ग़ाज़ियाबाद

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ग़ाज़ियाबाद
Ghaziabad
ग़ाज़ियाबाद में इंदिरापुरम
ग़ाज़ियाबाद में इंदिरापुरम
ग़ाज़ियाबाद की उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
ग़ाज़ियाबाद
ग़ाज़ियाबाद
उत्तर प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 28°40′N 77°25′E / 28.67°N 77.42°E / 28.67; 77.42निर्देशांक: 28°40′N 77°25′E / 28.67°N 77.42°E / 28.67; 77.42
ज़िलाग़ाज़ियाबाद ज़िला
राज्यउत्तर प्रदेश
देश भारत
जनसंख्या (2011)
 • कुल23,58,525
भाषाएँ
 • प्रचलितहिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)

ग़ाज़ियाबाद (Ghaziabad) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के ग़ाज़ियाबाद ज़िले में स्थित एक नगर है।[1][2]

विवरण[संपादित करें]

ग़ाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत का एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है और दिल्ली के पूर्व और मेरठ के दक्षिणपश्चिम में स्थित है। ग़ाज़ियाबाद में ग़ाज़ियाबाद जिले का मुख्यालय स्थित है। स्वतंत्रता से पहले ग़ाज़ियाबाद जिला, मेरठ जिले का भाग था पर स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् राजनैतिक कारणों से इसे एक पृथक जिला बनाया गया। ग़ाज़ियाबाद का नाम इसके संस्थापक ग़ाज़ीउद्दीन के नाम पर पड़ा है, जिसने इसका नाम अपने नाम पर ग़ाज़ीउद्दीननगर रखा था, लेकिन बाद में, इसका नाम छोटा करके ग़ाज़ियाबाद कर दिया गया।

इतिहास[संपादित करें]

दिल्ली गेट

गाजियाबाद नगर की स्थापना १७४० में मुगल सम्राट मुहम्मद शाह के वजीर गाजी-उद-दीन ने कोलकाता से पेशावर तक जाने वाली ग्रैंड ट्रंक रोड पर की थी, और उनके नाम पर इसे तब गाजी-उद-दीन नगर कहा जाता था।[3] मुगल काल में गाजियाबाद और इसके आसपास के क्षेत्र (विशेषकर हिंडन के तट) मुगल शाही परिवार के लिए पिकनिक स्थल थे।[4] १७६३ में भरतपुर के राजा सूरज मल की मृत्यु रुहेलों के हाथों इसी स्थान के पास हुई थी।[5] गाजियाबाद की १८५७ के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी भूमिका रही थी। मई १८५७ में यहाँ दिल्ली तक जाने वाले हिंडन मार्ग की रखवाली कर रहे सेनानियों का सामना ब्रिटिश सेना की एक छोटी सी टुकड़ी से हुआ था, जिसमें उन सेनानियों की हार हुई थी।[5]

१८६४ में नगर में रेलवे के आगमन के साथ ही नगर के नाम को "गाजीउद्दीननगर" से छोटा कर "गाजियाबाद" कर दिया गया।[6][7][8] दिल्ली और लाहौर को जोड़ने वाली सिंध, पंजाब और दिल्ली रेलवे की रेल लाइन को अम्बाला से गाजियाबाद तक उसी वर्ष खोला गया था।[9] १८७० में सिंध, पंजाब और दिल्ली रेलवे की अमृतसर-सहारनपुर-गाजियाबाद लाइन के पूरा होने के साथ, नगर मुल्तान से भी सीधी रेल सेवा से जुड़ गया, और गाजियाबाद रेलवे स्टेशन ईस्ट इंडियन रेलवे और सिंध, पंजाब और दिल्ली रेलवे का जंक्शन बन गया।[10] इन्हीं वर्षों में यहां वैज्ञानिक समाज की स्थापना हुई, जिसे सर सैयद अहमद खान के शैक्षिक आंदोलन में एक मील का पत्थर माना जाता है।[11] ब्रिटिश राज की अधिकांश अवधि के दौरान मेरठ और बुलंदशहर के साथ-साथ गाजियाबाद भी मेरठ सिविल जजशिप के तहत जिले के तीन मुंसिफों में से एक था।[12] नगर के मध्य में तब दो चौड़े बाजार थे, जहाँ ईंट से निर्मित दुकानें थी। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक नगर में दो अन्य बाजारों का भी निर्माण हुआ, जिनको उन्हें स्थापित करने वाले कलेक्टरों के नाम पर राइट-गंज और वायरगंज कहा गया। १८६८ से ही गाजियाबाद में नगरपालिका है।[13]

