बंगलौर

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बंगलौर (शिफा का शहर)
बेंगलुरु (ಬೆಂಗಳೂರು)
—  महानगर  —
विधान सौध
विधान सौध
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
क्षेत्र बयालुसीमे
राज्य कर्नाटक
ज़िला बंगलौर शहरी
आयुक्त डॉ.आर सुब्रह्मण्य
जनसंख्या
घनत्व
84,25,970 (3rd) (2011 के अनुसार )
• 11,371 /कि.मी. (29,451 /वर्ग मी.)
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
741 कि.मी² (286 वर्ग मील)[1]
• 920 मीटर (3,018 फी॰)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 12°58′00″N 77°34′00″E / 12.966667, 77.566667

बंगलौर या बेंगलूरु (कन्नड़: ಬೆಂಗಳೂರು; उच्चारण: ['beŋgəɭuːru]) भारत के राज्य कर्नाटक की राजधानी है। बंगलौर की जनसंख्या लगभग 61 लाख है और यह भारत का पांचवा सबसे बडा शहर है। इस शहर को भारत की सूचना प्रौद्योगिकी की राजधानी कहते हैं। यहाँ साफ्टवेयर तथा संगणक (कम्प्यूटर) से सम्बन्धित अनेकानेक प्रतिष्ठान (कम्पनियां) स्थित हैं। 1 नवंबर 2006 को शहर का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर बेंगलूरु कर दिया गया है।

बंगलौर कर्नाटक का सबसे बड़ा शहर है। यहाँ पर कन्नड़ बोली जाती है । बहुत से लोग एक से ज़्यादा भाषा बोलते हैं । एक अनुमान के अनुसार बंगलौर में ५१% से ज़्यादा लोग भारत के विभिन्न हिस्सों से आ कर बसे हैं ।

अनुक्रम

इतिहास [संपादित करें]

पुराणों में इस स्थान को कल्याणपुरी या कल्याण नगर के नाम से जाना जाता था। अंग्रेजों के आगमन के पश्चात ही बंगलौर को अपना यह अंग्रेज़ी नाम मिला।

बेगुर के पास मिले एक शिलालेख से ऐसा प्रतीत होता है कि यह जिला 1004 ई० तक, गन्गा राजवंश का एक भाग था। इसे बेंगा-वलोरू के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ प्राचीन कन्नड़ में "रखवालों का नगर" होता है। सन् 1015 से 1116 तक तमिलनाडु के चोल शासकों ने यहाँ राज किया जिसके बाद इसकी सत्ता होयसल राजवंश के हाथ चली गई । ऐसा माना जाता है कि आधुनिक बंगलौर की स्थापना सन 1537 में विजयनगर साम्राज्य के दौरान हुई थी । विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद बंगलौर के सत्ता की बागडोर कई बार बदली। मराठा सेनापति शाहाजी भोंसले के अघिकार में कुछ समय तक रहने के बाद इस पर मुग़लों ने राज किया। बाद में जब 1689 में मुगल शासक औरंगजेब ने इसे चिक्काराजा वोडयार को दे दिया तो यह नगर मैसूर साम्राज्य का हिस्सा हो गया। कृष्णराजा वोडयार के देहांत के बाद मैसूर के सेनापति हैदर अली ने इस पर 1759 में अधिकार कर लिया। इसके बाद हैदर-अली के पुत्र टीपू सुल्तान, जिसे लोग शेर-ए-मैसूर के नाम से जानते हैं, ने यहाँ 1799 तक राज किया जिसके बाद यह अंग्रेजों के अघिकार में चला गया। यह राज्य 1799 में चौथे मैसूर युद्ध में टीपू की मौत के बाद ही अंग्रेजों के हाथ लग सका। मैसूर का शासकीय नियंत्रण महाराजा के ही हाथ में छोड़ दिया गया, केवल छावनी क्षेत्र (कैंटोनमेंट) अंग्रेजों के अधीन रहा। ब्रिटिश शासनकाल में यह नगर मद्रास प्रेसिडेंसी के तहत था। मैसूर की राजधानी 1831 में मैसूर शहर से बदल कर बंगलौर कर दी गई।

