर छुपा और मेरी ही गाड़ी लेकर घूम रहा था - लेकिन मैं नहीं था बल्कि कोई और था' - तो उसे पुलिस के अंदर का कोई सहायक बचा ले तो बचा ले, वरना उसका धरा जाना निश्चित है। अगर आप तकनीकी चीज़ें समझ नहीं पा रहे, तो इस मामले में न उलझें। अगर समझ पा रहें हैं तो जगदीश जो को बंद न करने का क्या कारण हो सकता है? यह 'वह मुझे प्रिय हैं' का तर्क मान्य नहीं है।
  • मैं आपको इसपर भी चेतावनी दे रहा हूँ - एक पक्ष लेकर न चलें और इस मामले में मुँह बंद करवाने की चेष्टा न करें। यहाँ कोई शाही (royal) नहीं है। मैंने जो यह अभी लिखा है उसमें एक भी अपशब्द नहीं है। अगर होता भी तो आपके अनुसार यह निति-उल्लंघन नहीं होता - अगर ग़लत कर रहा हूँ तो नीति दिखाएँ। बिना नीति के अपने समय-समय पर भावनाओं के अनुसार बदलते नियम बनाकर आप लोगों को धमका नहीं सकते और मुझे आपका व्यकव्य बिलकुल ऐसा ही प्रतीत हुआ।

मयूर जी समझदार हैं और पिरिक जीत से बचना समझते हैं। वह समय की मांग समझते हैं। उनका विशेष पक्ष नहीं है। इन्ही कारणों से मैं उनकी इज्ज़त करता हूँ। वह भी आपको समझा रहें हैं कि पानी सर से ऊपर निकल चुका है। उनकी बात सुने। हम में आपस में असहमति है। आप आये और आपने घोषणा करी के 'ऐसा-ऐसा होगा' और फिर सीधे मुझे धमकाया। आपका चुना यह रास्ता इतना ग़लत है कि मैं आपको बयान भी नहीं कर सकता। आग में मिटटी का तेल। बिल जी आपसे नरमी से बात कर रहें हैं। मैं भी कर रहा हूँ - केवल अनुनाद जी को ही उनके बिना किसी परिणाम के मुझपर दर्ज़नों बाण मारने के बाद ही मैंने दो-एक चीज़ें कहीं हैं। आप भी नरम रहें हो अच्छा होगा। वरना यह सदस्य समाज फटकर दो-तीन हिस्सों में हमेशा के लिए बंटने की कागार पर है। --Hunnjazal (वार्ता) 19:38, 22 जुलाई 2012 (UTC)

मैं ऊपर अपने लिखे को अब चार बार पढ़ा है। इसमें मुझे एक भी असंयत वाक्य नहीं दिख रहा और न ही इसमें कुछ अपमानजनक दिख रहा है। अगर आपको कुछ लगे तो ज़रूर बताईएगा और मैं पहले से ही क्षमा मांगे रखता हूँ। आप भी कृपया नीति और नम्रता के दायरे रहियेगा। अगर मुझे लेखों को ही ख़तरा नहीं लग रहा होता तो क्या आपको लगता है कि मैंने यह प्रक्रिया शुरू भी करनी थी? किस विवाद में आपने मुझे कभी अग्रसर देखा है? आधे समय तो मैं लेख लिखने में इतना व्यस्त होता हूँ कि सीधी मुझसे करी वार्ता का जवाब देने में भी कई दिन निकल जाते हैं! लेकिन यह मामले इतने संगीन हैं कि इनपर चुप रहना हमारी विकी के लिए बहुत हानिकारक है। --Hunnjazal (वार्ता) 20:07, 22 जुलाई 2012 (UTC)

