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भूगोल का प्रवेशद्वार

A Robinson projection map of Earth
भूगोल प्रवेशद्वार में आपका स्वागत् हैं। भूगोल एक अत्यधिक पुराना, रोचक तथा ज्ञानवर्धक विषय रहा हैं। वर्तमान में इसका महत्व अत्यधिक बढ़ गया हैं जहां एक ओर पारिस्थितिकी, स्थलाकृति, जलवायु, भूमंडलीय ऊष्मीकरण, महासागर जैसे भौतिक भूगोल के प्रमुख उप-विषय हैं वही दूसरी ओर संसाधन, पर्यटन, जनसंख्या, सांस्कृतिक, धर्म, कृषि जैसे विषय मानव भूगोल के उप-विषय हैं।

भूगोल में नयी तकनीकों जैसे, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस और डिजिटल कार्टोग्राफी के अधुनातन प्रयोगों ने इसकी उपयोगिता को पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया है।

प्रमुख लेख

गंगा नदी
गंगा नदी भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है जो भारत और बांग्लादेश में मिलाकर २,५१० किमी की दूरी तय करती हुई उत्तरांचल में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक विशाल भू भाग को सींचती है, देश की प्राकृतिक संपदा ही नहीं, जन जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है। २,०७१ कि.मी तक भारत तथा उसके बाद बांग्लादेश में अपनी लंबी यात्रा करते हुए यह सहायक नदियों के साथ दस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है।

इस नदी में मछलियों तथा सर्पों की अनेक प्रजातियाँ तो पाई ही जाती हैं मीठे पानी वाले दुर्लभ डालफिन भी पाए जाते हैं। यह कृषि, पर्यटन, साहसिक खेलों तथा उद्योगों के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है तथा अपने तट पर बसे शहरों की जलापूर्ति भी करती है। इसके तट पर विकसित धार्मिक स्थल और तीर्थ भारतीय सामाजिक व्यवस्था के विशेष अंग हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस नदी के जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। गंगा की इस असीमित शुद्धीकरण क्षमता और सामाजिक श्रद्धा के बावजूद इसका प्रदूषण रोका नहीं जा सका है। फिर भी इसके प्रयत्न जारी हैं और सफ़ाई की अनेक परियोजनाओं के क्रम में नवंबर,२००८ में भारत सरकार द्वारा इसे भारत की राष्ट्रीय नदी तथा इलाहाबाद और हल्दिया के बीच (१६०० किलोमीटर) गंगा नदी जलमार्ग- को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया है।

क्या आप जानते हैं?

पनामा नहर का त्रिविमीय चित्रण

चर्चित स्थान

तियांजिन पोर्ट

आज का देश

दक्षिण सूडान
दक्षिण सूडान या 'जनूब-उस-सूडान' (आधिकारिक तौर पर दक्षिणी सूडान गणतंत्र) उत्तर-पूर्व अफ़्रीका में 3° और 13° समानांतर उत्तर आक्षांश तथा 24° और 36 ° मध्याह्न पूर्व देशांतर पर स्थित एक स्थल-रुद्ध देश है। जुबा देश की वर्तमान राजधानी और सबसे बड़ा शहर भी है। देश के उत्तर में सूडान गणतंत्र, पूर्व में इथियोपिया, दक्षिण-पूर्व में केन्या, दक्षिण में युगान्डा, दक्षिण-पश्चिम में कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य और पश्चिम में मध्य अफ़्रीकी गणराज्य है।

यह उष्णकटिबंधीय वन, दलदलों और घास के मैदानी भागों से परिपूर्ण है। यहाँ की प्रमुख नदी श्वेत नील है, जो दक्षिण सूडान की राजधानी जुबा सहित देश के कई भागों से होकर गुजरता है। यह अफ्रीका महाद्वीप के केंद्र में स्थित है और इसकी सीमा छह देशों से सटी है। यह प्राकृतिक तेल के लिहाज से संपन्न देश है।

दक्षिण सूडान को 9 जुलाई 2011 को जनमत-संग्रह के पश्चात स्वतंत्रता प्राप्त हुई। इस जनमत-संग्रह में भारी संख्या (कुल मत का 98.83%) में देश की जनता ने सूडान से अलग एक नए राष्ट्र के निर्माण के लिए मत डाला। यह विश्व का 196वां स्वतंत्र देश, संयुक्त राष्ट्र का 193वां सदस्य तथा अफ्रीका का 55वां देश है।

हमारे भूगोलवेत्ता

अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट
अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट (जर्मन:Friedrich Wilhelm Heinrich Alexander von Humboldt ; जन्म १७६९- मृत्यु १८५९ ई.) एक प्रमुख भूगोलवेत्ता थे। उनका जन्म बर्लिन में तत्कालीन शाही परिवार में हुआ। उनकी सबसे प्रसिद्द रचना कॉसमॉस- १८४५ से १८६२ के बीच पांच खण्डो में प्रकाशित हुई और अन्य रचना साइनलैण्ड पर लिखा शोध ग्रन्थ १७८९ में छपा। हम्बोल्ट के साथ ही भूगोल में आधुनिक युग की शुरूआत मानी जाती है।

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