कुमार विश्वास

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कुमार विश्वास
Dr. Kumar Vishvas(cropped).jpg

जन्म 10 फ़रवरी 1970 (1970-02-10) (आयु 49)
भारत पिलखुआ, मेरठ, उत्तरप्रदेश

कुमार विश्वास (जन्म : १० फरवरी १९७०) एक भारतीय हिन्दी कवि, वक्ता और सामाजिक-राजनैतिक कार्यकर्ता हैं। वे आम आदमी पार्टी के नेता रह चुके हैं। उनका मूल नाम विश्वास कुमार शर्मा है। वे युवाओं के अत्यन्त प्रिय कवि हैं। हिंदी को भारत से विश्व तक पुनः स्थापित करने वाले कुमार विश्वास के कविता के मंचन, वाचन, गायन के साथ साथ वकतृत्व प्रतिभा के भी धनी हैं। उन्हें अत्याधुनिक हिंदी काव्यलोक में अब 'सरस्वती का वरद पुत्र' कहा जाता है। मंच संचालन, गायन, काव्य वाचन, पाठन, लेखन आदि सब विधाओं में निपुण कुमार विश्वास हिंदी के प्राध्यापक भी रह चुके हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ने का अनुभव रखने वाले कुमार विश्वास के अंदर ऐसी प्रतिभा है कि वो बिना कविता सुनाए भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर सकते है आज के कुछ सालो बाद इतिहास उन्हें एक ऐसे समाज सुधारक और नेता के रूप में याद करेगा जो राजनीति में होते हुए भी राजनीति के खिलाफ बोला 🙏 । वे एक ऐसे नेता हैं जो राजनीति में होते हुए भी जब जब राजनीति में विचलन उत्पन्न हुआ है उन्होंने अपनी कविताओं और अपने भाषणों से लोगो को जागरूक किया और उन राजनीति के नायकों की कुर्सियों को हिला कर रख दिया जो बैठे तो जनता की सेवा के लिए हैं लेकिन जनता को ही लुटने में लगे है । कुमार विश्वास ने अपनी " लोकतंत्र के सारे रहा डाकू हैं , वे बोले दरबार सजाओ " जैसी कविताओं से लोगो को जागरूक किया और उन कुकर्मियों को भी संबोधित किया जिनको सत्ताएं मिलने के बाद वे भूल जाते हैं कि हमारे देश की जनता कैसी है , हमारा देश आगे बढ़ रहा है या गड्ढे में जा रहा है । कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है

प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा[संपादित करें]

कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी (वसन्त पंचमी), 1970 को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद के पिलखुआ में एक मध्यवर्गी परिवार में हुआ था। उनके पिता डॉ॰ चन्द्रपाल शर्मा, आर एस एस डिग्री कॉलेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। वे चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं। कुमार विश्वास की पत्नी का नाम मंजू शर्मा है।

कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय विद्यालय, पिलखुआ से प्राप्त की। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज से बारहवीं उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डॉ॰ कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढ़ाई में नहीं लगा और उन्होंने बीच में ही वह पढ़ाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्पश्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया।

जीवन वृत्ति[संपादित करें]

डॉ॰ कुमार विश्वास ने अपना करियर राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 में शुरू किया। तत्पश्चात वो अब तक महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही डॉ॰ विश्वास हिन्दी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से हैं। उन्होंने अब तक हज़ारों कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है। साथ ही वह कई पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं। डॉ॰ विश्वास मंच के कवि होने के साथ साथ हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के गीतकार भी हैं। उनके द्वारा लिखे गीत अगले कुछ दिनों में फ़िल्मों में दिखाई पड़ेगी। उन्होंने आदित्य दत्त की फ़िल्म 'चाय-गरम' में अभिनय भी किया है।

राजनीतिक जीवन[संपादित करें]

कुमार विश्वास अगस्त २०११ के दौरान जनलोकपाल आन्दोलन के लिए गठित टीम अन्ना के एक सक्रिय सदस्य रहे हैं।[1] वे २६ नवम्बर २०१२ को गठित आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। डॉ॰ कुमार विश्‍वास अमेठी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, परन्‍तु हार गए। [2] वो एक ऐसे छवि वाले कवि रहे हैं जिसने राजनीति को युगधर्म के आलावा कुछ नहीं समझा। कई राजनीतिक पार्टी उनकों अपने खेमें में लाना चाहते हैं पर वो अडिग रहे हैं।

राजनीति से रूठे कवि कुमार विश्वास कहते हैं "सियासत में मेरा खोया या पाया हो नहीं सकता। सृजन का बीज हूँ मिट्टी में जाया हो नहीं सकता।" उनका कहना है कि 'राजनीति 10 साल 5 साल लेकिन कविता हजार साल।'

कार्य और उपलब्धियां[संपादित करें]