डेढ़ दिन से इसपर बिलकुल चुप्पी है। मैं भी कुछ देर के लिए इस विषय पर चुप हो रहा हूँ। वैसे भी मुझे इस सब से ज़्यादा लेख बनाना पसंद है। लेकिन यह मामले सुलझे नहीं हैं और आँखें मीचने से चले नहीं जाएँगे। यह ऐसी स्थिति है जिसे भड़कने के लिए एक चिंगारी मात्र की ज़रुरत है। अनुनाद जी और छद्म खातों को एक तरफ़ छोड़िये - अगर नीति-नियम ही नहीं हैं तो शांति अस्थाई ही हो सकती है। --Hunnjazal (वार्ता) 03:15, 24 जुलाई 2012 (UTC)

Hunnjazal की बातों पर ध्यान देना चाहिए, इनका हिन्दी विकि में बहुत बड़ा योगदान रहा है। विज्ञान संबन्धित लेखों के साथ साथ हर विषय में इन्हों ने लिखा है। खगोलशास्त्र में तो प्राय सभी लेखों पर कार्य करने साथ इस विषय के हजारों लेखों का निर्माण किया है। हिंदी विकि को निष्पक्षता के साथ सुचारु रुप से संचालन के लिए (अहंता को छोड़कर) सही निर्णय लिया जाय। इनके द्वारा रखे गए इस प्रस्ताव को समर्थन करने मे कोई हानि नहीं है, भविष्य में छद्म खाते बनाने का कोई साहस नहीं करेगा।भवानी गौतम (वार्ता) 03:52, 24 जुलाई 2012 (UTC)

मेरे मन में आमतौर पर विकि सदस्यों के प्रति और खासतौर पर विकि प्रबंधकों के प्रति बहुत सम्मान का भाव है। ::जिसे हिंदी विकि के योग्य प्रबंधक की चेतावनी मिले उसे कम-से-कम ६ माह के लिए तो प्रतिबंधित हो ही जाना चाहिए। ऐसी कोइ नीति नहीं है किंतु फिर भी अनिरुद्ध जी ऐसा करेंगें इसका भरोसा है। कोइ प्रबंधक नीति न समझने वाले, विकि को गुटों में बाँटने की ओर ले जाने वाले, गलत सदस्यों की किसी आत्मियता के कारण रक्षा करने वाले तथा सही सदस्यों पर किसी खास भावना के कारण व्यक्तिगत हमला करने वाले सदस्यों के लिए इससे उपयुक्त सजा का प्रस्ताव करें तो मेरा समर्थन होगा। अनिरुद्ध  वार्ता  14:55, 24 जुलाई 2012 (UTC)

कठपुतली निरोधक निति[संपादित करें]

विकिपीडिया:कठपुतली पर नया ड्राफ़्ट लाया गया है। इसे लागू करने के लिए सम्बंधित प्रस्ताव विकिपीडिया वार्ता:कठपुतली पर है। कृपया अपनी प्रतिक्रिया उचित वार्ता पृष्ठ पर दें, धन्यवाद।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 06:02, 24 जुलाई 2012 (UTC)

GLAM Crafts Museum blog post[संपादित करें]

Dear all, Here's a blog post cum report on India's first GLAM initiative at the National Crafts Museum! The program started out in English but was taken forward in Hindi to suit the staff members who have been enthusiastically creating articles and editing in Hindi Wikipedia! The program has been a bold step to prove that GLAM can very well happen in India - with its own design and structure and it has also given the Hindi community a precious gift of 6 new editors.

A special thanks to User: Roboture who has been with us in each and every meet and helped train editors, User:Yann for his first set of invaluable Commons contributions and to User:Aniruddhajnu and User:Siddhartha Ghai for coming down to the museum to inspire the staff members.

