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निर्वाचित लेख

कालिंजर दुर्ग के महल
कालिंजर दुर्ग, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के बांदा जिला स्थित एक दुर्ग है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में विंध्य पर्वत पर स्थित यह दुर्ग विश्व धरोहर स्थल खजुराहो से ९७.७ किमी दूर है। इसे भारत के सबसे विशाल और अपराजेय दुर्गों में गिना जाता रहा है। इस दुर्ग में कई प्राचीन मन्दिर हैं। इनमें कई मंदिर तीसरी से पाँचवीं सदी गुप्तकाल के हैं। यहाँ के शिव मन्दिर के बारे में मान्यता है कि सागर-मन्थन से निकले कालकूट विष को पीने के बाद भगवान शिव ने यही तपस्या कर उसकी ज्वाला शांत की थी। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला कतिकी मेला यहाँ का प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव है। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात इसकी पहचान एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर के रूप में की गयी है। वर्तमान में यह दुर्ग भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकार एवं अनुरक्षण में है। विस्तार में...

समाचार

चंद्रयान का मॉडल


हाल के निधन: सुषमा स्वराज, गिरीश कर्नाड, कृष्णा सोबती, रमाकांत अचरेकर, कादर ख़ान

क्या आप जानते हैं?

आईएनएस कुर्सुरा
  • ...कि सलीम-जावेद ने एक साथ 24 फिल्मों में कार्य किया जिसमें से 20 फिल्में सफल रही?
  • ...कि राष्ट्रीय चरखा संग्रहालय में 26 फीट ऊँचा चरखा स्थापित है?
  • ...कि पनडुब्बी कुर्सुरा (चित्रित) को सेवामुक्त करने के बाद संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया?
  • ...कि गीता महालिक भारतीय शास्त्रीय नृत्य, ओडिसी की उत्कृष्ट नृत्यांगना में से एक हैं?
  • ...कि भारतीय संगीत निर्देशिका रही उषा खन्ना, हिन्दी फिल्म उद्योग में कुछ चुनिंदा महिला संगीतकारों में से एक है?

निर्वाचित चित्र

Sun Temple, Modhera - Sabha Mandap 01.jpg
मोढेरा सूर्य मंदिर, गुजरात के महेसाणा जिलें के एक गाँव “मोढेरा” मे स्थित है। यह सूर्य मन्दिर, हिन्दू मन्दिर स्थापत्यकला एवं शिल्प का बेजोड़ नमूना प्रस्तुत करता है।

आज का आलेख

भूरी आंखों वाली बुलबुल
बुलबुल, शाखाशायी गण के पिकनोनॉटिडी कुल (Pycnonotidae) का पक्षी है, और प्रसिद्ध गायक पक्षी "बुलबुल हजारदास्ताँ" से एकदम भिन्न है। ये कीड़े-मकोड़े और फल फूल खानेवाले पक्षी होते हैं। ये पक्षी अपनी मीठी बोली के लिए नहीं, बल्कि लड़ने की आदत के कारण शौकीनों द्वारा पाले जाते रहे हैं। किन्तु यहां उल्लेखनीय है, कि केवल नर बुलबुल जी गाता है, किन्तु मादा बुलबुल नहीं गा पाती है। बुलबुल कलछौंह भूरे मटमैले या गंदे पीले और हरे रंग का होता है, और अपने पतले शरीर, लंबी दुम और उठी हुई चोटी के कारण बड़ी सरलता से ही पहचान लिए जाते हैं। विश्व भर में कुल ९७०० प्रजातियां पायी जाती हैं। इनकी कई जातियाँ भारत में पायी जाती हैं, जिनमें "गुलदुम बुलबुल" सबसे प्रसिद्ध है। इसे लोग लड़ाने के लिए पालते हैं और पिंजड़े में नहीं, बल्कि लोहे के एक (अंग्रेज़ी अक्षर -टी) (T) आकार के चक्कस पर बिठाए रहते हैं। इनके पेट में एक पेटी बाँध दी जाती है, जो एक लंबी डोरी के सहारे चक्कस में बँधी रहती है।  विस्तार में...

बन्धु प्रकल्प एवं अन्य भाषाओं में


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