टेलीग्राफ तथा रेल के आगमन ने नगर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। उन्नीसवीं सदी में बंगलौर एक द्विनगर (ट्विन सिटी) बन गया -पेट और छावनीपेट में मुख्यतः कन्नड़ जनवास था जबकि छावनी के निवासियों में तमिल प्रवासियों की बहुतायत थी। 1898 में प्लेग की चपेट में आने से बंगलौर की जनसंख्या एकाएक कम हो गई। 1906 में यह देश का पहला ऐसा नगर बना जहां जलविद्युत आपूर्ति की सुविधा थी। शिवानासमुद्र का पनबिजली केन्द्र इसका स्रोत था।

1990 के दशक में सौम्योपकरण (सॉफ्टवेयर) की अचानक प्रगति के कारण बंगलौर काफी उन्नत हो गया।

भौगोलिक स्थिति [संपादित करें]

कर्नाटक का उच्च न्यायालय

12.97 डिग्री उत्तरी अक्छांश और 77.56 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित इस नगर का भूखंड मुख्यतः पठारी है । यह मैसूर का पठार के लगभग बीच में 920 मीटर की औसत ऊचाई पर अवस्थित है । बंगलौर जिले के उत्तर-पूर्व में कोलार जिला (सोने की खानों के लिये प्रसिद्घ), उत्तर-पश्चिम में तुमकुर जिला, दक्षिण-पश्चिम में मांड्य जिला, दक्षिण में चामराजनगर जिला तथा दक्षिण-पूर्व में तमिलनाडु राज्य है ।

संस्कृति [संपादित करें]

बंगलौर का दृश्य

एक अनुमान के अनुसार बंगलौर में 51% से अधिक लोग भारत के विभिन्न हिस्सों से आ कर बसे हैं। अपने सुहाने मौसम के कारण इसे भारत का उद्यान नगर भी कहते हैं। प्रकाश का पर्व दीपावली यहाँ बहुत धूमधाम से मनाई जाती है । दशहरा, जो मैसूर का पहचान चिह्न बन गया है, भी काफी प्रसिद्ध है । अन्य लोकप्रिय उत्सवों में गणेश चतुर्थी, उगाडी, संक्रांति, ईद-उल-फितर, क्रिसमस का नाम लिया जा सकता है । कन्नड़ फिल्म उद्योग का केन्द्र बंगलौर, सालाना औसतन 80 कन्नड़ फिल्म बनाता है । कन्नड़ फिल्मों की लोकप्रियता ने एक नई जनभाषा बंगलौर-की-कन्नड़ को जन्म दिया है जो अन्य भाषाओं से प्रेरित है और युवा संस्कृति का समर्थक । व्यंजनों की विविधता से भरपूर इस नगर में उत्तर भारतीय, दक्कनी, चीनी तथा पश्चिमी खाने काफी लोकप्रिय हैं ।

क्रिकेट यहाँ का सर्वाधिक लोकप्रिय खेल है। बंगलौर ने देश को काफी उन्नत खिलाड़ी दिये हैं, जिसमें राहुल द्रविड़, अनिल कुम्बले, गुंडप्पा विश्वनाथ, प्रसन्ना, बी. एस. चन्द्रशेखर, वेंकटेश प्रसाद, जावागल श्रीनाथ आदि का नाम लिया जा सकता है। बंगलौर में कई क्लब भी हैं, जैसे - बंगलौर गोल्फ क्लब, बाउरिंग इंस्टीट्यूट, इक्सक्लुसिव बंगलौर क्लब आदि जिनके पूर्व सदस्यों में विंस्टन चर्चिल और मैसूर महाराजा का नाम शामिल है।

दर्शनीय स्थल [संपादित करें]