Hope this gives more courage to any community that wants to start a similar project! Would love to provide any help needed. Noopur28 (वार्ता) 06:23, 25 जुलाई 2012 (UTC)

खगोलशास्त्र[संपादित करें]

यहाँ पर अपना मन्तव्य रखें।भवानी गौतम (वार्ता) 16:19, 25 जुलाई 2012 (UTC)

ताजमहल का निर्वाचन - संबंधी[संपादित करें]

मैंने ताजमहल लेख को निर्वाचन हेतु प्रस्तावित किया है। वैसे यह लेख काफ़ी पहले बना था, किन्तु ताजमहल उससे भी पूर्व बना था... यानि इसमें आवश्यक/वांछित सुधार संभव/अपेक्षित हैं। अतः सदस्यों की राय मिले, जिससे काफ़ी समय से निर्वाचन प्रक्रिया को मिले विराम को हटाया जा सके।

--ये सदस्य हिन्दी विकिपीडिया के प्रबंधक है।प्रशा:आशीष भटनागरवार्ता 06:10, 26 जुलाई 2012 (UTC)

आज का आलेख[संपादित करें]

पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा[संपादित करें]

नमस्कार।

मैं सभी सदस्यों को अवगत कराना चाहूँगा कि पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा प्रणाली का सुगठन सम्पूर्ण हो गया है और प्रणाली प्रयोग में लानी शुरू कर दी गई है। अतः, सभी सदस्यों से अनुरोध है कि समय मिलने पर निम्न श्रेणियाँ देख उपयुक्त चर्चाओं में भाग लें।

अधिक जानकारी के लिये सदस्य वि:हहेच देख सकते हैं। सदस्य इस प्रणाली में नामांकन करने के लिये ट्विंकल का प्रयोग भी कर सकते हैं। धन्यवाद--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 21:20, 26 जुलाई 2012 (UTC)

चित्रों को हटाने सम्बन्धित नीतियाँ[संपादित करें]

मैं हिन्दी विकि से सभी सदस्यों का ध्यान इस विषय पर केन्द्रित करना चाहता हूँ। चित्र अपलोड करने की नीतियों की सबसे भ्रामक बात यह है कि इसमें यह पता नहीं चलता की कौन से चित्र को विकिपीडिया पर रहने दिया जाएगा और किसे नहीं। जैसे मैंने अभी 2012 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में इन खेलों का लोगो अपलोड किया है और लवी सिंघल द्वारा एक घण्टे से भी कम समय में मुझे यह सन्देश मेरे वार्ता पृष्ठ पर दे दिया गया है कि इस चित्र को हटा दिया जएगा और कारण दिया गया है

फ़4 • ग़ैर मुक्त उचित उपयोग उपयोग फ़ाइल जिसपर कोई उचित उपयोग औचित्य न दिया हो

मैंने इस चित्र को अपलोड करते समय सब जानकारी उपलब्ध कराई है कि यह चित्र मैंने विकिपीडिया से ही लिया है। इससे पहले मैंने अंग्रेज़ी विकि से यही चित्र यहाँ डालने का प्रयास किया था लेकिन वह लाल कड़ी दिखाने लगा जिसके कारण मैंने वह चित्र अपने कम्प्यूटर पर डाउनलोड किया और उसे पीएनजी इमेज बनाकर अपलोड किया। अब मेरी यह समझ नहीं आ रहा कि इससे कैसे कॉपीराइट उलंघन होगा। क्या कोई अनुभवी सदस्य सरल भाषा में मुझे यह समझाएगा कि हिन्दी विकि पर चित्र अपलोड करने की नीति क्या है और वह कौन सी परिस्थितियाँ हैं जिनमें सदस्यों द्वारा अपलोड चित्र को हटाया नहीं जाएगा? धन्यवाद। रोहित रावत (वार्ता) 18:53, 27 जुलाई 2012 (UTC)