कुमार विश्वास को श्रृंगार रस का कवि माना जाता है। उनके द्वारा लिखा काव्य संग्रह 'कोई दीवाना कहता है' युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहा। उन्होंने कई सुंदर कविताएं लिखी हैं जिनमे हिंदी कविता के नवरस मिलते हैं। उनके लिखे गीत कुछ फिल्मों आदि में भी उपयोग किये गए हैं। उन्होंने अपने से पूर्व में हुए महनीय कवियों को श्रद्धांजलि देते हुए 'तर्पण' नामक टीवी कार्यक्रम भी बनाया, जिसमे स्वयं विश्वास ने पुराने कवियों की कविताओं को अपना स्वर दिया है।

विभिन्न पत्रिकाओं में नियमित रूप से छपने के अलावा डॉ॰ कुमार विश्वास की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो संस्करण में)[3]. विख्यात लेखक स्वर्गीय धर्मवीर भारती ने डॉ॰ विश्वास को इस पीढ़ी का सबसे ज़्यादा सम्भावनाओं वाला कवि कहा है। प्रथम श्रेणी के हिन्दी गीतकार 'नीरज' जी ने उन्हें 'निशा-नियामक' की संज्ञा दी है। मशहूर हास्य कवि डॉ॰ सुरेन्द्र शर्मा ने उन्हें इस पीढ़ी का एकमात्र आई एस ओ:2006 कवि कहा है।

कुमार विश्वास ने 2018 हिंदी फिल्म परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण के लिए एक गीत डी दे जगह लिखा था।[4]

मंच[संपादित करें]

कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ॰ विश्वास एक अग्रणी कवि हैं। वो अब तक हज़ारों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ और संचालन कर चुके हैं। देश के सैकड़ों प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में उनके एकल कार्यक्रम होते रहे हैं। इनमें आई आई टी खड़गपुर, आई आई टी बी एच यू, आई एस एम धनबाद, आई आई टी रूड़की[5], आई आई टी भुवनेश्वर[6], आई आई एम लखनऊ[7], एन आई टी जलंधर[8], एन आई टी त्रिचि[9], इत्यादि कई संस्थान शामिल हैं। कई कॉर्पोरेट कंपनियों में भी डॉ॰ विश्वास को अक्सर कविता-पाठ के लिए बुलाया जाता है।

भारत के सैकड़ों छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें अमेरिका[10], दुबई[11], सिंगापुर[12] मस्कट, अबू धाबी और नेपाल जैसे देश शामिल हैं।

पुरस्कार[संपादित करें]

1) डॉ॰ कुंवर बेचैन काव्य-सम्मान एवम पुरस्कार समिति द्वारा 1994 में 'काव्य-कुमार पुरस्कार'

2) साहित्य भारती, उन्नाव द्वारा 2004 में 'डॉ॰ सुमन अलंकरण'

3) हिन्दी-उर्दू अवार्ड अकादमी द्वारा 2006 में 'साहित्य-श्री'[13]

4) डॉ॰ उर्मिलेश जन चेतना मंच द्वारा 2010 में 'डॉ॰ उर्मिलेश गीत-श्री' सम्मान[14] कुमार विश्वास ने जनलोकपाल की लड़ाई में अन्ना हजारे जी के समर्थन के साथ ही जनलोकपाल का मंच द्वारा संचालन भी किया था और जनलोकपाल बिल की अदभुत लडॉ॰ई लडने के बाद ही कुमार विश्वास इंदौर में उन्हे अग्रसेन महाराज की जयंती पर जब उनसे इंदौर आने का आग्रह किया तो उन्होने मना नहीं किया और वह सीधे दुबई से शो करते हुए अपने घर भी नहीं गए सीधे इंदौर आ गए कुमार विश्वास वा कई बहुत अच्छे इंसान है इनकी कविताए अदभुत है

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Team behind Team Anna[मृत कड़ियाँ]
  2. IANS Nov 26, 2012, 02.05PM IST (2012-11-26). "Arvind Kejriwal formally launches Aam Aadmi Party - Times Of India". Articles.timesofindia.indiatimes.com. मूल से 2013-01-26 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2013-01-02.
  3. http://dpb.in/books/book/zb, 5e0_search_0_0_a_SU5S/Koi+Diwana+Kahta+hai/index.html
  4. "Video: कुमार विश्वास ने फिल्म 'परमाणु' के लिए लिखा खूबसूरत नग़मा".
  5. http://en.wikipedia.org/wiki/Alcheringa_(festival)
  6. http://www.orissalinks.com/page/6?get-help=514
  7. http://iimlucknow.wordpress.com/page/4/
  8. http://collegekhabar.com/events/utkansh-2010-nit-jalndhar/
  9. http://www.dipity.com/timeline/Nit-Trichy
  10. http://www.indiaabroad-digital.com/indiaabroad/20100604?pg=57#pg57
  11. http://tn.exoticdubai.com/2009/01/indian-mushaira-in-dsf/
  12. http://blogs.wsj.com/indiarealtime/2011/02/07/hindi-poets-a-big-hit-overseas/
  13. http://international.zeenews.com/inner1.asp?aid=197170&ssid=8&sid=ART
  14. http://www.hindimedia.in/index.php?option=com_content&task=view&id=13811&Itemid=87

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]