ऐसा माना जाता है कि जब कैंपे गौड़ा ने १५३७ में बंगलौर की स्थापना की उस समय उसने मिट्टी की चिनाई वाले एक छोटे किले का निर्माण कराया। साथ ही गवीपुरम में उसने गवी गंगाधरेश्वरा मंदिर और बासवा में बसवांगुड़ी मंदिर की स्थापना की। इस किले के अवशेष अभी भी मौजूद हैं जिसका दो शताब्दियों के बाद हैदर अली ने पुनर्निर्माण कराया और टीपू सुल्तान ने उसमें और सुधार कार्य किए। ये स्थल आज भी दर्शनीय है। शहर के मध्य १८६४ में निर्मित कब्बन पार्क और संग्रहालय देखने के योग्य है। १९५८ में निर्मित सचिवालय, गांधी जी के जीवन से संबंधित गांधी भवन, टीपू सुल्तान का सुमेर महल, बाँसगुड़ी तथा हरे कृष्ण मंदिर, लाल बाग, बंगलौर पैलेस साईं बाबा का आश्रम, नृत्यग्राम, बनेरघाट अभयारण्य कुछ ऐसे स्थल हैं जहाँ बंगलौर की यात्रा करने वाले ज़रूर जाना चाहेंगे।

बसवनगुडी बुल टेम्पल [संपादित करें]

बसवनगुडी मंदिर

यह मंदिर भगवान शिव के वाहन नंदी बैल को समर्पित है। प्रत्येक दिन इस मंदिर में काफी संख्या में भक्तों की भीड़ देखी जा सकती है। इस मंदिर में बैठे हुए बैल की प्रतिमा स्था पित है। यह मूर्ति 4.5 मीटर ऊंची और 6 मीटर लम्बी है।hjjhhk

शिव मूर्ति [संपादित करें]

यह मूर्ति 65 फीटर ऊंची है। इस मूर्ति में भगवान शिव पदमासन की अवस्था में विराजमान है। इस मूर्ति की पृष्ठभूमि में कैलाश पर्वत, भगवान शिव का निवास स्थल तथा प्रवाहित हो रही गंगा नदी है।

इस्कोन मंदिर [संपादित करें]

इस्कोन मंदिर (दॉ इंटरनेशलन सोसायटी फॉर कृष्णा कंसी) बंगलूरू की खूबसूरत इमारतों में से एक है। इस इमारत में कई आधुनिक सुविधाएं जैसे मल्टी-विजन सिनेमा थियेटर, कम्प्यूटर सहायता प्रस्तुतिकरण थियेटर एवं वैदिक पुस्तकालय और उपदेशात्मक पुस्तकालय है। इस मंदिर के सदस्यो व गैर-सदस्यों के लिए यहाँ रहने की भी काफी अच्छी सुविधा उपलब्ध है।

टीपू पैलेस [संपादित करें]

बंगलौर पैलेस

टीपू पैलेस व किला बंगलूरू के प्रसिद्व पर्यटन स्थलों में से है। इस महल की वास्तुकला व बनावट मुगल जीवनशैली को दर्शाती है। इसके अलावा यह किला अपने समय के इतिहास को भी दर्शाता है। टीपू महल के निर्माण का आरंभ हैदर अली ने करवाया था। जबकि इस महल को स्वयं टीपू सुल्तान ने पूरा किया था।

वेनकटप्पा आर्ट गैलरी [संपादित करें]

यह जगह कला प्रेमियों के लिए बिल्कुल उचित है। इस आर्ट गैलरी में लगभग 600 पेंटिग प्रदर्शित की गई है। यह आर्ट गैलरी पूरे वर्ष खुली रहती है। इसके अलावा, इस गैलरी में कई अन्य नाटकीय प्रदर्शनी का संग्रह देख सकते हैं।

बंगलूरू पैलेस [संपादित करें]

इस महल का निर्माण 1887 ई. में करवाया गया था। यह महल बंगलूरू के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। इस महल की वास्तुकला तुदौर शैली पर आधारित है। यह महल बंगलूरू शहर के मध्य में स्थित है। यह महल लगभग 800 एकड़ में फैला हुआ है। यह महल इंगलैंड के वाइंडसर महल की तरह दिखाई देता है।

विधान सौधा [संपादित करें]