रोहित जी, आपने यह तो बताया था कि चित्र को अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर से लिया गया है परन्तु किसी गैर-मुक्त फ़ाइल के लिए यह सब पर्याप्त नहीं है। चित्र के वर्णन में रचयिता की जगह आपका नाम था जो गलत है, आपने कोई लाईसेंस नहीं दिया था जो हमेशा हर चित्र के साथ अनिवार्य होता है, आपको स्रोत की जगह उसका लिंक भी देना होता है (जैसे इस प्रकरण में आपको अंग्रेज़ी विकिपीडिया का लिंक देना था जहाँ से आपने यह चित्र लिया है)।
अगर कोई फ़ाइल गैर-मुक्त है और उसका प्रयोग आपको किसी लेख में करना है तो आपको निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना होता है:
  1. क्या चित्र के विषय को केवल शब्दों से समझाया जा सकता है? अगर हाँ, तो चित्र को अपलोड नहीं किया जा सकता।
  2. हमेशा ऐसी फ़ाइल अपलोड करते वक्त {{Non-free use rationale}} साँचे का प्रयोग हमेशा करें।
  3. जब आप फ़ाइल को अपलोड करना चाहते हैं तो विकिपीडिया:अपलोड के विभिन्न विकल्पों में सबसे उचित को चुने। जैसे इस परिस्थिति में आपको दिए गए पृष्ठ के "यह किसी संगठन, ब्रैंड, उत्पाद (प्रोडक्ट), सार्वजनिक सुविधा, या अन्य वस्तु का लोगो है" विकल्प को चुनना था।
  4. विकल्प को चुनने के पश्चात बस आपको माँगी गई जानकारी भरनी होती हैं।
इस चित्र में मैंने {{Non-free use rationale}} साँचा और लाईसेंसलगा दिया है, मतलब अब इसका प्रयोग विकिपीडिया पर हो सकता है।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 19:22, 27 जुलाई 2012 (UTC)
आपके प्रश्न के संबंध में अधिक जानकारी:
विकिपीडिया पर दो प्रकार के चित्रों का प्रयोग होता है:
  • पहले, जो किसी ऐसे मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत उपलब्ध हैं जिसमें चित्र का कमर्शियल उपयोग और डेरिवेटिव वर्क बनाने की आज़ादी हो (जैसे Creative Commons Attribution Share Alike)। सार्वजनिक चित्र (public domain images) भी इसमें आती हैं।
  • दूसरी श्रेणी है ग़ैर-मुक्त चित्रों की। इसमें ऐसे चित्र आते हैं जो यद्यपि कॉपीराइट से मुक्त नहीं हैं, परंतु उनका उपयोग संयुक्त राज्य अमेरिका के कानून में उचित उपयोग (fair use) में आता है। इस प्रकार में फ़िल्मों के पोस्टर, कंपनियों के अथवा प्रोडक्टों के लोगो, कॉपीराइट सुरक्षित सॉफ़्टवेयर के स्क्रीनशॉट इत्यादि आते हैं।
पहली श्रेणी के चित्रों को विकिपीडिया पर बिना किसी परेशानी के डाला जा सकता है (बलकी इन्हें तो विकिमीडिया कॉमन्स पर डाला जाना चाहिये, ताकि अन्य विकिमीडिया परियोजनाएँ भी इनका प्रयोग कर सकें)
दूसरी श्रेणी में जो चित्र आते हैं उन्हें कॉमन्स पर नहीं डाला जा सकता है, और कुछ शर्तों के साथ हिन्दी विकिपीडिया पर डाला जा सकता है। इस संबंध में विकिमीडिया फ़ाउन्डेशन ने यह रेज़ोल्यूशन पास किया था। इसके अनुसार फ़ाउन्डेशन द्वारा चलाई जा रही सभी विकियों पर जब भी ग़ैर-मुक्त चित्रों को उचित उपयोग के अंतर्गत डाला जाए तो उनपर एक उचित उपयोग औचित्य (fair use rationale) साथ में डाला जाना चाहिये। इसके तहत सभी परियोजनाओं को एक exemption doctrine policy बनानी थी जिसके अनुसार ही ग़ैर-मुक्त चित्रों का प्रयोग संभव होगा। इस समय हिन्दी विकिपीडिया पर ऐसी कोई नीति स्पष्ट नहीं है। अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर इस संबंध में en:WP:NFCC है। हमें भी ग़ैर-मुक्त चित्रों के संबंध में ऐसी एक स्पष्ट नीति की आवश्यकता है, परंतु उसके अभाव में भी रेज़ोल्यूशन का पालन करने के लिये हमें उचित उपयोग औचित्य सभी ग़ैर-मुक्त चित्रों पर जोड़ने आवश्यक हैं। अभी ऐसे अनेकों ग़ैर-मुक्त चित्र हैं जिनपर कोई उपयोग औचित्य नहीं हैं। हमें उनपर उपयोग औचित्य जोड़ने होंगे, और नए अपलोड हुए चित्रों के लिये हम फ़4 का प्रयोग करना होगा ताकि हम जल्द-से-जल्द हिन्दी विकिपीडिया पर इस रेज़ोल्यूशन का पूर्णतया पालन कर सकें।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 19:37, 27 जुलाई 2012 (UTC)