यद्यपि गाजियाबाद १८६५ में ही रेल सेवाओं से जुड़ गया था, फिर भी नगर में पहला आधुनिक उद्योग वर्ष १९४० में स्थापित हुआ। इसके पश्चात १९४७ में भारत की स्वतंत्रता के बाद के चार वर्षों में नगर में २२ अन्य कारखाने खुले। इस विकास का मुख्य कारण नवगठित पाकिस्तान से लोगों का आगमन और वहां के पंजाब प्रान्त से व्यवसायों का स्थानांतरण माना जाता है।[14] जॉन ओक एंड मोहन लिमिटेड, जो अपघर्षकों का निर्माण करने वाली भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, मूल रूप से रावलपिंडी में 'नेशनल एब्रेसिव्स' के नाम से स्थापित थी, और १९४७ में 'डायर मीकिन्स' के स्वामित्व के तहत यहां स्थानांतरित की गई थी।[15] इसके बाद १९४९ में नगर में मोहन मीकिन ब्रेवरीज की भी स्थापना हुई।[16] इन्हीं वर्षों में गाजियाबाद भारत में तेल इंजन उद्योग के सबसे प्रमुख केंद्रों में से एक भी बन गया।[17]

१९६७ में गाजियाबाद नगरपालिका की सीमाओं का विस्तार दिल्ली-यूपी सीमा तक हो गया था। १९७० के दशक की शुरुआत में शहर में कई स्टील-विनिर्माण इकाइयाँ भी आईं, जिससे यह शहर के प्राथमिक उद्योगों में से एक बन गया। इसी अवधि में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की स्थापना के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का उदय भी देखा गया।[18] अगले कुछ वर्षों में नगर के नियोजित औद्योगिक विकास में कई प्रख्यात औद्योगिक घरानों ने सहयोग दिया, जिनमें मोहन (मोहन नगर औद्योगिक एस्टेट, १९४९), टाटा (टाटा ऑयल मिल्स), मोदी (मोदीनगर, १९३३; इंटरनेशनल टोबैको कंपनी, १९६७), श्रीराम्स (श्री राम पिस्टन, १९६४), जयपुरिया आदि और डैनफॉस इंडिया लिमिटेड (स्था. १९६८); इंडो-बुल्गार फूड लिमिटेड और इंटरनेशनल टोबैको कंपनी (स्था. १९६७) जैसी विदेशी संस्थाओं ने भी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई।[19]

चीत्रदीर्घा[संपादित करें]

क्रॉसिंग रिपब्लिक वैशाली मेट्रो स्टेशन के पास अपार्टमेंट जवाहर गेट घंटाघर वैभव खंड, इंदिरापुरम

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
  2. "Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance Archived 2017-04-23 at the Wayback Machine," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975
  3. Anu Kapur, p. 83-85, Mapping Place Names of India
  4. Roy, Debashish (14 August 2011). "Ghaziabad has a long way to go to become a part of NCR backbone". The Hindu. मूल से 20 July 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 June 2014.
  5. Imperial Gazetteer, United Province, Meerut Division. 1905. पृ॰ 82,83. अभिगमन तिथि 19 जून 2021.
  6. "history1". nagarnigamghaziabad.com. मूल से 2 October 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 September 2015.
  7. "[IRFCA] Indian Railways FAQ: IR History: Early Days - 1". Irfca.org. मूल से 7 March 2005 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 June 2014.
  8. "History". ghaziabad.nic.in. District Administration, Ghaziabad. मूल से 8 December 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 5 November 2008.
  9. "[IRFCA] Indian Railways FAQ: IR History: Early Days - 1". Irfca.org. मूल से 22 September 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 June 2014.
  10. "[IRFCA] Indian Railways FAQ: IR History: Early Days - 2". Irfca.org. मूल से 11 June 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 June 2014.
  11. Azimabadi, Badr (2007). Great Personalities in Islam. Daryaganj, Delhi: Adam Publishers. पृ॰ 218. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788174351227.
  12. Statistical, descriptive and historical account of the North-western ... - North-western provinces - Google Books. 8 June 2007. अभिगमन तिथि 17 June 2014.
  13. "Imperial Gazetteer of India, Volume 12, page 222 -- Imperial Gazetteer of India -- Digital South Asia Library". dsal.uchicago.edu. अभिगमन तिथि 19 जून 2021.
  14. Saxena, Aruna (1989). Perspectives in industrial geography : a case study of an industrial city of Uttar Pradesh. New Delhi: Concept Pub. Co. पपृ॰ 30, 92, 98. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8170222508.
  15. Saxena, Aruna (1989). Perspectives in industrial geography : a case study of an industrial city of Uttar Pradesh. New Delhi: Concept Pub. Co. पृ॰ 172. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8170222508.
  16. "Mohan Meakin Group". Mohanmeakin.com. अभिगमन तिथि 17 June 2014.
  17. Saxena, Aruna (1989). Perspectives in industrial geography : a case study of an industrial city of Uttar Pradesh. New Delhi: Concept Pub. Co. पृ॰ 92. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8170222508.
  18. Saxena, Aruna (1989). Perspectives in industrial geography : a case study of an industrial city of Uttar Pradesh. New Delhi: Concept Pub. Co. पपृ॰ 97, 98. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8170222508.
  19. Saxena, Aruna (1989). Perspectives in industrial geography : a case study of an industrial city of Uttar Pradesh. New Delhi: Concept Pub. Co. पपृ॰ 124, 93, 11, 39, 69. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8170222508.