विधान सौधा

यह जगह बंगलूरू के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। इसका निर्माण 1954 ई. में किया गया। इस इमारत की वास्तुकला नियो-द्रविडियन शैली पर आधारित है। वर्तमान समय में यह जगह कर्नाटक राज्य के विधान सभा के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा इमारत का कुछ हिस्सा कर्नाटक सचिवालय के रूप में भी कार्य कर रहा है। विधान सौधा के शैली में ही और एक इमारत का निर्माण किया गया है, जिसका नाम ’विकास सौधा’ रखा गया है ।

लाल बाग [संपादित करें]

लाल बाग का रात्रि दृश्य

वर्तमान समय में इस बाग को लाल बाग वनस्पति बगीचा के नाम से जाना जाता है। यह बाग भारत के सबसे खूबसूरत वनस्पतिक बगीचों में से एक है। अठारहवीं शताब्दी में हैदर अली और टीपू सुल्तान ने इसका निर्माण करवाया था। इस बगीचे के अंदर एक खूबसूरत झील है। यह झील 1.5 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। यह झील का नजारा एक छोटे से द्वीप की तरह प्रतीत होता है। जिस कारण यह जगह एक अच्छे पर्यटन स्थल के रूप में भी जाना जाता है। खुलने का समय- सुबह 9 बजे से शाम 6 तक। शुल्क - 12 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए दो रूपए।

कब्बन पार्क [संपादित करें]

कई एकड़ क्षेत्र में फैले लॉन, दूर तक फैली हरियाली, सैंकड़ों वर्ष पुराने पेड़, सुंदर झीलें, कमल के तालाब, गुलाबों की क्यारियाँ, दुर्लभ समशीतोष्ण और शीतोष्ण पौधे, सजावटी फूल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यहाँ प्रकृति मनुष्य के साथ साक्षात्कार करती है। यह स्थान बंगलौर के सुंदरतम स्थानों में से एक है जिसे लाल बाग बॉटनिकल गार्डन, या लाल बाग वनस्पति उद्यान कहते हैं। यह २४० एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। १७६० में इसकी नींव हैदर अली ने रखी और टीपू सुल्तान ने इसका विकास किया।

दरगाह हजरत तवक्कल मस्तान [संपादित करें]

यह दरगाह सूफी संत तवक्कल मस्तान की है। इस दरगाह में मुस्लिम व गैर-मुस्लिम दोनों ही श्रद्धालु आते हैं।

गांधी भवन [संपादित करें]

गांधी भवन कुमार कुरूपा मार्ग पर स्थित है। यह भवन महात्मा गांधी के जीवन की याद में बनवाया गया है। इस भवन में गांधी जी के बचपन से लेकर उनके जीवन के अंतिम दिनों को चित्रों के द्वारा दर्शाया गया है। इसके अलावा यहाँ स्वयं गांधी जी द्वारा लिखे गए पत्रों की प्रतिकृति का संग्रह, उनके खडाऊ, पानी पीने के लिए मिट्टी के बर्तन आदि स्थित है। यह भवन सुबह 10.30 बजे से शाम के 5 बजे तक खुला रहता है।

चौदैया मेमोरियल हॉल [संपादित करें]

इस हॉल का निर्माण वायलिन के आकार में किया गया है। कर्नाटक के प्रसिद्ध सांरगी आचार्य टी.चौदैया की मृत्यु के बाद इस जगह का नाम उनके नाम पर रखा गया। विभिन्न उद्देश्यों से बने इस वातानुकूलित हॉल में विशेष रूप से परम्परागत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यह जगह गायत्री देवी पार्क एक्सटेंशन पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह इमारत पूरे विश्व में संगीत वाद्य के आकार में बना पहला इमारत है।

गवी गंगादरश्रवरा मंदिर [संपादित करें]

यह मंदिर बसवनगुडी के समीप स्थित है। यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी विशेष रूप से जाना जाता है। यह मंदिर बंगलूरू के पुराने मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण केम्पेगौड़ा ने करवाया था। यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस मंदिर में एक प्राकृतिक गुफा है। मकर सक्रांति के दिन काफी संख्या में भक्तगण यहाँ एकत्रित होते हैं। यह मंदिर सुबह 7.30 बजे खुलता है और और दिन के 12 बजे तक खुला रहता है। इसके अलावा शाम 5 बजे से रात 8.30 बजे तक खुला रहता है।