पुस्तक निर्माता (बुक क्रिएटर) की समस्याएँ[संपादित करें]

हिन्दी विकि में 'मेरा कलेक्शन' नाम से जो 'पुस्तक निर्माता ' उपलब्ध कराया गया है उसमें कुछ समस्याएँ हैं। पहली समस्या यह है कि इसका काउण्टर से शुरू होता है। दूसरी समस्या है कि इसकी सहायता से जब हम कोई लेख अपनी 'पुस्तक' में जोड़ते हैं तो इसका काउण्टर पर ही अटका रहता है, आगे नहीं बढ़ता। तीसरी और सबसे बड़ी समस्या यह है कि यदि पाँच-दस लेखों को मिलाकर एक पुस्तक 'ZIM' फॉर्मट में डाउनलोड कर लेते हैं तो Kiwix नामक जिम-फाइल-रीडर में इस फाइल को खोलते ही कुछ समस्या आती है और किविक्स प्रोग्राम अपने-आप बन्द हो जाता है। यह अन्तिम समस्या बंग्ला विकि के पुस्तक निर्माता के साथ भी है। जबकि अंग्रेजी विकि के 'बुक क्रिएटर' द्वारा कोई पुस्तक बनाकर डाउनलोड करने पर बिलकुल ठीक चलती है। हिन्दी विकि का ZIM फॉर्मट में ५०० मेगाबाइट का जो 'डम्प' अन्यत्र उपलब्ध है वह भी किविक्स प्रोग्राम के साथ बढ़िया से चल रहा है।
इन लक्षणों से लगता है कि हिन्दी विकि और बांग्ला विकि के 'पुस्तक-निर्माता' टूल पुराने हैं। यह भी संभव है कि कोई बहुत छोटी सी समस्या हो। सिद्धार्थ जी कृपया इस उपयोगी औजार को भी शीघ्र ठीक कराएँ। -- अनुनाद सिंहवार्ता 10:12, 28 जुलाई 2012 (UTC)

विकि परियोजनाएँ और सहकार्य[संपादित करें]

हिन्दी विकिपीडिया में बहुत सारी परियोजनाएँ शुरु तो की गईं हैं परंतु उनमें काम न के बराबर है। किसी एक सदस्य के द्वारा शुरु किए गए लेख या कार्य पर कोई दूसरे सदस्य का सहयोग हिंदी विकि में कभी-कभार ही दिखाई देता है। किसी एक सदस्य के लिखे लेख को कोई दूसरा सदस्य सुधारे तो उल्टा देने का काम भी हुआ है। विकिपीडिया का लक्ष्य किसने कितने लिखे और क्या लिखे आदि परखने लिए नही है, मौलिकता परखने के लिए भी नहीं है यह तो मुक्त(स्वतन्त्र) ज्ञान कोष है जो कोई भी गूडविल से संपादन कर सकता है। जो ही हुआ उसे अब छोड़कर, मेरा सभी से आग्रह है पुरानी बातों भूलाकर और सौहार्दता की कमी को पूरा करते हुए सहकार्य से सभी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाए। भवानी गौतम (वार्ता) 00:48, 29 जुलाई 2012 (UTC)

आपका विचार सही है भवानी जी. मैं अपने द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने व इससे जुड़े लेखों को सुधारने के लिए प्रयत्नशील हूँ. अक्सर सदस्य परियोजनाओं के सदस्य तो बन जाते है परन्तु लेखों में सुधार नहीं करते. हिन्दी विकी पर बढ़िया संपादकों के बेहद कमी है इसीलिए परियोजनाओं का काम धीमा चलता है. आशूबातकरें 04:30, 30 जुलाई 2012 (UTC)

हिन्दी विकि में जबरन अंग्रेज़ी विकि थोपने का बिल विलियम का प्रयास[संपादित करें]

विकि मित्रों मैं आप लोगों का ध्यान इस ओर खींचना चाहता हूँ। बिल विलियम द्वारा बार-बार 2012 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक पदक तालिका में मेरे द्वारा निर्मित तालिका को हटाकर अंग्रेज़ी विकि की तालिका की नकल उतार कर लगा दी जा रही है और तर्क दिया जा रहा है कि मैं जो तालिका लगा रहा हूँ उसे नेत्रहीन लोग नहीं पढ़ सकते। पहली बात तो यह की नेत्रहीन लोग कुछ नहीं पढ़ सकते हैं और यदी बात रंगान्धता की है तो मेरे द्वारा और बिल विलियम द्वारा लगाई गई तालिका में स्वर्ण, रजत, और कांस्य के लिए जिन रंगो का उपयोग किया जा रहा है वह एकसमान है। तो फिर पता नहीं क्यों बिल विलियम द्वारा यह निर्थक तर्क दिया गया। इसके अतिरिक बिल द्वारा लगाई गई तालिका में बहुत सी कमियाँ है और मैंने जो तालिका बनाई है वह सभी प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराती है। मैं आप लोगों से पूछ्ना चाहता हूँ कि क्या बिल विलियम यहाँ हिन्दी विकि पर अंग्रेज़ी विकि थोपने आए हैं? क्या हम लोगों को हर बात में अंग्रेज़ी विकि की नकल उतारनी होगी। बहुत सी अन्य भाषाओं में भी ओलम्पिक पदक तालिका लगाई गई है लेकिन तमिल विकि को छोड़कर सब ने अपने प्रकार से तालिका लगाई है। तो केवल हम लोग ही क्यों ऐसे हैं कि हर बात में अंग्रेज़ी विकि की नकल उतारे? क्या हम लोग अपने तरीके से तालिका नहीं बना सकते? मैं बिल विलियम से केवल इतना पूछना चाहता हूँ कि रंगान्धता या नेत्रहीनता के अतिरिक्त उनके पास क्या तर्क है मेरे द्वारा निर्मित तालिका को हटाने का? रोहित रावत (वार्ता) 14:49, 29 जुलाई 2012 (UTC)