आवागमन [संपादित करें]

वायु मार्ग

बंगलौर विमानक्शःएत्र सबसे नजदीकी एयरपोर्ट बंगलौर सेंट्रल रेल स्टेशन से करीब 3० किलोमी. की दूरी पर स्थित है। कई प्रमुख शहरों जैसे कलकत्ता, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद, चैन्नई, अहमदाबाद, गोवा, कोच्ची, मंगलूर, पुणे और तिरूवंतपुरम से यहाँ के लिए नियमित रूप से उड़ानें भरी जाती है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी इसी एयरपोर्ट से निकलती हैं।

रेल मार्ग

बंगलुरू में दो प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़े हुए है। देश के कई शहरों से नियमित रूप से एक्सप्रेस रेल बंगलूरू के लिए चलती है।

सड़क मार्ग

बंगलूरू में काफी संख्या में बस टर्मिनल है। जो कि रेलवे स्टेशन के समीप ही है।

खरीदारी [संपादित करें]

बंगलूरू में शॉपिंग का अपना ही एक अलग मजा है। यहाँ आपको कांचीपुरम सिल्क या सावोरस्की क्रिस्टल आसानी से मिल सकता है। बंगलूरू विशेष रूप से मॉलों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित मॉल भारत के कुछ खूबसूरत और बड़े मॉल में से एक है। कमर्शियल स्ट्रीट बंगलूरू से सबसे व्यस्त और भीड़-भाड़ वाले शॉपिंग की जगहों में से है। यहाँ आपको जूते, ज्वैलरी, स्टेशनरी, ट्रैवल किट और स्पोाट्स वस्तुएं आसानी से मिल जाएगी। ब्रिटिश काल के दौरान के दक्षिण परेड को आज एम.जी.रोड़ के नाम से जाना जाता है। यहाँ आपको शॉपिंग के लिए इलेक्ट्रॉ निक उपकरण, किताबें और मैगजीन, सिल्क साड़ी, कपड़े, प्राचीन और फोटोकारी की जुड़ी विशेष चीजें मिल सकती है। एम.जी.रोड़ के काफी नजदीक ही ब्रिगेड रोड है यह जगह इलेक्ट्रॉ निक उपकरण जैसे टेलीविजन, फ्रिज, म्यूजिक सिस्टम, कम्प्यूटर और वाशिंग मशीन आदि के लिए प्रसिद्व है।

इसके अलावा आप सरकारी बाजार में भी शॉपिंग के लिए जा सकते हैं। यहाँ आपको पीतल के बर्तन, लकड़ी का फर्नीचर, प्राचीन आभूषण, परम्परागत वस्त्र, साड़ी, सजाने का समान आदि आसानी से मिल जाएगा। आप खरीदारी के लिए मैजस्टिक क्षेत्र में भी जा सकते हैं। यहाँ काफी अच्छी खरीददारी की जा सकती है। इस बाजार को हॉग-कॉग मार्केट, बुर्मा बाजार के नाम से भी जाना जाता है। बंगलूरू में कई अन्य बाजार भी है जैसे रूस्सल मार्केट यहाँ आपको कॉकरी और घर से जुड़ी कई चीजें मिल जाएगी। इसके अतिरिक्त चिकपेट बाजार विशेष रूप से सिल्क साड़ी, सोने व चांदी के गहनों के लिए काफी प्रसिद्ध है।

परिवहन [संपादित करें]

बंगलौर का एच.ए.एल. अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा देश का तीसरा व्यस्ततम एयरपोर्ट है । घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय उङानों में प्रयुक्त यह हवाईपट्टी, एशिया, मध्य-पूर्व तथा यूरोप के लिये सेवाएं देता है ।

यह भी देखें [संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]

संदर्भ [संपादित करें]

  1. The total area of Greater Bangalore has been mentioned in the Karnataka budget of 2007-08 as 741 km². "Finance Budget for 2007-08" (PDF). Government of India. http://www.kar.nic.in/finance/bud2007/bs07e.pdf. अभिगमन तिथि: 2007-06-28.