पहली बात तो यह की नेत्रहीन लोग कुछ नहीं पढ़ सकते हैं, इस वाक्य में आप तथ्यात्मक और नैतिक दोनों रूपों में मूलभूत गलती कर रहे हैं। अगर तालिका नेत्रहीन नहीं पढ़ पा रहे हैं तो यह एक बहुत बड़ी कमी है जिसे आप दूर करने का प्रयास करें। अंग्रेजी विकि की तालिका में यदि यह सुविधा है तो उसे अपनाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। विलियम जी से शिकायत है तो आप अपनी तालिका को इस दृष्टि से भी अंग्रेजी से बेहतर बनाने का प्रयास कीजिए। धन्यवाद। -- अजीत कुमार तिवारी वार्ता 17:03, 29 जुलाई 2012 (UTC)
रोहित जी आपका यह कहना कि "नेत्रहीन लोग कुछ नहीं पढ़ सकते हैं" यह बहुत ही अपमानजनक बात है। कृपया ऐसी टिप्पणी करने से बचे, अगर आपको इस बात का ज्ञान नहीं है तो आपको बता दूँ कि नेत्रहीन स्क्रीन रीडर द्वारा लेखों को पढ़ सकते हैं और पढ़ते भी हैं। जिस सूची को में लगा रहा हूँ वो अंग्रेज़ी विकिपीडिया से नहीं अपितु मेरे ही द्वारा हिन्दी विकिपीडिया की निर्वाचित सूची 2010 एशियाई खेल पदक तालिका से है। अंग्रेज़ी विकिपीडिया से तो मैने कुछ लिया ही नहीं। और ध्यान से सुने कि इस सूची का प्रयोग सबसे पहले हिन्दी विकिपीडिया पर ही हुआ है अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर कल तक आपके जैसी सूची का प्रयोग' हो रहा था, शायद आपके जैसे अंजान सदस्य ही इसका प्रयोग करे रहें होंगे। सभी विकिपीडिया परियोजनाओं में सबसे पहले हिन्दी विकिपीडिया पर मेरी जैसी सूची का प्रयोग हुआ है, अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर तो आज बदल कर हिन्दी विकिपीडिया जैसी सूची की गई है। आप अपने तथ्यों को ठीक करें किसी पर कोई इल्जाम लगाने से पहले। दूसरा, विकिपीडिया सभी के लिए है आपके लिए शायद नेत्रहीन व्यक्तियों का हिन्दी विकिपीडिया के लेखों का पढ़ना महत्वपूर्ण न हो परन्तु विकिमीडिया फाउंडेशन और मेरे लिए भी यह महत्वपूर्ण है। ज्ञान पाने का अधिकार सबको है। आपको मेरे तर्क समझ आ ही गए होंगे: पहला, यह सूची मैने पहले लगाई है अंग्रेज़ी विकिपीडिया वालो ने बाद में; दूसरा, नेत्रहीन भी लेख पढ़ सकते हैं; तीसरा, आपके द्वारा बनाई गई सूची को स्क्रीन रीडर नहीं पढ़ सकता; चौथा, मेरी सूची को आराम से स्क्रीन रीडर द्वारा पढ़ा जा सकता है, धन्यवाद।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 18:20, 29 जुलाई 2012 (UTC)
विलियमजी मैं अपनी कही बात के लिए आपसे माफ़ी माँगता हूँ। नेत्रहीन लोग पढ़ ही नहीं सकते कहने से मेरे कहने का अर्थ यह नहीं था की मैं नेत्रहीन लोगों को अपमानित कर रहा हूँ। मुझे लगा कि आप मेरी तालिका को हटाने के लिए जल्दबाज़ी में कुछ भी तर्क दे रहे हैं। मुझे स्क्रीनरीडर की कोई जानकारी नहीं थी कि यह कैसे रीड करता है। तालिका के सम्बन्ध में मैंने आगे की वार्ता सम्बन्धित पृष्ठ पर लिख दी है। रोहित रावत (वार्ता) 14:20, 30 जुलाई 2012 (UTC)

ऐक्सेसेब्लिटी[संपादित करें]

मित्रों। मैने पदक तालिका के कई पुराने अवतरणओं में जाकर दो सर्वाधिक प्रचलित पटल पाठक (स्क्रीन रीडर) से जाँच की है। वे सभी पूरी तरह ऐक्सेसेबल हैं। बिल द्वारा बनाए गए भी और रोहित जी द्वारा बनाए गए भी। विकिमीडिया दुनिया के सर्वाधिक ऐक्सेसेबल वेवसाइटों में शामिल है। इसके लिए सामान्य सदस्यों को संपादन के दौरान कुछ भी अलग या ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत नहीं है। कुछ कमियाँ हैं लेकिन वे हमारे द्वारा नहीं बल्कि सॉप्टवेयर विकासकर्ताओं द्वारा ही दूर की जा सकती हैं। हाँ रंगों का विवेकपूर्ण प्रयोग वर्णांधता या अल्प दृष्टि वाले या डिसलेक्सिया आदि की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए काफी सहायक होती है। अनिरुद्ध  वार्ता  23:46, 30 जुलाई 2012 (UTC)

अनिरुद्ध जी, सिर्फ़ सूची का पढ़ा जाना ही नहीं अपितु उसका ठीक से पढ़ा जाना भी आवश्यक है। स्क्रीन रीडर सूची को किस अनुक्रम में पढ़ता है यह महत्वपूर्ण है। पदक तालिका को स्क्रीन रीडर को कुछ ऐसे पढ़ना चाहिए: पहले कैप्शन जो यह बताए कि सूची किस बारे में है, फ़िर सूची में प्रथम स्थान के देश का नाम, उसका कोड, फ़िर उस देश द्वारा जीते गए स्वर्ण, रजत तथा कांस्य पदक (इसी अनुक्रम में), फ़िर उसे दूसरे स्थान के राष्ट्र पर बढ़ना चाहिए। इसके बारे में अंग्रेज़ी विकि के डेटा टेबल ट्यूटोरियल में अच्छी तरह से बताया हुआ है।
मुझे अन्य स्क्रीन रीडर के बारे में तो नहीं पता परन्तु अगर सूची में रो हैडर का इस्तेमाल नहीं किया गया तो JAWS के द्वारा कुछ समस्याएँ उत्पन्न होंगी, जैसे अगर कोई नेत्रहीन व्यक्ति सभी राष्ट्रों के स्वर्ण पदकों को पढ़ना चाहता है तो बिना रो हैडर के वह सूची को कुछ इस प्रकार पढ़ेगा: "स्वर्ण, 9", "स्वर्ण, 5", "स्वर्ण, 3", आदि, या फ़िर अगर स्क्रीन रीडर का सॉफ्टवेयर अनुमान लगाता है कि स्वर्ण पदक वाले कॉलम में रो हैडर इन्फो है तो वो इसे कुछ इस प्रकार पढ़ेगा: "स्वर्ण, 1, 9", "स्वर्ण, 2, 5", "स्वर्ण, 3, 3", आदि ये दोनों ही प्रकार ठीक नहीं हैं। सूची ठीक से पढ़ी ऐसे जानी चाहिए: "स्वर्ण, चीनी जनवादी गणराज्य (CHN), 9", "स्वर्ण, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), 5", "स्वर्ण, इटली (ITA), 3", आदि। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि स्क्रीन रीडर किस क्रम में सूची की प्रविष्टियों को पढ़ता है।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 05:04, 31 जुलाई 2012 (UTC)
बिल की रो हेडर वाली बात ठीक है। अधिक कॉलम वाले टेबल में कभी-कभी यह जानने की जरूरत पड़ती है कि हम जिस डेटा को पढ़ रहे हैं वह किससे संबंधित है। तब इस तरह बनी हुइ तालिकाएं पटल पाठक के कुछ खास कमांड को सपोर्ट करती हैं। आम तौर पर एक ही तरह की डाटा रखने वाली तालिकाओं में इसकी ज्यादा जरुरत पड़ती है। मसलन सभी विकिपिडिया की तालिका में। तालिका बनाते समय रो हेडर लगाना निश्चित रूप से पटल पाठक के लिए कुछ अतिरिक्त सहायक सुविधाएं उपलब्ध कराता है। ऐक्सेसेब्लिटी की समझ रखने वालों के लिए यह सूचना भी देना जरूरी लग रहा है कि अभी तक हिंदी विकिपीडिया का मुखपृष्ठ उसके अन्य पृष्ठों की तुलना में सबसे कम ऐक्सेसेबल है। उसके विभिन्न हिस्सों के शीर्षक अभी भी हेडिंग फॉरमेट में नहीं हैं। अनिरुद्ध  वार्ता  13:43, 1 अगस्त 2012 (UTC)